जाल सांस्थितिकी (मेश टोपोलॉजी) में, यदि हमारे पास छः कम्प्यूटर हैं, तो कितने लिंक होने आवश्यक हैं?
- (a)6
- (b)12
- (c)13
- (d)15
सही उत्तर — D, (d) 15 — पूर्ण जाल सांस्थितिकी में n युक्तियों के लिए कड़ियों की संख्या n(n − 1)/2 होती है, और n = 6 रखने पर 6 × 5 ÷ 2 = 15 मिलता है। पहला क़दम — ‘जाल’ का अर्थ पकड़िए। जाल सांस्थितिकी की परिभाषा ही यह है कि हर युक्ति का हर दूसरी युक्ति के साथ अपना निजी, समर्पित बिंदु-से-बिंदु संपर्क हो। कोई साझा मुख्य तार नहीं, कोई बीच का हब नहीं — छः संगणक हैं तो पहले संगणक का दूसरे, तीसरे, चौथे, पाँचवें और छठे से सीधा तार होना चाहिए, और यही बात हर दूसरे संगणक पर भी लागू होगी। दूसरा क़दम — गिनिए, पर दो बार मत गिनिए। हर संगणक से (n − 1) यानी 5 तार निकलते हैं, इसलिए छहों को मिलाकर 6 × 5 = 30 तार-सिरे बनते हैं। किंतु हर कड़ी के दो सिरे होते हैं और वह दो संगणकों में साझा है, इसलिए इस 30 में हर कड़ी ठीक दो बार गिनी जा चुकी है। आधा कर दीजिए : 30 ÷ 2 = 15। यही n(n − 1)/2 वाला सूत्र है, और यह वही गिनती है जो छः बिंदुओं में से दो-दो के जोड़े बनाने पर मिलती है। तीसरा क़दम — छोटे उदाहरण से जाँच लीजिए। दो संगणक हों तो 2 × 1 ÷ 2 = 1 कड़ी — ठीक। तीन हों तो 3 × 2 ÷ 2 = 3 कड़ियाँ, अर्थात् त्रिभुज की तीन भुजाएँ — ठीक। चार हों तो 4 × 3 ÷ 2 = 6, अर्थात् वर्ग की चार भुजाएँ और दो विकर्ण — ठीक। यह जाँच पंद्रह सेकंड लेती है और आधा करना भूलने वाली सबसे आम भूल को तुरंत पकड़ लेती है। एक बात और, जो साथ में पूछी जाती है : हर युक्ति में (n − 1) निवेश-निर्गम द्वार (I/O ports) चाहिए, अर्थात् यहाँ पाँच। कड़ियों की संख्या और द्वारों की संख्या अलग-अलग राशियाँ हैं — पहली आधी की जाती है, दूसरी नहीं — और प्रश्न किसे पूछ रहा है यह पढ़कर ही तय करना चाहिए। जाल सांस्थितिकी की यही बनावट उसके गुण-दोष भी तय कर देती है। समर्पित कड़ी होने से यातायात आपस में टकराता नहीं, एक कड़ी टूटने पर पूरा संजाल ठप नहीं होता, संदेश बीच के किसी साझा माध्यम से नहीं गुज़रता इसलिए निजता बनी रहती है, और दोष कहाँ है यह पहचानना आसान होता है। दूसरी ओर तारों तथा द्वारों की संख्या युक्तियों के वर्ग की दर से बढ़ती है, इसलिए बड़ा जाल बिछाना महँगा और भारी पड़ता है — यही कारण है कि पूर्ण जाल प्रायः पूरे संजाल के बजाय उसकी रीढ़ वाले कुछ ही नोडों के बीच बनाया जाता है।
