निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : कथन I : भारत में, केंद्र सरकार, भारतीय रिज़र्व बैंक के परामर्श से, उपभोक्ता कीमत सूचकांक के आधार पर पाँच वर्ष में एक बार मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारित करती है । कथन II : वर्तमान में, भारत में मौद्रिक नीति ढाँचा केंद्र सरकार द्वारा प्रचालित किया जाता है । उपर्युक्त कथनों के सन्दर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है ?
- (a)कथन I और कथन II दोनों सही हैं और कथन II, कथन I की सही व्याख्या है
- (b)कथन I और कथन II दोनों सही हैं और कथन II, कथन I की सही व्याख्या नहीं है
- (c)कथन I सही है किन्तु कथन II ग़लत है
- (d)कथन I ग़लत है किन्तु कथन II सही है
सही उत्तर — C, (c) कथन I सही है किन्तु कथन II ग़लत है — यह इस प्रश्नपत्र के चार 'कथन I / कथन II' प्रश्नों में पहला है, इसलिए पहले इसका ढाँचा समझ लीजिए । यहाँ दो कथन अलग-अलग परखे जाते हैं और फिर, यदि दोनों सही हों, तो यह भी देखा जाता है कि दूसरा कथन पहले की व्याख्या करता है या नहीं । कथन I वही बात कहता है जो भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम 1934 की धारा 45ZA में लिखी है — केंद्र सरकार, बैंक के परामर्श से, उपभोक्ता कीमत सूचकांक के रूप में मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारित करेगी और उसे प्रत्येक पाँच वर्ष में एक बार अधिसूचित करेगी । यह अध्याय वित्त अधिनियम 2016 के द्वारा जोड़ा गया था और लक्ष्य 4 प्रतिशत रखा गया, जिसके दोनों ओर दो प्रतिशत बिंदु की सहनशीलता सीमा है, अर्थात 2 से 6 प्रतिशत का दायरा । इसलिए कथन I सही है । कथन II कहता है कि मौद्रिक नीति ढाँचा केंद्र सरकार द्वारा प्रचालित किया जाता है, और यही ग़लत है । ढाँचे का प्रचालन भारतीय रिज़र्व बैंक करता है, और नीतिगत रेपो दर छह सदस्यों वाली मौद्रिक नीति समिति तय करती है, जो धारा 45ZB के अधीन गठित होती है । सरकार का काम लक्ष्य तय करना और तीन बाह्य सदस्यों की नियुक्ति करना है, नीति चलाना नहीं । अतः कथन I सही और कथन II ग़लत — उत्तर विकल्प (c) ।
- (a)कथन I और कथन II दोनों सही हैं और कथन II, कथन I की सही व्याख्या है — यह विकल्प दोनों कथनों को सही मानता है और साथ ही कहता है कि कथन II, कथन I की सही व्याख्या है । दोनों शर्तें यहाँ टूटती हैं । पहली, कथन II सही ही नहीं है, क्योंकि मौद्रिक नीति ढाँचे का प्रचालन भारतीय रिज़र्व बैंक करता है, केंद्र सरकार नहीं । दूसरी, व्याख्या का संबंध भी नहीं बनता : यह प्रश्न कि लक्ष्य कौन तय करता है और यह प्रश्न कि नीति कौन चलाता है, दो अलग बातें हैं, और 2016 के ढाँचे की पूरी बनावट ही इन दोनों कामों को अलग-अलग हाथों में रखने पर टिकी है । इस विकल्प को चुनने से पहले सदा दो चरणों में सोचिए — पहले सत्य, फिर व्याख्या ।
- (b)कथन I और कथन II दोनों सही हैं और कथन II, कथन I की सही व्याख्या नहीं है — इस विकल्प में निषेध मोटे तिरछे अक्षरों में छपा है — कथन II, कथन I की सही व्याख्या 'नहीं' है — और वही उसका पूरा अर्थ तय करता है । पर इस विकल्प तक पहुँचने की पहली शर्त यह है कि दोनों कथन सही हों, और वह शर्त यहाँ पूरी नहीं होती । कथन II तथ्यतः ग़लत है, इसलिए व्याख्या का प्रश्न ही नहीं उठता । यह ध्यान रखिए कि (a) और (b) आपस में केवल इसी 'नहीं' से अलग होते हैं ; दोनों में दोनों कथनों का सही होना अनिवार्य है । जल्दी में यह छोटा-सा शब्द छूट जाए तो अभ्यर्थी दो विकल्पों में से ग़लत वाला उठा लेता है ।
