निम्नलिखित में से किस एक उद्योग के बहिःस्राव, नदी जल के pH मान को कम करने के मुख्य कारण माने जाते हैं?
- (a)अल्कोहल डिस्टिलरी उद्योग
- (b)प्लास्टिक कप विनिर्माण उद्योग
- (c)साबुन एवं डिटर्जेंट उद्योग
- (d)सीसा (लेड) बैटरी विनिर्माण उद्योग
सही उत्तर — D, (d) सीसा (लेड) बैटरी विनिर्माण उद्योग — इस उद्योग का बहिःस्राव मुक्त गंधक अम्ल लिये होता है, और गंधक अम्ल जल में पूरी तरह वियोजित होकर pH को सीधे नीचे गिरा देता है। पहला क़दम — यह देखिए कि इस उद्योग में अम्ल आता कहाँ से है। सीसा-अम्ल बैटरी का विद्युत-अपघट्य ही तनु गंधक अम्ल (H₂SO₄) है। बैटरी बनाने की लगभग हर अवस्था में वह अम्ल जल के संपर्क में आता है : पट्टिकाओं के निर्माण और संरूपण (formation) की टंकियों में, पट्टिकाओं की धुलाई और परिपक्वन में, बैटरी में अम्ल भरने के समय हुए छलकाव में, और फ़र्श तथा उपकरणों की धुलाई में। इसलिए संयंत्र से निकलने वाला जल केवल थोड़ा अम्लीय नहीं होता, उसमें मुक्त खनिज अम्ल घुला रहता है, और साथ में घुला हुआ सीसा भी। दूसरा क़दम — रसायन देखिए, क्योंकि यही ‘मुख्य कारण’ शब्द को न्यायसंगत बनाता है। गंधक अम्ल प्रबल अम्ल है और जल में लगभग पूरा वियोजित हो जाता है, इसलिए उसका हर अणु हाइड्रोजन आयन देकर pH घटाता है। दुर्बल कार्बनिक अम्ल उतनी ही मात्रा में डालने पर उतने हाइड्रोजन आयन नहीं देते, क्योंकि वे आंशिक रूप से ही वियोजित होते हैं। नदी के जल में जो थोड़ी-बहुत क्षारकता कार्बोनेट और बाइकार्बोनेट के रूप में रहती है, वह प्रबल अम्ल के आगे जल्दी चुक जाती है, और उसके चुकते ही pH तेज़ी से गिरता है। तीसरा क़दम — नियम याद रखिए, क्योंकि परीक्षा उन्हें अलग से भी पूछती है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सामान्य बहिःस्राव मानक अंतःस्थलीय पृष्ठ जल के लिए pH 5·5 से 9·0 के बीच रखने को कहते हैं, इसलिए ऐसे संयंत्रों को छोड़ने से पहले बहिःस्राव को उदासीन करना पड़ता है — प्रायः चूने से — और अवक्षेपित सीसे को अलग करना पड़ता है। सीसा-अम्ल बैटरी विनिर्माण बोर्ड की ‘लाल’ श्रेणी में आता है, अर्थात् सबसे अधिक प्रदूषणकारी वर्ग में। चौथा क़दम — सीसे को अम्ल से अलग समझिए। इस उद्योग की दूसरी और अधिक गंभीर हानि भारी धातु की है : सीसा शरीर में जमा होता है और विशेषकर बच्चों के तंत्रिका-तंत्र को हानि पहुँचाता है। किंतु प्रश्न विशेष रूप से pH के गिरने का कारण पूछ रहा है, और उस कसौटी पर उत्तर मुक्त गंधक अम्ल है, सीसा नहीं। यह भेद पढ़कर रखिए, क्योंकि इसी उद्योग पर आधारित प्रश्न कभी pH के नाम से आता है और कभी भारी धातु के नाम से।
- (a)अल्कोहल डिस्टिलरी उद्योग — आयोग की कुंजी इस विकल्प को नहीं लेती, यद्यपि केवल अम्लता की दृष्टि से यह विकल्प बचाव-योग्य है, और यही बात इसे इस प्रश्न का सबसे सीखने लायक हिस्सा बनाती है। शीरा-आधारित आसवनी का बहिःस्राव, जिसे स्पेंट वॉश कहते हैं, सचमुच अम्लीय होता है और उसका pH प्रायः 5 से नीचे रहता है। किंतु आसवनी की पहचान उसकी अम्लता से नहीं बनती — वह भारत के सबसे भारी कार्बनिक भार वाले बहिःस्रावों में गिनी जाती है, जिसमें BOD हज़ारों मिलीग्राम प्रति लीटर तक और COD उससे भी ऊँचा जाता है, और मेलेनॉइडिन