भारत सरकार की एक योजना ‘ई-संजीवनी’, निम्नलिखित में से किस प्रयोजन के लिए कार्यरत है?
- (a)कोविड-19 से प्रभावित व्यक्तियों का आँकड़ा-संचय तैयार करना
- (b)दूरचिकित्सा (टेलीमेडिसिन) के उपयोग को बढ़ावा देना
- (c)एक इलेक्ट्रॉनिक राष्ट्रीय क्लिनिकल रजिस्ट्री स्थापित करना
- (d)स्वास्थ्य देखभाल सिफारिशों को सशक्त रूप से बढ़ावा देना
सही उत्तर — B, (b) दूरचिकित्सा (टेलीमेडिसिन) के उपयोग को बढ़ावा देना — ‘ई-संजीवनी’ भारत सरकार की राष्ट्रीय दूरचिकित्सा सेवा है, जिसमें रोगी और चिकित्सक आमने-सामने हुए बिना दृश्य-श्रव्य माध्यम से परामर्श करते हैं। पहला क़दम — योजना का ढाँचा देखिए, क्योंकि उसी से उसका प्रयोजन साफ़ हो जाता है। ‘ई-संजीवनी’ दो प्रारूपों में चलती है। पहला प्रारूप चिकित्सक-से-चिकित्सक का है, जो आयुष्मान भारत के अंतर्गत बने स्वास्थ्य एवं आरोग्य केंद्रों पर हब-एंड-स्पोक ढाँचे में काम करता है : गाँव या प्रखंड का केंद्र ‘स्पोक’ होता है, जहाँ सामुदायिक स्वास्थ्यकर्मी रोगी को बिठाकर संपर्क जोड़ता है, और ज़िले या उससे ऊपर के अस्पताल का विशेषज्ञ ‘हब’ पर बैठकर परामर्श देता है। दूसरा प्रारूप सीधे रोगी-से-चिकित्सक का है, जिसमें व्यक्ति अपने घर से ही बाह्य रोगी विभाग जैसी सेवा ले सकता है। दोनों में जो कुछ होता है वह परामर्श है — परीक्षण, सलाह और नुस्खा — इसलिए योजना का प्रयोजन दूरचिकित्सा को बढ़ावा देना ही है। दूसरा क़दम — इसका इतिहास याद रखिए, क्योंकि प्रश्न प्रायः तिथियों पर टिकते हैं। चिकित्सक-से-चिकित्सक वाला प्रारूप नवंबर 2019 में आरंभ हुआ, अर्थात् महामारी से पहले; और रोगी-से-चिकित्सक वाला बाह्य रोगी प्रारूप अप्रैल 2020 में, जब देशभर के अस्पतालों के बाह्य रोगी विभाग बंद पड़े थे और लोगों तक परामर्श पहुँचाने का कोई दूसरा रास्ता नहीं था। यह मंच केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की पहल है और इसे उन्नत संगणन विकास केंद्र, मोहाली ने विकसित किया है। तीसरा क़दम — यह देखिए कि योजना क्या नहीं है, क्योंकि तीनों असत्य विकल्प इसी सीमा पर खड़े हैं। ‘ई-संजीवनी’ कोई आँकड़ा-संचय नहीं है, कोई पंजी नहीं है, और कोई सलाह-प्रसार अभियान भी नहीं है — वह एक सेवा-मंच है, जिस पर परामर्श वास्तविक समय में होता है। महामारी के वर्षों में उसका उपयोग बहुत तेज़ी से बढ़ा, इसलिए उसे कोविड से जुड़े कार्यक्रमों के साथ मिला देना आसान है, पर वह उन कार्यक्रमों का हिस्सा नहीं था; वह उनसे पहले शुरू हुआ था और उनके बाद भी चल रहा है। चौथा क़दम — इसे बड़े ढाँचे में जोड़ लीजिए। दूरचिकित्सा को भारत में विधिक आधार 2020 में जारी टेलीमेडिसिन प्रैक्टिस गाइडलाइंस से मिला, जिन्होंने यह तय किया कि पंजीकृत चिकित्सक किन परिस्थितियों में दूर से परामर्श और नुस्खा दे सकता है। ‘ई-संजीवनी’ को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन से भी जोड़ा गया है, ताकि परामर्श का अभिलेख व्यक्ति की डिजिटल स्वास्थ्य पहचान से जुड़ सके। यह मंच अब सरकार द्वारा चलाई जा रही विश्व की सबसे बड़ी दूरचिकित्सा पहल माना जाता है।
