निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : कथन I : भारत में, RTGS और NEFT भुगतान प्रणालियाँ भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम के स्वामित्व में और इसके द्वारा प्रचालित हैं । कथन II : भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम, बैंकों द्वारा संवर्धित सत्ता है । उपर्युक्त कथनों के सन्दर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है ?
- (a)कथन I और कथन II दोनों सही हैं और कथन II, कथन I की सही व्याख्या है
- (b)कथन I और कथन II दोनों सही हैं और कथन II, कथन I की सही व्याख्या नहीं है
- (c)कथन I सही है किन्तु कथन II ग़लत है
- (d)कथन I ग़लत है किन्तु कथन II सही है
सही उत्तर — D, (d) कथन I ग़लत है किन्तु कथन II सही है — दोनों कथनों को अलग-अलग परखिए । कथन I कहता है कि RTGS और NEFT भुगतान प्रणालियाँ भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम के स्वामित्व में और उसी के द्वारा प्रचालित हैं । यही ग़लत है । दोनों प्रणालियाँ भारतीय रिज़र्व बैंक के स्वामित्व में हैं और वही उन्हें चलाता है ; रिज़र्व बैंक का अपना प्रश्नोत्तर पृष्ठ NEFT को 'रिज़र्व बैंक के स्वामित्व वाली और उसके द्वारा प्रचालित देशव्यापी केंद्रीकृत भुगतान प्रणाली' कहता है । RTGS में हर लेनदेन का निपटान अलग-अलग और तत्काल होता है, बिना किसी नेटिंग के, और वह रिज़र्व बैंक की बहियों में होने के कारण अंतिम तथा अप्रतिसंहरणीय होता है ; उसमें न्यूनतम राशि दो लाख रुपये है और ऊपरी सीमा कोई नहीं । NEFT आधे-आधे घंटे के बैचों में निपटता है और उसमें रिज़र्व बैंक की ओर से कोई राशि-सीमा नहीं रखी गई । कथन II कहता है कि भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम बैंकों द्वारा प्रवर्तित संस्था है, और यह सही है : वह रिज़र्व बैंक तथा भारतीय बैंक संघ की पहल पर बना और उसकी अंश-पूँजी दस प्रवर्तक बैंकों ने ली, जिसे बाद में और बैंकों तक फैलाया गया । अतः कथन I ग़लत और कथन II सही — उत्तर विकल्प (d) ।
- (a)कथन I और कथन II दोनों सही हैं और कथन II, कथन I की सही व्याख्या है — यह विकल्प दोनों कथनों को सही मानता है और साथ में यह भी कहता है कि कथन II पहले की व्याख्या करता है । पर पहली शर्त ही टूट जाती है, क्योंकि कथन I ग़लत है — RTGS और NEFT भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम की नहीं, रिज़र्व बैंक की प्रणालियाँ हैं । यह विकल्प इसलिए आकर्षक लगता है कि उसका तर्क सुनने में सुसंगत है : यदि निगम बैंकों की संस्था हो तो बैंकों के बीच पैसा भेजने वाली प्रणालियाँ उसी के पास होनी चाहिए । सुसंगत तर्क और सही तथ्य दो अलग बातें हैं, और 'कथन I / कथन II' प्रश्न में सदा तथ्य पहले जाँचा जाता है, तर्क बाद में ।
- (b)कथन I और कथन II दोनों सही हैं और कथन II, कथन I की सही व्याख्या नहीं है — इस विकल्प का पूरा अर्थ उसमें छपे 'नहीं' पर टिका है — कथन II, कथन I की सही व्याख्या 'नहीं' है — और पुस्तिका ने उसे मोटे तिरछे अक्षरों में छापा है । पर यह विकल्प भी तभी चुना जा सकता है जब दोनों कथन सही हों, और यहाँ कथन I सही नहीं है । इसलिए व्याख्या का प्रश्न ही नहीं उठता । विकल्प (a) और (b) का यही ढाँचा चारों 'कथन I / कथन II' प्रश्नों में दोहराया गया है : दोनों में दोनों कथनों का सही होना अनिवार्य है, और वे आपस में केवल व्याख्या के संबंध पर अलग होते हैं ।
