अष्टाधारी संख्या 473 की द्वि-आधारी समतुल्य संख्या क्या है?
- (a)100111011
- (b)100111111
- (c)110111011
- (d)110001011
सही उत्तर — A, (a) 100111011 — अष्टाधारी का हर अंक ठीक तीन द्विआधारी अंकों में खुलता है, और 4, 7, 3 क्रमशः 100, 111, 011 बनते हैं, जिन्हें उसी क्रम में जोड़ देने पर 100111011 मिलता है। पहला क़दम — यह समझिए कि तीन ही क्यों। अष्टाधारी का आधार 8 है और 8 = 2³, इसलिए एक अष्टाधारी अंक जितनी सूचना रखता है उतनी ही ठीक तीन द्विआधारी अंक रखते हैं। यही कारण है कि इन दोनों पद्धतियों के बीच बदलने के लिए दशमलव से होकर जाने की ज़रूरत नहीं पड़ती — अंक-दर-अंक सीधा अनुवाद हो जाता है। इसी तर्क से षोडश-आधारी का हर अंक चार द्विआधारी अंकों में खुलता है, क्योंकि 16 = 2⁴। दूसरा क़दम — तालिका लगाइए। 0 = 000, 1 = 001, 2 = 010, 3 = 011, 4 = 100, 5 = 101, 6 = 110, 7 = 111। अब 473 के अंकों पर बारी-बारी लगाइए : 4 → 100, 7 → 111, 3 → 011। इन्हें उसी क्रम में सटाइए, और यहीं सबसे बड़ी सावधानी है — हर समूह पूरे तीन अंकों का रहना चाहिए, इसलिए 3 को केवल 11 लिखकर नहीं छोड़ा जा सकता, उसका अगुआ शून्य 011 में रहना ही चाहिए। जोड़ने पर 100 111 011, अर्थात् 100111011। तीसरा क़दम — दशमलव से जाँच लीजिए, क्योंकि यही जाँच सारी भूलें पकड़ती है। 473 अष्टाधारी का मान 4 × 8² + 7 × 8 + 3 = 256 + 56 + 3 = 315 है। अब उत्तर को दशमलव में पढ़िए : 100111011 में जिन स्थानों पर 1 है उनके स्थानीय मान 256, 32, 16, 8, 2 और 1 हैं, और 256 + 32 + 16 + 8 + 2 + 1 = 315। दोनों मिल गए, इसलिए उत्तर पक्का है। एक अतिरिक्त बात जो साथ में पूछ ली जाती है : यही संख्या षोडश-आधारी में 13B बनती है, क्योंकि 315 = 1 × 256 + 3 × 16 + 11 और 11 के लिए संकेत B है। उलटी दिशा में भी नियम वही है — द्विआधारी से अष्टाधारी जाना हो तो दाहिने सिरे से तीन-तीन अंकों के समूह बनाइए, और यदि सबसे बाएँ समूह में अंक कम पड़ें तो उसके आगे शून्य लगाकर तीन पूरे कर लीजिए।
- (b)100111111 — यह उत्तर तब बनता है जब अंतिम अंक 3 का समूह 011 के बजाय 111 लिख दिया जाए। इसे उलटकर पढ़ लीजिए — 100 111 111 के तीन समूह क्रमशः 4, 7 और 7 हैं, अर्थात् यह संख्या 473 नहीं, 477 अष्टाधारी है, और दशमलव में 4 × 64 + 7 × 8 + 7 = 319 होती है, जबकि हमें 315 चाहिए। इस भूल की जड़ प्रायः यह होती है कि आँख पिछले अंक 7 के समूह 111 पर टिकी रह जाती है और अगला समूह भी वैसा ही लिख दिया जाता है। यही कारण है कि रूपांतरण करते समय तीनों समूह पहले अलग-अलग कागज़ पर लिखकर फिर जोड़ना अधिक सुरक्षित है, और उसके बाद दशमलव वाली जाँच लगा लेना चाहिए, जो इस विकल्प को तुरंत बाहर कर देती है।
- (c)110111011 — यहाँ पहला समूह 100 के बजाय 110 लिखा गया है। उलटकर पढ़िए तो 110 111 011 के अंक 6, 7 और 3 हैं, अर्थात् यह संख्या 673 अष्टाधारी है, दशमलव में 6 × 64 + 7 × 8 + 3 = 443 — दिए गए 315 से कहीं दूर। 110 अंक 6 का चित्र है, 4 का नहीं; 4 = 2² होने से उसका चित्र 100 है, जिसमें केवल चार वाले स्थान पर एक होता है, जबकि 110 में चार और दो दोनों स्थानों पर एक है। तीन अंकों की यह तालिका इतनी छोटी है कि उसे कागज़ पर उतार लेना सबसे सस्ता बचाव है, विशेषकर इसलिए कि 100 और 110 जैसे पड़ोसी चित्र जल्दी में एक जैसे दिखते हैं।
