निम्नलिखित में से कौन-सा एक, सही IP ऐड्रेस नहीं है?
- (a)201.54.122.107
- (b)102.45.221.710
- (c)102.45.201.22
- (d)250.234.123.124
सही उत्तर — B, (b) 102.45.221.710 — इस पते का अंतिम अष्टक 710 है, और कोई भी अष्टक 255 से बड़ा नहीं हो सकता, इसलिए यह IPv4 पता है ही नहीं। पहले पूछ को ठीक से पढ़िए। प्रश्न नकारात्मक है — पुस्तिका में ‘नहीं’ मोटे अक्षरों में छपा है — इसलिए खोजना उस अकेले पते को है जो लिखने के नियम ही तोड़ता हो, न कि यह कि कौन-सा पता किसी वास्तविक संगणक को दिया गया है। पहला क़दम — नियम को याद कीजिए। IPv4 पता कुल 32 बिट का होता है और उसे पढ़ने-लिखने की सुविधा के लिए चार बराबर टुकड़ों में बाँट दिया जाता है, जिन्हें अष्टक (octet) कहते हैं और बिंदुओं से अलग करके दशमलव में लिखा जाता है — इसी को बिंदु-दशमलव संकेतन (dotted-decimal notation) कहते हैं। प्रत्येक अष्टक ठीक 8 बिट का है, और 8 बिट से कुल 2⁸ = 256 भिन्न मान बनते हैं, अर्थात् 0 से लेकर 255 तक। यही पूरी कसौटी है : चार संख्याएँ, तीन बिंदु, और हर संख्या 0 और 255 के बीच। दूसरा क़दम — चारों को इस कसौटी पर तौलिए। विकल्प (a) के अष्टक 201, 54, 122 और 107 हैं; (c) के 102, 45, 201 और 22; (d) के 250, 234, 123 और 124। तीनों में चारों संख्याएँ 255 से छोटी या बराबर हैं, इसलिए तीनों पते नियम के अनुसार सही लिखे गए हैं। विकल्प (b) के अष्टक 102, 45, 221 और 710 हैं — अंतिम संख्या 710 है, जो 255 से कहीं बड़ी है। 710 को द्विआधारी में लिखने के लिए दस बिट चाहिए (1011000110), जबकि उस स्थान पर केवल आठ बिट की जगह है। इसलिए यह पता किसी भी मशीन को दिया ही नहीं जा सकता, और यही नकारात्मक पूछ का उत्तर है। तीसरा क़दम — बनावट देख लीजिए। विकल्प (b) और (c) के पहले दो अष्टक एक ही हैं, 102 और 45; अंतर केवल पिछले दो में है। यह संयोग नहीं है — प्रश्न बनाने वाला चाहता है कि आँख शुरू के अंकों की समानता पर टिक जाए और अंतिम अष्टक जल्दी में पढ़ लिया जाए। ऐसे प्रश्नों में हर पते को बाएँ से दाएँ पढ़ने के बजाय चारों अंतिम अष्टक पहले पढ़ लेना अधिक सुरक्षित है, क्योंकि परिसर तोड़ने वाली संख्या प्रायः वहीं छिपाई जाती है।
- (a)201.54.122.107 — यह पूरी तरह सही IPv4 पता है, इसलिए नकारात्मक पूछ का उत्तर नहीं है। इसके चारों अष्टक — 201, 54, 122 और 107 — 0 और 255 के बीच हैं, इसलिए हर एक आठ बिट में समा जाता है। पहला अष्टक 201 होने से यह पता परंपरागत श्रेणी-विभाजन में वर्ग C में आता है, क्योंकि वर्ग C का पहला अष्टक 192 से 223 तक होता है; वर्ग C के पतों में शुरू के 24 बिट संजाल (network) की पहचान बताते हैं और अंतिम 8 बिट उस संजाल के भीतर के परिचारिका-संगणक (host) की, इसलिए ऐसा एक संजाल अधिकतम 254 उपयोग-योग्य पते दे पाता है। ध्यान रहे कि यह श्रेणी-विभाजन आज केवल पढ़ाई की सुविधा भर है — व्यवहार में CIDR ने उसकी जगह ले ली है — पर परीक्षा में पहला अष्टक देखकर वर्ग बता देना अब भी नियमित रूप से पूछा जाता है।