के कारण उसका रंग गहरा भूरा होता है। इसका मुख्य नुक़सान जल में घुली ऑक्सीजन का चुक जाना और प्रकाश का रुक जाना है, जिससे जलीय जीवन दम तोड़ता है। इसीलिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शीरा-आधारित आसवनियों के लिए शून्य द्रव निस्सरण का अधिदेश दिया है, अर्थात् स्पेंट वॉश को नदी या भूमि पर छोड़ा ही नहीं जा सकता; उसे जैव-मीथेनन, कंपोस्टिंग या भस्मीकरण से निपटाना होता है। संक्षेप में : यह उद्योग जल को अम्लीय भी करता है, पर उसकी पहचान वाला संकट ऑक्सीजन की माँग है, जबकि कुंजी वाले उद्योग की पहचान वाला संकट मुक्त खनिज अम्ल ही है।
- (b)प्लास्टिक कप विनिर्माण उद्योग — प्लास्टिक कप बनाने की प्रक्रिया मुख्यतः शुष्क है — पॉलीस्टाइरीन या पॉलीप्रोपिलीन की चादर को गरम करके साँचे में ढालना, या पिघले हुए बहुलक को अंतःक्षेपित करना — और उसमें कोई अम्ल न तो कच्चे माल के रूप में लगता है और न प्रक्रिया में बनता है। जल का उपयोग यहाँ प्रायः साँचों तथा मशीनों को ठंडा करने में होता है, इसलिए जो जल बाहर निकलता है उसका मुख्य दोष ऊष्मीय होता है, रासायनिक नहीं। इस उद्योग की असली पर्यावरणीय समस्या बहिःस्राव में है ही नहीं — वह ठोस अपशिष्ट में है : एक बार काम आने वाले प्लास्टिक का ढेर, नालियों तथा जल-निकायों में उसका बहकर पहुँचना, और टूट-टूटकर सूक्ष्म-प्लास्टिक में बदलना। इसीलिए इस उद्योग पर नियंत्रण अपशिष्ट-प्रबंधन के नियमों से किया जाता है, बहिःस्राव के pH मानक से नहीं। ऐसे प्रश्न में यह पूछना उपयोगी है कि उद्योग की प्रक्रिया में अम्ल या क्षार कहीं आता भी है या नहीं; उत्तर ‘नहीं’ हो तो विकल्प तुरंत बाहर हो जाता है।
- (c)साबुन एवं डिटर्जेंट उद्योग — यह विकल्प उत्तर से ठीक उलटी दिशा में है, और इसी कारण इसे पहचानते ही आधा प्रश्न हल हो जाता है। साबुन बनता ही क्षार से है : वसा या तेल को कास्टिक सोडा जैसे प्रबल क्षार के साथ उबालकर साबुनीकरण किया जाता है, इसलिए संयंत्र से निकलने वाला जल क्षारीय होता है और नदी में मिलकर pH को नीचे नहीं, ऊपर ले जाता है। इसका अर्थ यह नहीं कि यह उद्योग हानिरहित है — डिटर्जेंट का बहिःस्राव अपने साथ फ़ॉस्फ़ेट लाता है, जो शैवाल की अंधाधुंध वृद्धि यानी सुपोषण (eutrophication) का कारण बनता है, और पृष्ठ-सक्रिय पदार्थ लाता है, जिनसे नदी पर झाग बनता है और जल की ऑक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता घटती है। पर वह सब अलग समस्या है। प्रश्न विशेष रूप से pH घटाने का कारण पूछ रहा है, और क्षारीय बहिःस्राव pH घटा ही नहीं सकता।
pH किसी विलयन में हाइड्रोजन आयन की सांद्रता का लघुगणकीय माप है : 7 उदासीन, उससे नीचे अम्लीय, ऊपर क्षारीय, और हर एक इकाई का अंतर दस गुने का अंतर है। स्वच्छ नदी-जल का pH प्रायः 6·5 से 8·5 के बीच रहता है, और उसे इस परिसर में बनाए रखने का काम जल में घुली कार्बोनेट-बाइकार्बोनेट क्षारकता करती है, जो एक प्राकृतिक उभयरोधी (buffer) की तरह काम करती है। जब कोई प्रबल खनिज अम्ल बहिःस्राव के साथ आता है तो पहले यही क्षारकता उसे सोखती है, और उसके चुकते ही pH तेज़ी से गिरने लगता है। यही कारण है कि अम्लीय बहिःस्राव का असर कुछ समय तक दिखाई नहीं देता और फिर