- (d)110001011 — इस विकल्प में दो समूह बिगड़े हुए हैं। 110 001 011 को उलटकर पढ़िए तो अंक 6, 1 और 3 निकलते हैं, अर्थात् यह 613 अष्टाधारी है और दशमलव में 6 × 64 + 1 × 8 + 3 = 395 होती है। पहले समूह में वही 4 के बदले 6 वाली भूल है जो विकल्प (c) में है, और बीच वाले समूह में 7 का चित्र 111 के बजाय 001 लिख दिया गया है, जो अंक 1 का चित्र है। दो-दो समूह ग़लत होने से यह विकल्प सबसे दूर पड़ता है और इसीलिए सबसे कम ललचाता है; पर इसकी उपयोगिता यह है कि यह उलटकर पढ़ने की आदत सिखा देता है। किसी भी रूपांतरण-प्रश्न में हर असत्य विकल्प स्वयं किसी न किसी संख्या का सही रूपांतरण होता है, और यह देख लेना कि वह कौन-सी संख्या है, अपनी भूल का ठिकाना तुरंत बता देता है।
संख्या पद्धतियाँ इस बात में भिन्न होती हैं कि उनका आधार क्या है, अर्थात् एक स्थान से अगले स्थान पर जाते हुए स्थानीय मान कितने गुना बढ़ता है। द्विआधारी का आधार 2 है और उसमें केवल 0 तथा 1 अंक चलते हैं; अष्टाधारी का 8 है और उसमें 0 से 7 तक; दशमलव का 10 है; और षोडश-आधारी का 16 है, जिसमें 9 के बाद A से F तक के संकेत 10 से 15 का काम करते हैं। संगणक भीतर से द्विआधारी में ही काम करता है, पर लंबी बिट-शृंखलाएँ मनुष्य के लिए पढ़ना कठिन हैं, इसलिए उन्हें छोटा करके लिखने के लिए अष्टाधारी और षोडश-आधारी का प्रयोग होता है। इन दोनों की सुविधा इस बात से आती है कि उनके आधार दो की घातें हैं : 8 = 2³ होने से एक अष्टाधारी अंक ठीक तीन बिट के बराबर है, और 16 = 2⁴ होने से एक षोडश-आधारी अंक ठीक चार बिट के बराबर। इसीलिए इन पद्धतियों और द्विआधारी के बीच रूपांतरण समूह बनाकर सीधे हो जाता है, जबकि दशमलव के साथ ऐसा नहीं है — 10 दो की घात नहीं है, इसलिए दशमलव से द्विआधारी जाने के लिए बार-बार दो से भाग देकर शेषफल उलटे क्रम में लिखने पड़ते हैं।
इस अध्याय की पूरी तैयारी तीन अंकों की एक तालिका और एक अनुशासन पर टिकी है। तालिका है 0 से 7 तक के अंकों के तीन-बिट चित्र, और अनुशासन यह कि हर समूह पूरे तीन अंकों का लिखा जाए — अगुआ शून्य छोड़ देने से पूरी शृंखला एक स्थान खिसक जाती है और उत्तर बदल जाता है। इसके ऊपर एक जाँच है जो लगभग मुफ़्त पड़ती है : दोनों संख्याओं को दशमलव में बदलकर मिला लेना। यहाँ दिया गया 473 दशमलव में 315 है और सही उत्तर भी 315, इसलिए संदेह की कोई गुंजाइश नहीं बचती। दूसरी बात, असत्य विकल्पों की बनावट देखने योग्य है : तीनों स्वयं किसी न किसी अष्टाधारी संख्या के ठीक-ठीक रूपांतरण हैं — 477, 673 और 613 — अर्थात् कोई भी विकल्प यों ही नहीं गढ़ा गया, हर एक किसी विशेष भूल का परिणाम है। ऐसे प्रश्न में सबसे तेज़ विधि यही है कि विकल्पों को उलटकर अष्टाधारी में पढ़ लिया जाए और देखा जाए कि 473 किसमें बनता है; इससे गणना दोनों दिशाओं में जाँची जाती है और समय भी कम लगता है।
- 8 = 2³ होने के कारण अष्टाधारी का प्रत्येक अंक ठीक तीन द्विआधारी अंकों के बराबर है, इसलिए दोनों के बीच रूपांतरण दशमलव से गुज़रे बिना अंक-दर-अंक हो जाता है।
- तीन-बिट तालिका : 0 = 000, 1 = 001, 2 = 010, 3 = 011, 4 = 100, 5 = 101, 6 = 110, 7 = 111।
