जिस व्यक्ति को चिकित्सा परीक्षा के बाद अनुपयुक्त घोषित कर दिया जाता है और जिसके लिए कोई वैकल्पिक नियोजन संभव नहीं है, उस व्यक्ति के लिए अशक्तता प्रतिकर का प्रावधान निम्नलिखित में से किस अधिनियम में है?
- (a)भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन तथा सेवाशर्त विनियमन) अधिनियम, 1996
- (b)कारखाना अधिनियम, 1948
- (c)खान अधिनियम, 1952
- (d)बागान श्रम अधिनियम, 1951
सही उत्तर — C, (c) खान अधिनियम, 1952 — इसकी धारा 9A में ठीक वही क्रम लिखा है जो प्रश्न में वर्णित है : चिकित्सा परीक्षा, अनुपयुक्त घोषित होना, वैकल्पिक नियोजन, और वैकल्पिक नियोजन संभव न हो तो अशक्तता प्रतिकर। पहला क़दम — उपबंध को क्रम से पढ़िए, क्योंकि प्रश्न उसी क्रम की एक कड़ी पर टिका है। धारा 9A खानों में नियोजित या नियोजन चाहने वाले व्यक्तियों की चिकित्सा परीक्षा की व्यवस्था करती है — आरंभिक परीक्षा और समय-समय पर होने वाली परीक्षा दोनों। यदि परीक्षा में कोई व्यक्ति अनुपयुक्त पाया जाता है तो उसे खान के स्वामी, अभिकर्ता और प्रबंधक के व्यय पर चिकित्सा उपचार दिलाया जाता है, और उस अवधि में उसे पूरी मजदूरी मिलती रहती है। दूसरा क़दम — निर्णायक उपधारा पर आइए। यदि उपचार के बाद भी वह व्यक्ति उस कर्तव्य के लिए चिकित्सकीय रूप से अनुपयुक्त घोषित कर दिया जाए जिसे वह परीक्षा से ठीक पहले कर रहा था, और उसकी यह अनुपयुक्तता उसके खान में नियोजन से सीधे जुड़ी हो, तो स्वामी, अभिकर्ता और प्रबंधक का पहला दायित्व यह है कि वे उसे खान में ऐसा वैकल्पिक नियोजन दें जिसके लिए वह चिकित्सकीय रूप से उपयुक्त हो। इसी उपधारा के साथ दो परंतुक जुड़े हैं, और प्रश्न उन्हीं में से पहले-दूसरे की स्थिति का वर्णन करता है : जहाँ ऐसा कोई वैकल्पिक नियोजन तत्काल उपलब्ध न हो, वहाँ उसे निर्धारित दर से अशक्तता भत्ता देना होगा; और जहाँ वह व्यक्ति खान की नौकरी छोड़ने का निर्णय करे, वहाँ उसे निर्धारित दर से एकमुश्त राशि अशक्तता प्रतिकर के रूप में देनी होगी। इन दरों को तय करते समय कर्मचारियों की मासिक मजदूरी, अशक्तता की प्रकृति तथा अन्य संगत बातें ध्यान में रखी जाती हैं। तीसरा क़दम — इस उपबंध की विशेषता पहचानिए, क्योंकि वही इसे शेष तीनों विधियों से अलग करती है। यहाँ प्रतिकर किसी बीमा निधि या कल्याण बोर्ड से नहीं आता — दायित्व सीधे खान के स्वामी, अभिकर्ता और प्रबंधक पर रखा गया है; और वह किसी दुर्घटना पर नहीं, चिकित्सा परीक्षा के परिणाम पर सक्रिय होता है। खनन के धूल-जन्य रोग वर्षों में पनपते हैं और किसी एक दिन की घटना से नहीं जुड़ते, इसलिए विधायिका ने यहाँ आवधिक परीक्षा को ही वह द्वार बनाया जिससे उपचार, पुनर्नियोजन और प्रतिकर तीनों का अधिकार खुलता है। चौथा क़दम — प्रक्रिया का एक सिरा नियमों में भी है। खान नियम, 1955 के अधीन चिकित्सा परीक्षा और अनुपयुक्त घोषित किए गए व्यक्ति की अपील की व्यवस्था है : वह प्रमाणपत्र मिलने से तीस दिन के भीतर पुनर्परीक्षा के लिए अपीलीय चिकित्सा बोर्ड के समक्ष अपील कर सकता है।
