निम्नलिखित में से किसने नासिक में भोंसला मिलिटरी स्कूल शुरू किया था ?
- (a)वी.डी. सावरकर
- (b)एम.आर. जयकर
- (c)एन.सी. केलकर
- (d)बी.एस. मुंजे
सही उत्तर — D, (d) बी.एस. मुंजे । बालकृष्ण शिवराम मुंजे (12 दिसंबर 1872 – 3 मार्च 1948) नागपुर के चिकित्सक और राजनेता थे, जो 1920 में बाल गंगाधर तिलक की मृत्यु के बाद काँग्रेस से अलग हो गए और 1927 से 1937 तक हिन्दू महासभा के अखिल भारतीय अध्यक्ष रहे ; 1937 में उन्होंने यह पद विनायक दामोदर सावरकर को सौंपा । वे काँग्रेस नेताओं के तीव्र विरोध के बावजूद लंदन के गोल मेज़ सम्मेलनों में दो बार सम्मिलित हुए । भारतीय युवाओं के सैन्य प्रशिक्षण में उनकी विशेष रुचि थी, और इटली की यात्रा से लौटने के बाद उन्होंने नासिक में भोंसला मिलिटरी स्कूल की स्थापना की — विद्यालय का नाम नागपुर के भोंसले राजवंश की स्मृति में है । उनका मूल विचार यह था कि भारतीय समाज में सैन्य-प्रशिक्षण की परंपरा का पुनरुद्धार किया जाए, क्योंकि औपनिवेशिक भर्ती-नीति ने अधिकांश भारतीय समुदायों को सेना से बाहर रखा हुआ था । शेष तीनों विकल्प उसी दौर के महाराष्ट्रीय नेता हैं और परीक्षक ने उन्हें इसीलिए एक साथ रखा है — तीनों 1926 के साबरमती समझौते के हस्ताक्षरकर्ताओं में थे, किन्तु नासिक के इस विद्यालय की स्थापना का श्रेय उनमें से किसी को नहीं है ।
- (a)वी.डी. सावरकर — विनायक दामोदर सावरकर इसी वैचारिक धारा के सर्वाधिक प्रसिद्ध नाम हैं, इसीलिए यह सबसे आकर्षक भ्रामक विकल्प है — पर भोंसला मिलिटरी स्कूल उनकी स्थापना नहीं है । सावरकर का संबंध अभिनव भारत सोसाइटी, 'हिन्दुत्व' (1923) की रचना, अंडमान की सेल्युलर जेल और रत्नागिरी के वर्षों से है ; हिन्दू महासभा का अखिल भारतीय अध्यक्ष पद उन्होंने 1937 में मुंजे से ही ग्रहण किया था । अर्थात् इस प्रश्न में सावरकर मुंजे के उत्तराधिकारी हैं, संस्थापक नहीं ।
- (b)एम.आर. जयकर — मुकुंद रामराव जयकर एक विधिवेत्ता और संवैधानिक वार्ताकार थे, सैन्य शिक्षा के प्रवर्तक नहीं । उनका नाम 1926 के साबरमती समझौते से जुड़ता है, जिसमें विवादों के निपटारे के लिए मोतीलाल नेहरू और जयकर की समिति बनी थी, तथा गोल मेज़ सम्मेलनों की वार्ताओं से । उनका कार्यक्षेत्र न्यायालय, विधान-मंडल और मध्यस्थता था — नासिक का यह विद्यालय उनसे नहीं जुड़ता ।
- (c)एन.सी. केलकर — नरसिंह चिंतामण केलकर तिलक के निकट सहयोगी और 'केसरी' तथा 'मराठा' के संपादक थे, और 1920 के दशक में 'उत्तरदायी सहयोग' (responsive cooperation) गुट के नेता । वे भी 1926 के साबरमती समझौते के हस्ताक्षरकर्ताओं में थे । उनकी पहचान पत्रकारिता और विधान-मंडल की राजनीति की है ; नासिक के भोंसला मिलिटरी स्कूल की स्थापना से उनका संबंध नहीं ।
बीसवीं सदी के आरंभ में भारतीय नेताओं का एक वर्ग यह मानता था कि राजनीतिक आंदोलन के साथ-साथ भारतीयों का सैन्य-प्रशिक्षण भी आवश्यक है, क्योंकि औपनिवेशिक सरकार की 'लड़ाकू जातियों' (martial races) वाली भर्ती-नीति ने भारत के अधिकांश समुदायों को शस्त्र और सैन्य अनुभव से वंचित रखा था । बी.एस. मुंजे इसी विचार के सबसे सक्रिय प्रवर्तक थे । नागपुर के चिकित्सक, तिलक-अनुयायी और बाद में हिन्दू महासभा के अध्यक्ष (1927-1937) मुंजे ने भारतीय युवाओं को औपचारिक सैनिक शिक्षा देने के उद्देश्य से नासिक में भोंसला मिलिटरी स्कूल आरंभ किया । यह प्रश्न आधुनिक भारतीय इतिहास के उस उपखंड से है जिसमें 'व्यक्ति-संस्था' का जोड़ा पूछा जाता है — नेता का नाम और उसने जो संगठन, पत्र या संस्था स्थापित की ।
