एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) योजना के अधीन लाभार्थी किस आयु वर्ग के बच्चे होते हैं ?
- (a)0 – 6 वर्ष
- (b)0 – 3 वर्ष
- (c)3 – 6 वर्ष
- (d)6 – 15 वर्ष
सही उत्तर — A, (a) 0 – 6 वर्ष — एकीकृत बाल विकास सेवा योजना का लाभार्थी-वर्ग जन्म से लेकर छह वर्ष की आयु तक के सभी बच्चे हैं, और इसी के साथ गर्भवती महिलाएँ तथा धात्री माताएँ भी इसकी लाभार्थी हैं । प्रश्न केवल बच्चों की आयु पूछता है, इसलिए उत्तर 0 से 6 वर्ष है । यह योजना 2 अक्टूबर 1975 को आरंभ हुई थी और आज महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधीन चलती है ; इसकी सारी सेवाएँ आँगनवाड़ी केन्द्र के माध्यम से दी जाती हैं, जहाँ आँगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका काम करती हैं । योजना छह सेवाएँ देती है — पूरक पोषाहार, विद्यालय-पूर्व अनौपचारिक शिक्षा, पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा, टीकाकरण, स्वास्थ्य जाँच और संदर्भ सेवाएँ । इनमें से अंतिम तीन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ मिलकर दी जाती हैं, इसलिए यह योजना दो मंत्रालयों के अभिसरण का उदाहरण भी है । छह वर्ष की ऊपरी सीमा मनमानी नहीं है : उसके बाद बच्चा विद्यालय की आयु में प्रवेश कर जाता है और उसकी पोषण-संबंधी ज़िम्मेदारी मध्याह्न भोजन जैसी दूसरी योजनाओं पर चली जाती है । वर्ष 2021-22 से यह योजना 'सक्षम आँगनवाड़ी और पोषण 2·0' के छाता-कार्यक्रम में पुनर्गठित की गई है, पर लाभार्थी बच्चों की आयु-सीमा वही 0 से 6 वर्ष बनी हुई है ।
- (b)0 – 3 वर्ष — 0 से 3 वर्ष योजना के भीतर का एक उप-वर्ग है, पूरा लाभार्थी-वर्ग नहीं । इस आयु के बच्चों को आँगनवाड़ी केन्द्र पर पकाया हुआ भोजन नहीं, घर ले जाने वाला राशन दिया जाता है, क्योंकि वे केन्द्र पर पूरा दिन नहीं रह सकते । जीवन के पहले हज़ार दिन — गर्भधारण से लेकर दो वर्ष की आयु तक — पोषण की दृष्टि से सबसे निर्णायक माने जाते हैं, इसलिए इस उप-वर्ग पर विशेष बल रहता है और यही बात इस विकल्प को आकर्षक बनाती है । पर योजना यहीं समाप्त नहीं होती ; तीन वर्ष के बाद बच्चा उसी केन्द्र पर विद्यालय-पूर्व शिक्षा के लिए आता रहता है ।
- (c)3 – 6 वर्ष — 3 से 6 वर्ष भी योजना का एक उप-वर्ग ही है — वह उप-वर्ग जिसे आँगनवाड़ी केन्द्र पर विद्यालय-पूर्व अनौपचारिक शिक्षा और पकाया हुआ पूरक भोजन मिलता है । राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने इसी आयु को 'आधारभूत चरण' का हिस्सा बनाया है, जिससे यह वर्ग और भी परिचित लगने लगा है । पर विद्यालय-पूर्व शिक्षा योजना की छह सेवाओं में से केवल एक है ; टीकाकरण, स्वास्थ्य जाँच और पूरक पोषाहार जन्म से ही चलते हैं । इसलिए 3 से 6 वर्ष को पूरा लाभार्थी-वर्ग मान लेना योजना को उसकी एक सेवा तक सीमित कर देना है ।