- (c)कथन I सही है किन्तु कथन II ग़लत है — यह विकल्प सत्य-मूल्यों को ठीक उलट देता है — कथन I को सही और कथन II को ग़लत ठहराकर । दोनों बातें उलटी हैं । भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम बैंकों की ही पहल से खड़ा हुआ है, इसलिए कथन II ग़लत नहीं है ; और RTGS तथा NEFT रिज़र्व बैंक की प्रणालियाँ हैं, इसलिए कथन I सही नहीं है । यह विकल्प उन अभ्यर्थियों को खींचता है जो निगम को कोई सरकारी नियामक संस्था मान बैठते हैं । वास्तव में वह कंपनी अधिनियम की धारा 8 के अधीन बनी ग़ैर-लाभकारी कंपनी है, जो भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम 2007 के ढाँचे में काम करती है ।
भारत की भुगतान व्यवस्था दो स्तरों पर बँटी है । बड़े मूल्य की और अंतर-बैंक निपटान वाली प्रणालियाँ भारतीय रिज़र्व बैंक के पास हैं — RTGS और NEFT दोनों उसी के स्वामित्व में हैं और उसी के द्वारा प्रचालित होती हैं । खुदरा भुगतान की प्रणालियाँ भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम के पास हैं, जो रिज़र्व बैंक और भारतीय बैंक संघ की पहल पर दिसंबर 2008 में बना, कंपनी अधिनियम 1956 की धारा 25 — आज की धारा 8 — के अधीन ग़ैर-लाभकारी कंपनी के रूप में पंजीकृत हुआ, और भुगतान तथा निपटान प्रणाली अधिनियम 2007 के ढाँचे में काम करता है । उसकी प्रणालियों में एकीकृत भुगतान अंतरापृष्ठ, तत्काल भुगतान सेवा, रुपे कार्ड, राष्ट्रीय स्वचालित समाशोधन गृह, आधार सक्षम भुगतान प्रणाली, भारत बिल भुगतान प्रणाली, फ़ास्टैग और चेक ट्रंकेशन प्रणाली आती हैं । इस विभाजन को याद रखने का सरल सूत्र यही है — अंतर-बैंक अंतरण रिज़र्व बैंक के, खुदरा उत्पाद निगम के ।
यह भाग B के अंतिम खंड का दूसरा 'कथन I / कथन II' प्रश्न है और यह उसी तकनीक पर बना है जिस पर ऐसे अधिकांश प्रश्न बनते हैं : एक सही वाक्य लेकर उसके कर्ता का नाम बदल देना । यहाँ RTGS और NEFT का स्वामी बदलकर भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम कर दिया गया है, जबकि दूसरा कथन ज्यों का त्यों सही छोड़ा गया है । छपाई और शब्दावली की तीन बातें ध्यान देने योग्य हैं । पहली, अंग्रेज़ी स्तंभ संस्था का नाम 'National Payment Corporation of India' छापता है, जबकि उसका वास्तविक नाम 'National Payments Corporation of India' है ; हिन्दी स्तंभ 'भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम' लिखता है, जो मानक रूप है और इस चूक से बच जाता है । दूसरी, हिन्दी entity के लिए 'सत्ता' शब्द रखती है, जबकि सामान्य प्रयोग में सत्ता का अर्थ शासन या अधिकार होता है और यहाँ अपेक्षित शब्द इकाई, निकाय या संस्था था । तीसरी, promoted के लिए 'संवर्धित' छपा है, जबकि कंपनी विधि की हिन्दी में promoter को प्रवर्तक और promoted को प्रवर्तित कहा जाता है । तीनों में से कोई भी उत्तर नहीं बदलता, पर पढ़ते समय ठिठकाता ज़रूर है ।
- RTGS और NEFT दोनों भारतीय रिज़र्व बैंक के स्वामित्व में हैं और उसी के द्वारा प्रचालित होती हैं ; रिज़र्व बैंक NEFT को अपनी 'देशव्यापी केंद्रीकृत भुगतान प्रणाली' कहता है ।
- RTGS में हर लेनदेन का निपटान अलग-अलग और तत्काल होता है, बिना नेटिंग के, और रिज़र्व बैंक की बहियों में होने के कारण वह अंतिम तथा अप्रतिसंहरणीय होता है ; न्यूनतम राशि दो लाख रुपये और कोई ऊपरी सीमा नहीं ।
- NEFT आधे-आधे घंटे के बैचों में निपटता है, उसमें रिज़र्व बैंक की ओर से कोई राशि-सीमा नहीं है, और वह चौबीसों घंटे, सातों दिन उपलब्ध रहता है ; RTGS भी 14 दिसंबर 2020 से चौबीसों घंटे उपलब्ध है ।
- भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम दिसंबर 2008 में बना, रिज़र्व बैंक और भारतीय बैंक संघ की पहल पर ; उसकी अंश-पूँजी दस प्रवर्तक बैंकों ने ली थी और बाद में उसका अंश-आधार और बैंकों तक फैलाया गया ।
- यह निगम कंपनी अधिनियम 1956 की धारा 25 — आज की धारा 8 — के अधीन ग़ैर-लाभकारी कंपनी है और भुगतान तथा निपटान प्रणाली अधिनियम 2007 के ढाँचे में काम करता है ।
- निगम की प्रणालियाँ — एकीकृत भुगतान अंतरापृष्ठ, तत्काल भुगतान सेवा, रुपे, राष्ट्रीय स्वचालित समाशोधन गृह, आधार सक्षम भुगतान प्रणाली, भारत बिल भुगतान प्रणाली, फ़ास्टैग और चेक ट्रंकेशन प्रणाली ।
- हर भुगतान प्रणाली को भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम की मान लेना । खुदरा उत्पाद उसके हैं, पर RTGS और NEFT रिज़र्व बैंक के हैं ।
- निगम को नियामक संस्था समझ लेना । वह नियामक नहीं, धारा 8 के अधीन बनी ग़ैर-लाभकारी कंपनी है ; नियामक भारतीय रिज़र्व बैंक है ।
- 'कथन I / कथन II' में सुसंगत लगने वाले तर्क को तथ्य मान लेना । पहले हर कथन का तथ्य अलग-अलग जाँचिए, व्याख्या का प्रश्न बाद में आता है ।
- RTGS की न्यूनतम राशि को अधिकतम राशि पढ़ लेना । दो लाख रुपये न्यूनतम है और ऊपरी सीमा कोई नहीं ।
भुगतान प्रणालियों पर प्रश्न प्रायः तीन रूपों में आते हैं । पहला — कौन-सी प्रणाली किसके स्वामित्व में है, जैसा यहाँ पूछा गया है ; इसमें विकल्प रिज़र्व बैंक, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम, भारतीय बैंक संघ और किसी बड़े बैंक के बीच बाँटे जाते हैं । दूसरा — दो प्रणालियों की तुलना, जैसे RTGS और NEFT में निपटान की विधि, राशि-सीमा या समय का अंतर ; इसमें संख्याएँ निर्णायक होती हैं । तीसरा — किसी संस्था का विधिक स्वरूप और उसके प्रवर्तक कौन हैं । 'कथन I / कथन II' के रूप में यह विषय विशेष रूप से उपयुक्त बैठता है, क्योंकि एक कथन में संस्था का नाम बदलकर और दूसरे को सही छोड़कर चारों विकल्प सार्थक बना दिए जाते हैं । ध्यान रखिए कि इस प्रश्नपत्र के चारों ऐसे प्रश्नों में 'दोनों कथन ग़लत' वाला विकल्प नहीं है, इसलिए कम से कम एक कथन सही अवश्य होगा — और यही जाँच बताती है कि यदि दोनों ग़लत लग रहे हों तो कहीं भूल हुई है ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
भारत में RTGS और NEFT भुगतान प्रणालियों का स्वामित्व और प्रचालन किसके पास है ?
- (a)भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम
- (b)भारतीय रिज़र्व बैंक
- (c)भारतीय स्टेट बैंक
- (d)भारतीय बैंक संघ
उत्तर(b) भारतीय रिज़र्व बैंक — दोनों देशव्यापी केंद्रीकृत प्रणालियाँ रिज़र्व बैंक के स्वामित्व में हैं और वही उन्हें चलाता है ; भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम के पास खुदरा भुगतान की प्रणालियाँ हैं ।
- practice — not a real PYQ
निम्नलिखित में से कौन-सी भुगतान प्रणाली भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम द्वारा प्रचालित की जाती है ?
- (a)NEFT
- (b)RTGS
- (c)एकीकृत भुगतान अंतरापृष्ठ (UPI)
- (d)SWIFT
उत्तर(c) एकीकृत भुगतान अंतरापृष्ठ (UPI) — यह निगम की खुदरा भुगतान प्रणाली है ; NEFT और RTGS रिज़र्व बैंक की हैं, और SWIFT बैंकों के बीच संदेश भेजने का अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क है, भारत की भुगतान प्रणाली नहीं ।