किसी वयस्क कामगार को, जिसने 1 जनवरी, 2022 को किसी फैक्टरी में कार्यग्रहण किया है और वर्ष के दौरान 220 दिन कार्य किया है, स्थायी आदेश के अनुसार वर्ष के दौरान 25 दिन के लिए कामबंदी कराई गई है । वह कैलेण्डर वर्ष 2023 के दौरान कितने दिनों की मज़दूरी सहित छुट्टी का हक़दार होगा ?
- (a)शून्य
- (b)10
- (c)12
- (d)11
सही उत्तर — D, (d) 11 । यह प्रश्न कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 79 (मज़दूरी सहित वार्षिक छुट्टी) के दो-चरणीय गणित पर बना है, और दोनों चरणों को अलग-अलग करना ही कुंजी है । पहला चरण — पात्रता । धारा 79(1) कहती है कि जिस कामगार ने किसी कैलेण्डर वर्ष में 240 दिन या उससे अधिक कार्य किया हो, वह अगले कैलेण्डर वर्ष में मज़दूरी सहित छुट्टी का हक़दार होगा । यहाँ कामगार ने 2022 में केवल 220 दिन काम किया, अर्थात् प्रत्यक्षतः 240 से कम । किन्तु धारा 79(1) के स्पष्टीकरण 1 के अनुसार कामबंदी (lay-off) के दिन — चाहे वे करार से, संविदा से या स्थायी आदेशों के अनुसार अनुज्ञेय हों — 240 दिन की गणना के प्रयोजन के लिए कार्य किए गए दिन माने जाएँगे । अतः 220 + 25 = 245 दिन, जो 240 से अधिक है ; कामगार 2023 में छुट्टी का हक़दार है, और इसीलिए विकल्प 'शून्य' ग़लत है । दूसरा चरण — छुट्टी की मात्रा । वही स्पष्टीकरण साफ़ कहता है कि उन दिनों के लिए कामगार छुट्टी अर्जित नहीं करेगा । छुट्टी की दर वयस्क के लिए प्रत्येक 20 दिन के वास्तविक कार्य पर एक दिन है । अतः केवल वास्तव में किए गए 220 दिनों पर गणना होगी : 220 ÷ 20 = 11 दिन । इसलिए कामगार कैलेण्डर वर्ष 2023 में 11 दिन की मज़दूरी सहित छुट्टी का हक़दार है — विकल्प (d) । ध्यान दीजिए कि पुस्तिका में संख्यात्मक विकल्प आरोही क्रम में नहीं छपे हैं — (b) 10, (c) 12, (d) 11 — इसलिए उत्तर अंकित करते समय अक्षर देखकर ही निशान लगाइए ।
- (a)शून्य — यह वह उत्तर है जो केवल पहले चरण को अधूरा पढ़ने से निकलता है : '220 दिन < 240 दिन, अतः कोई छुट्टी नहीं' । यह स्पष्टीकरण 1 की अनदेखी करता है, जो कामबंदी के दिनों को 240 की गणना में जोड़ने का आदेश देता है । 220 + 25 = 245 होते ही पात्रता सिद्ध हो जाती है । यही इस प्रश्न का मुख्य जाल है — परीक्षक जानता है कि अधिकांश अभ्यर्थी धारा 79 की मुख्य पंक्ति याद रखते हैं और स्पष्टीकरण भूल जाते हैं ।
- (b)10 — यह उत्तर तब बनता है जब कोई कामबंदी के 25 दिन को किए गए कार्य में से घटा देता है : 220 − 25 = 195, और 195 ÷ 20 = 9.75 ; धारा 79(2) के अनुसार आधे दिन या उससे अधिक का अंश पूरा दिन गिना जाता है, इसलिए 10 । यह गणना दो बार ग़लत है — कामबंदी के दिन घटाए नहीं जाते, वे केवल पात्रता में जोड़े जाते हैं और अर्जन में गिने नहीं जाते । वास्तविक कार्य-दिवस 220 ही हैं, 195 नहीं ।
- (c)12 — यह उत्तर तब बनता है जब कोई कामबंदी के दिनों को दोनों जगह गिन ले : 245 ÷ 20 = 12.25, और अंश हटाकर 12 । यह स्पष्टीकरण 1 के अंतिम उपवाक्य की उपेक्षा है, जो कहता है कि इन दिनों के लिए कामगार छुट्टी अर्जित नहीं करेगा । स्पष्टीकरण की संरचना ही यह है : ये दिन पात्रता की गिनती में जोड़े जाते हैं, अर्जन की गिनती में नहीं । इसी एक वाक्य से 12 और 11 के बीच का निर्णय होता है ।
कारखाना अधिनियम, 1948 का अध्याय VIII (धाराएँ 78-84) मज़दूरी सहित वार्षिक छुट्टी का उपबंध करता है, और उसका केंद्र धारा 79 है । उसका ढाँचा तीन बातों से बनता है : (i) योग्यता — किसी कैलेण्डर वर्ष में 240 दिन या अधिक कार्य ; (ii) दर — वयस्क कामगार के लिए प्रत्येक 20 दिन के कार्य पर एक दिन, बालक के लिए प्रत्येक 15 दिन के कार्य पर एक दिन ; और (iii) स्पष्टीकरण 1 — कामबंदी के दिन, महिला कामगार की दशा में बारह सप्ताह से अनधिक प्रसूति छुट्टी, तथा पिछले वर्ष अर्जित छुट्टी, 240 दिन की गणना में कार्य किए गए दिन माने जाएँगे, किन्तु इन दिनों के लिए छुट्टी अर्जित नहीं होगी । धारा 79(2) अंशों का नियम देती है — आधे दिन या उससे अधिक का अंश पूरा दिन, उससे कम का अंश छोड़ दिया जाता है । यह भी ध्यान रखिए कि छुट्टी सदैव अगले कैलेण्डर वर्ष में भोगी जाती है, उसी वर्ष नहीं जिसमें अर्जित हुई ।