अचानक भारी दिखने लगता है। pH गिरने के परिणाम केवल रासायनिक नहीं होते : मछलियों के गलफड़े और अंडे कम pH पर सीधे प्रभावित होते हैं, अनेक अकशेरुकी जीव जीवित नहीं रह पाते, और अम्लीय जल तलछट में जमी भारी धातुओं को घुलनशील बनाकर उन्हें खाद्य-शृंखला में लौटा देता है। अलग-अलग उद्योगों की पहचान अलग-अलग दोषों से बनती है — किसी की मुक्त अम्ल से, किसी की ऑक्सीजन की भारी माँग से, किसी की भारी धातुओं से, किसी की ऊष्मा से — और परीक्षा प्रायः इसी ‘पहचान वाले दोष’ पर टिकती है।
इस प्रश्न में ‘मुख्य कारण’ शब्द निर्णायक है, और उसी शब्द पर पूरा विवाद टिकता है। चार में से दो उद्योगों का बहिःस्राव सचमुच अम्लीय होता है, इसलिए अकेली अम्लता से उत्तर नहीं छँटता; छाँटने के लिए यह पूछना पड़ता है कि किस उद्योग की पहचान ही मुक्त खनिज अम्ल है। सीसा-अम्ल बैटरी संयंत्र में गंधक अम्ल कच्चा माल है, इसलिए वहाँ अम्ल का निकलना प्रक्रिया की अनिवार्य देन है; आसवनी में अम्लता किण्वन की उपज है और उसका मुख्य संकट ऑक्सीजन की माँग तथा रंग है, जिसके कारण भारत में उस बहिःस्राव को नदी में छोड़ने की अनुमति ही नहीं है। इस बनावट से दो सीखें निकलती हैं। पहली, पर्यावरण के प्रश्नों में हर उद्योग के साथ उसका ‘पहचान वाला प्रदूषक’ याद रखिए — बैटरी के साथ अम्ल और सीसा, आसवनी के साथ BOD तथा मेलेनॉइडिन, साबुन-डिटर्जेंट के साथ क्षार, फ़ॉस्फ़ेट और झाग, चीनी मिल के साथ भारी कार्बनिक भार, चमड़ा शोधन के साथ क्रोमियम, कागज़ लुगदी के साथ लिग्निन तथा विरंजन के उपोत्पाद। दूसरी, जब दो विकल्प एक ही दिशा में जाते दिखें तो प्रश्न का वह शब्द ढूँढ़िए जो ‘मुख्य’, ‘सबसे बड़ा’ या ‘विशेष रूप से’ कहता है — वही शब्द दोनों में से एक को चुनने का आधार देता है।
- सीसा-अम्ल बैटरी का विद्युत-अपघट्य तनु गंधक अम्ल है, इसलिए पट्टिका-संरूपण, धुलाई, परिपक्वन, अम्ल भरने और फ़र्श की सफ़ाई से निकलने वाला जल मुक्त खनिज अम्ल और घुला हुआ सीसा दोनों लिये होता है।
- गंधक अम्ल प्रबल अम्ल है और जल में लगभग पूरा वियोजित होता है, इसलिए वह उतनी ही मात्रा के दुर्बल कार्बनिक अम्ल की तुलना में कहीं अधिक हाइड्रोजन आयन देकर pH गिराता है।
- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सामान्य बहिःस्राव मानक अंतःस्थलीय पृष्ठ जल के लिए pH 5·5 से 9·0 के बीच माँगते हैं, इसलिए अम्लीय बहिःस्राव को छोड़ने से पहले उदासीन करना अनिवार्य है।
- स्वच्छ नदी-जल का pH प्रायः 6·5 से 8·5 के बीच रहता है और उसे कार्बोनेट-बाइकार्बोनेट क्षारकता उभयरोधी की तरह थामे रखती है; उस क्षारकता के चुकते ही pH तेज़ी से गिरता है।
- आसवनी का स्पेंट वॉश भी अम्लीय होता है और उसका pH प्रायः 5 से नीचे रहता है, पर उसकी पहचान अत्यंत ऊँचे BOD तथा COD और मेलेनॉइडिन से आए गहरे भूरे रंग से बनती है; केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शीरा-आधारित आसवनियों के लिए शून्य द्रव निस्सरण का अधिदेश दिया है।
- साबुन एवं डिटर्जेंट उद्योग का बहिःस्राव क्षारीय होता है, क्योंकि साबुनीकरण कास्टिक सोडा जैसे प्रबल क्षार से किया जाता है; वह pH घटाता नहीं, बढ़ाता है, और उसकी अलग समस्याएँ फ़ॉस्फ़ेट से होने वाला सुपोषण तथा पृष्ठ-सक्रिय पदार्थों से बनने वाला झाग हैं।
