निम्नलिखित अभिक्रिया पर विचार कीजिए : 2H₂(g) + O₂(g) → 2H₂O(l) ऊपर दी गई अभिक्रिया के बारे में, निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन सही है?
- (a)हाइड्रोजन की ऑक्सीकरण अवस्था बढ़ती है जबकि ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण अवस्था घटती है।
- (b)हाइड्रोजन की ऑक्सीकरण अवस्था घटती है जबकि ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण अवस्था बढ़ती है।
- (c)हाइड्रोजन की ऑक्सीकरण अवस्था और साथ ही ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण अवस्था में कोई परिवर्तन नहीं होता।
- (d)अभिक्रिया के दौरान हाइड्रोजन अपचयित होता है जबकि ऑक्सीजन उपचयित (ऑक्सीकृत) होती है।
सही उत्तर — A, (a) हाइड्रोजन की ऑक्सीकरण अवस्था बढ़ती है जबकि ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण अवस्था घटती है — हाइड्रोजन 0 से +1 पर जाता है और ऑक्सीजन 0 से −2 पर। पहला क़दम — बाईं ओर की अवस्थाएँ लिखिए। नियम यह है कि कोई तत्व जब अपने मुक्त, तात्विक रूप में हो तो उसकी ऑक्सीकरण अवस्था शून्य होती है। अभिक्रिया में बाईं ओर H₂ और O₂ दोनों तात्विक रूप में हैं, इसलिए दोनों की ऑक्सीकरण अवस्था 0 है। दूसरा क़दम — दाईं ओर की अवस्थाएँ निकालिए। जल में ऑक्सीजन हाइड्रोजन की तुलना में कहीं अधिक विद्युत-ऋणात्मक है, इसलिए साझा इलेक्ट्रॉन-युग्म को अपनी ओर खींचकर वह −2 की अवस्था लेती है; अणु उदासीन है, इसलिए दोनों हाइड्रोजन परमाणुओं को मिलकर +2 देना होगा, अर्थात् प्रत्येक हाइड्रोजन +1 पर। तीसरा क़दम — दिशा पढ़िए और नाम दीजिए। हाइड्रोजन 0 से +1 पर गया, अर्थात् उसकी ऑक्सीकरण अवस्था बढ़ी — यही ऑक्सीकरण है, और इलेक्ट्रॉन की भाषा में हाइड्रोजन ने इलेक्ट्रॉन खोए। ऑक्सीजन 0 से −2 पर गई, अर्थात् उसकी ऑक्सीकरण अवस्था घटी — यही अपचयन है, और इलेक्ट्रॉन की भाषा में ऑक्सीजन ने इलेक्ट्रॉन पाए। विकल्प (a) ठीक यही दो बातें कहता है। साथ में यह भी निकल आता है कि हाइड्रोजन यहाँ अपचायक है, क्योंकि वह स्वयं ऑक्सीकृत होकर दूसरे को अपचयित कराता है, और ऑक्सीजन ऑक्सीकारक है। चौथा क़दम — विकल्पों की बनावट देखिए, क्योंकि उससे आधा काम बिना गणना के हो जाता है। विकल्प (b) कहता है कि हाइड्रोजन की अवस्था घटती है और ऑक्सीजन की बढ़ती है; विकल्प (d) उसी बात को दूसरे शब्दों में कहता है — हाइड्रोजन अपचयित होता है और ऑक्सीजन उपचयित। अवस्था का घटना ही अपचयन है और बढ़ना ही उपचयन, इसलिए ये दोनों विकल्प एक ही कथन के दो रूप हैं। इस प्रश्नपत्र में हर प्रश्न का ठीक एक ही विकल्प कुंजी में है, इसलिए दो समान कथन एक साथ सही नहीं हो सकते और दोनों एक साथ बाहर हो जाते हैं। इसके बाद केवल (a) और (c) बचते हैं, और (c) यह कहता है कि कोई परिवर्तन हुआ ही नहीं — जो तात्विक रूप की शून्य अवस्था और जल की +1 तथा −2 अवस्थाओं के सामने टिक नहीं सकता। एक बात याद रखने योग्य है, क्योंकि वह अपवाद के रूप में पूछी जाती है : हाइड्रोजन प्रायः +1 पर रहता है पर धातु हाइड्राइडों में, जैसे NaH और CaH₂, वह −1 पर होता है; और ऑक्सीजन प्रायः −2 पर रहती है पर परॉक्साइडों में −1 पर और फ़्लुओरीन के साथ धनात्मक अवस्था में।
