कोई व्यक्ति एक विशेष दिशा में 5 किलोमीटर चलता है और तब दक्षिण दिशा में 4 किलोमीटर चलता है । यदि वह जहाँ चलना समाप्त करता है, वह प्रारंभिक स्थान से पूर्व दिशा में है, तो वह प्रारंभिक स्थान से कितनी दूर है ?
- (a)2 किलोमीटर
- (b)3 किलोमीटर
- (c)4 किलोमीटर
- (d)5 किलोमीटर
सही उत्तर — B, (b) 3 किलोमीटर — इस प्रश्न में पहली दिशा बताई ही नहीं गई है ; वह अंत की शर्त से निकालनी पड़ती है, और यही इसकी असली परीक्षा है । प्रारंभिक स्थान को मूल बिंदु मानिए और पूर्व-पश्चिम को क्षैतिज तथा उत्तर-दक्षिण को ऊर्ध्व अक्ष मानिए । पहली यात्रा 5 किलोमीटर की है, किसी अज्ञात दिशा में ; उसे पूर्व की ओर x और उत्तर की ओर y घटकों में बाँट लीजिए, जहाँ x² + y² = 25 । दूसरी यात्रा ठीक 4 किलोमीटर दक्षिण की है, इसलिए वह उत्तर वाले घटक में से 4 घटा देती है और पूर्व वाले घटक को छूती भी नहीं । अंतिम स्थिति के घटक हुए (x, y − 4) । अब प्रश्न की अंतिम शर्त पढ़िए — वह प्रारंभिक स्थान से ठीक पूर्व दिशा में है । पूर्व दिशा का अर्थ है कि उत्तर-दक्षिण का घटक शून्य हो, इसलिए y − 4 = 0, यानी y = 4 । तब x² = 25 − 16 = 9 और x = 3 ; पूर्व में होने के कारण x धनात्मक है । अतः वह प्रारंभिक स्थान से 3 किलोमीटर की दूरी पर है । यह प्रसिद्ध 3-4-5 समकोण त्रिभुज है : पहली यात्रा 3 पूर्व और 4 उत्तर का कर्ण थी, दूसरी यात्रा ने उत्तर वाला 4 पूरी तरह काट दिया, और शेष रह गया 3 किलोमीटर पूर्व । चला वह कुल 9 किलोमीटर, पर विस्थापन केवल 3 किलोमीटर है ।
- (a)2 किलोमीटर — यदि अंतिम दूरी 2 किलोमीटर होती तो पहली यात्रा को 2 किलोमीटर पूर्व और 4 किलोमीटर उत्तर का कर्ण होना पड़ता, जिसकी लंबाई √(4 + 16) = √20 ≈ 4·47 किलोमीटर बनती है — प्रश्न में दी गई 5 किलोमीटर नहीं । यही एक जाँच तीनों ग़लत विकल्पों पर लगाई जा सकती है : अंतिम दूरी d हो तो पहली यात्रा √(d² + 16) होनी चाहिए, और वह 5 के बराबर तभी होती है जब d = 3 हो । 2 का आकर्षण केवल इतना है कि वह 5 और 4 के अंतर के आसपास दिखता है, पर यहाँ दोनों यात्राएँ एक ही सीधी रेखा पर नहीं हैं, इसलिए घटाव काम नहीं करता ।
- (c)4 किलोमीटर — 4 किलोमीटर वह संख्या है जो प्रश्न में पहले से मौजूद है — दक्षिण की यात्रा की लंबाई — और थके हुए पाठक की आँख उसी पर टिक जाती है । पर दक्षिण की यात्रा प्रारंभिक स्थान से दूरी नहीं बताती ; वह केवल उत्तर वाले घटक को काटती है । जाँच कीजिए : अंतिम दूरी 4 होने पर पहली यात्रा √(16 + 16) = √32 ≈ 5·66 किलोमीटर होनी चाहिए थी, जबकि प्रश्न 5 किलोमीटर कहता है । इस श्रेणी के प्रश्नों में दी हुई कोई संख्या उत्तर के रूप में दोहरा दी जाए, यह सबसे आम जाल है, और उससे बचने का उपाय हर बार आरेख बनाना है ।
- (d)5 किलोमीटर — 5 किलोमीटर तब उत्तर होता जब दूसरी यात्रा हुई ही न होती, या जब वह पहली यात्रा की दिशा में ही आगे बढ़ती । यहाँ दूसरी यात्रा दक्षिण की ओर है और वह पहली यात्रा के उत्तर वाले घटक को पूरी तरह मिटा देती है, इसलिए 5 किलोमीटर चलकर भी अंत में केवल 3 किलोमीटर की दूरी बचती है । यही चली गई दूरी और विस्थापन का भेद है : कुल चली गई दूरी 5 + 4 = 9 किलोमीटर है, विस्थापन 3 किलोमीटर । जाँच से भी यही निकलता है — अंतिम दूरी 5 मानने पर पहली यात्रा √(25 + 16) = √41 ≈ 6·40 किलोमीटर बननी चाहिए थी ।