- (c)102.45.201.22 — यह भी सही पता है और इसीलिए उत्तर नहीं है, यद्यपि यह इस प्रश्न का सबसे चतुर विकल्प है : इसके पहले दो अष्टक — 102 और 45 — कुंजी वाले विकल्प (b) से हूबहू मिलते हैं, इसलिए दोनों को साथ-साथ पढ़ने वाला अभ्यर्थी सोच सकता है कि दोष दोनों में एक जैसा होगा या दोनों में एक जैसा नहीं होगा। यहाँ चारों अष्टक 102, 45, 201 और 22 हैं, चारों 255 से छोटे, इसलिए पता निर्दोष है। पहला अष्टक 102 होने के कारण यह वर्ग A का पता है, जिसका पहला अष्टक 1 से 126 तक होता है; वर्ग A में केवल पहले आठ बिट संजाल की पहचान बताते हैं, इसीलिए ऐसे संजाल बहुत बड़े होते हैं। इस विकल्प से सीखने की बात यह है कि पते की जाँच अष्टक-दर-अष्टक करनी चाहिए, दूसरे पते से तुलना करके नहीं।
- (d)250.234.123.124 — यह भी सही ढंग से लिखा गया पता है, इसलिए उत्तर नहीं है — यद्यपि इस पर उँगली रुक सकती है, क्योंकि इसके अष्टक बड़े दिखते हैं। 250, 234, 123 और 124 — चारों 255 से छोटे या बराबर हैं, इसलिए चारों आठ-आठ बिट में समा जाते हैं और पता बिंदु-दशमलव नियम का पूरा पालन करता है। एक और कारण से यह विकल्प ललचाता है : पहला अष्टक 250 होने से यह पता वर्ग E के परिसर (240 से 255) में पड़ता है, जो प्रयोगात्मक उपयोग के लिए आरक्षित रखा गया है, इसलिए साधारण परिचारिका-संगणकों को ऐसे पते बाँटे नहीं जाते। किंतु आरक्षण आवंटन की नीति है, लिखावट का नियम नहीं; प्रश्न यह पूछ रहा है कि कौन-सा पता सही रूप में लिखा ही नहीं गया, और उस कसौटी पर यह पता खरा उतरता है। यही भेद — ‘सही ढंग से लिखा गया’ बनाम ‘वास्तव में बाँटा जाने वाला’ — इस विकल्प की पूरी सीख है।
IPv4 पता 32 बिट की एक संख्या है जो किसी संजाल पर जुड़ी हर युक्ति को पहचान देती है। मनुष्य के पढ़ने के लिए इसे चार आठ-बिट टुकड़ों में बाँटकर बिंदुओं से अलग दशमलव में लिखा जाता है, और चूँकि आठ बिट से 2⁸ = 256 मान बनते हैं, हर टुकड़ा 0 से 255 तक ही हो सकता है। इसलिए किसी पते की वैधता जाँचने का पहला और सबसे सस्ता तरीक़ा यही है : चार संख्याएँ हैं या नहीं, और हर एक 255 के भीतर है या नहीं। पूरे 32 बिट से लगभग 4·3 अरब पते बनते हैं, जो इंटरनेट के फैलाव के सामने कम पड़ गए — यही IPv6 की ओर बढ़ने का कारण बना, जो 128 बिट का है और जिसे आठ समूहों में षोडश-आधारी अंकों से लिखा जाता है। पते का हर हिस्सा एक ही काम नहीं करता : उसका आगे का भाग संजाल की पहचान बताता है और पीछे का भाग उस संजाल के भीतर की युक्ति की। पहले