- (b)हाइड्रोजन की ऑक्सीकरण अवस्था घटती है जबकि ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण अवस्था बढ़ती है। — यह विकल्प दिशाएँ ठीक उलट देता है : यह कहता है कि हाइड्रोजन की ऑक्सीकरण अवस्था घटती है और ऑक्सीजन की बढ़ती है, जबकि वास्तव में हाइड्रोजन 0 से +1 पर चढ़ता है और ऑक्सीजन 0 से −2 पर उतरती है। यह भूल प्रायः इस कारण होती है कि विद्युत-ऋणात्मकता का नियम भुला दिया जाता है और आँख केवल यह देखती है कि जल में हाइड्रोजन ‘छोटा’ है और ऑक्सीजन ‘बड़ी’; पर ऑक्सीकरण अवस्था आकार से नहीं, इलेक्ट्रॉन-युग्म के खिंचाव से तय होती है, और वह खिंचाव सदैव अधिक विद्युत-ऋणात्मक परमाणु की ओर होता है। एक और बात ध्यान देने योग्य है : यह विकल्प वही कहता है जो विकल्प (d) दूसरे शब्दों में कहता है, इसलिए दोनों को साथ रखकर पढ़ लेने भर से दोनों बाहर हो जाते हैं, क्योंकि कुंजी में केवल एक विकल्प रहता है।
- (c)हाइड्रोजन की ऑक्सीकरण अवस्था और साथ ही ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण अवस्था में कोई परिवर्तन नहीं होता। — यह कहता है कि दोनों तत्वों की ऑक्सीकरण अवस्था में कोई परिवर्तन नहीं होता, जो सीधे-सीधे असत्य है और उस अभ्यर्थी को पकड़ता है जो अभिक्रिया को केवल ‘संयोजन’ के रूप में देखता है — दो तत्व मिलकर एक यौगिक बना रहे हैं, इसलिए लगता है कि कुछ स्थानांतरित नहीं हुआ। किंतु संयोजन अभिक्रिया और उपचयन-अपचयन अभिक्रिया परस्पर विरोधी वर्ग नहीं हैं; जब भी दो तत्व मिलकर कोई यौगिक बनाते हैं, दोनों की अवस्था शून्य से बदलकर कुछ और हो जाती है, इसलिए हर ऐसी अभिक्रिया अनिवार्यतः उपचयन-अपचयन भी होती है। यहाँ बाईं ओर दोनों तत्व मुक्त रूप में हैं, अर्थात् शून्य पर, और दाईं ओर जल में हाइड्रोजन +1 पर तथा ऑक्सीजन −2 पर है — परिवर्तन दोनों में हुआ है, और वह किसी अनुमान से नहीं, अवस्थाएँ लिखकर देखा जा सकता है।
- (d)अभिक्रिया के दौरान हाइड्रोजन अपचयित होता है जबकि ऑक्सीजन उपचयित (ऑक्सीकृत) होती है। — यह विकल्प विकल्प (b) की ही बात दूसरे शब्दों में कहता है : अवस्था का घटना ही अपचयन है और बढ़ना ही उपचयन, इसलिए ‘हाइड्रोजन अपचयित और ऑक्सीजन उपचयित’ कहना वही है जो ‘हाइड्रोजन की अवस्था घटी और ऑक्सीजन की बढ़ी’ कहना। दोनों उलटी दिशा बताते हैं, इसलिए दोनों असत्य हैं। यह विकल्प इसीलिए ख़तरनाक है कि यह पारिभाषिक शब्दों में लिखा है और पारिभाषिक शब्द सुनने में अधिक अधिकारपूर्ण लगते हैं। बचाव का तरीक़ा हर बार एक ही है — शब्दों को संख्याओं में बदलकर देखिए। हाइड्रोजन 0 से +1 पर, इसलिए वह उपचयित हुआ, अपचयित नहीं; ऑक्सीजन 0 से −2 पर, इसलिए वह अपचयित हुई, उपचयित नहीं। यहीं यह भी याद कर लीजिए कि जो स्वयं उपचयित होता है वही अपचायक कहलाता है, इसलिए इस अभिक्रिया में हाइड्रोजन अपचायक है और ऑक्सीजन ऑक्सीकारक।
