किसी कर्मचारी के मज़दूरी संदाय अधिनियम, 1936 के उपबंधों के अधीन आने के लिए उसकी अधिकतम मासिक मज़दूरी कितनी होनी चाहिए ?
- (a)पंद्रह हज़ार रुपए
- (b)अठारह हज़ार रुपए
- (c)इक्कीस हज़ार रुपए
- (d)चौबीस हज़ार रुपए
सही उत्तर — D, (d) चौबीस हज़ार रुपए । मज़दूरी संदाय अधिनियम, 1936 की धारा 1(6) ही वह उपबंध है जो अधिनियम की मज़दूरी-सीमा तय करती है : अधिनियम उसी नियोजित व्यक्ति की मज़दूरी पर लागू होता है जिसकी उस वेतन-अवधि में मासिक मज़दूरी का औसत अधिसूचित राशि से कम हो । यही धारा केंद्र सरकार को यह शक्ति भी देती है कि वह राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन (National Sample Survey Organisation) द्वारा प्रकाशित उपभोक्ता व्यय सर्वेक्षण (Consumer Expenditure Survey) के आँकड़ों के आधार पर प्रत्येक पाँच वर्ष बाद अधिसूचना द्वारा इस राशि को बढ़ा सके । श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय ने अधिसूचना सं. का.आ. 2806(अ) [S.O. 2806(E)], दिनांक 28 अगस्त 2017 द्वारा यह सीमा 18,000 रुपए मासिक से बढ़ाकर 24,000 रुपए मासिक कर दी, जो 29 अगस्त 2017 से प्रभावी हुई । अतः 2023 के इस प्रश्नपत्र के समय प्रचलित — और आज भी उद्धृत — आँकड़ा 24,000 रुपए मासिक है, और यही उत्तर है । ध्यान रखने योग्य बात यह है कि यह सीमा 'अधिकतम मज़दूरी' के रूप में पूछी जाती है, अर्थात् इससे ऊपर कमाने वाला कर्मचारी अधिनियम के संरक्षण से बाहर हो जाता है — मज़दूरी में अवैध कटौतियों और विलंबित भुगतान के विरुद्ध यह अधिनियम जिन्हें बचाता है, वे निम्न-आय वर्ग के वेतनभोगी ही हैं ।
- (a)पंद्रह हज़ार रुपए — 15,000 रुपए मासिक इस अधिनियम की सीमा कभी नहीं रही । यह आँकड़ा अभ्यर्थियों के मन में कर्मचारी भविष्य निधि एवं प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1952 की वेतन-सीमा से आता है, जहाँ अनिवार्य सदस्यता के लिए मूल वेतन + महँगाई भत्ता 15,000 रुपए मासिक की सीमा प्रयुक्त होती है । श्रम विधियों में प्रत्येक अधिनियम की अपनी अलग वेतन-सीमा है और उन्हें आपस में मिलाना इस खंड की सबसे आम भूल है ।
- (b)अठारह हज़ार रुपए — 18,000 रुपए इस अधिनियम की पिछली सीमा है, वर्तमान नहीं — 28 अगस्त 2017 की अधिसूचना से पहले यही राशि प्रचलित थी, और उसी अधिसूचना ने इसे बढ़ाकर 24,000 रुपए किया । यह विकल्प उसी अभ्यर्थी को फँसाने के लिए है जिसने पुराना नोट्स पढ़ा हो । धारा 1(6) में पाँच-वर्षीय पुनरीक्षण का उपबंध होने के कारण इस अंक को 'नवीनतम अधिसूचना के साथ' याद रखना आवश्यक है ।
- (c)इक्कीस हज़ार रुपए — 21,000 रुपए मासिक इस अधिनियम से नहीं, बल्कि दो अन्य श्रम विधियों से जुड़ा परिचित अंक है — कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) की वेतन-सीमा और बोनस संदाय अधिनियम, 1965 के अधीन पात्रता की वेतन-सीमा दोनों 21,000 रुपए मासिक हैं । परीक्षक ने इसे यहाँ इसीलिए रखा है कि यह अंक श्रम-विधि पढ़ने वाले को परिचित लगता है, पर मज़दूरी संदाय अधिनियम की धारा 1(6) से इसका कोई संबंध नहीं ।
मज़दूरी संदाय अधिनियम, 1936 का उद्देश्य मज़दूरी की मात्रा तय करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि तय मज़दूरी समय पर, पूरी और वैध कटौतियों के बाद ही दी जाए । इसकी धुरी तीन बातों पर है : वेतन-अवधि एक माह से अधिक नहीं हो सकती (धारा 4) ; मज़दूरी का भुगतान निर्धारित समय-सीमा के भीतर करना होगा (धारा 5 — कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों में वेतन-अवधि की समाप्ति से सात दिन के भीतर, अन्यथा दस दिन के भीतर) ; और मज़दूरी से केवल धारा 7 में गिनाई गई कटौतियाँ ही की जा सकती हैं । अधिनियम की परिधि धारा 1(6) की वेतन-सीमा से तय होती है, और यही सीमा इस प्रश्न का विषय है । यह वह सीमा है जो केंद्र सरकार उपभोक्ता व्यय सर्वेक्षण के आधार पर प्रत्येक पाँच वर्ष में संशोधित कर सकती है ।