दिशा-ज्ञान के प्रश्न वस्तुतः निर्देशांक ज्यामिति के प्रश्न हैं । चार मुख्य दिशाएँ दो लंबवत अक्ष बनाती हैं — पूर्व-पश्चिम क्षैतिज और उत्तर-दक्षिण ऊर्ध्व — इसलिए हर यात्रा को दो घटकों में तोड़ा जा सकता है और यात्राओं के घटक अलग-अलग जोड़े जा सकते हैं । अंतिम दूरी पाइथागोरस प्रमेय से निकलती है : यदि पूर्व की ओर कुल विस्थापन a और उत्तर की ओर b हो, तो प्रारंभिक स्थान से दूरी √(a² + b²) । दो बातें अलग-अलग समझनी चाहिए — 'कितना चला' (सभी यात्राओं की लंबाइयों का योग) और 'कितनी दूर है' (सीधी रेखा में विस्थापन) ; प्रश्न प्रायः दूसरी बात पूछता है । जब कोई यात्रा की दिशा न बताई गई हो, तो उसे अंत की शर्त से निकाला जाता है : 'ठीक पूर्व में है' का अर्थ है उत्तर-दक्षिण का शुद्ध घटक शून्य, और 'ठीक उत्तर में है' का अर्थ है पूर्व-पश्चिम का शुद्ध घटक शून्य । इन प्रश्नों में 3-4-5, 5-12-13 और 8-15-17 जैसे पूर्णांक त्रिक बार-बार लौटते हैं ।
यह भाग B के अंतिम संख्यात्मक खंड का पाँचवाँ और अंतिम प्रश्न है, और यह उस खंड का एकमात्र तार्किक विवेचन वाला प्रश्न है — शेष चार शुद्ध अंकगणित और क्षेत्रमिति के हैं । रचना की दृष्टि से यह सामान्य दिशा-प्रश्नों से एक क़दम आगे है : प्रायः प्रश्न हर मोड़ पर दिशा बता देता है और अभ्यर्थी को केवल आरेख खींचना होता है, जबकि यहाँ पहली यात्रा की दिशा जान-बूझकर छिपा दी गई है और उसे अंतिम शर्त से खोजना पड़ता है । इसीलिए इस प्रश्न को उल्टे सिरे से हल करना अधिक सरल है — पहले यह देखिए कि दक्षिण की 4 किलोमीटर की यात्रा को काटने के लिए पहली यात्रा में उत्तर की ओर ठीक 4 किलोमीटर होना ही चाहिए । संख्याएँ 5 और 4 चुनकर परीक्षक ने 3-4-5 त्रिक बुला लिया है, इसलिए गणना में वर्गमूल का कोई कष्ट नहीं । हिन्दी और अंग्रेज़ी दोनों स्तंभ यही प्रश्न पूछते हैं ; अंतर केवल इतना है कि हिन्दी विकल्पों में 'किलोमीटर' पूरा लिखा है और अंग्रेज़ी में 'km' संक्षेप में ।
- चार मुख्य दिशाएँ दो लंबवत अक्ष बनाती हैं, इसलिए हर यात्रा को पूर्व-पश्चिम और उत्तर-दक्षिण घटकों में तोड़कर अलग-अलग जोड़ा जा सकता है ; अंतिम दूरी √(a² + b²) होती है ।
- इस प्रश्न की शर्त : अंत में व्यक्ति ठीक पूर्व दिशा में है, इसलिए उत्तर-दक्षिण का शुद्ध घटक शून्य है, और इसीलिए पहली यात्रा का उत्तर वाला घटक ठीक 4 किलोमीटर होना चाहिए ।
- पहली यात्रा 5 किलोमीटर की है, जिसके घटक 3 पूर्व और 4 उत्तर हैं — यह प्रसिद्ध 3-4-5 समकोण त्रिभुज है, और 3² + 4² = 5² इसे सत्यापित करता है ।
- उत्तर 3 किलोमीटर है, जबकि कुल चली गई दूरी 5 + 4 = 9 किलोमीटर है । 'कितना चला' और 'कितनी दूर है' दो अलग राशियाँ हैं, और प्रश्न दूसरी वाली पूछता है ।
- सामान्य जाँच का सूत्र : अंतिम दूरी d हो तो पहली यात्रा की लंबाई √(d² + 4²) होनी चाहिए ; यह 5 के बराबर केवल d = 3 पर होती है, इसलिए हल अद्वितीय है ।