- (d)6 – 15 वर्ष — 6 से 15 वर्ष की आयु इस योजना के दायरे से पूरी तरह बाहर है ; वह विद्यालय जाने वाले बच्चों की आयु है और उसके लिए दूसरी योजनाएँ बनी हैं । मध्याह्न भोजन योजना, जिसे अब पी एम पोषण कहा जाता है, कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को भोजन देती है, और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 छह से चौदह वर्ष की आयु के बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार देता है । एकीकृत बाल विकास सेवा योजना का काम ठीक इससे पहले के वर्षों का है — विद्यालय में प्रवेश से पहले के छह वर्ष, जिनमें कुपोषण का सबसे अधिक ख़तरा रहता है ।
एकीकृत बाल विकास सेवा योजना भारत की आरंभिक बाल्यावस्था देखभाल और विकास की सबसे बड़ी योजना है । इसका मूल विचार यह है कि छोटे बच्चे की भूख, बीमारी और सीखने की ज़रूरतें अलग-अलग खिड़कियों से नहीं, एक ही केन्द्र से पूरी की जाएँ — इसीलिए नाम में 'एकीकृत' शब्द है । उसी सोच से छह सेवाएँ एक साथ रखी गईं : पूरक पोषाहार, विद्यालय-पूर्व अनौपचारिक शिक्षा, पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा, टीकाकरण, स्वास्थ्य जाँच और संदर्भ सेवाएँ । इनमें से तीन — टीकाकरण, स्वास्थ्य जाँच और संदर्भ सेवाएँ — स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की व्यवस्था के साथ अभिसरण में दी जाती हैं, शेष तीन महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ज़िम्मेदारी हैं । लाभार्थी दो श्रेणियों में हैं : छह वर्ष तक के बच्चे, तथा गर्भवती महिलाएँ और धात्री माताएँ । सेवाओं का ठिकाना आँगनवाड़ी केन्द्र है, और उसे चलाने वाली आँगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका मानदेय पर काम करने वाली सामुदायिक कार्यकर्ता हैं ।
यह प्रश्न भाग B के उस खंड से है जो राजव्यवस्था, शासन, अर्थव्यवस्था और सरकारी योजनाओं को समेटता है — प्रश्न 56 से 60, 91 से 95 और 106 से 110 । कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की भर्ती परीक्षा में सामाजिक सुरक्षा और कल्याण योजनाएँ स्वाभाविक विषय हैं, क्योंकि चयनित अधिकारी का काम ही सामाजिक सुरक्षा के ढाँचे के भीतर होता है । आयु-वर्ग पूछना इस प्रकार की योजनाओं पर प्रश्न बनाने का सबसे आज़माया हुआ तरीक़ा है, क्योंकि हर बड़ी योजना के भीतर कई उप-वर्ग होते हैं और उन्हें पूरे वर्ग से अलग पहचानना ही असली परीक्षा है । यहाँ चारों विकल्प इसी सिद्धांत पर बने हैं — दो विकल्प योजना के भीतर के वास्तविक उप-वर्ग हैं और एक विकल्प किसी दूसरी योजना का आयु-वर्ग । उत्तर वही है जो पूरे लाभार्थी-वर्ग को समेटता है । हिन्दी और अंग्रेज़ी दोनों स्तंभ यहाँ एक ही बात कहते हैं ; अंतर केवल इतना है कि हिन्दी में आयु-सीमाएँ मध्य रेखा के दोनों ओर रिक्ति के साथ छपी हैं ।
- एकीकृत बाल विकास सेवा योजना 2 अक्टूबर 1975 को आरंभ हुई थी और आज महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधीन है ; इसकी सेवाएँ आँगनवाड़ी केन्द्र के माध्यम से दी जाती हैं ।
- लाभार्थी दो श्रेणियों में हैं — 0 से 6 वर्ष तक के बच्चे, तथा गर्भवती महिलाएँ और धात्री माताएँ । प्रश्न केवल बच्चों की आयु पूछता है, इसलिए उत्तर 0 से 6 वर्ष है ।