- (a)कोविड-19 से प्रभावित व्यक्तियों का आँकड़ा-संचय तैयार करना — यह विकल्प इसलिए ललचाता है कि ‘ई-संजीवनी’ का बाह्य रोगी प्रारूप अप्रैल 2020 में, महामारी के ठीक बीच में शुरू हुआ था, इसलिए मन उसे कोविड से जुड़े हर कार्यक्रम के साथ जोड़ लेता है। पर आँकड़ा-संचय बनाना और परामर्श कराना दो अलग काम हैं। कोविड से प्रभावित व्यक्तियों के आँकड़े रोग-निगरानी की अपनी व्यवस्थाओं और समर्पित पोर्टलों से जुटाए जाते थे, संपर्क-अनुरेखण के लिए अलग मोबाइल ऐप था, और टीकाकरण के लिए अलग मंच। ‘ई-संजीवनी’ इनमें से कुछ नहीं है : उस पर जो होता है वह चिकित्सक और रोगी के बीच का जीवंत परामर्श है, और परामर्श का अभिलेख बनना उसका उपोत्पाद है, प्रयोजन नहीं। इसके अलावा ध्यान रहे कि इसका पहला प्रारूप नवंबर 2019 में, महामारी से पहले ही आरंभ हो चुका था, इसलिए यह योजना कोविड की उपज भी नहीं है।
- (c)एक इलेक्ट्रॉनिक राष्ट्रीय क्लिनिकल रजिस्ट्री स्थापित करना — यह विकल्प एक वास्तविक कार्यक्रम की ओर संकेत करता है, पर वह कार्यक्रम कोई और है, और इसीलिए यह विकल्प सबसे अच्छा जाल है। कोविड-19 के लिए एक राष्ट्रीय नैदानिक पंजी भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने अलग से बनाई थी, जिसका काम अस्पतालों में भर्ती रोगियों के लक्षणों, उपचार और परिणामों का व्यवस्थित अभिलेख जुटाकर शोध के लिए उपलब्ध कराना था। पंजी का उद्देश्य आँकड़े जमा करना और उनसे निष्कर्ष निकालना होता है, जबकि ‘ई-संजीवनी’ का उद्देश्य सेवा पहुँचाना है। दोनों को अलग रखने का सरल सूत्र यह है कि अपने आप से पूछिए — इस कार्यक्रम के अंत में क्या निकलता है? पंजी के अंत में आँकड़े निकलते हैं और शोध-पत्र; ‘ई-संजीवनी’ के अंत में एक परामर्श और एक नुस्खा निकलता है। यही भेद उत्तर तय कर देता है।
- (d)स्वास्थ्य देखभाल सिफारिशों को सशक्त रूप से बढ़ावा देना — यह विकल्प जान-बूझकर अस्पष्ट रखा गया है, और अस्पष्टता ही इसकी पहचान है — ‘स्वास्थ्य देखभाल सिफारिशों को सशक्त रूप से बढ़ावा देना’ किसी विशेष योजना का वर्णन नहीं करता, क्योंकि स्वास्थ्य संबंधी सलाह और परामर्शिकाएँ मंत्रालय अपने सामान्य संप्रेषण से जारी करता रहता है और उसके लिए किसी अलग मंच की आवश्यकता नहीं होती। ‘ई-संजीवनी’ इससे कहीं ठोस चीज़ है : उस पर एक विशेष रोगी एक विशेष चिकित्सक से जुड़ता है, अपनी शिकायत बताता है, और उसे उसी समय व्यक्तिगत परामर्श तथा नुस्खा मिलता है। सामान्य सलाह और व्यक्तिगत परामर्श का यही भेद निर्णायक है। परीक्षा में ऐसे धुँधले विकल्पों को पहचानना अपने आप में एक कौशल है : जिस विकल्प में कोई ठोस क्रिया, कोई लाभार्थी या कोई तंत्र नहीं दिखता, वह प्रायः भरने के लिए रखा गया विकल्प होता है।
दूरचिकित्सा का अर्थ है सूचना तथा संचार प्रौद्योगिकी के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा पहुँचाना, जब चिकित्सक और रोगी एक स्थान पर नहीं हो सकते। भारत जैसे देश में इसका महत्व सीधा है : विशेषज्ञ चिकित्सक बड़े नगरों में केंद्रित हैं, जबकि रोगी दूर-दराज़ के गाँवों में हैं, और यात्रा में लगने वाला समय तथा पैसा अपने आप में इलाज न कराने का बड़ा कारण बनता है। ‘ई-संजीवनी’ इसी अंतर को पाटने के लिए बनाई गई राष्ट्रीय दूरचिकित्सा सेवा है। इसका पहला प्रारूप चिकित्सक-से-चिकित्सक