निम्नलिखित में से कौन-सा एक साबुन नहीं है?
- (a)सोडियम स्टीयरेट
- (b)सोडियम पामेट
- (c)सोडियम बेंजोएट
- (d)सोडियम ओलिएट
सही उत्तर — C, (c) सोडियम बेंजोएट — यह बेंज़ोइक अम्ल का सोडियम लवण है, और बेंज़ोइक अम्ल में लंबी हाइड्रोकार्बन पूँछ है ही नहीं, इसलिए यह साबुन नहीं हो सकता। पहले पूछ को ठीक से पढ़िए। प्रश्न नकारात्मक है — पुस्तिका में ‘नहीं’ मोटे अक्षरों में छपा है — इसलिए ढूँढ़ना उस अकेले लवण को है जो साबुन की परिभाषा से बाहर गिरता हो। पहला क़दम — परिभाषा को दो टुकड़ों में तोड़िए। साबुन किसी लंबी शृंखला वाले वसा अम्ल का सोडियम या पोटैशियम लवण है। इसमें दो शर्तें हैं और दोनों साथ-साथ पूरी होनी चाहिए : धातु सोडियम या पोटैशियम हो, और अम्ल लंबी शृंखला वाला वसा अम्ल हो, प्रायः बारह से अठारह कार्बन तक। चारों विकल्पों में पहली शर्त पूरी है, क्योंकि चारों सोडियम लवण हैं; इसलिए पूरा निर्णय दूसरी शर्त पर टिकता है। दूसरा क़दम — दूसरी शर्त इतनी महत्वपूर्ण क्यों है, यह समझिए। साबुन का अणु दुमुँहा होता है : एक सिरे पर लंबी हाइड्रोकार्बन पूँछ, जो जल से दूर भागती है पर तेल और चिकनाई में घुल जाती है, और दूसरे सिरे पर आवेशित कार्बोक्सिलेट शीर्ष, जो जल में घुलता है। जल में पर्याप्त सांद्रता पर ऐसे अणु गोल गुच्छे बना लेते हैं जिन्हें मिसेल कहते हैं — पूँछें भीतर की ओर, चिकनाई को घेरे हुए, और शीर्ष बाहर जल की ओर। इसी बनावट से मैल जल में उठ जाता है। यह पूरी क्रिया लंबी पूँछ के बिना संभव नहीं है। तीसरा क़दम — विकल्प (c) को इस कसौटी पर रखिए। बेंज़ोइक अम्ल का सूत्र C₆H₅COOH है : एक बेंज़ीन वलय और उससे सीधे जुड़ा कार्बोक्सिल समूह, बीच में कोई लंबी शृंखला नहीं। इसका सोडियम लवण, सोडियम बेंजोएट, जल में अच्छी तरह घुल तो जाता है पर मिसेल नहीं बना सकता, इसलिए उसमें साफ़ करने का गुण नहीं आता। इसका असली उपयोग बिलकुल दूसरा है — यह खाद्य परिरक्षक है, जो अम्लीय खाद्य पदार्थों में, जैसे शीतल पेय और अचार, फफूँद तथा यीस्ट की वृद्धि रोकता है; अम्लीय माध्यम में वह बेंज़ोइक अम्ल में बदलकर काम करता है। चौथा क़दम — शेष तीनों जाँच लीजिए। स्टीयरेट, पामेट और ओलिएट — तीनों उन्हीं वसा अम्लों के सोडियम लवण हैं जो प्राकृतिक तेलों और वसाओं में मिलते हैं, और तीनों सचमुच साबुन हैं। इसलिए बाहर का लवण केवल एक बचता है, और वही उत्तर है।
- (a)सोडियम स्टीयरेट — सोडियम स्टीयरेट स्टीयरिक अम्ल का सोडियम लवण है, जिसका सूत्र C₁₇H₃₅COONa है — अठारह कार्बन की संतृप्त शृंखला के सिरे पर कार्बोक्सिलेट शीर्ष। यह साबुन की परिभाषा पर पूरी तरह खरा उतरता है, इसलिए नकारात्मक पूछ का उत्तर नहीं हो सकता; उलटे यह कठोर साबुन की टिकिया का सबसे प्रमुख घटक है और पाठ्यपुस्तकों में साबुन का आदर्श उदाहरण इसी को माना जाता है। एक बात साथ में याद रखने योग्य है : सोडियम लवण कठोर साबुन देते हैं और पोटैशियम लवण मुलायम साबुन, इसलिए वही स्टीयरिक अम्ल पोटैशियम के साथ मिलकर मुलायम साबुन बनाता है। यह भेद अलग से भी पूछा जाता है, और उसका आधार यही है कि पोटैशियम लवण जल में अधिक घुलनशील होते हैं।