यह विभाजन श्रेणियों से तय होता था — वर्ग A (पहला अष्टक 1 से 126), वर्ग B (128 से 191), वर्ग C (192 से 223), वर्ग D (224 से 239, बहुप्रसारण के लिए) और वर्ग E (240 से 255, प्रयोगात्मक उपयोग के लिए आरक्षित) — और 127 से शुरू होने वाला परिसर स्वयं मशीन को लौटाने वाले पते (loopback) के लिए रखा गया है। आज व्यवहार में यह श्रेणी-विभाजन CIDR ने बदल दिया है, जिसमें संजाल का आकार पते के साथ लिखे उपसर्ग से बताया जाता है, जैसे 192.168.1.0/24।
इस प्रश्नपत्र का कंप्यूटर खंड सिद्धांत कम और परिभाषा की सीमाएँ अधिक पूछता है, और यह प्रश्न उसी का उदाहरण है : यहाँ न उपजाल-नकाब निकालना है, न श्रेणी बतानी है, केवल यह देखना है कि कौन-सी संख्या अपने डिब्बे में समाती ही नहीं। ऐसे प्रश्न कुछ सेकंड में हल हो जाते हैं यदि नियम याद हो, और पूरी तरह छूट जाते हैं यदि याद न हो — इसलिए इस अध्याय की तैयारी में परिसर याद रखना सबसे ऊँची प्राथमिकता है। दूसरी बात, इस प्रश्न की बनावट में एक जाल जान-बूझकर रखा गया है : कुंजी वाला पता और एक असत्य विकल्प अपने पहले दो अष्टकों में एक जैसे हैं, इसलिए जल्दी में पढ़ने वाला अंतर पिछले हिस्से में नहीं ढूँढ़ता। तीसरी बात, वर्ग E वाला पता उन अभ्यर्थियों को ललचाने के लिए रखा गया है जिन्होंने आरक्षित परिसर पढ़ रखे हैं; ऐसे विकल्प में सही कदम यह पूछना है कि प्रश्न किस बात पर टिका है — लिखावट के नियम पर या आवंटन की नीति पर। निजी उपयोग के लिए आरक्षित परिसर — 10 से शुरू होने वाला पूरा वर्ग, 172.16 से 172.31 तक, और 192.168 से शुरू होने वाला परिसर — इसी अध्याय का दूसरा नियमित प्रश्न है और उसे साथ ही याद कर लेना चाहिए।
- IPv4 पता 32 बिट का होता है और उसे चार अष्टकों में बाँटकर बिंदु-दशमलव संकेतन में लिखा जाता है; हर अष्टक ठीक 8 बिट का है, इसलिए उसका मान 0 से 255 तक ही हो सकता है।
- 710 को द्विआधारी में लिखने के लिए दस बिट चाहिए, इसलिए 102.45.221.710 किसी IPv4 पते का रूप ले ही नहीं सकता — यही इस प्रश्न की एकमात्र कसौटी है।
- परंपरागत श्रेणी-विभाजन में पहला अष्टक 1 से 126 होने पर वर्ग A, 128 से 191 होने पर वर्ग B, 192 से 223 होने पर वर्ग C, 224 से 239 होने पर वर्ग D (बहुप्रसारण) और 240 से 255 होने पर वर्ग E (प्रयोगात्मक उपयोग के लिए आरक्षित) होता है।
- 127 से शुरू होने वाला परिसर स्वयं मशीन को लौटाने वाले पते के लिए रखा गया है, जिसका सबसे परिचित रूप 127.0.0.1 है।
- किसी पते का आरक्षित परिसर में होना उसे ग़लत नहीं बनाता — आरक्षण आवंटन की नीति है, जबकि 0 से 255 की सीमा लिखावट का नियम है; यह भेद इस प्रश्न के एक विकल्प का पूरा आधार है।