- (a)भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन तथा सेवाशर्त विनियमन) अधिनियम, 1996 — भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम, 1996 सन्निर्माण कर्मकारों के नियोजन तथा सेवा-शर्तों का विनियमन करता है और उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य तथा कल्याण के उपाय करता है — स्थापनों का पंजीकरण, कर्मकारों का लाभार्थी के रूप में पंजीकरण, और राज्य कल्याण बोर्डों का गठन इसके मुख्य अंग हैं। इन बोर्डों के पास जो निधि रहती है वह उसी वर्ष की उपकर विधि से जुटाई जाती है, और उसी में से पात्र कर्मकारों को अनेक कल्याणकारी लाभ दिए जाते हैं। किंतु प्रश्न जिस विशेष क्रम का वर्णन करता है — चिकित्सा परीक्षा में अनुपयुक्त घोषित होना, फिर नियोजक का उसी स्थापन में वैकल्पिक काम देने का दायित्व, और वह संभव न हो तो नियोजक द्वारा ही अशक्तता प्रतिकर — वह इस अधिनियम की योजना नहीं है। यहाँ लाभ कल्याण निधि से आते हैं और उनकी पात्रता बोर्ड के नियमों से तय होती है, जबकि कुंजी वाले अधिनियम में दायित्व सीधे स्वामी, अभिकर्ता और प्रबंधक पर पड़ता है।
- (b)कारखाना अधिनियम, 1948 — कारखाना अधिनियम, 1948 स्वास्थ्य, सुरक्षा, कल्याण, काम के घंटे, अवकाश तथा किशोर एवं महिला कर्मकारों से जुड़े उपबंध देता है, और परिसंकटमय प्रक्रियाओं वाले अध्याय में उसने कर्मकारों की चिकित्सा परीक्षा की व्यवस्था भी की है — ऐसे काम पर लगाने से पहले, काम के दौरान और उसे छोड़ने के बाद, नियत अंतरालों पर। इसी कारण यह विकल्प सबसे भरोसेमंद लगता है : चिकित्सा परीक्षा का उल्लेख यहाँ भी है। पर वह परीक्षा जोखिम की निगरानी के लिए है; अनुपयुक्त पाए जाने पर वैकल्पिक नियोजन देने और उसके अभाव में अशक्तता प्रतिकर चुकाने का दायित्व इस अधिनियम में नहीं रखा गया। कारखानों में उपार्जित क्षति या व्यावसायिक रोग के लिए प्रतिकार का रास्ता अलग विधियों से जाता है — कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम, 1923 और कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 — जो इस प्रश्न के विकल्पों में हैं ही नहीं। यही भेद इस विकल्प को बाहर करता है।
