न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम, 1948 के अधीन, ऐसे कर्मचारी की, जो मात्रानुपाती काम पर नियोजित है, कालानुपाती काम के आधार पर मज़दूरी की न्यूनतम दर सुनिश्चित करने के प्रयोजन के लिए, जो उन कर्मचारियों की दशा में लागू होगी, पारिश्रमिक की न्यूनतम दर क्या कहलाती है ?
- (a)न्यूनतम मात्रानुपाती दर
- (b)प्रतिभूत कालानुपाती दर
- (c)न्यूनतम कालानुपाती दर
- (d)प्रतिभूत मात्रानुपाती दर
सही उत्तर — B, (b) प्रतिभूत कालानुपाती दर (guaranteed time rate) । न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम, 1948 की धारा 3(2) उचित सरकार को चार प्रकार की दरें नियत करने की शक्ति देती है, और अधिनियम स्वयं कोष्ठक में उनके नाम भी दे देता है : (a) कालानुपाती काम के लिए मज़दूरी की न्यूनतम दर — 'न्यूनतम कालानुपाती दर' (minimum time rate) ; (b) मात्रानुपाती काम के लिए मज़दूरी की न्यूनतम दर — 'न्यूनतम मात्रानुपाती दर' (minimum piece rate) ; (c) पारिश्रमिक की वह न्यूनतम दर जो मात्रानुपाती काम पर नियोजित कर्मचारियों की दशा में इसलिए लागू की जाती है कि उन्हें कालानुपाती काम के आधार पर मज़दूरी की न्यूनतम दर प्रतिभूत (सुनिश्चित) हो सके — 'प्रतिभूत कालानुपाती दर' (guaranteed time rate) ; और (d) अतिकाल (overtime) कार्य के लिए प्रतिस्थापी दर — 'अतिकाल दर' (overtime rate) । प्रश्न का स्टेम खंड (c) की परिभाषा को लगभग शब्दशः दोहराता है — 'मात्रानुपाती काम पर नियोजित' कर्मचारी और 'कालानुपाती काम के आधार पर' न्यूनतम दर सुनिश्चित करना — इसलिए उत्तर 'प्रतिभूत कालानुपाती दर' ही है । इसका व्यावहारिक अर्थ यह है : ठेके/टुकड़ा-दर पर काम करने वाले कामगार की कमाई उसके उत्पादन पर निर्भर होती है, और यदि किसी कारण उत्पादन गिर जाए तो उसकी कमाई न्यूनतम मज़दूरी से नीचे चली जाएगी । प्रतिभूत कालानुपाती दर वह फ़र्श (floor) है जो ऐसे कामगार को समय के आधार पर गणना करके दी जाती है, चाहे टुकड़ा-दर से उसकी कमाई कम बने ।
- (a)न्यूनतम मात्रानुपाती दर — यह धारा 3(2) का खंड (b) है — मात्रानुपाती काम (piece work) के लिए स्वयं नियत की गई न्यूनतम दर, अर्थात् 'प्रति इकाई उत्पादन पर इतनी राशि' । यह टुकड़ा-दर को ही नियंत्रित करती है, कालानुपाती आधार पर कोई प्रत्याभूति नहीं देती । प्रश्न ठीक इसी अंतर पर टिका है : स्टेम माँग रहा है वह दर जो मात्रानुपाती कामगार को समय के आधार पर सुरक्षा दे, न कि वह दर जो मात्रानुपाती काम के लिए ही तय हो ।
- (c)न्यूनतम कालानुपाती दर — यह धारा 3(2) का खंड (a) है — उन कर्मचारियों के लिए न्यूनतम दर जो कालानुपाती काम (time work) पर ही नियोजित हैं, जैसे दैनिक या मासिक वेतनभोगी । यह विकल्प इसलिए आकर्षक लगता है कि इसमें 'कालानुपाती' शब्द है, पर इसमें 'प्रतिभूत' नहीं है, और प्रत्याभूति ही स्टेम का मूल तत्व है । जिस कामगार पर यह दर लागू होती है वह मात्रानुपाती काम पर है ही नहीं ।
- (d)प्रतिभूत मात्रानुपाती दर — यह पद अधिनियम में है ही नहीं — धारा 3(2) की चार श्रेणियाँ हैं न्यूनतम कालानुपाती दर, न्यूनतम मात्रानुपाती दर, प्रतिभूत कालानुपाती दर और अतिकाल दर । परीक्षक ने 'प्रतिभूत' और 'मात्रानुपाती' दोनों सही शब्द लेकर एक ग़लत जोड़ा बना दिया है, ताकि जो अभ्यर्थी शब्द पहचानता है पर परिभाषा नहीं जानता वह फँस जाए । प्रत्याभूति सदैव कालानुपाती आधार पर दी जाती है, मात्रानुपाती आधार पर नहीं ।
न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम, 1948 का ढाँचा तीन कड़ियों का है । पहली — अधिनियम केवल 'अनुसूचित नियोजनों' (scheduled employments) पर लागू होता है, अर्थात् उन रोज़गारों पर जो अधिनियम की अनुसूची में सूचीबद्ध हैं (धारा 2(g)) । दूसरी — धारा 3 उचित सरकार को उन नियोजनों के लिए न्यूनतम मज़दूरी दरें नियत और पुनरीक्षित करने का दायित्व देती है, और धारा 3(2) चार प्रकार की दरों को नाम देती है : न्यूनतम कालानुपाती दर, न्यूनतम मात्रानुपाती दर, प्रतिभूत कालानुपाती दर और अतिकाल दर । तीसरी — धारा 4 बताती है कि न्यूनतम मज़दूरी में क्या-क्या सम्मिलित हो सकता है : मूल दर के साथ जीवन-निर्वाह लागत भत्ता, अथवा रियायती दर पर दी जाने वाली आवश्यक वस्तुओं का नकद-मूल्य । धारा 3(3) यह भी अनुमति देती है कि विभिन्न अनुसूचित नियोजनों, कार्य-वर्गों, वयस्क/किशोर/बालक/शिक्षु तथा विभिन्न क्षेत्रों के लिए अलग-अलग दरें नियत की जाएँ ।