- (d)कथन I ग़लत है किन्तु कथन II सही है — यह विकल्प सत्य-मूल्यों को ठीक उलट देता है — कथन I को ग़लत और कथन II को सही ठहराकर । पर कथन I का हर अंश अधिनियम की भाषा से मेल खाता है : लक्ष्य केंद्र सरकार निर्धारित करती है, बैंक के परामर्श से, उपभोक्ता कीमत सूचकांक के रूप में, और पाँच वर्ष में एक बार । इनमें से किसी एक अंश को भी बदल दिया जाए तो कथन ग़लत हो जाता, जैसे 'थोक मूल्य सूचकांक' लिख दिया जाता या 'तीन वर्ष' कर दिया जाता । ऐसे प्रश्नों में उलटा उत्तर प्रायः उन्हें आकर्षित करता है जो केंद्रीय बैंक को हर मौद्रिक निर्णय का स्वामी मान लेते हैं और भूल जाते हैं कि लक्ष्य तय करने का अधिकार विधि ने सरकार को दिया है ।
भारत का लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्य ढाँचा 2015 के मौद्रिक नीति ढाँचा समझौते से आरंभ हुआ और वित्त अधिनियम 2016 के द्वारा भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम 1934 में जोड़े गए अध्याय से विधिक रूप ले गया । उसकी बनावट में काम दो हिस्सों में बँटा है । लक्ष्य निर्धारित करना राजनीतिक निर्णय है, इसलिए वह केंद्र सरकार के पास है : धारा 45ZA के अधीन सरकार, बैंक के परामर्श से, उपभोक्ता कीमत सूचकांक के रूप में लक्ष्य तय करती है और उसे पाँच वर्ष में एक बार राजपत्र में अधिसूचित करती है । लक्ष्य तक पहुँचने का काम तकनीकी है, इसलिए वह बैंक के पास है : धारा 45ZB के अधीन गठित मौद्रिक नीति समिति नीतिगत रेपो दर तय करती है । समिति में छह सदस्य होते हैं — गवर्नर अध्यक्ष के रूप में, मौद्रिक नीति के प्रभारी उप गवर्नर, केंद्रीय बोर्ड द्वारा नामित बैंक का एक अधिकारी, और केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त तीन बाह्य सदस्य । प्रत्येक को एक मत मिलता है और बराबरी की स्थिति में गवर्नर का निर्णायक मत होता है ।
यह प्रश्न भाग B के अंतिम खंड का है, जो अर्थव्यवस्था और समसामयिकी को समेटता है, और यह उन चार प्रश्नों में पहला है जो 'कथन I / कथन II' के रूप में पूछे गए हैं — 111 से 114 तक । यह रूप संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में हाल के वर्षों में बहुत बढ़ा है और वह पुराने 'कथन एवं कारण' प्रश्न का ही उत्तराधिकारी है । चारों प्रश्नों के विकल्प शब्दशः एक जैसे हैं, इसलिए एक बार ढाँचा समझ लेने पर चारों एक ही विधि से हल हो जाते हैं । इस प्रश्न का विषय कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की भर्ती के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है, क्योंकि मुद्रास्फीति और ब्याज दरें ही वह पृष्ठभूमि हैं जिन पर भविष्य निधि की वास्तविक प्रतिफल-दर तय होती है । छपाई की बात यह है कि 'कथन I :' और 'कथन II :' तिरछे अक्षरों में छपे हैं और विकल्प (b) का निषेध मोटे तिरछे अक्षरों में । हिन्दी और अंग्रेज़ी दोनों स्तंभ एक ही बात कहते हैं ।
- भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम 1934 की धारा 45ZA : केंद्र सरकार, बैंक के परामर्श से, उपभोक्ता कीमत सूचकांक के रूप में मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारित करेगी और उसे प्रत्येक पाँच वर्ष में एक बार अधिसूचित करेगी ।
- लक्ष्य 4 प्रतिशत है, जिसके दोनों ओर दो प्रतिशत बिंदु की सहनशीलता सीमा है — ऊपरी सीमा 6 प्रतिशत और निचली सीमा 2 प्रतिशत ; रिज़र्व बैंक के अनुसार यही लक्ष्य 31 मार्च 2031 तक बनाए रखा गया है ।
- धारा 45ZB के अधीन मौद्रिक नीति समिति में छह सदस्य होते हैं — गवर्नर (अध्यक्ष), मौद्रिक नीति के प्रभारी उप गवर्नर, केंद्रीय बोर्ड द्वारा नामित बैंक का एक अधिकारी, तथा केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त तीन बाह्य सदस्य ।