- इन प्रश्नों में लौटने वाले पूर्णांक त्रिक — 3-4-5, 6-8-10, 5-12-13 और 8-15-17 । संख्याएँ इनमें से किसी से मेल खाती दिखें तो वर्गमूल निकालने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती ।
- पहली यात्रा की दिशा का अनुमान लगा लेना । प्रश्न उसे 'एक विशेष दिशा' कहकर छोड़ देता है, और वह अंत की शर्त से निकलती है, कल्पना से नहीं ।
- 5 और 4 को एक ही सीधी रेखा पर मानकर घटा देना । दोनों यात्राएँ एक रेखा पर होतीं तभी 1 किलोमीटर मिलता ; यहाँ वे समकोण बनाती हैं ।
- प्रश्न में दी हुई कोई संख्या उत्तर के रूप में उठा लेना । 4 किलोमीटर दक्षिण की यात्रा की लंबाई है, प्रारंभिक स्थान से दूरी नहीं ।
- 'कितनी दूर है' को 'कितना चला' पढ़ लेना । कुल 9 किलोमीटर चलकर भी वह प्रारंभिक स्थान से केवल 3 किलोमीटर दूर है ।
दिशा-ज्ञान इस श्रेणी की परीक्षाओं में तीन रूपों में आता है । पहला और सबसे सामान्य — हर मोड़ की दिशा बता दी जाती है और अंत में प्रारंभिक स्थान से दूरी या दिशा पूछी जाती है ; इसमें केवल सावधानी से आरेख बनाना होता है । दूसरा, जो इस प्रश्न में है — किसी एक यात्रा की दिशा छिपा दी जाती है और अंतिम स्थिति की शर्त दे दी जाती है ; तब उल्टी दिशा में सोचना पड़ता है, अर्थात पहले यह तय कीजिए कि किस घटक को शून्य होना है । तीसरा — दो व्यक्ति अलग-अलग बिंदुओं से चलते हैं और उनके बीच की अंतिम दूरी पूछी जाती है । तीनों में विधि एक ही है : कागज़ पर उत्तर ऊपर और पूर्व दायीं ओर रखकर हर यात्रा को तीर से खींचिए, पूर्व-पश्चिम और उत्तर-दक्षिण के शुद्ध घटक अलग-अलग जोड़िए, और अंत में पाइथागोरस प्रमेय लगाइए । दायें-बायें मुड़ने वाले प्रश्नों में यह भी ध्यान रखिए कि मुड़ना सदा चलने वाले की अपनी दिशा के सापेक्ष होता है, मानचित्र के सापेक्ष नहीं ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
कोई व्यक्ति अपने घर से 4 किलोमीटर उत्तर दिशा में चलता है, फिर दायीं ओर मुड़कर 3 किलोमीटर चलता है । अब वह अपने घर से कितनी दूर है ?
- (a)3 किलोमीटर
- (b)4 किलोमीटर
- (c)5 किलोमीटर
- (d)7 किलोमीटर
उत्तर(c) 5 किलोमीटर — उत्तर की ओर मुख करके दायीं ओर मुड़ने पर वह पूर्व की ओर चलता है, इसलिए घटक 4 उत्तर और 3 पूर्व हैं और दूरी √(16 + 9) = 5 किलोमीटर । 7 किलोमीटर तब मिलता जब दोनों यात्राएँ एक ही सीधी रेखा पर होतीं ।
- practice — not a real PYQ
कोई व्यक्ति 10 किलोमीटर दक्षिण दिशा में चलता है, फिर 6 किलोमीटर पूर्व दिशा में और उसके बाद 10 किलोमीटर उत्तर दिशा में चलता है । वह अपने प्रारंभिक स्थान से कितनी दूर और किस दिशा में है ?
- (a)4 किलोमीटर पूर्व में
- (b)6 किलोमीटर पूर्व में
- (c)6 किलोमीटर पश्चिम में
- (d)16 किलोमीटर पूर्व में
उत्तर(b) 6 किलोमीटर पूर्व में — 10 किलोमीटर दक्षिण और 10 किलोमीटर उत्तर एक-दूसरे को पूरी तरह काट देते हैं, इसलिए केवल 6 किलोमीटर पूर्व का घटक बचता है । चली गई कुल दूरी 26 किलोमीटर है, पर विस्थापन 6 किलोमीटर ।