वाला है और आयुष्मान भारत के स्वास्थ्य एवं आरोग्य केंद्रों पर हब-एंड-स्पोक ढाँचे में चलता है, जहाँ केंद्र पर बैठा सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी रोगी की सहायता करता है और ऊपर के अस्पताल का चिकित्सक परामर्श देता है; व्यवहार में मंच का अधिकांश उपयोग इसी प्रारूप से होता है। दूसरा प्रारूप सीधे रोगी-से-चिकित्सक वाला है, जिसमें व्यक्ति अपने घर से पंजीकरण करके परामर्श ले सकता है। यह पहल केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की है और मंच उन्नत संगणन विकास केंद्र, मोहाली ने विकसित किया है। इसके चारों ओर की व्यवस्था भी जानने योग्य है : 2020 के टेलीमेडिसिन प्रैक्टिस गाइडलाइंस ने दूर से परामर्श और नुस्खे को विधिक आधार दिया, और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन ने डिजिटल स्वास्थ्य पहचान तथा अभिलेखों का ढाँचा खड़ा किया, जिससे यह मंच जोड़ा गया है।
सरकारी योजनाओं के प्रश्न में सबसे बड़ा जोखिम नाम की समानता का होता है, और स्वास्थ्य क्षेत्र में तो एक ही समय पर अनेक कार्यक्रम साथ-साथ चल रहे थे — सेवा-मंच, पंजियाँ, ऐप, टीकाकरण पोर्टल और बीमा योजनाएँ। इसलिए हर योजना के साथ तीन बातें याद रखनी चाहिए : वह किस मंत्रालय की है, वह करती क्या है, और वह कब शुरू हुई। ‘ई-संजीवनी’ के लिए ये तीनों सीधी हैं — स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, दूरचिकित्सा परामर्श, और नवंबर 2019 तथा अप्रैल 2020 में दो प्रारूपों का आरंभ। दूसरी बात, इस प्रश्न के विकल्पों को देखिए तो तीनों असत्य विकल्प एक ही श्रेणी के हैं : वे सब ‘सूचना जुटाने या फैलाने’ की बात करते हैं, जबकि उत्तर ‘सेवा पहुँचाने’ की बात करता है। योजना-आधारित प्रश्नों में यह छँटनी बहुत काम आती है — पहले तय कीजिए कि योजना का उत्पाद क्या है, फिर उसी उत्पाद वाला विकल्प चुनिए। तीसरी बात, यह प्रश्नपत्र स्वास्थ्य के प्रशासनिक और वित्तीय पक्ष को भी छूता है, इसलिए दूरचिकित्सा के साथ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, आयुष्मान भारत के दोनों घटक और स्थानीय निकायों को मिलने वाले स्वास्थ्य अनुदान भी एक साथ पढ़ लेने चाहिए।
- ‘ई-संजीवनी’ भारत सरकार की राष्ट्रीय दूरचिकित्सा सेवा है, जिसका प्रयोजन दृश्य-श्रव्य माध्यम से चिकित्सा परामर्श उपलब्ध कराना है।
- इसके दो प्रारूप हैं : चिकित्सक-से-चिकित्सक वाला प्रारूप, जो आयुष्मान भारत के स्वास्थ्य एवं आरोग्य केंद्रों पर हब-एंड-स्पोक ढाँचे में चलता है, और सीधे रोगी-से-चिकित्सक वाला बाह्य रोगी प्रारूप।
- चिकित्सक-से-चिकित्सक वाला प्रारूप नवंबर 2019 में आरंभ हुआ, अर्थात् महामारी से पहले; रोगी-से-चिकित्सक वाला प्रारूप अप्रैल 2020 में, जब अस्पतालों के बाह्य रोगी विभाग बंद थे।
- यह पहल केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की है और मंच उन्नत संगणन विकास केंद्र, मोहाली ने विकसित किया है।
- हब-एंड-स्पोक ढाँचे में गाँव या प्रखंड का स्वास्थ्य केंद्र ‘स्पोक’ होता है, जहाँ सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी रोगी की सहायता करता है, और ज़िले या उससे ऊपर के अस्पताल का विशेषज्ञ ‘हब’ पर बैठकर परामर्श देता है।