- समिति नीतिगत रेपो दर तय करती है, वर्ष में कम से कम चार बार बैठती है, उसकी गणपूर्ति चार सदस्यों से होती है, हर सदस्य को एक मत मिलता है और बराबरी पर गवर्नर का निर्णायक मत होता है ।
- धारा 45ZN : यदि औसत मुद्रास्फीति लगातार तीन तिमाहियों तक सहनशीलता सीमा से बाहर रहे तो बैंक को केंद्र सरकार को रिपोर्ट देनी होती है — विफलता के कारण, प्रस्तावित उपाय और लक्ष्य तक लौटने का अनुमानित समय ।
- काम का बँटवारा ही इस ढाँचे की आत्मा है : लक्ष्य सरकार तय करती है, ढाँचे का प्रचालन रिज़र्व बैंक करता है । कथन II इसी बँटवारे को उलट देता है, इसलिए वह ग़लत है ।
- लक्ष्य तय करने और नीति चलाने को एक मान लेना । लक्ष्य केंद्र सरकार तय करती है, नीति रिज़र्व बैंक चलाता है, और यही भेद इस प्रश्न का पूरा विषय है ।
- 'कथन I / कथन II' प्रश्न में पहले व्याख्या देख लेना । पहले दोनों कथनों का सत्य अलग-अलग तय कीजिए ; व्याख्या का प्रश्न तभी उठता है जब दोनों सही निकलें ।
- विकल्प (b) का 'नहीं' छूट जाना । वह मोटे तिरछे अक्षरों में छपा है और वही (a) तथा (b) को अलग करता है ।
- उपभोक्ता कीमत सूचकांक के स्थान पर थोक मूल्य सूचकांक मान लेना । विधि ने लक्ष्य उपभोक्ता कीमत सूचकांक के रूप में ही निर्धारित करने को कहा है ।
'कथन I / कथन II' प्रश्नों में विकल्प सदा वही चार होते हैं, इसलिए विधि भी सदा वही रहती है । पहले कथन I को अकेले पढ़कर सही या ग़लत ठहराइए, फिर कथन II को अकेले । यदि दोनों सही निकलें तो तीसरा चरण आता है — क्या कथन II वह कारण बताता है जिससे कथन I घटित होता है । ध्यान रखने योग्य बात यह है कि इस प्रश्नपत्र के चारों ऐसे प्रश्नों में 'दोनों कथन ग़लत हैं' वाला विकल्प है ही नहीं ; चारों विकल्पों में कम से कम एक कथन सही रहता है । इसका व्यावहारिक अर्थ यह है कि यदि आपका विश्लेषण दोनों कथनों को ग़लत ठहरा रहा हो तो कहीं न कहीं भूल हुई है, और यह अपने आप में एक जाँच है । अर्थव्यवस्था के ऐसे प्रश्नों में कथन प्रायः किसी अधिनियम की धारा या किसी संस्था के आधिकारिक विवरण से उठाए जाते हैं, इसलिए संस्था का नाम, संख्या और अवधि — तीनों पर अलग-अलग ध्यान दीजिए ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
भारत में मुद्रास्फीति लक्ष्य कौन निर्धारित करता है और कितनी अवधि में एक बार ?
- (a)भारतीय रिज़र्व बैंक, प्रत्येक तीन वर्ष में एक बार
- (b)केंद्र सरकार, भारतीय रिज़र्व बैंक के परामर्श से, प्रत्येक पाँच वर्ष में एक बार
- (c)मौद्रिक नीति समिति, प्रत्येक पाँच वर्ष में एक बार
- (d)नीति आयोग, प्रत्येक पाँच वर्ष में एक बार
उत्तर(b) केंद्र सरकार, भारतीय रिज़र्व बैंक के परामर्श से, प्रत्येक पाँच वर्ष में एक बार — यह भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम 1934 की धारा 45ZA की व्यवस्था है, और लक्ष्य उपभोक्ता कीमत सूचकांक के रूप में अधिसूचित किया जाता है ।
- practice — not a real PYQ
भारत की मौद्रिक नीति समिति में कुल कितने सदस्य होते हैं और उनमें कितने बाह्य सदस्य होते हैं ?
- (a)छह सदस्य, जिनमें तीन बाह्य सदस्य
- (b)चार सदस्य, जिनमें दो बाह्य सदस्य
- (c)छह सदस्य, जिनमें दो बाह्य सदस्य
- (d)सात सदस्य, जिनमें तीन बाह्य सदस्य
उत्तर(a) छह सदस्य, जिनमें तीन बाह्य सदस्य — गवर्नर अध्यक्ष होते हैं, उनके साथ मौद्रिक नीति के प्रभारी उप गवर्नर और केंद्रीय बोर्ड द्वारा नामित बैंक का एक अधिकारी होता है, तथा तीन बाह्य सदस्य केंद्र सरकार नियुक्त करती है ।