श्रम विधि के इस खंड में EPFO सबसे अधिक 'संख्या' पूछता है — वेतन-सीमा, दिनों की संख्या, सदस्यों की संख्या, सप्ताहों की संख्या । इसलिए तैयारी में प्रत्येक अधिनियम की अपनी संख्या को उसी अधिनियम के साथ बाँधकर याद करना चाहिए, क्योंकि विकल्पों में सदैव पड़ोसी अधिनियमों की संख्याएँ ही भ्रामक विकल्प बनकर आती हैं — यहाँ 15,000 (भविष्य निधि), 21,000 (ईएसआई/बोनस) और 18,000 (इसी अधिनियम की पुरानी सीमा) । एक और बात ध्यान में रखिए : मज़दूरी संदाय अधिनियम, 1936 उन चार अधिनियमों में से एक है जिन्हें मज़दूरी संहिता, 2019 (Code on Wages) में समाहित किया गया — शेष तीन हैं न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम, 1948, बोनस संदाय अधिनियम, 1965 और समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 । चारों श्रम संहिताएँ 21 नवंबर 2025 से प्रवृत्त हुईं, किन्तु यह प्रश्नपत्र 2023 का है और उस समय की स्थिति के अनुसार ही हल किया जाना चाहिए ।
- मज़दूरी संदाय अधिनियम, 1936 की धारा 1(6) अधिनियम की वेतन-सीमा तय करती है ; अधिनियम उसी पर लागू होता है जिसकी मासिक मज़दूरी का औसत अधिसूचित राशि से कम हो ।
- वर्तमान अधिसूचित राशि 24,000 रुपए मासिक है — श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय की अधिसूचना का.आ. 2806(अ), दिनांक 28 अगस्त 2017, प्रभावी 29 अगस्त 2017 ।
- इसी अधिसूचना ने पिछली सीमा 18,000 रुपए मासिक को बढ़ाकर 24,000 रुपए किया ; आधार था एनएसएसओ का उपभोक्ता व्यय सर्वेक्षण ।
- धारा 1(6) केंद्र सरकार को प्रत्येक पाँच वर्ष बाद इस सीमा को अधिसूचना द्वारा बढ़ाने की शक्ति देती है ।
- अधिनियम की अन्य प्रमुख धाराएँ : धारा 4 (वेतन-अवधि एक माह से अधिक नहीं), धारा 5 (भुगतान का समय), धारा 7 (अनुज्ञेय कटौतियों की सूची) ।
- विभिन्न श्रम विधियों की वेतन-सीमाएँ आपस में मिला देना — 15,000 (ईपीएफ), 21,000 (ईएसआई तथा बोनस), 24,000 (मज़दूरी संदाय) ।
- पुरानी अधिसूचित सीमा 18,000 रुपए को वर्तमान मान लेना ; धारा 1(6) में पाँच-वर्षीय पुनरीक्षण का उपबंध है ।
- मज़दूरी संदाय अधिनियम को मज़दूरी की दर तय करने वाला अधिनियम समझ लेना — दर न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम, 1948 तय करता है ।
EPFO प्रवर्तन अधिकारी/लेखा अधिकारी तथा सहायक भविष्य निधि आयुक्त, दोनों परीक्षाओं में यह अंक सीधे-सीधे पूछा जाता है, और कभी-कभी उलटे रूप में — 'निम्नलिखित में से किस अधिनियम की वेतन-सीमा 24,000 रुपए मासिक है ?' । उत्तर देने से पहले यह जाँच लीजिए कि प्रश्न किस अधिनियम की सीमा माँग रहा है, क्योंकि विकल्पों में सदैव पड़ोसी अधिनियमों की सीमाएँ रखी जाती हैं । संख्याओं को अधिसूचना के वर्ष के साथ याद रखना सबसे सुरक्षित है ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
मज़दूरी संदाय अधिनियम, 1936 के अधीन वेतन-सीमा को संशोधित करने की शक्ति केंद्र सरकार को किस आधार पर और कितने अंतराल पर प्राप्त है ?
- (a)थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर, प्रत्येक तीन वर्ष बाद
- (b)एनएसएसओ के उपभोक्ता व्यय सर्वेक्षण के आधार पर, प्रत्येक पाँच वर्ष बाद
- (c)औद्योगिक कामगारों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर, प्रतिवर्ष
- (d)केंद्रीय सलाहकार बोर्ड की सिफ़ारिश पर, प्रत्येक दस वर्ष बाद
उत्तर(b) एनएसएसओ के उपभोक्ता व्यय सर्वेक्षण के आधार पर, प्रत्येक पाँच वर्ष बाद — यही धारा 1(6) का उपबंध है, और इसी के अधीन 2017 में सीमा 24,000 रुपए की गई ।
- practice — not a real PYQ
बोनस संदाय अधिनियम, 1965 के अधीन बोनस पाने की पात्रता की वर्तमान वेतन-सीमा क्या है ?
- (a)पंद्रह हज़ार रुपए मासिक
- (b)अठारह हज़ार रुपए मासिक
- (c)इक्कीस हज़ार रुपए मासिक
- (d)चौबीस हज़ार रुपए मासिक
उत्तर(c) इक्कीस हज़ार रुपए मासिक — यही वह अंक है जिसे परीक्षार्थी प्रायः मज़दूरी संदाय अधिनियम की 24,000 रुपए वाली सीमा से गड्डमड्ड कर देते हैं ।