- सीसे का दूसरा और अधिक गंभीर संकट भारी धातु का है — वह शरीर में संचित होता है और विशेषकर बच्चों के तंत्रिका-तंत्र को हानि पहुँचाता है — पर यह प्रश्न विशेष रूप से pH के गिरने का कारण पूछता है।
- ‘मुख्य कारण’ को हल्के में पढ़ लेना; इस प्रश्न में एक से अधिक बहिःस्राव अम्लीय हैं और उत्तर उसी उद्योग का बनता है जिसकी पहचान ही मुक्त खनिज अम्ल है।
- साबुन एवं डिटर्जेंट को अम्लीय मान लेना; साबुनीकरण क्षार से होता है, इसलिए वह बहिःस्राव pH बढ़ाता है, घटाता नहीं।
- आसवनी को केवल अम्लता के आधार पर चुन लेना, उसके पहचान वाले संकट — अत्यधिक ऊँचे BOD तथा COD और गहरे रंग — को अनदेखा करके।
- सीसे की भारी-धातु हानि और अम्ल की pH हानि को एक मान लेना; दोनों एक ही उद्योग से आते हैं पर प्रश्न अलग-अलग पूछे जाते हैं।
- प्लास्टिक उद्योग की समस्या को बहिःस्राव में ढूँढ़ना; उसकी असली समस्या ठोस अपशिष्ट और सूक्ष्म-प्लास्टिक की है।
पर्यावरण के प्रश्न इस प्रश्नपत्र के सामान्य विज्ञान खंड में नियमित हैं और तीन रूपों में आते हैं। पहला रूप यही है — किसी प्रदूषक या असर का नाम देकर उसका स्रोत उद्योग पूछना, या उलटकर उद्योग देकर उसका मुख्य प्रदूषक पूछना। दूसरा रूप प्राचलों का है : BOD और COD का अर्थ, घुली ऑक्सीजन का महत्व, या किसी मानक का परिसर। तीसरा रूप संस्थागत है — कौन-सा बोर्ड मानक बनाता है, कौन-सा नियम किस अपशिष्ट पर लागू होता है, कौन-सी श्रेणी सबसे अधिक प्रदूषणकारी है। तीनों की तैयारी एक ही तालिका से हो जाती है जिसमें आठ-दस उद्योगों के सामने उनका पहचान वाला प्रदूषक और उसका मुख्य असर लिखा हो। उसी तालिका में यह भी जोड़ लीजिए कि किस उद्योग का बहिःस्राव अम्लीय है और किसका क्षारीय, क्योंकि इसी प्रश्नपत्र का एक और प्रश्न महासागरीय अम्लीकरण के कारण पर है और दोनों की पृष्ठभूमि एक ही है।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
साबुन एवं डिटर्जेंट उद्योग के बहिःस्राव के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन सही है?
- (a)वह प्रबल रूप से अम्लीय होता है और नदी-जल का pH घटा देता है
- (b)वह क्षारीय होता है और उसके साथ आने वाले फ़ॉस्फ़ेट सुपोषण का कारण बनते हैं
- (c)उसका मुख्य प्रदूषक घुला हुआ सीसा होता है
- (d)उसका कोई रासायनिक प्रभाव नहीं होता, केवल ऊष्मीय प्रभाव होता है
उत्तर(b) वह क्षारीय होता है और उसके साथ आने वाले फ़ॉस्फ़ेट सुपोषण का कारण बनते हैं — साबुनीकरण कास्टिक सोडा जैसे प्रबल क्षार से किया जाता है, इसलिए बहिःस्राव क्षारीय निकलता है; फ़ॉस्फ़ेट शैवाल-प्रस्फुटन को बढ़ाते हैं और पृष्ठ-सक्रिय पदार्थ झाग बनाते हैं।
- practice — not a real PYQ
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सामान्य बहिःस्राव मानकों के अनुसार, अंतःस्थलीय पृष्ठ जल में छोड़े जाने वाले बहिःस्राव का pH किस परिसर में होना चाहिए?
- (a)3·0 से 6·0
- (b)4·5 से 7·5
- (c)5·5 से 9·0
- (d)7·0 से 11·0
उत्तर(c) 5·5 से 9·0 — यही वह परिसर है जो अंतःस्थलीय पृष्ठ जल में निस्सरण के लिए निर्धारित है, और इसी कारण अम्लीय बहिःस्राव को छोड़ने से पहले प्रायः चूने से उदासीन किया जाता है।