- (b)सोडियम पामेट — सोडियम पामेट भी साबुन ही है, इसलिए उत्तर नहीं है। यह पामिटिक अम्ल का सोडियम लवण है, सूत्र C₁₅H₃₁COONa — सोलह कार्बन की संतृप्त शृंखला, अर्थात् स्टीयरेट से केवल दो कार्बन छोटी। पामिटिक अम्ल ताड़ के तेल का मुख्य वसा अम्ल है और साबुन उद्योग में उससे बने लवण को इसी नाम से पुकारा जाता है; साबुन की टिकिया पर छपी संघटक-सूची में यह नाम प्रायः स्टीयरेट के साथ-साथ मिलता है। यहाँ शब्दावली की एक टिप्पणी उपयोगी है : पुस्तिका ‘पामेट’ लिखती है, जो अंग्रेज़ी वाले स्तंभ के ‘palmate’ का ही लिप्यंतरण है, जबकि जिस अम्ल से यह बना है उसका पाठ्यपुस्तकीय नाम पामिटिक अम्ल है। दोनों एक ही वस्तु के नाम हैं और दोनों स्तंभ एक ही बात कह रहे हैं, इसलिए इस अंतर से उत्तर नहीं बदलता।
- (d)सोडियम ओलिएट — सोडियम ओलिएट भी साबुन है और इसीलिए उत्तर नहीं है। यह ओलिक अम्ल का सोडियम लवण है, सूत्र C₁₇H₃₃COONa, जिसमें अठारह कार्बन की शृंखला तो है पर उसमें एक द्विबंध भी है, अर्थात् यह असंतृप्त वसा अम्ल है। ओलिक अम्ल जैतून के तेल तथा अनेक वनस्पति तेलों का प्रमुख घटक है, और उसका द्विबंध शृंखला में एक मोड़ डाल देता है, जिससे अणु आपस में उतने कसकर नहीं जमते; इसी कारण असंतृप्त वसा अम्लों से बने साबुन अपेक्षाकृत नरम होते हैं और उनका गलनांक भी कम होता है। ध्यान दीजिए कि साबुन होने के लिए शृंखला का संतृप्त होना आवश्यक नहीं है — आवश्यक केवल यह है कि वह लंबी हो, ताकि जल से दूर भागने वाली पूँछ बन सके। यही कारण है कि इस प्रश्न के तीन विकल्प, संतृप्त हों या असंतृप्त, सब साबुन हैं।
साबुन लंबी शृंखला वाले वसा अम्लों के सोडियम या पोटैशियम लवण हैं, और वे बनते हैं साबुनीकरण (saponification) से — वसा या तेल, जो रासायनिक रूप से ग्लिसरॉल के त्रि-एस्टर हैं, कास्टिक सोडा जैसे क्षार के साथ गरम किए जाते हैं और साबुन के साथ ग्लिसरॉल उपोत्पाद के रूप में निकलता है। बने हुए साबुन को सांद्र नमक के घोल से अलग किया जाता है, जिसे नमकीकरण कहते हैं। साबुन के अणु की सफ़ाई-क्षमता उसकी दुमुँही बनावट से आती है : जल-विरोधी हाइड्रोकार्बन पूँछ चिकनाई में धँस जाती है और जल-स्नेही कार्बोक्सिलेट शीर्ष जल की ओर मुँह किए रहता है, जिससे मिसेल बनते हैं और मैल का कण घिरकर जल में निलंबित हो जाता है। इसी बनावट की एक कमज़ोरी भी है : कठोर जल में घुले कैल्सियम तथा मैग्नीशियम आयन साबुन के साथ मिलकर अघुलनशील मल (scum) बना देते हैं, इसलिए साबुन झाग नहीं देता और व्यर्थ जाता है। इसी कमी को दूर करने के लिए संश्लिष्ट अपमार्जक बनाए गए, जिनका शीर्ष सल्फ़ोनेट या सल्फ़ेट होता है और जिनके कैल्सियम-मैग्नीशियम लवण घुलनशील रहते हैं, इसलिए वे कठोर जल में भी काम करते हैं। इसके ठीक विपरीत सोडियम बेंजोएट, जो इस प्रश्न का उत्तर है, सफ़ाई से जुड़ा है ही नहीं — वह खाद्य परिरक्षक है और अम्लीय खाद्य पदार्थों में सूक्ष्मजीवों की वृद्धि रोकता है।
यह प्रश्न रटी हुई सूची से नहीं, परिभाषा को खोलकर लगाने से हल होता है, और यही इसकी सबसे बड़ी सीख है। चारों विकल्प ‘सोडियम’ से शुरू होते हैं और चारों किसी न किसी कार्बोक्सिलिक अम्ल के लवण हैं, इसलिए ऊपर से चारों एक जैसे दिखते हैं; भेद केवल इस बात का है कि अम्ल की शृंखला कितनी लंबी है। जिन तीन में लंबी वसा-शृंखला है वे साबुन हैं, और जिसमें केवल एक बेंज़ीन वलय है वह नहीं। इसलिए इस अध्याय की तैयारी में हर नाम के साथ उसकी कार्बन-संख्या याद रखना अत्यंत उपयोगी है : स्टीयरिक अठारह, पामिटिक सोलह, ओलिक अठारह पर एक द्विबंध के साथ, और लॉरिक बारह। दूसरी बात, इस प्रश्नपत्र का विज्ञान खंड रोज़मर्रा के रसायन को नियमित रूप से छूता है — साबुन और अपमार्जक, परिरक्षक, प्रतिजैविक, प्रतिऑक्सीकारक — इसलिए इन पदार्थों के नाम उनके उपयोग के साथ जोड़कर याद करने चाहिए, केवल सूत्र के साथ नहीं। तीसरी बात, नकारात्मक पूछ में चारों विकल्पों को वर्गीकृत करके ही आगे बढ़िए; तीन एक श्रेणी में और एक अकेला बचे, तभी उत्तर पर भरोसा किया जा सकता है।
- साबुन लंबी शृंखला वाले वसा अम्ल का सोडियम या पोटैशियम लवण है; दोनों शर्तें — सोडियम या पोटैशियम, और लंबी वसा-शृंखला — साथ-साथ पूरी होनी चाहिए।
- सोडियम बेंजोएट बेंज़ोइक अम्ल (C₆H₅COOH) का सोडियम लवण है, जिसमें बेंज़ीन वलय के साथ सीधे कार्बोक्सिल समूह जुड़ा है और कोई लंबी पूँछ नहीं, इसलिए वह मिसेल नहीं बना सकता और साबुन नहीं है।
- सोडियम बेंजोएट का वास्तविक उपयोग खाद्य परिरक्षक का है, विशेषकर अम्लीय खाद्य पदार्थों में जहाँ वह बेंज़ोइक अम्ल में बदलकर फफूँद तथा यीस्ट को रोकता है।
- सोडियम स्टीयरेट (C₁₇H₃₅COONa, अठारह कार्बन, संतृप्त) कठोर साबुन का प्रमुख घटक है; सोडियम पामेट (C₁₅H₃₁COONa, सोलह कार्बन) ताड़ के तेल से आता है; सोडियम ओलिएट (C₁₇H₃₃COONa) असंतृप्त है और नरम साबुन देता है।
- साबुनीकरण में वसा या तेल को क्षार के साथ गरम किया जाता है; साबुन के साथ ग्लिसरॉल उपोत्पाद के रूप में बनता है और साबुन को सांद्र नमक के घोल से अलग किया जाता है।
- सोडियम लवण कठोर साबुन देते हैं और पोटैशियम लवण मुलायम साबुन, क्योंकि पोटैशियम लवण जल में अधिक घुलनशील होते हैं।
- कठोर जल के कैल्सियम तथा मैग्नीशियम आयन साबुन के साथ अघुलनशील मल बनाते हैं, इसलिए वहाँ साबुन झाग नहीं देता; संश्लिष्ट अपमार्जक इस कमी से मुक्त हैं क्योंकि उनके कैल्सियम-मैग्नीशियम लवण घुलनशील रहते हैं।