परीक्षक ने चारों विकल्पों में महाराष्ट्र के, लगभग एक ही पीढ़ी के और वैचारिक रूप से पड़ोसी नेता रखे हैं — यह जान-बूझकर किया गया है, ताकि 'क्षेत्र से अनुमान' काम न करे । सावरकर सर्वाधिक प्रसिद्ध हैं, इसलिए अनुमान लगाने वाला अभ्यर्थी प्रायः (a) चुन बैठता है । इस श्रेणी के प्रश्नों में सुरक्षित उपाय यह है कि प्रत्येक नेता के साथ एक 'हस्ताक्षर संस्था' जोड़कर याद रखी जाए : मुंजे — नासिक का भोंसला मिलिटरी स्कूल ; सावरकर — अभिनव भारत सोसाइटी और 'हिन्दुत्व' ; केलकर — 'केसरी'/'मराठा' का संपादन ; जयकर — साबरमती समझौते की नेहरू-जयकर समिति तथा संवैधानिक वार्ताएँ । ध्यान दीजिए कि तीनों भ्रामक नाम और मुंजे, चारों ही 1926 के साबरमती समझौते से जुड़े थे — निकटता ही इस प्रश्न की कठिनाई है ।
- बालकृष्ण शिवराम मुंजे (1872-1948) नागपुर के चिकित्सक व राजनेता थे ; 1920 में तिलक की मृत्यु के बाद उन्होंने काँग्रेस से नाता तोड़ लिया ।
- वे 1927 से 1937 तक हिन्दू महासभा के अखिल भारतीय अध्यक्ष रहे और 1937 में यह पद वी.डी. सावरकर को सौंपा ।
- काँग्रेस नेताओं के विरोध के बावजूद वे लंदन के गोल मेज़ सम्मेलनों में दो बार सम्मिलित हुए ।
- इटली की यात्रा से लौटने के बाद उन्होंने नासिक में भोंसला मिलिटरी स्कूल की स्थापना की, जिसका उद्देश्य भारतीय युवाओं को सैनिक प्रशिक्षण देना था ।
- विद्यालय का नाम नागपुर के भोंसले राजवंश की स्मृति में रखा गया ; मुंजे स्वयं नागपुर से थे ।
- सर्वाधिक प्रसिद्ध नाम (सावरकर) को स्वतः उत्तर मान लेना — प्रसिद्धि और संस्थापकत्व अलग-अलग बातें हैं ।
- हिन्दू महासभा के अध्यक्षों का क्रम उलट देना — 1927-1937 मुंजे, उसके बाद सावरकर ।
- भोंसला मिलिटरी स्कूल को नागपुर में मान लेना — विद्यालय नासिक में है, यद्यपि नाम नागपुर के भोंसले राजवंश से आया है ।
'व्यक्ति और उसकी स्थापित संस्था' EPFO तथा UPSC का बहुत नियमित प्रारूप है — कभी सीधे 'किसने आरंभ किया', कभी सूची-सुमेलन, और कभी 'निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही नहीं है' के रूप में । ऐसे प्रश्नों में परीक्षक प्रायः एक ही क्षेत्र या एक ही विचारधारा के चार नाम रखता है, ताकि अनुमान असंभव हो जाए । इसलिए संस्थाओं की सूची व्यक्ति के साथ, और यथासंभव नगर के साथ, याद कीजिए ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
1937 में बी.एस. मुंजे के बाद हिन्दू महासभा के अखिल भारतीय अध्यक्ष कौन बने ?
- (a)एन.सी. केलकर
- (b)वी.डी. सावरकर
- (c)एम.आर. जयकर
- (d)श्यामा प्रसाद मुखर्जी
उत्तर(b) वी.डी. सावरकर — मुंजे 1927 से 1937 तक अध्यक्ष रहे और 1937 में यह पद सावरकर को सौंपा ।
- practice — not a real PYQ
भोंसला मिलिटरी स्कूल किस नगर में स्थापित किया गया था ?
- (a)नागपुर
- (b)पुणे
- (c)नासिक
- (d)कोल्हापुर
उत्तर(c) नासिक — विद्यालय नासिक में है, यद्यपि उसका नाम नागपुर के भोंसले राजवंश की स्मृति में रखा गया ।