EPFO का श्रम-विधि खंड इस प्रकार के 'गणना-प्रश्न' नियमित रूप से पूछता है, क्योंकि उनमें अधिनियम का पाठ और अंकगणित दोनों एक साथ जाँचे जा सकते हैं । इस प्रश्न में तीनों ग़लत विकल्प अपने-अपने ढंग से 'लगभग सही' हैं — शून्य (स्पष्टीकरण भूलना), 10 (कामबंदी घटाना) और 12 (कामबंदी पर भी छुट्टी अर्जित करना) — अर्थात् प्रत्येक विकल्प एक विशिष्ट भूल का प्रतिफल है । ऐसे प्रश्नों में सुरक्षित पद्धति यही है कि उत्तर दो अलग प्रश्नों में तोड़ा जाए : 'क्या वह पात्र है ?' और 'कितने दिन ?' । दोनों के आधार अलग-अलग हैं — पहला 245 पर, दूसरा 220 पर । यह भी स्मरण रखिए कि कारखाना अधिनियम, 1948 अब व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य-दशा संहिता, 2020 में समाहित है, और चारों श्रम संहिताएँ 21 नवंबर 2025 से प्रवृत्त हुई हैं ; 2023 का यह प्रश्न 1948 के अधिनियम के अनुसार ही हल किया जाना चाहिए ।
- धारा 79(1) — जिस कामगार ने कैलेण्डर वर्ष में 240 दिन या अधिक कार्य किया हो, वह अगले कैलेण्डर वर्ष में मज़दूरी सहित छुट्टी का हक़दार है ।
- छुट्टी की दर — वयस्क के लिए प्रत्येक 20 दिन के कार्य पर एक दिन ; बालक के लिए प्रत्येक 15 दिन के कार्य पर एक दिन ।
- स्पष्टीकरण 1 — कामबंदी के दिन, बारह सप्ताह से अनधिक प्रसूति छुट्टी और पिछले वर्ष की अर्जित छुट्टी 240 दिन की गणना में जोड़ी जाती है, किन्तु उन दिनों के लिए छुट्टी अर्जित नहीं होती ।
- धारा 79(2) — छुट्टी की गणना में आधे दिन या उससे अधिक का अंश पूरा दिन गिना जाता है, उससे कम का अंश छोड़ दिया जाता है ।
- इस प्रश्न की गणना — पात्रता 220 + 25 = 245 (≥ 240) ; अर्जन 220 ÷ 20 = 11 दिन, अतः 2023 में 11 दिन की छुट्टी ।
- पात्रता का आधार और अर्जन का आधार एक मान लेना — पात्रता 245 दिन पर तय होती है, अर्जन केवल 220 वास्तविक कार्य-दिवसों पर ।
- कामबंदी के दिनों को कार्य-दिवसों में से घटा देना ; स्पष्टीकरण उन्हें जोड़ता है, घटाता नहीं ।
- विकल्पों के आरोही क्रम पर भरोसा करना — इस प्रश्न में विकल्प (b) 10, (c) 12, (d) 11 के क्रम में छपे हैं ।
कारखाना अधिनियम की धारा 79 EPFO में लगभग सदैव गणना-प्रश्न के रूप में आती है, और परीक्षक स्पष्टीकरण 1 की तीनों श्रेणियों — कामबंदी, प्रसूति छुट्टी, पिछले वर्ष की अर्जित छुट्टी — में से किसी एक को स्टेम में डाल देता है । कभी-कभी यही प्रश्न बालक कामगार के लिए पूछा जाता है, जहाँ दर 15 दिन पर एक दिन हो जाती है । इसलिए धारा 79 को सूत्र के रूप में नहीं, दो-चरणीय प्रक्रिया के रूप में याद कीजिए ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 79 के अधीन किसी बालक कामगार के लिए मज़दूरी सहित छुट्टी की दर क्या है ?
- (a)प्रत्येक 10 दिन के कार्य पर एक दिन
- (b)प्रत्येक 15 दिन के कार्य पर एक दिन
- (c)प्रत्येक 20 दिन के कार्य पर एक दिन
- (d)प्रत्येक 25 दिन के कार्य पर एक दिन
उत्तर(b) प्रत्येक 15 दिन के कार्य पर एक दिन — वयस्क के लिए यह दर प्रत्येक 20 दिन पर एक दिन है ।
- practice — not a real PYQ
किसी महिला कामगार ने 2022 में 200 दिन कार्य किया और उसे 12 सप्ताह (84 दिन) की प्रसूति छुट्टी मिली । कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 79 के अधीन 2023 में उसकी मज़दूरी सहित छुट्टी कितने दिन की होगी ?
- (a)शून्य
- (b)10 दिन
- (c)14 दिन
- (d)16 दिन
उत्तर(b) 10 दिन — पात्रता के लिए 200 + 84 = 284 दिन (240 से अधिक), किन्तु अर्जन केवल वास्तविक 200 कार्य-दिवसों पर : 200 ÷ 20 = 10 दिन ।