- योजना की छह सेवाएँ : पूरक पोषाहार, विद्यालय-पूर्व अनौपचारिक शिक्षा, पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा, टीकाकरण, स्वास्थ्य जाँच और संदर्भ सेवाएँ ।
- इन छह में से टीकाकरण, स्वास्थ्य जाँच और संदर्भ सेवाएँ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ अभिसरण में दी जाती हैं ।
- भीतर के उप-वर्ग : तीन वर्ष से छोटे बच्चों को घर ले जाने वाला राशन मिलता है, जबकि तीन से छह वर्ष के बच्चे केन्द्र पर आकर पकाया हुआ भोजन और विद्यालय-पूर्व शिक्षा पाते हैं ।
- वर्ष 2021-22 से यह योजना 'सक्षम आँगनवाड़ी और पोषण 2·0' नामक छाता-कार्यक्रम के अंतर्गत पुनर्गठित की गई है, पर बच्चों की आयु-सीमा 0 से 6 वर्ष ही बनी हुई है ।
- योजना के भीतर के उप-वर्ग को पूरा लाभार्थी-वर्ग मान लेना । 0 से 3 और 3 से 6 दोनों इसी योजना के भीतर हैं, पर लाभार्थी-वर्ग दोनों को मिलाकर बनता है ।
- बच्चों के साथ गर्भवती और धात्री महिलाओं को भूल जाना । वे भी लाभार्थी हैं, यद्यपि यह प्रश्न केवल बच्चों की आयु पूछता है ।
- पूरक पोषाहार के आरंभ की आयु को लाभार्थी-वर्ग की आरंभिक आयु समझ लेना । लाभार्थी-वर्ग जन्म से गिना जाता है ।
- इसे विद्यालय जाने वाले बच्चों की योजना मान लेना । छह वर्ष के बाद का दायित्व पी एम पोषण जैसी दूसरी योजनाओं पर है ।
सरकारी योजनाओं पर प्रश्न प्रायः चार बिंदुओं में से किसी एक पर टिकते हैं — लाभार्थी कौन है, कौन-सा मंत्रालय चलाता है, कब आरंभ हुई, और उसमें क्या-क्या सम्मिलित नहीं है । आयु-वर्ग पूछना सबसे आम रूप है, क्योंकि उत्तर एक पंक्ति में जाँचा जा सकता है और भीतर के उप-वर्ग तैयार जाल दे देते हैं । दूसरा प्रचलित रूप कथन-आधारित होता है, जिसमें दो या तीन कथन देकर सही कथनों का चयन कराया जाता है । तीसरा रूप सुमेलन का है, जिसमें योजनाओं को उनके मंत्रालयों या लाभार्थियों से जोड़ना पड़ता है । तैयारी की सुरक्षित विधि यह है कि हर बड़ी योजना के लिए चार बातें एक साथ याद रखी जाएँ — आरंभ वर्ष, मंत्रालय, लाभार्थी की परिभाषा और सेवाओं की सूची — और साथ ही यह भी कि उसके ठीक पहले और ठीक बाद की आयु किस योजना के अधीन आती है, क्योंकि विकल्प प्रायः उन्हीं पड़ोसी योजनाओं से उठाए जाते हैं ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) योजना भारत में किस वर्ष आरंभ की गई थी ?
- (a)1971
- (b)1975
- (c)1985
- (d)1995
उत्तर(b) 1975 — यह योजना 2 अक्टूबर 1975 को आरंभ हुई थी और आज महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधीन आँगनवाड़ी केन्द्रों के माध्यम से चलती है ।
- practice — not a real PYQ
एकीकृत बाल विकास सेवा योजना के अंतर्गत विद्यालय-पूर्व अनौपचारिक शिक्षा किस आयु वर्ग के बच्चों को दी जाती है ?
- (a)जन्म से 6 माह तक
- (b)6 माह से 3 वर्ष तक
- (c)3 से 6 वर्ष तक
- (d)6 से 14 वर्ष तक
उत्तर(c) 3 से 6 वर्ष तक — यही वह उप-वर्ग है जो आँगनवाड़ी केन्द्र पर आकर विद्यालय-पूर्व शिक्षा और पकाया हुआ पूरक भोजन पाता है ; इससे छोटे बच्चों को घर ले जाने वाला राशन मिलता है ।