भारत के संविधान का निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद, कारखाने या खान या किसी अन्य परिसंकटमय नियोजन में बालकों के नियोजन को प्रतिषिद्ध करता है?
- (a)अनुच्छेद 19
- (b)अनुच्छेद 21
- (c)अनुच्छेद 23
- (d)अनुच्छेद 24
सही उत्तर — D, (d) अनुच्छेद 24 — यही वह अनुच्छेद है जो कहता है कि चौदह वर्ष से कम आयु के किसी बालक को किसी कारखाने या खान में काम पर नहीं लगाया जाएगा और न ही किसी अन्य परिसंकटमय नियोजन में लगाया जाएगा। पहला क़दम — अनुच्छेद का पाठ पहचानिए, क्योंकि प्रश्न लगभग उसी की भाषा दोहरा रहा है। अनुच्छेद 24 का शीर्षक ही ‘कारखानों आदि में बालकों के नियोजन का प्रतिषेध’ है, और उसमें तीन बातें एक साथ हैं : आयु की सीमा चौदह वर्ष, तीन प्रकार के स्थान — कारखाना, खान और कोई अन्य परिसंकटमय नियोजन, और प्रतिषेध का निरपेक्ष होना। इस अनुच्छेद में कोई अपवाद-खंड नहीं है और न ही कोई ‘युक्तियुक्त निर्बंधन’ वाला उपबंध, जैसा मूल अधिकारों के कुछ दूसरे अनुच्छेदों में मिलता है। दूसरा क़दम — उसकी जगह देखिए। अनुच्छेद 23 और 24 मिलकर भाग III का वह उपशीर्षक बनाते हैं जिसे ‘शोषण के विरुद्ध अधिकार’ कहा जाता है। इन दोनों की एक विशेषता यह है कि ये केवल राज्य के विरुद्ध नहीं, निजी व्यक्तियों के विरुद्ध भी प्रवर्तनीय हैं — अर्थात् कोई निजी कारखाना-मालिक भी इनका उल्लंघन कर सकता है और उसके विरुद्ध यह अधिकार सीधे काम आता है। यही बात इन्हें उन मूल अधिकारों से अलग करती है जो केवल राज्य की कार्रवाई पर लगते हैं। तीसरा क़दम — विधायी अनुवर्तन जान लीजिए, क्योंकि प्रश्न उसी पर भी बनते हैं। इस अनुच्छेद को व्यवहार में उतारने वाली मुख्य विधि बाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 है, जिसे 2016 में संशोधित किया गया। संशोधन के बाद चौदह वर्ष से कम आयु के बालक का नियोजन सभी व्यवसायों तथा प्रक्रियाओं में प्रतिषिद्ध है, कुछ सीमित छूटों को छोड़कर, जैसे विद्यालय के समय के बाद परिवार के अपने उद्यम में सहायता करना; और चौदह से अठारह वर्ष के बीच के व्यक्ति के लिए ‘किशोर’ की नई श्रेणी बनाई गई, जिसे परिसंकटमय व्यवसायों तथा प्रक्रियाओं में नहीं लगाया जा सकता। कारखाना अधिनियम, 1948 और खान अधिनियम, 1952 भी अपनी-अपनी न्यूनतम आयु-सीमाएँ रखते हैं। चौथा क़दम — इस अनुच्छेद के आसपास के उपबंध भी साथ में याद रखिए, क्योंकि वे एक ही विषय के अलग-अलग सिरे हैं। अनुच्छेद 21-क छह से चौदह वर्ष के बालकों को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का मूल अधिकार देता है, जो 86वें संविधान संशोधन से जोड़ा गया; अनुच्छेद 39 के खंड यह निदेश देते हैं कि बालकों की कोमल आयु का दुरुपयोग न हो और उन्हें स्वस्थ रूप से विकसित होने के अवसर मिलें; और अनुच्छेद 51-क का एक खंड माता-पिता या संरक्षक का यह कर्तव्य बताता है कि वे छह से चौदह वर्ष के अपने बालक को शिक्षा का अवसर दें। शिक्षा की आयु-सीमा और बाल श्रम की आयु-सीमा दोनों चौदह वर्ष पर मिलती हैं, और यही मेल इस पूरे समूह को एक सूत्र में बाँधता है।