यह प्रश्न विशुद्ध परिभाषा-प्रश्न है : परीक्षक ने अधिनियम की चार पारिभाषिक दरों में से एक की परिभाषा उठाकर स्टेम बना दिया और चारों विकल्पों में उन्हीं दो-दो शब्दों — 'न्यूनतम/प्रतिभूत' और 'कालानुपाती/मात्रानुपाती' — के चार संयोजन रख दिए । ऐसे प्रश्न में अनुमान लगभग असंभव है और शब्दों की गड्डमड्ड सुनिश्चित है, इसलिए इन चार पदों को उनकी परिभाषा के साथ रटना ही एकमात्र उपाय है । एक स्मरण-सूत्र काम आता है : 'प्रत्याभूति सदैव समय की होती है' — क्योंकि टुकड़ा-दर पर काम करने वाले को जो सुरक्षा चाहिए वह समय-आधारित फ़र्श की ही है । यह भी ध्यान रखिए कि न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम, 1948 मज़दूरी संहिता, 2019 में समाहित किया जा चुका है, और चारों श्रम संहिताएँ 21 नवंबर 2025 से प्रवृत्त हुई हैं ; किन्तु यह प्रश्नपत्र 2023 का है और उसे 1948 के अधिनियम की भाषा से ही हल किया जाना है ।
- धारा 3(2)(a) — कालानुपाती काम के लिए न्यूनतम दर, जिसे अधिनियम 'न्यूनतम कालानुपाती दर' (minimum time rate) कहता है ।
- धारा 3(2)(b) — मात्रानुपाती काम के लिए न्यूनतम दर, अर्थात् 'न्यूनतम मात्रानुपाती दर' (minimum piece rate) ।
- धारा 3(2)(c) — मात्रानुपाती कामगारों को कालानुपाती आधार पर न्यूनतम मज़दूरी सुनिश्चित करने वाली दर, अर्थात् 'प्रतिभूत कालानुपाती दर' (guaranteed time rate) — इसी प्रश्न का उत्तर ।
- धारा 3(2)(d) — अतिकाल कार्य के लिए प्रतिस्थापी दर, अर्थात् 'अतिकाल दर' (overtime rate) ।
- अधिनियम केवल अनुसूचित नियोजनों पर लागू होता है (धारा 2(g)) ; धारा 4 न्यूनतम मज़दूरी के घटक बताती है और धारा 3(3) भिन्न वर्गों व क्षेत्रों के लिए भिन्न दरों की अनुमति देती है ।
- 'प्रतिभूत मात्रानुपाती दर' जैसे गढ़े हुए पद को अधिनियम का पद मान लेना — धारा 3(2) में केवल चार नाम हैं ।
- 'न्यूनतम कालानुपाती दर' और 'प्रतिभूत कालानुपाती दर' को एक समझ लेना — पहली कालानुपाती कामगार पर, दूसरी मात्रानुपाती कामगार पर लागू होती है ।
- न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम को सभी नियोजनों पर लागू मान लेना — यह केवल अनुसूचित नियोजनों पर लागू होता है ।
EPFO का श्रम-विधि खंड परिभाषा-प्रश्न बहुत पसंद करता है : किसी अधिनियम की धारा से एक पारिभाषिक पद उठाकर उसकी परिभाषा स्टेम में रख दी जाती है और विकल्पों में उसी पद के मिलते-जुलते संयोजन । इसलिए प्रत्येक श्रम अधिनियम की परिभाषा-धारा (धारा 2) तथा उन धाराओं को, जो कोष्ठक में नाम देती हैं, विशेष ध्यान से पढ़िए । यही प्रारूप उलटकर भी आता है — पद देकर परिभाषा पूछी जाती है ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम, 1948 की धारा 3(2) के अधीन अतिकाल कार्य के लिए, अन्यथा लागू होने वाली न्यूनतम दर के प्रतिस्थापन में नियत की जाने वाली दर क्या कहलाती है ?
- (a)प्रतिभूत कालानुपाती दर
- (b)अतिकाल दर
- (c)न्यूनतम मात्रानुपाती दर
- (d)विशेष भत्ता दर
उत्तर(b) अतिकाल दर (overtime rate) — धारा 3(2)(d) के अधीन यह वह दर है, चाहे कालानुपाती हो या मात्रानुपाती, जो अतिकाल कार्य के संबंध में अन्यथा लागू न्यूनतम दर के स्थान पर लागू होती है ।
- practice — not a real PYQ
न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम, 1948 के उपबंध किन नियोजनों पर लागू होते हैं ?
- (a)सभी नियोजनों पर
- (b)केवल कारखानों पर
- (c)केवल अनुसूचित नियोजनों पर
- (d)केवल संगठित क्षेत्र के नियोजनों पर
उत्तर(c) केवल अनुसूचित नियोजनों पर — धारा 2(g) के अधीन 'अनुसूचित नियोजन' वे हैं जो अधिनियम की अनुसूची में सूचीबद्ध हैं ; अनुसूची में नियोजन जोड़ने की शक्ति धारा 27 में है ।