सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए : सूची I (उपबंध) A. वसूली अधिकारी B. अनिवार्य बीमा C. अनुसूचित नियोजन D. निर्वाह भत्ता सूची II (अधिनियम) 1. औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946 2. न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम, 1948 3. उपदान संदाय अधिनियम, 1972 4. कर्मचारी भविष्य निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1952 कूट :
- (a)A-4, B-3, C-2, D-1
- (b)A-4, B-2, C-3, D-1
- (c)A-1, B-2, C-3, D-4
- (d)A-1, B-3, C-2, D-4
सही उत्तर — A, (a) A-4, B-3, C-2, D-1 । चारों उपबंध अपने-अपने अधिनियम की 'हस्ताक्षर' शब्दावली हैं : (A) वसूली अधिकारी (Recovery Officer) कर्मचारी भविष्य निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1952 का पद है — अधिनियम की धारा 2(kA) उसे परिभाषित करती है और धाराएँ 8B से 8G बकाया राशि की वसूली की पूरी मशीनरी देती हैं, जिसमें भू-राजस्व की बकाया की तरह वसूली भी सम्मिलित है ; इसलिए A-4 । (B) अनिवार्य बीमा (Compulsory Insurance) उपदान संदाय अधिनियम, 1972 की धारा 4A है — केंद्र या राज्य सरकार से भिन्न प्रत्येक नियोजक को भारतीय जीवन बीमा निगम अथवा किसी अन्य बीमाकर्ता से उपदान-दायित्व का बीमा कराना होता है, और जिन नियोजकों ने अपना स्थापित तथा रजिस्ट्रीकृत उपदान निधि बना रखी है वे इससे छूट पाते हैं ; इसलिए B-3 । (C) अनुसूचित नियोजन (Scheduled Employment) न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम, 1948 की धारा 2(g) का पद है — अधिनियम केवल उन्हीं नियोजनों पर लागू होता है जो उसकी अनुसूची में सूचीबद्ध हैं ; इसलिए C-2 । (D) निर्वाह भत्ता (Subsistence Allowance) औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946 की धारा 10A है — कदाचार की जाँच लंबित रहते निलंबित कामगार को पहले नब्बे दिन तक उसकी पूर्ववर्ती मज़दूरी का पचास प्रतिशत, और उसके बाद शेष निलंबन-अवधि के लिए पचहत्तर प्रतिशत, बशर्ते अनुशासनिक कार्यवाही में विलंब स्वयं कामगार के आचरण के कारण न हो ; इसलिए D-1 । यही संयोजन विकल्प (a) में है ।
- (b)A-4, B-2, C-3, D-1 — इसमें A-4 और D-1 सही हैं, पर बीच के दोनों युग्म आपस में बदल गए हैं — यह अनिवार्य बीमा को न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम से और अनुसूचित नियोजन को उपदान संदाय अधिनियम से जोड़ देता है । दोनों असंभव हैं : न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम में बीमा का कोई उपबंध नहीं, और उपदान संदाय अधिनियम अनुसूची-आधारित नहीं है — वह कारखानों, खानों, बागानों, दुकानों आदि पर सीधे लागू होता है ।
- (c)A-1, B-2, C-3, D-4 — यह विकल्प चारों युग्म उलट देता है : वसूली अधिकारी स्थायी आदेश अधिनियम को, अनिवार्य बीमा न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम को, अनुसूचित नियोजन उपदान अधिनियम को और निर्वाह भत्ता भविष्य निधि अधिनियम को । एक भी युग्म टिकता नहीं । सबसे आसान जाँच यह है कि 1946 का स्थायी आदेश अधिनियम प्रतिष्ठान की सेवा-शर्तों को लिखित रूप देने वाला अधिनियम है, उसमें राशि-वसूली की मशीनरी है ही नहीं ।
- (d)A-1, B-3, C-2, D-4 — इसके बीच के दो युग्म (B-3 और C-2) सही हैं, किन्तु दोनों छोर उलटे हैं — वसूली अधिकारी को 1946 के स्थायी आदेश अधिनियम से और निर्वाह भत्ता को 1952 के भविष्य निधि अधिनियम से जोड़ दिया गया है । वास्तव में निर्वाह भत्ता निलंबन से जुड़ी सेवा-शर्त है, इसलिए वह स्थायी आदेश अधिनियम में है, और वसूली अधिकारी अंशदान की वसूली से जुड़ा पद है, इसलिए वह भविष्य निधि अधिनियम में ।
यह प्रश्न श्रम विधि की उस आदत की परीक्षा है जिसमें प्रत्येक अधिनियम अपनी अलग शब्दावली गढ़ता है, और वही शब्दावली अधिनियम की पहचान बन जाती है । चार अधिनियमों की चार पहचान इस प्रकार हैं : औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946 — प्रतिष्ठान की सेवा-शर्तों को लिखित, प्रमाणित 'स्थायी आदेशों' का रूप देना ; इसी से निलंबन, निर्वाह भत्ता, वर्गीकरण जैसे पद आते हैं । न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम, 1948 — अनुसूची में गिनाए गए नियोजनों के लिए न्यूनतम दरें ; इसी से 'अनुसूचित नियोजन' और 'उचित सरकार' आते हैं । कर्मचारी भविष्य निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1952 — अंशदान, तीन योजनाएँ और बकाया की वसूली ; इसी से 'वसूली अधिकारी' और 'निर्धारण' (assessment) आते हैं । उपदान संदाय अधिनियम, 1972 — पाँच वर्ष की निरंतर सेवा पर उपदान, नियंत्रक प्राधिकारी, और धारा 4A का अनिवार्य बीमा ।