- (a)अनुच्छेद 19 — अनुच्छेद 19 नागरिकों को कुछ स्वतंत्रताएँ देता है — वाक् एवं अभिव्यक्ति की, शांतिपूर्वक और निरायुध सम्मेलन की, संगम या संघ बनाने की, पूरे भारत में अबाध संचरण की, किसी भी भाग में निवास तथा बसने की, और कोई भी वृत्ति, उपजीविका, व्यापार या कारोबार करने की। इनमें से हर स्वतंत्रता पर राज्य युक्तियुक्त निर्बंधन लगा सकता है, और ये केवल नागरिकों को उपलब्ध हैं। इस अनुच्छेद का बाल नियोजन से कोई सीधा संबंध नहीं है। एक बात ध्यान देने योग्य है : इसमें एक स्वतंत्रता वृत्ति या कारोबार की भी है, इसलिए कुछ अभ्यर्थी उसे रोज़गार से जोड़कर यहाँ पहुँच जाते हैं; पर वह उपबंध व्यक्ति के अपने व्यवसाय चुनने की स्वतंत्रता के बारे में है, किसी और को काम पर लगाने के प्रतिषेध के बारे में नहीं। संपत्ति का अधिकार इसी अनुच्छेद से 44वें संविधान संशोधन द्वारा हटाया गया था, जो अलग से पूछा जाता है।
- (b)अनुच्छेद 21 — अनुच्छेद 21 कहता है कि किसी व्यक्ति को उसके प्राण या दैहिक स्वतंत्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जाएगा, अन्यथा नहीं, और यह अधिकार नागरिकों तथा ग़ैर-नागरिकों दोनों को प्राप्त है। न्यायिक व्याख्या ने इसका दायरा बहुत विस्तृत किया है — गरिमा के साथ जीवन, स्वच्छ पर्यावरण, स्वास्थ्य, आजीविका और शिक्षा जैसे अनेक अधिकार इसी से निकाले गए हैं — और इसीलिए यह विकल्प ललचाता है : बाल श्रम स्पष्ट रूप से बालक के जीवन और विकास को क्षति पहुँचाता है, इसलिए लगता है कि उत्तर यहीं होगा। पर प्रश्न यह पूछ रहा है कि कौन-सा अनुच्छेद कारखाने, खान या परिसंकटमय नियोजन में बालकों के नियोजन का प्रतिषेध करता है, और वह प्रतिषेध संविधान में अलग से, स्पष्ट शब्दों में लिखा हुआ है। जब कोई बात संविधान में सीधे लिखी हो, तब व्याख्या से निकाला गया अधिकार उत्तर नहीं बनता। शिक्षा वाला उपबंध भी अनुच्छेद 21 में नहीं, अलग जोड़े गए अनुच्छेद 21-क में है।
- (c)अनुच्छेद 23 — यह इस प्रश्न का सबसे निकट का पड़ोसी है और इसीलिए सबसे ख़तरनाक। अनुच्छेद 23 मानव के दुर्व्यापार, बेगार तथा उसी प्रकार के अन्य बलात् श्रम का प्रतिषेध करता है और उसका उल्लंघन दंडनीय अपराध बनाता है; साथ ही वह राज्य को यह छूट देता है कि वह सार्वजनिक प्रयोजनों के लिए अनिवार्य सेवा लागू कर सके, बशर्ते उसमें केवल धर्म, मूलवंश, जाति या वर्ग के आधार पर भेदभाव न हो। यह अनुच्छेद 24 के ठीक पहले आता है और दोनों मिलकर ‘शोषण के विरुद्ध अधिकार’ बनाते हैं, इसलिए विषय एक ही परिवार का लगता है। भेद यह है कि अनुच्छेद 23 श्रम की प्रकृति देखता है — क्या वह बलात् है, क्या उसका कोई उचित प्रतिफल मिल रहा है — जबकि अनुच्छेद 24 काम करने वाले की आयु देखता है। उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय ने अनुच्छेद 23 के अंतर्गत यह भी माना है कि न्यूनतम मजदूरी से कम पर काम कराना बलात् श्रम के समान है; पर वह विस्तार भी आयु के बारे में कुछ नहीं कहता, और इस प्रश्न की पूछ आयु तथा स्थान की है।
‘शोषण के विरुद्ध अधिकार’ भाग III के दो अनुच्छेदों से बना है। अनुच्छेद 23 मानव के दुर्व्यापार, बेगार और उसी प्रकार के बलात् श्रम का प्रतिषेध करता है और उन्हें विधि द्वारा दंडनीय बनाता है, यद्यपि राज्य सार्वजनिक प्रयोजनों के लिए अनिवार्य सेवा लागू कर सकता है बशर्ते उसमें केवल धर्म, मूलवंश, जाति या वर्ग के आधार पर भेदभाव न हो। अनुच्छेद 24 चौदह वर्ष से कम आयु के बालकों के कारखाने, खान या किसी अन्य परिसंकटमय नियोजन में काम पर लगाने का प्रतिषेध करता है। इन दोनों की दो विशेषताएँ अलग से याद रखने योग्य हैं : ये निजी व्यक्तियों के विरुद्ध भी प्रवर्तनीय हैं, और इनमें कोई युक्तियुक्त निर्बंधन वाला खंड नहीं है। इनके चारों ओर संविधान में बालकों से जुड़े और भी उपबंध हैं। अनुच्छेद 21-क, जो 86वें संविधान संशोधन से जोड़ा गया, छह से चौदह वर्ष के बालकों को नि:शुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा का मूल अधिकार देता है; अनुच्छेद 39 के खंड राज्य को यह निदेश देते हैं कि बालकों तथा श्रमिकों की कोमल आयु का दुरुपयोग न हो और नागरिक आर्थिक आवश्यकता से ऐसे कामों में जाने को विवश न हों जो उनकी आयु या शक्ति के अनुकूल न हों; अनुच्छेद 45 छह वर्ष से कम आयु के बालकों की प्रारंभिक देखभाल तथा शिक्षा की बात करता है; और अनुच्छेद 51-क का एक खंड माता-पिता या संरक्षक पर यह मूल कर्तव्य डालता है कि वे छह से चौदह वर्ष के अपने बालक को शिक्षा का अवसर दें। विधायी स्तर पर मुख्य विधि बाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 है, जिसका 2016 का संशोधन चौदह वर्ष से कम आयु के बालक के नियोजन को सभी व्यवसायों में प्रतिषिद्ध करता है और चौदह से अठारह वर्ष के लिए ‘किशोर’ की श्रेणी बनाकर उन्हें परिसंकटमय व्यवसायों से बाहर रखता है।
इस प्रश्न को हल करने का सबसे सुरक्षित तरीक़ा यह है कि अनुच्छेदों को उनके शीर्षक के साथ याद रखा जाए, केवल विषय के साथ नहीं। अनुच्छेद 24 का शीर्षक ही ‘कारखानों आदि में बालकों के नियोजन का प्रतिषेध’ है, इसलिए प्रश्न का पाठ पढ़ते ही वह शीर्षक सामने आ जाना चाहिए। दूसरी बात, इस प्रश्न में जो जाल है वह विषय की निकटता का है : तीनों असत्य विकल्प भी मूल अधिकारों के अनुच्छेद हैं और उनमें से एक तो अनुच्छेद 24 का सीधा पड़ोसी है तथा उसी उपशीर्षक में आता है। ऐसे मामलों में भेद करने का नियम यह है कि देखा जाए कि प्रश्न किस बात पर टिका है — यहाँ आयु और स्थान पर, इसलिए वह अनुच्छेद चाहिए जो आयु और स्थान दोनों का नाम लेता है। तीसरी बात, बालकों से जुड़े संविधान के उपबंधों को एक समूह में पढ़ लीजिए — अनुच्छेद 21-क, 24, 39 के संबंधित खंड, 45 और 51-क का संबंधित खंड — क्योंकि परीक्षा प्रायः इन्हीं को आपस में बदलकर पूछती है, और चौदह वर्ष की आयु दो जगह आने से भ्रम और बढ़ जाता है। चौथी बात, संविधान के उपबंध के साथ उसकी अनुवर्ती विधि भी याद रखिए, क्योंकि इस प्रश्नपत्र में श्रम विधियाँ और सांविधानिक उपबंध साथ-साथ पूछे जाते हैं।
- अनुच्छेद 24 चौदह वर्ष से कम आयु के किसी भी बालक को कारखाने, खान या किसी अन्य परिसंकटमय नियोजन में काम पर लगाने का प्रतिषेध करता है; उसका शीर्षक ही ‘कारखानों आदि में बालकों के नियोजन का प्रतिषेध’ है।
- अनुच्छेद 23 और 24 मिलकर भाग III का ‘शोषण के विरुद्ध अधिकार’ बनाते हैं, और दोनों निजी व्यक्तियों के विरुद्ध भी प्रवर्तनीय हैं।
- अनुच्छेद 23 मानव के दुर्व्यापार, बेगार तथा उसी प्रकार के बलात् श्रम का प्रतिषेध करता है; वह श्रम की प्रकृति देखता है, जबकि अनुच्छेद 24 काम करने वाले की आयु।
- अनुच्छेद 24 में कोई अपवाद-खंड या युक्तियुक्त निर्बंधन वाला उपबंध नहीं है, इसलिए यह प्रतिषेध निरपेक्ष है।
- इसकी मुख्य अनुवर्ती विधि बाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 है; 2016 के संशोधन के बाद चौदह वर्ष से कम आयु के बालक का नियोजन सभी व्यवसायों तथा प्रक्रियाओं में प्रतिषिद्ध है, कुछ सीमित छूटों को छोड़कर।