उपचयन और अपचयन की परिभाषा रसायन में तीन बार बदली है और तीनों रूप अब भी पढ़ाए जाते हैं। सबसे पुराना रूप ऑक्सीजन का है : ऑक्सीजन का जुड़ना उपचयन और हटना अपचयन। उससे व्यापक रूप इलेक्ट्रॉन का है : इलेक्ट्रॉन का खोना उपचयन और पाना अपचयन। और सबसे व्यापक रूप ऑक्सीकरण अवस्था का है : अवस्था का बढ़ना उपचयन और घटना अपचयन। यही तीसरा रूप सहसंयोजक यौगिकों पर भी चल जाता है, जहाँ इलेक्ट्रॉन पूरी तरह स्थानांतरित नहीं होते, केवल खिंच जाते हैं। ऑक्सीकरण अवस्था निकालने के नियम थोड़े से हैं : मुक्त तत्व की अवस्था शून्य; एकपरमाणुक आयन की अवस्था उसके आवेश के बराबर; यौगिक में सभी परमाणुओं की अवस्थाओं का योग शून्य और आयन में उसके आवेश के बराबर; हाइड्रोजन प्रायः +1 पर पर धातु हाइड्राइडों में −1 पर; ऑक्सीजन प्रायः −2 पर, परॉक्साइडों में −1 पर और फ़्लुओरीन के साथ धनात्मक; तथा फ़्लुओरीन सदैव −1 पर। दोनों प्रक्रियाएँ सदा साथ चलती हैं, इसीलिए उन्हें रेडॉक्स कहा जाता है : जो पदार्थ स्वयं उपचयित होता है वह दूसरे को अपचयित कराता है और अपचायक कहलाता है, और जो स्वयं अपचयित होता है वह ऑक्सीकारक। यहाँ दी गई अभिक्रिया हाइड्रोजन का दहन है, ऊष्माक्षेपी है, और यही अभिक्रिया हाइड्रोजन ईंधन सेल में विद्युत उत्पन्न करने के लिए नियंत्रित ढंग से चलाई जाती है।
यह प्रश्न रसायन का सबसे बुनियादी हिसाब पूछता है और उसे हल करने की विधि तीन पंक्तियों की है : बाईं ओर की अवस्थाएँ लिखिए, दाईं ओर की लिखिए, और घटाकर दिशा देख लीजिए। जो अभ्यर्थी अवस्थाएँ लिखे बिना केवल शब्दों के सहारे सोचता है वह प्रायः दिशा उलट देता है, क्योंकि ‘हाइड्रोजन ने ऑक्सीजन से जुड़ना’ सुनने में अपचयन जैसा लगता है। दूसरी बात, इस प्रश्न की विकल्प-रचना अपने आप में एक कौशल सिखाती है : दो विकल्प एक ही बात दो भाषाओं में कह रहे हैं — एक अवस्था की भाषा में और दूसरा उपचयन-अपचयन की पारिभाषिक भाषा में — और चूँकि कुंजी में एक ही विकल्प रहता है, दोनों एक साथ बाहर हो जाते हैं। यह छँटाई गणना से पहले हो सकती है और आधा समय बचा देती है, इसलिए विकल्पों को आपस में तौलने की आदत डालनी चाहिए। एक शब्दावली की टिप्पणी भी दर्ज करने योग्य है : पुस्तिका इसी प्रश्न में दोनों शब्द-परिवार साथ-साथ चलाती है — पहले तीन विकल्पों में ‘ऑक्सीकरण अवस्था’ और चौथे में ‘अपचयित’ तथा ‘उपचयित (ऑक्सीकृत)’ — इसलिए अभ्यर्थी को दोनों शब्दावलियाँ आती होनी चाहिए, अन्यथा वह चौथे विकल्प को पहले तीन से अलग विषय का समझ बैठेगा।
- किसी भी तत्व का मुक्त, तात्विक रूप शून्य ऑक्सीकरण अवस्था पर होता है, इसलिए H₂(g) में हाइड्रोजन और O₂(g) में ऑक्सीजन दोनों शून्य पर हैं।
- जल में ऑक्सीजन अधिक विद्युत-ऋणात्मक होने के कारण −2 पर होती है और प्रत्येक हाइड्रोजन +1 पर, ताकि उदासीन अणु में योग शून्य रहे।
- हाइड्रोजन 0 से +1 पर जाता है, अर्थात् उपचयित होता है और इलेक्ट्रॉन खोता है; ऑक्सीजन 0 से −2 पर जाती है, अर्थात् अपचयित होती है और इलेक्ट्रॉन पाती है।
- जो स्वयं उपचयित होता है वही अपचायक कहलाता है — यहाँ हाइड्रोजन — और जो स्वयं अपचयित होता है वही ऑक्सीकारक — यहाँ ऑक्सीजन।