- (a)6 — 6 वह संख्या है जो प्रश्न में पहले ही दी जा चुकी है — संगणकों की गिनती — और उसे उत्तर मान लेना असल में कोई गणना न करने के बराबर है। इस विकल्प की एक दूसरी जड़ भी है, जो अधिक ख़तरनाक है : वलय सांस्थितिकी (ring topology) में सचमुच n युक्तियों के लिए n ही कड़ियाँ होती हैं, क्योंकि वहाँ हर युक्ति केवल अपने दो पड़ोसियों से जुड़ती है और अंतिम युक्ति पहली से जुड़कर घेरा पूरा कर देती है। इसलिए जिस अभ्यर्थी को सांस्थितिकियों के नाम ठीक से याद नहीं, वह वलय वाला सूत्र जाल पर लगा देता है और छः पर रुक जाता है। बचाव सीधा है : जाल का पूरा अर्थ ही ‘हर एक का हर दूसरे से’ है, इसलिए वहाँ कड़ियाँ युक्तियों से कहीं अधिक होंगी, बराबर कभी नहीं।
- (b)12 — 12 उस अभ्यर्थी को मिलता है जो हर संगणक के लिए दो कड़ियाँ मान लेता है और फिर 6 × 2 करके रुक जाता है। यह चित्र वलय सांस्थितिकी का है, जहाँ सचमुच हर युक्ति के दो पड़ोसी होते हैं; पर वहाँ भी उत्तर 12 नहीं होगा, क्योंकि हर कड़ी दो युक्तियों में साझा है और 6 × 2 = 12 को आधा करके 6 ही बचता है। अर्थात् यह विकल्प दो भूलें एक साथ करता है — जाल की जगह वलय का चित्र, और फिर आधा करना भूल जाना। इसी से इस अध्याय का सबसे उपयोगी नियम निकलता है : जब भी आप ‘हर युक्ति से इतनी कड़ियाँ’ गिनकर गुणा करें, अंत में दो से भाग देना अनिवार्य है, क्योंकि कड़ी युक्ति की संपत्ति नहीं, दो युक्तियों के बीच की साझी चीज़ है।
- (c)13 — 13 का कोई सूत्र नहीं है — न जाल का, न वलय का, न तारा (star) का, न बस (bus) का — और यही इसकी भूमिका है। यह सही उत्तर 15 से केवल दो कम है, इसलिए वह अभ्यर्थी इस पर आ टिकता है जो सूत्र ठीक-ठीक याद न होने पर ‘लगभग एक दर्जन से कुछ ऊपर’ का अनुमान लगाता है, या जो 6 × 5 ÷ 2 की गणना जल्दी में करके पंद्रह के आसपास कोई संख्या चुन लेता है। इस प्रकार के निकटवर्ती विकल्प का एक ही तोड़ है — अनुमान लगाने के बजाय सूत्र को छोटे मामले पर जाँच लेना। तीन युक्तियों का जाल त्रिभुज बनता है और उसमें तीन कड़ियाँ होती हैं; यदि आपका सूत्र यह मान देता है तो वह छः युक्तियों पर भी ठीक चलेगा, और तब 13 जैसी कोई संख्या बचती ही नहीं।
सांस्थितिकी (topology) से अभिप्राय है कि संजाल की युक्तियाँ आपस में किस ज्यामितीय ढंग से जोड़ी गई हैं। ध्यान रहे कि यह वही शब्द है जो गणित में एक पूरी शाखा का नाम है; यहाँ उसका अर्थ केवल संजाल की बनावट है, और पुस्तिका इसीलिए कोष्ठक में ‘मेश टोपोलॉजी’ लिखकर संदेह मिटा देती है। मूल सांस्थितिकियाँ चार हैं। जाल (mesh) में हर युक्ति का हर दूसरी युक्ति से समर्पित बिंदु-से-बिंदु संपर्क होता है, इसलिए कड़ियाँ n(n − 1)/2 और हर युक्ति में n − 1 द्वार चाहिए। तारा (star) में हर युक्ति केवल एक केंद्रीय नियंत्रक या हब से जुड़ती है, इसलिए n युक्तियों के लिए n कड़ियाँ लगती हैं और हब का बिगड़ना पूरे संजाल को रोक देता है। बस (bus) में एक