- उसी संशोधन ने चौदह से अठारह वर्ष के व्यक्ति के लिए ‘किशोर’ की श्रेणी बनाई, जिसे परिसंकटमय व्यवसायों तथा प्रक्रियाओं में नियोजित नहीं किया जा सकता।
- बालकों से जुड़े अन्य उपबंध : अनुच्छेद 21-क (86वें संशोधन से जोड़ा गया, छह से चौदह वर्ष के बालकों को नि:शुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा), अनुच्छेद 39 के संबंधित खंड, अनुच्छेद 45, और अनुच्छेद 51-क का शिक्षा से जुड़ा मूल कर्तव्य।
- अनुच्छेद 23 और 24 को आपस में बदल देना; दोनों एक ही उपशीर्षक में हैं, पर 23 श्रम की प्रकृति देखता है और 24 आयु।
- अनुच्छेद 21 की विस्तृत न्यायिक व्याख्या के भरोसे उसे उत्तर मान लेना; जब प्रतिषेध संविधान में सीधे लिखा हो, तब व्याख्या से निकाला गया अधिकार उत्तर नहीं बनता।
- शिक्षा वाले उपबंध को अनुच्छेद 21 में ढूँढ़ना; वह अलग जोड़े गए अनुच्छेद 21-क में है।
- अनुच्छेद 24 में कोई अपवाद मान लेना; उसका प्रतिषेध निरपेक्ष है और उसमें युक्तियुक्त निर्बंधन वाला कोई खंड नहीं।
- चौदह वर्ष की आयु दो जगह आने से भ्रमित हो जाना; वह बाल नियोजन के प्रतिषेध की ऊपरी सीमा भी है और नि:शुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा के अधिकार की ऊपरी सीमा भी।
संविधान के अनुच्छेदों से इस प्रश्नपत्र में लगातार प्रश्न आते हैं और वे तीन रूप लेते हैं। पहला रूप यही है — किसी उपबंध का विषय बताकर अनुच्छेद पूछना, या उलटकर अनुच्छेद देकर विषय पूछना, जैसा इसी प्रश्नपत्र में अनुच्छेद 43 पर किया गया है। दूसरा रूप समूह का है : किसी अध्याय या उपशीर्षक के अनुच्छेदों को सुमेलित करना, या यह पूछना कि कोई अनुच्छेद किस भाग में आता है। तीसरा रूप कथन-आधारित है, जिसमें किसी अनुच्छेद की परिधि, अपवाद या न्यायिक व्याख्या पर दो-तीन कथन रखकर कूट माँगा जाता है। तीनों की तैयारी के लिए श्रम, बालक और शोषण से जुड़े अनुच्छेदों की एक सूची अपने शीर्षक के साथ बना लेना सबसे कारगर है — 14 से 18, 21-क, 23, 24, 39, 41, 42, 43, 43-क और 51-क — और उनके सामने एक-एक पंक्ति में विषय लिखा हो। शीर्षक याद रहने पर ऐसे प्रश्न कुछ ही क्षणों में हल हो जाते हैं।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
भारत के संविधान का कौन-सा अनुच्छेद मानव के दुर्व्यापार तथा बलात् श्रम का प्रतिषेध करता है?
- (a)अनुच्छेद 21
- (b)अनुच्छेद 22
- (c)अनुच्छेद 23
- (d)अनुच्छेद 24
उत्तर(c) अनुच्छेद 23 — यही मानव के दुर्व्यापार, बेगार तथा उसी प्रकार के अन्य बलात् श्रम का प्रतिषेध करता है और उसे दंडनीय बनाता है; अनुच्छेद 24 उसी उपशीर्षक का दूसरा अनुच्छेद है, जो बालकों के नियोजन से संबंधित है।
- practice — not a real PYQ
बाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 ने चौदह से अठारह वर्ष के बीच के व्यक्तियों के लिए कौन-सी श्रेणी बनाई, जिन्हें परिसंकटमय व्यवसायों तथा प्रक्रियाओं में नियोजित नहीं किया जा सकता?
- (a)बालक
- (b)किशोर
- (c)प्रशिक्षु
- (d)अल्पवयस्क कर्मकार
उत्तर(b) किशोर — इसी संशोधन ने यह नई श्रेणी जोड़ी; चौदह वर्ष से कम आयु वाला ‘बालक’ है, जिसका नियोजन सभी व्यवसायों में प्रतिषिद्ध है, जबकि किशोर केवल परिसंकटमय व्यवसायों तथा प्रक्रियाओं से बाहर रखा गया है।