- ‘सोडियम लवण है इसलिए साबुन है’ मान लेना; धातु सही होना आधी शर्त है, दूसरी आधी शर्त लंबी वसा-शृंखला की है।
- सोडियम बेंजोएट को सोडियम बेंज़ीनसल्फ़ोनेट या किसी अपमार्जक से जोड़ लेना; वह परिरक्षक है और सफ़ाई से उसका कोई संबंध नहीं।
- असंतृप्त वसा अम्ल के लवण को साबुन मानने से इनकार कर देना; सोडियम ओलिएट असंतृप्त होते हुए भी साबुन है, क्योंकि शर्त शृंखला की लंबाई की है, संतृप्तता की नहीं।
- ‘पामेट’ और ‘पामिटिक’ को अलग-अलग पदार्थ समझ लेना; दोनों एक ही वसा अम्ल के नाम हैं, एक साबुन उद्योग का और दूसरा पाठ्यपुस्तक का।
- नकारात्मक पूछ में पहला अपरिचित नाम चुन लेना; यहाँ चारों नाम मिलते-जुलते हैं और छाँटने का आधार केवल संरचना है।
साबुन और अपमार्जक का अध्याय इस प्रश्नपत्र के रसायन खंड में लौट-लौटकर आता है और चार रूपों में पूछा जाता है। पहला रूप यही है — नामों की सूची देकर यह पूछना कि कौन-सा साबुन है या नहीं है, जहाँ उत्तर परिभाषा से निकलता है। दूसरा रूप प्रक्रिया का है : साबुनीकरण किसे कहते हैं, उसका उपोत्पाद क्या है, नमकीकरण क्यों किया जाता है। तीसरा रूप क्रियाविधि का है — मिसेल कैसे बनता है, कठोर जल में साबुन क्यों काम नहीं करता, अपमार्जक वहाँ क्यों चल जाते हैं। चौथा रूप उपयोग का है, जहाँ किसी रसायन का नाम देकर उसका रोज़मर्रा का काम पूछा जाता है, और सोडियम बेंजोएट जैसे परिरक्षक वहीं आते हैं। इन चारों की तैयारी के लिए एक पन्ना पर्याप्त है जिसमें प्रमुख वसा अम्लों के नाम कार्बन-संख्या के साथ, साबुनीकरण का समीकरण, मिसेल का चित्र, और आठ-दस रोज़मर्रा के रसायनों के नाम उनके उपयोग के साथ लिखे हों।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
वसा या तेल को क्षार के साथ गरम करके साबुन बनाने की अभिक्रिया को क्या कहते हैं?
- (a)एस्टरीकरण
- (b)साबुनीकरण
- (c)बहुलकीकरण
- (d)उदासीनीकरण
उत्तर(b) साबुनीकरण — इसमें वसा या तेल, जो ग्लिसरॉल के त्रि-एस्टर हैं, क्षार के साथ अभिकृत होकर वसा अम्ल का लवण यानी साबुन देते हैं और ग्लिसरॉल उपोत्पाद के रूप में निकलता है। एस्टरीकरण इसकी उलटी दिशा है, जिसमें अम्ल और ऐल्कोहॉल से एस्टर बनता है।
- practice — not a real PYQ
कठोर जल में साबुन ठीक से झाग क्यों नहीं देता?
- (a)कठोर जल का pH बहुत कम होता है, इसलिए साबुन विघटित हो जाता है
- (b)कठोर जल में घुले कैल्सियम तथा मैग्नीशियम आयन साबुन के साथ अघुलनशील मल बना देते हैं
- (c)कठोर जल में घुली ऑक्सीजन साबुन को ऑक्सीकृत कर देती है
- (d)कठोर जल का ताप सामान्य जल से सदैव अधिक होता है
उत्तर(b) कठोर जल में घुले कैल्सियम तथा मैग्नीशियम आयन साबुन के साथ अघुलनशील मल बना देते हैं — ये लवण जल में नहीं घुलते, इसलिए साबुन झाग बनाने के बजाय मल के रूप में बैठ जाता है और व्यर्थ जाता है; संश्लिष्ट अपमार्जक इस कठिनाई से मुक्त हैं क्योंकि उनके कैल्सियम-मैग्नीशियम लवण घुलनशील रहते हैं।