- भारत में दूरचिकित्सा को विधिक आधार 2020 में जारी टेलीमेडिसिन प्रैक्टिस गाइडलाइंस से मिला, जिन्होंने दूर से परामर्श तथा नुस्खा देने की शर्तें तय कीं।
- ‘ई-संजीवनी’ को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन से जोड़ा गया है, ताकि परामर्श का अभिलेख व्यक्ति की डिजिटल स्वास्थ्य पहचान से जुड़ सके; यह सरकार द्वारा चलाई जा रही विश्व की सबसे बड़ी दूरचिकित्सा पहल मानी जाती है।
- ‘ई-संजीवनी’ को कोविड-कालीन योजना मान लेना; उसका पहला प्रारूप नवंबर 2019 में, महामारी से पहले ही आरंभ हो चुका था।
- सेवा-मंच और पंजी को एक मान लेना; पंजी आँकड़े जमा करती है, जबकि यह मंच परामर्श कराता है।
- इसे संपर्क-अनुरेखण ऐप या टीकाकरण पोर्टल से मिला देना; वे अलग कार्यक्रम थे और उनका उद्देश्य भी अलग था।
- दोनों प्रारूपों को उलट देना; स्वास्थ्य एवं आरोग्य केंद्रों वाला प्रारूप चिकित्सक-से-चिकित्सक है और घर से लिया जाने वाला परामर्श रोगी-से-चिकित्सक।
- धुँधले विकल्प को सही मान लेना; जिस विकल्प में कोई ठोस क्रिया, लाभार्थी या तंत्र न दिखे, वह प्रायः भरने के लिए रखा गया होता है।
सरकारी योजनाओं से इस प्रश्नपत्र में हर वर्ष कई प्रश्न आते हैं और वे तीन रूप लेते हैं। पहला रूप यही है — योजना का नाम देकर उसका उद्देश्य पूछना, या उलटकर उद्देश्य देकर योजना पूछना। दूसरा रूप मंत्रालय का है : कौन-सी योजना किस मंत्रालय के अधीन है, जो इसी प्रश्नपत्र में और भी जगह पूछा गया है। तीसरा रूप कथन-आधारित है, जिसमें योजना के आरंभ-वर्ष, उसके घटकों या उसकी पात्रता पर दो-तीन कथन रखकर कूट माँगा जाता है। तीनों की तैयारी के लिए एक तालिका बना लीजिए जिसमें योजना का नाम, मंत्रालय, आरंभ-वर्ष, उद्देश्य और एक विशिष्ट विशेषता लिखी हो — जैसे ‘ई-संजीवनी’ के सामने दो प्रारूपों वाली विशेषता। नामों की समानता वाले जाल इसी तालिका से टूटते हैं, क्योंकि एक ही क्षेत्र की योजनाएँ पास-पास लिखी होने पर उनका भेद आँख के सामने रहता है।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
‘ई-संजीवनी’ के दो प्रारूपों में से कौन-सा एक चिकित्सक-से-चिकित्सक प्रारूप है, जो स्वास्थ्य एवं आरोग्य केंद्रों पर हब-एंड-स्पोक ढाँचे में चलता है?
- (a)ई-संजीवनी ओ० पी० डी०
- (b)ई-संजीवनी ए० बी०–एच० डब्ल्यू० सी०
- (c)आरोग्य सेतु
- (d)को-विन
उत्तर(b) ई-संजीवनी ए० बी०–एच० डब्ल्यू० सी० — इसी प्रारूप में केंद्र पर बैठा सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी रोगी की सहायता करता है और ऊपर के अस्पताल का चिकित्सक परामर्श देता है, जबकि ओ० पी० डी० वाला प्रारूप रोगी को सीधे अपने घर से परामर्श लेने देता है। शेष दो अलग कार्यक्रम हैं।
- practice — not a real PYQ
भारत में दूरचिकित्सा को विधिक आधार देने वाले ‘टेलीमेडिसिन प्रैक्टिस गाइडलाइंस’ किस वर्ष जारी किए गए?
- (a)2016
- (b)2018
- (c)2020
- (d)2022
उत्तर(c) 2020 — इन्हीं दिशानिर्देशों ने यह तय किया कि पंजीकृत चिकित्सक किन परिस्थितियों में दूर से परामर्श दे सकता है और कौन-सी औषधियाँ इस मार्ग से लिखी जा सकती हैं, और इसी वर्ष ‘ई-संजीवनी’ का बाह्य रोगी प्रारूप भी आरंभ हुआ।