- (d)बागान श्रम अधिनियम, 1951 — बागान श्रम अधिनियम, 1951 बागानों में काम करने वालों के कल्याण पर केंद्रित है : पीने का पानी, शौच तथा सफ़ाई की व्यवस्था, चिकित्सा सुविधाएँ, कैंटीन, शिशु-गृह, मनोरंजन की सुविधाएँ, आवास, तथा काम के घंटे, साप्ताहिक अवकाश और बीमारी एवं प्रसूति संबंधी लाभ। इसमें चिकित्सा सुविधा का उल्लेख होने से यह विकल्प भी पहली दृष्टि में संभव लगता है, पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना और चिकित्सा परीक्षा के परिणाम पर अशक्तता प्रतिकर का अधिकार देना दो अलग बातें हैं। पहली सेवा है, दूसरी वैधानिक हक़। इस अधिनियम में वह दूसरी बात नहीं है। ऐसे प्रश्नों में छाँटने का सबसे सुरक्षित तरीक़ा यह पूछना है कि जिस उद्योग की बात हो रही है उसका विशिष्ट जोखिम क्या है और विधायिका ने उसी जोखिम के लिए कौन-सा विशेष उपबंध बनाया है; खनन का विशिष्ट जोखिम धूल-जन्य और दीर्घकालिक है, और उसी के लिए आवधिक परीक्षा से जुड़ा यह उपबंध बना।
खान अधिनियम, 1952 खानों में काम करने वालों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण के लिए बना है और उसका प्रवर्तन खान सुरक्षा महानिदेशालय करता है। इसमें निरीक्षकों की नियुक्ति, खान समितियों, काम के घंटों, विश्राम और अवकाश, तथा दुर्घटनाओं की सूचना जैसे उपबंधों के साथ एक विशेष उपबंध चिकित्सा परीक्षा का है। धारा 9A के अधीन खानों में नियोजित या नियोजन चाहने वाले व्यक्तियों की आरंभिक तथा आवधिक चिकित्सा परीक्षा की व्यवस्था की जाती है, और उसका पूरा तर्क इस उद्योग के विशिष्ट जोखिम से निकलता है : खनन के अनेक रोग वर्षों में धूल के साँस में जाने से पनपते हैं, वे किसी एक दुर्घटना की तरह दिखाई नहीं देते, इसलिए उन्हें पकड़ने का एकमात्र रास्ता समय-समय पर होने वाली जाँच है। उसी धारा में जाँच के परिणामों के साथ अधिकार भी जोड़ दिए गए हैं — अनुपयुक्त पाए जाने पर स्वामी, अभिकर्ता तथा प्रबंधक के व्यय पर उपचार और उस अवधि में पूरी मजदूरी; उपचार के बाद भी अनुपयुक्तता बनी रहे और वह नियोजन से सीधे जुड़ी हो तो खान में वैकल्पिक नियोजन; वैकल्पिक नियोजन तत्काल उपलब्ध न हो तो निर्धारित दर से अशक्तता भत्ता; और व्यक्ति नौकरी छोड़ने का निर्णय करे तो निर्धारित दर से एकमुश्त अशक्तता प्रतिकर। दरें तय करते समय मासिक मजदूरी, अशक्तता की प्रकृति और अन्य संगत बातें देखी जाती हैं। खान नियम, 1955 इसी की प्रक्रिया देते हैं, जिसमें अनुपयुक्त घोषित व्यक्ति के लिए प्रमाणपत्र मिलने से तीस दिन के भीतर अपीलीय चिकित्सा बोर्ड से पुनर्परीक्षा माँगने का अधिकार भी है।
श्रम विधियों के इस परिवार में प्रश्न प्रायः यही रूप लेता है : किसी उपबंध का वर्णन देकर पूछना कि वह किस अधिनियम में है। ऐसे प्रश्न में विकल्प जान-बूझकर एक ही परिवार के चुने जाते हैं — यहाँ चारों उद्योग-विशिष्ट श्रम विधियाँ हैं और चारों में स्वास्थ्य या चिकित्सा से जुड़े उपबंध हैं — ताकि केवल ‘इसमें चिकित्सा की बात है’ जान लेना पर्याप्त न रहे। छाँटने का भरोसेमंद तरीक़ा यह पूछना है कि जिस उद्योग के लिए विधि बनी है उसका विशिष्ट जोखिम क्या