सुमेलन प्रश्नों में सबसे कारगर विधि 'सबसे पक्के युग्म से छँटनी' की है । यहाँ 'अनुसूचित नियोजन' लगभग हर अभ्यर्थी के लिए न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम का पद है — यह लंगर पकड़ते ही, C-2 न रखने वाले विकल्प (b) और (c) एक साथ कट जाते हैं । शेष (a) और (d) के बीच अंतर केवल A और D पर है, और वह अंतर तर्क से तय हो जाता है : वसूली का काम वही अधिनियम करेगा जिसमें कोई राशि देय होती है (भविष्य निधि अंशदान), और निर्वाह भत्ता वही अधिनियम देगा जो निलंबन को नियंत्रित करता है (स्थायी आदेश) । इस तरह चारों धाराएँ याद न होने पर भी उत्तर निकल आता है । ध्यान रहे कि 1946 का अधिनियम औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 में और शेष तीन क्रमशः मज़दूरी संहिता, 2019 तथा सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 में समाहित किए जा चुके हैं ; चारों संहिताएँ 21 नवंबर 2025 से प्रवृत्त हुईं ।
- वसूली अधिकारी — कर्मचारी भविष्य निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1952 ; परिभाषा धारा 2(kA) में, वसूली की मशीनरी धाराओं 8B से 8G में ।
- अनिवार्य बीमा — उपदान संदाय अधिनियम, 1972 की धारा 4A ; सरकार से भिन्न प्रत्येक नियोजक को एलआईसी या अन्य बीमाकर्ता से बीमा कराना होता है, स्थापित व रजिस्ट्रीकृत उपदान निधि वाले नियोजक छूट-प्राप्त हैं ।
- अनुसूचित नियोजन — न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम, 1948 की धारा 2(g) ; अधिनियम केवल अनुसूची में सूचीबद्ध नियोजनों पर लागू होता है ।
- निर्वाह भत्ता — औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946 की धारा 10A ; निलंबन के पहले नब्बे दिन तक मज़दूरी का 50 प्रतिशत और उसके बाद 75 प्रतिशत, यदि विलंब कामगार के अपने आचरण के कारण न हो ।
- चारों अधिनियम अब श्रम संहिताओं में समाहित हैं — 1946 का अधिनियम औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 में ; 1948 का मज़दूरी संहिता, 2019 में ; 1952 तथा 1972 के अधिनियम सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 में ।
- 'अनिवार्य बीमा' को कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 से जोड़ देना — प्रश्न में वह अधिनियम है ही नहीं ; यहाँ अनिवार्य बीमा उपदान संदाय अधिनियम की धारा 4A है ।
- 'वसूली अधिकारी' और 'नियंत्रक प्राधिकारी' को एक मान लेना — पहला ईपीएफ अधिनियम का, दूसरा उपदान संदाय अधिनियम का पद है ।
- सुमेलन में बीच के युग्मों से आरंभ करना ; सदैव उस युग्म से शुरू कीजिए जिस पर कोई संदेह न हो ।
EPFO का श्रम-विधि खंड 'उपबंध बनाम अधिनियम' का सुमेलन लगभग हर वर्ष पूछता है, और उसके विकल्प इस तरह बनाए जाते हैं कि दो युग्म सही रखकर दो उलट दिए जाएँ । इसीलिए केवल एक युग्म जानना पर्याप्त नहीं होता । तैयारी का तरीक़ा यह है कि प्रत्येक अधिनियम के लिए तीन-चार अनन्य पद (जो केवल उसी अधिनियम में आते हैं) सूचीबद्ध कर लिए जाएँ — जैसे स्थायी आदेश : निर्वाह भत्ता, प्रमाणन अधिकारी ; ईपीएफ : वसूली अधिकारी, निर्धारण ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946 की धारा 10A के अधीन, जाँच लंबित रहते निलंबित कामगार को पहले नब्बे दिन तक निर्वाह भत्ता किस दर से देय है ?
- (a)मज़दूरी का पच्चीस प्रतिशत
- (b)मज़दूरी का पचास प्रतिशत
- (c)मज़दूरी का पचहत्तर प्रतिशत
- (d)मज़दूरी का शत-प्रतिशत
उत्तर(b) मज़दूरी का पचास प्रतिशत — पहले नब्बे दिन 50 प्रतिशत, उसके बाद शेष अवधि के लिए 75 प्रतिशत, बशर्ते विलंब कामगार के अपने आचरण के कारण न हो ।
- practice — not a real PYQ
उपदान संदाय अधिनियम, 1972 के अधीन अनिवार्य बीमा का उपबंध किस धारा में है ?
- (a)धारा 4
- (b)धारा 4A
- (c)धारा 7
- (d)धारा 8
उत्तर(b) धारा 4A — केंद्र/राज्य सरकार से भिन्न प्रत्येक नियोजक को उपदान-दायित्व का बीमा कराना होता है ; स्थापित तथा रजिस्ट्रीकृत उपदान निधि वाले नियोजक छूट-प्राप्त हैं ।