- निजी उपयोग के लिए आरक्षित परिसर 10.0.0.0 से 10.255.255.255, 172.16.0.0 से 172.31.255.255 तथा 192.168.0.0 से 192.168.255.255 हैं; ये पते इंटरनेट पर सीधे मार्गित नहीं होते।
- 32 बिट से लगभग 4·3 अरब पते ही बनते हैं, और यही कमी IPv6 की ओर बढ़ने का कारण बनी, जो 128 बिट का है और आठ समूहों में षोडश-आधारी अंकों से लिखा जाता है।
- अष्टक की ऊपरी सीमा 256 याद रख लेना; 8 बिट से 256 मान बनते हैं, पर वे 0 से 255 तक हैं, इसलिए 256 स्वयं किसी अष्टक का मान नहीं हो सकता।
- दो पतों के शुरू के अष्टक एक जैसे देखकर आगे की जाँच छोड़ देना; इस प्रश्न में दोष अंतिम अष्टक में छिपाया गया है।
- आरक्षित परिसर के पते को ‘ग़लत पता’ मान लेना; वर्ग E और निजी परिसर के पते नियम से पूरी तरह सही लिखे होते हैं, केवल उनका उपयोग सीमित है।
- वर्ग D और वर्ग E की सीमाएँ आपस में बदल देना; 224 से 239 बहुप्रसारण के लिए है और 240 से 255 प्रयोगात्मक उपयोग के लिए।
- नकारात्मक पूछ में पहला ‘अटपटा दिखने वाला’ पता चुन लेना, बिना चारों को परिसर की कसौटी पर तौले।
इस अध्याय से पूछ तीन ही रूपों में आती है। पहला रूप यही है — चार पते देकर वैध या अवैध छाँटना, जहाँ पूरा उत्तर 0 से 255 की सीमा पर टिकता है। दूसरा रूप श्रेणी पहचानने का है : कोई एक पता देकर पूछा जाता है कि वह किस वर्ग का है, और उत्तर केवल पहले अष्टक से निकल आता है। तीसरा रूप विशेष परिसरों का है — लौटाने वाला पता, निजी परिसर, बहुप्रसारण परिसर — जहाँ किसी परिसर का नाम या उसकी सीमा पूछी जाती है। तीनों की तैयारी के लिए एक छोटी तालिका पर्याप्त है जिसमें पहले अष्टक के परिसर के सामने वर्ग और उसका उपयोग लिखा हो, और उसके नीचे तीन निजी परिसर तथा लौटाने वाला पता। उससे आगे उपजाल-नकाब और CIDR की गणनाएँ आती हैं, जो इस प्रश्नपत्र में कम पूछी जाती हैं पर बैंकिंग तथा तकनीकी भर्ती परीक्षाओं में नियमित हैं।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
किसी IPv4 पते के प्रत्येक अष्टक (octet) का मान किस परिसर में हो सकता है?
- (a)0 से 127 तक
- (b)0 से 255 तक
- (c)1 से 254 तक
- (d)0 से 1023 तक
उत्तर(b) 0 से 255 तक — हर अष्टक ठीक 8 बिट का होता है और 8 बिट से 2⁸ = 256 भिन्न मान बनते हैं, जो 0 से आरंभ होकर 255 पर समाप्त होते हैं।
- practice — not a real PYQ
निम्नलिखित में से कौन-सा एक IPv4 पता निजी (private) उपयोग के लिए आरक्षित परिसर में आता है?
- (a)11.0.0.1
- (b)172.32.5.9
- (c)192.168.10.25
- (d)200.100.50.25
उत्तर(c) 192.168.10.25 — निजी परिसर 10.0.0.0 से 10.255.255.255, 172.16.0.0 से 172.31.255.255 तथा 192.168.0.0 से 192.168.255.255 हैं। 11 से शुरू होने वाला पता 10 वाले परिसर के बाहर है, 172.32 वाला पता 172.31 की ऊपरी सीमा के बाहर है, और 200 से शुरू होने वाला पता सार्वजनिक है।