है, और क्या यह उपबंध उसी जोखिम का उत्तर है। खनन का विशिष्ट जोखिम धीरे-धीरे पनपने वाला और नियोजन से सीधे जुड़ा हुआ है, इसलिए वहाँ आवधिक परीक्षा और उससे बँधे अधिकार स्वाभाविक हैं; कारखानों में परीक्षा तो है पर वह जोखिम की निगरानी तक सीमित है; बागान और सन्निर्माण की विधियाँ कल्याणकारी सेवाओं और कल्याण निधि के इर्द-गिर्द बनी हैं। दूसरी बात, इस उपबंध की सबसे विशिष्ट बात यह है कि दायित्व सीधे नियोजक पर है, किसी बीमा निकाय या बोर्ड पर नहीं — और यही तुलना इसी प्रश्नपत्र के दूसरे प्रश्नों के साथ पढ़ने योग्य है, जहाँ अशक्तता का प्रश्न चिकित्सा बोर्ड तय करता है और प्रतिकर बीमा तंत्र से आता है। तीसरी बात, ऐसे प्रश्नों में धारा-संख्या याद रखना अतिरिक्त लाभ देता है, क्योंकि अगला प्रश्न प्रायः वही संख्या पूछ लेता है।
- खान अधिनियम, 1952 की धारा 9A खानों में नियोजित या नियोजन चाहने वाले व्यक्तियों की आरंभिक तथा आवधिक चिकित्सा परीक्षा की व्यवस्था करती है।
- अनुपयुक्त पाए जाने पर व्यक्ति को खान के स्वामी, अभिकर्ता और प्रबंधक के व्यय पर चिकित्सा उपचार दिलाया जाता है और उस अवधि में उसे पूरी मजदूरी मिलती है।
- उपचार के बाद भी यदि वह अपने पूर्व कर्तव्य के लिए अनुपयुक्त घोषित हो और अनुपयुक्तता उसके खान में नियोजन से सीधे जुड़ी हो, तो स्वामी, अभिकर्ता और प्रबंधक को उसे खान में ऐसा वैकल्पिक नियोजन देना होगा जिसके लिए वह चिकित्सकीय रूप से उपयुक्त हो।
- जहाँ ऐसा वैकल्पिक नियोजन तत्काल उपलब्ध न हो, वहाँ निर्धारित दर से अशक्तता भत्ता देय होता है; और जहाँ वह व्यक्ति नौकरी छोड़ने का निर्णय करे, वहाँ निर्धारित दर से एकमुश्त राशि अशक्तता प्रतिकर के रूप में देय होती है।
- इन दरों का निर्धारण कर्मचारियों की मासिक मजदूरी, अशक्तता की प्रकृति तथा अन्य संगत बातों को ध्यान में रखकर किया जाता है।
- इस उपबंध की विशिष्टता यह है कि दायित्व सीधे खान के स्वामी, अभिकर्ता और प्रबंधक पर है, किसी बीमा निधि या कल्याण बोर्ड पर नहीं, और वह किसी दुर्घटना से नहीं, चिकित्सा परीक्षा के परिणाम से सक्रिय होता है।
- खान नियम, 1955 के अधीन अनुपयुक्त घोषित व्यक्ति प्रमाणपत्र मिलने से तीस दिन के भीतर अपीलीय चिकित्सा बोर्ड से पुनर्परीक्षा के लिए अपील कर सकता है; अधिनियम का प्रवर्तन खान सुरक्षा महानिदेशालय करता है।
- ‘चिकित्सा परीक्षा’ शब्द देखकर कारखाना अधिनियम चुन लेना; वहाँ परीक्षा जोखिम की निगरानी के लिए है, अशक्तता प्रतिकर का अधिकार उससे नहीं जुड़ता।
- कल्याण बोर्ड से मिलने वाले लाभ और नियोजक पर पड़ने वाले वैधानिक दायित्व को एक मान लेना; इस उपबंध में दायित्व सीधे स्वामी, अभिकर्ता और प्रबंधक पर है।
- इस उपबंध को दुर्घटना-आधारित प्रतिकर समझ लेना; यह चिकित्सा परीक्षा के परिणाम पर सक्रिय होता है, किसी एक घटना पर नहीं।