ही मुख्य तार होता है जिससे सब युक्तियाँ अवतरण-रेखाओं और टैप के ज़रिए लटकती हैं, इसलिए तार सबसे कम लगता है पर एक ही माध्यम साझा होने से टकराव और लंबाई की सीमा दोनों आ जाती हैं। वलय (ring) में हर युक्ति अपने दो पड़ोसियों से जुड़ती है और अंतिम पहली से मिलकर घेरा पूरा करती है, इसलिए n युक्तियों के लिए n कड़ियाँ होती हैं और संदेश एक ही दिशा में घूमकर गंतव्य तक पहुँचता है। व्यवहार में बड़े संजाल इन्हीं को मिलाकर बनाए जाते हैं, और उसे संकर (hybrid) सांस्थितिकी कहते हैं।
इस प्रश्न में गिनती ही पूरी सामग्री है, इसलिए तैयारी का सारा भार एक सूत्र और एक सावधानी पर है : सूत्र n(n − 1)/2, और सावधानी यह कि कड़ी दो युक्तियों में साझा होती है इसलिए दोहरी गिनती हटानी पड़ती है। यही गिनती गणित में द्विघात संयोजन के रूप में मिलती है — n वस्तुओं में से दो चुनने के तरीक़े — और इसी से सूत्र याद रखना आसान हो जाता है, क्योंकि कड़ी असल में दो संगणकों का एक जोड़ा ही है। दूसरी बात, प्रश्नपत्र इसी अध्याय से उलटी दिशा में भी पूछता है : कड़ियों की संख्या देकर युक्तियों की संख्या पूछ लेना, जहाँ n(n − 1) = 2 × कड़ियाँ हल करना पड़ता है। तीसरी बात, कड़ियों की संख्या और प्रति-युक्ति द्वारों की संख्या को गड्डमड्ड नहीं करना चाहिए — पहली आधी होती है, दूसरी नहीं — और परीक्षा दोनों को बारी-बारी पूछती रही है। अंत में एक व्यावहारिक बात, जो उत्तर लिखने के काम आती है : पूर्ण जाल इसीलिए दुर्लभ है कि उसका तार-भार युक्तियों के वर्ग की दर से बढ़ता है, इसलिए वह प्रायः पूरे संजाल में नहीं, केवल कुछ महत्वपूर्ण नोडों की रीढ़ में बिछाया जाता है।
- पूर्ण जाल सांस्थितिकी में n युक्तियों के लिए कड़ियों की संख्या n(n − 1)/2 होती है; n = 6 पर यह 6 × 5 ÷ 2 = 15 है।
- आधा इसलिए किया जाता है कि हर संगणक से (n − 1) सिरे निकलते हैं और हर कड़ी दो संगणकों में साझा होने के कारण उस गिनती में दो बार आ जाती है।
- जाल सांस्थितिकी में हर युक्ति को (n − 1) निवेश-निर्गम द्वार चाहिए — यहाँ पाँच; यह संख्या आधी नहीं की जाती और कड़ियों की संख्या से अलग है।
- जाल के गुण : समर्पित कड़ी होने से यातायात का टकराव नहीं, एक कड़ी टूटने पर पूरा संजाल ठप नहीं, संदेश साझा माध्यम से न गुज़रने के कारण निजता, और दोष पहचानने में आसानी।
- जाल का दोष : तारों तथा द्वारों की संख्या युक्तियों के वर्ग की दर से बढ़ती है, इसलिए बिछाना, जगह देना और बदलना तीनों महँगे पड़ते हैं।
- तुलना के लिए — तारा सांस्थितिकी में n युक्तियों के लिए n कड़ियाँ (हर युक्ति हब से), वलय में भी n कड़ियाँ (हर युक्ति दो पड़ोसियों से, घेरा पूरा), और बस में एक ही मुख्य तार जिससे सब अवतरण-रेखाओं द्वारा जुड़ती हैं।