- 473 अष्टाधारी में 4 → 100, 7 → 111 और 3 → 011 रखकर जोड़ने पर 100111011 मिलता है; अंतिम समूह का अगुआ शून्य छोड़ा नहीं जा सकता।
- जाँच के लिए दशमलव : 473 अष्टाधारी = 4 × 64 + 7 × 8 + 3 = 315, और 100111011 द्विआधारी = 256 + 32 + 16 + 8 + 2 + 1 = 315।
- 16 = 2⁴ होने से षोडश-आधारी का हर अंक चार बिट के बराबर है; वही संख्या 315 षोडश-आधारी में 13B लिखी जाती है।
- उलटी दिशा में द्विआधारी से अष्टाधारी जाने के लिए दाहिने सिरे से तीन-तीन अंकों के समूह बनाए जाते हैं और सबसे बाएँ समूह में कमी हो तो आगे शून्य लगाकर तीन पूरे कर लिए जाते हैं।
- दशमलव का आधार 10 दो की घात नहीं है, इसलिए दशमलव से द्विआधारी जाने के लिए बार-बार दो से भाग देकर शेषफल उलटे क्रम में पढ़ने पड़ते हैं — वहाँ समूह वाली सुविधा नहीं मिलती।
- किसी समूह का अगुआ शून्य छोड़ देना, जैसे 3 को 011 के बजाय 11 लिख देना; इससे पूरी शृंखला खिसक जाती है और उत्तर बदल जाता है।
- 4 का चित्र 100 है, 110 नहीं — पड़ोसी चित्र जल्दी में एक जैसे दिखते हैं, इसलिए तालिका सामने रखकर लिखना चाहिए।
- समूह की दिशा भूल जाना; द्विआधारी से अष्टाधारी जाते समय समूह दाहिने सिरे से बनते हैं, बाएँ से नहीं।
- अष्टाधारी में 8 या 9 अंक मान लेना; अष्टाधारी में अंक केवल 0 से 7 तक होते हैं, और यही बात परीक्षा में अलग से भी पूछी जाती है।
- जाँच छोड़ देना; दोनों संख्याओं को दशमलव में बदलकर मिला लेने में कुछ ही क्षण लगते हैं और वही जाँच तीनों असत्य विकल्पों को एक साथ बाहर कर देती है।
संख्या पद्धतियों से इस प्रश्नपत्र में लगभग हर वर्ष एक प्रश्न आता है और वह प्रायः सीधा रूपांतरण ही होता है : अष्टाधारी से द्विआधारी, षोडश-आधारी से दशमलव, या दशमलव से द्विआधारी। कभी-कभी वह जोड़-घटाव के रूप में भी आता है, जहाँ दो द्विआधारी संख्याओं का योग किसी दूसरे आधार में पूछ लिया जाता है, और कभी परिभाषा के रूप में — किस पद्धति में कौन-से अंक चलते हैं। इसी प्रश्नपत्र में एक और प्रश्न षोडश-आधारी संख्या का दशमलव मान पूछता है, इसलिए दोनों नियम — तीन बिट प्रति अष्टाधारी अंक और चार बिट प्रति षोडश-आधारी अंक — साथ-साथ याद रखने चाहिए। तैयारी के लिए दो तालिकाएँ पर्याप्त हैं : 0 से 7 तक के तीन-बिट चित्र और 0 से F तक के चार-बिट चित्र। इनके बाद हर रूपांतरण देखने भर का काम रह जाता है, और बची हुई एकमात्र सावधानी अगुआ शून्य की है।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
अष्टाधारी संख्या 156 की द्वि-आधारी समतुल्य संख्या क्या है?
- (a)1101110
- (b)1101101
- (c)1110110
- (d)1011110
उत्तर(a) 1101110 — 1 → 001, 5 → 101 और 6 → 110 रखकर जोड़ने पर 001101110 मिलता है, जिसका अगुआ शून्य हटाने पर 1101110 बचता है। जाँच : 156 अष्टाधारी = 64 + 40 + 6 = 110, और 1101110 = 64 + 32 + 8 + 4 + 2 = 110।
- practice — not a real PYQ
द्वि-आधारी संख्या 110101 की अष्टाधारी समतुल्य संख्या क्या है?
- (a)55
- (b)65
- (c)15
- (d)32
उत्तर(b) 65 — दाहिने सिरे से तीन-तीन के समूह बनाइए : 110 और 101, जो क्रमशः 6 और 5 हैं, इसलिए उत्तर 65 अष्टाधारी है। जाँच : 110101 द्विआधारी = 32 + 16 + 4 + 1 = 53, और 65 अष्टाधारी = 6 × 8 + 5 = 53।