- वैकल्पिक नियोजन वाले पहले दायित्व को छोड़कर सीधे प्रतिकर पर पहुँच जाना; क्रम में पहले उपचार, फिर वैकल्पिक नियोजन, फिर भत्ता या एकमुश्त प्रतिकर आता है।
- अशक्तता भत्ता और एकमुश्त अशक्तता प्रतिकर को एक मान लेना; पहला तब देय है जब वैकल्पिक नियोजन तत्काल उपलब्ध न हो, और दूसरा तब जब व्यक्ति नौकरी छोड़ने का निर्णय करे।
उद्योग-विशिष्ट श्रम विधियाँ इस प्रश्नपत्र में हर वर्ष आती हैं और उनसे प्रश्न तीन रूप लेते हैं। पहला रूप यही है — किसी उपबंध का वर्णन देकर पूछना कि वह किस अधिनियम में है, जहाँ चारों विकल्प एक ही परिवार की विधियाँ होती हैं। दूसरा रूप उलटा है : अधिनियम का नाम देकर उसका कोई विशिष्ट उपबंध, प्राधिकारी या समय-सीमा पूछना, जैसा इसी प्रश्नपत्र में खान अधिनियम के एक और प्रश्न में किया गया है। तीसरा रूप संख्यात्मक है — कितने दिन की सूचना, कितने वर्ष का अभिलेख, कितने कर्मकारों पर अधिनियम लागू होता है। तीनों की तैयारी के लिए एक तालिका सबसे उपयोगी है जिसमें अधिनियम का नाम और वर्ष, वह किस उद्योग या वर्ग पर लागू होता है, उसका प्रवर्तन कौन करता है, और उसके दो-तीन विशिष्ट उपबंध लिखे हों। विशिष्ट उपबंध वही चुनिए जो उस उद्योग के अपने जोखिम से जुड़े हों, क्योंकि परीक्षा प्रायः उन्हीं पर प्रश्न बनाती है।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
खान अधिनियम, 1952 की किस धारा में खानों में नियोजित या नियोजन चाहने वाले व्यक्तियों की चिकित्सा परीक्षा तथा अनुपयुक्त पाए जाने पर वैकल्पिक नियोजन और अशक्तता प्रतिकर का उपबंध है?
- (a)धारा 9
- (b)धारा 9A
- (c)धारा 16
- (d)धारा 22
उत्तर(b) धारा 9A — यही धारा आरंभिक तथा आवधिक चिकित्सा परीक्षा की व्यवस्था करती है और उसी के साथ उपचार, वैकल्पिक नियोजन, अशक्तता भत्ता तथा एकमुश्त अशक्तता प्रतिकर के उपबंध जुड़े हैं।
- practice — not a real PYQ
खान अधिनियम, 1952 के अधीन जब कोई व्यक्ति उपचार के बाद भी अपने पूर्व कर्तव्य के लिए चिकित्सकीय रूप से अनुपयुक्त घोषित हो और उसकी अनुपयुक्तता खान में उसके नियोजन से सीधे जुड़ी हो, तो स्वामी, अभिकर्ता तथा प्रबंधक का प्रथम दायित्व क्या है?
- (a)उसकी सेवा तत्काल समाप्त कर देना
- (b)उसे खान में ऐसा वैकल्पिक नियोजन देना जिसके लिए वह चिकित्सकीय रूप से उपयुक्त हो
- (c)उसे तुरंत एकमुश्त प्रतिकर देकर विदा कर देना
- (d)उसका मामला किसी बीमा निकाय को सौंप देना
उत्तर(b) उसे खान में ऐसा वैकल्पिक नियोजन देना जिसके लिए वह चिकित्सकीय रूप से उपयुक्त हो — यही पहला दायित्व है; अशक्तता भत्ता तब देय होता है जब ऐसा नियोजन तत्काल उपलब्ध न हो, और एकमुश्त अशक्तता प्रतिकर तब, जब वह व्यक्ति स्वयं नौकरी छोड़ने का निर्णय करे।