- शब्दावली : पुस्तिका ‘mesh topology’ को ‘जाल सांस्थितिकी’ लिखकर कोष्ठक में ‘मेश टोपोलॉजी’ भी देती है; सांस्थितिकी शब्द गणित की एक शाखा का नाम भी है, पर यहाँ उसका अर्थ केवल संजाल की बनावट है।
- दो से भाग देना भूल जाना और n(n − 1) यानी 30 लिख देना; कड़ी दो युक्तियों में साझा होती है, इसलिए दोहरी गिनती हटानी ही पड़ती है।
- वलय सांस्थितिकी का चित्र जाल पर लगा देना और उत्तर छः या बारह मान लेना।
- कड़ियों की संख्या और प्रति-युक्ति द्वारों की संख्या को एक मान लेना; कड़ियाँ n(n − 1)/2 हैं जबकि द्वार n − 1।
- सूत्र याद न होने पर निकटवर्ती संख्या का अनुमान लगा लेना; छोटे मामलों पर जाँच — दो युक्तियों पर एक कड़ी, तीन पर तीन — कुछ ही क्षण में सही सूत्र पकड़ा देती है।
- उलटी दिशा वाले प्रश्न में n(n − 1)/2 = कड़ियाँ हल करते समय n(n − 1) = 2 × कड़ियाँ लिखना भूल जाना।
संजाल की सांस्थितिकियाँ इस प्रश्नपत्र के कंप्यूटर खंड की स्थायी सामग्री हैं और तीन रूपों में आती हैं। पहला रूप यही गणना वाला है : युक्तियों की संख्या देकर कड़ियाँ या द्वार पूछना, अथवा उलटकर कड़ियाँ देकर युक्तियाँ पूछना। दूसरा रूप पहचान का है — किसी सांस्थितिकी का वर्णन देकर उसका नाम पूछना, जैसे ‘जिसमें एक ही मुख्य तार से सब युक्तियाँ लटकती हैं’ या ‘जिसमें केंद्रीय हब का बिगड़ना पूरा संजाल रोक देता है’। तीसरा रूप गुण-दोष का है : कौन-सी सांस्थितिकी सबसे कम तार लेती है, कौन-सी एक कड़ी टूटने पर भी चलती रहती है, कौन-सी में दोष ढूँढ़ना सबसे आसान है। तीनों के लिए एक ही तालिका पर्याप्त है, जिसमें चारों सांस्थितिकियों के सामने कड़ियों का सूत्र, एक मुख्य गुण और एक मुख्य दोष लिखा हो।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
पूर्ण जाल सांस्थितिकी में यदि n युक्तियाँ जुड़ी हों, तो प्रत्येक युक्ति में कितने निवेश-निर्गम द्वार (I/O ports) होने चाहिए?
- (a)n
- (b)n − 1
- (c)n(n − 1)/2
- (d)सदैव दो
उत्तर(b) n − 1 — जाल में हर युक्ति शेष सभी युक्तियों से सीधे जुड़ती है, इसलिए उसे अपने अतिरिक्त बची हुई (n − 1) युक्तियों के लिए उतने ही द्वार चाहिए। यह संख्या आधी नहीं की जाती; आधा केवल कड़ियों की कुल गिनती को किया जाता है, क्योंकि कड़ी दो युक्तियों में साझा होती है।
- practice — not a real PYQ
किसी पूर्ण जाल सांस्थितिकी में कुल 21 कड़ियाँ हैं। उसमें कितनी युक्तियाँ जुड़ी हुई हैं?
- (a)6
- (b)7
- (c)8
- (d)21
उत्तर(b) 7 — n(n − 1)/2 = 21 से n(n − 1) = 42 मिलता है, और लगातार दो पूर्णांकों का गुणनफल 42 केवल 7 × 6 पर बनता है, इसलिए n = 7।