- उपचयन और अपचयन सदा साथ चलते हैं, इसलिए ऐसी अभिक्रियाओं को रेडॉक्स कहा जाता है; जब भी दो तत्व मिलकर यौगिक बनाते हैं, वह संयोजन अनिवार्यतः रेडॉक्स भी होता है।
- अपवाद जो अलग से पूछे जाते हैं : हाइड्रोजन धातु हाइड्राइडों (NaH, CaH₂) में −1 पर होता है, और ऑक्सीजन परॉक्साइडों में −1 पर तथा फ़्लुओरीन के साथ धनात्मक अवस्था में।
- यह अभिक्रिया हाइड्रोजन का दहन है और ऊष्माक्षेपी है; यही अभिक्रिया हाइड्रोजन ईंधन सेल में नियंत्रित ढंग से चलाकर विद्युत प्राप्त की जाती है।
- अवस्थाएँ लिखे बिना केवल शब्दों के सहारे दिशा तय करना; ‘हाइड्रोजन का ऑक्सीजन से जुड़ना’ सुनने में अपचयन जैसा लगता है, जबकि वह उपचयन है।
- मुक्त तत्व की अवस्था शून्य होने का नियम भूल जाना और सीधे जल की अवस्थाओं से तुलना करने लगना।
- संयोजन अभिक्रिया को उपचयन-अपचयन से अलग वर्ग मान लेना; दो तत्वों से यौगिक बनने की हर अभिक्रिया रेडॉक्स भी होती है।
- ऑक्सीकारक और अपचायक की पहचान उलट देना; जो स्वयं उपचयित होता है वही अपचायक है, और यही सबसे अधिक बार उलटा याद रह जाता है।
- हाइड्रोजन को सदैव +1 और ऑक्सीजन को सदैव −2 मान लेना; धातु हाइड्राइड तथा परॉक्साइड इसके नियमित अपवाद हैं और परीक्षा उन्हीं पर प्रश्न बनाती है।
उपचयन-अपचयन से इस प्रश्नपत्र के रसायन खंड में लौट-लौटकर प्रश्न आते हैं और वे चार रूप लेते हैं। पहला रूप यही है — कोई समीकरण देकर पूछना कि किसकी अवस्था बढ़ी और किसकी घटी, या कौन ऑक्सीकारक है और कौन अपचायक। दूसरा रूप संख्यात्मक है : किसी यौगिक या आयन में किसी एक तत्व की ऑक्सीकरण अवस्था निकालना, जहाँ योग वाला नियम लगाना पड़ता है। तीसरा रूप अपवादों का है — किस यौगिक में हाइड्रोजन −1 पर है, किसमें ऑक्सीजन −1 पर। चौथा रूप उदाहरणों का है, जहाँ दैनिक जीवन की किसी घटना को रेडॉक्स के रूप में पहचानना होता है, जैसे लोहे में जंग लगना या चाँदी का काला पड़ना। चारों की तैयारी के लिए नियमों की एक छोटी सूची और दस-बारह अभ्यास-समीकरण पर्याप्त हैं, बशर्ते हर बार अवस्थाएँ लिखकर ही निर्णय किया जाए, अनुमान से नहीं।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
निम्नलिखित में से किस यौगिक में हाइड्रोजन की ऑक्सीकरण अवस्था −1 है?
- (a)H₂O
- (b)HCl
- (c)NaH
- (d)NH₃
उत्तर(c) NaH — सोडियम हाइड्राइड एक धातु हाइड्राइड है, जहाँ धातु हाइड्रोजन से कम विद्युत-ऋणात्मक है, इसलिए सोडियम +1 पर रहता है और हाइड्रोजन को −1 पर आना पड़ता है। शेष तीनों में हाइड्रोजन अधिक विद्युत-ऋणात्मक तत्व के साथ है, इसलिए वह +1 पर है।
- practice — not a real PYQ
अभिक्रिया Zn(s) + CuSO₄(aq) → ZnSO₄(aq) + Cu(s) के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन सही है?
- (a)जिंक अपचयित होता है
- (b)जिंक ऑक्सीकारक का काम करता है
- (c)जिंक उपचयित होता है और वही अपचायक है
- (d)कॉपर उपचयित होता है
उत्तर(c) जिंक उपचयित होता है और वही अपचायक है — जिंक 0 से +2 पर जाता है, अर्थात् उसकी अवस्था बढ़ती है और वह इलेक्ट्रॉन खोता है; वही इलेक्ट्रॉन कॉपर आयन लेकर +2 से 0 पर आ जाता है, इसलिए कॉपर अपचयित होता है और ऑक्सीकारक का काम करता है।