निम्नलिखित में से कौन-सा, पूँजीगत व्यय नहीं है?
- (a)किसी घिसे-पिटे पुर्जे को निकालने में हुआ व्यय ₹ 5,000 है। इस पुर्जे को निकालकर नया इंजिन लगाना है
- (b)नई मशीन खरीदने के लिए विदेश यात्रा पर हुआ व्यय
- (c)खरीदी गई मशीनरी का मालभाड़ा और बीमा
- (d)किसी सेकंडहैंड मशीन को खरीदकर उसके उपयोग से पहले उसकी मरम्मत पर व्यय की गई राशि
सही उत्तर — A, (a) किसी घिसे-पिटे पुर्जे को निकालने में हुआ व्यय ₹ 5,000 है। इस पुर्जे को निकालकर नया इंजिन लगाना है — चारों में यही अकेला व्यय पूँजीगत नहीं, आयगत (revenue) है। पहले पूछ को ठीक से पढ़िए। प्रश्न नकारात्मक है — पुस्तिका में ‘नहीं’ मोटे अक्षरों में छपा है — इसलिए खोजना यह है कि चार में से कौन-सा व्यय मशीनरी खाते में नहीं जुड़ेगा, न कि यह कि कौन-सा जुड़ेगा। पहला क़दम — कसौटी लिख लीजिए। कोई व्यय पूँजीगत तभी है जब वह इन तीन में से कुछ करे : या तो कोई नई स्थायी संपत्ति खड़ी करे, या किसी मौजूदा संपत्ति की अर्जन-क्षमता अथवा उपयोगी जीवन को उसके मूल आकलित स्तर से आगे बढ़ाए, या संपत्ति को उस स्थान और उस दशा तक पहुँचाए जहाँ वह अभीष्ट रूप से काम करने योग्य हो जाए। यह तीसरी कसौटी लेखा मानक AS 10 (संशोधित) तथा Ind AS 16 की भाषा में ‘प्रत्यक्षतः आरोपणीय लागत’ (directly attributable cost) कहलाती है। इसके विपरीत जो व्यय संपत्ति को केवल उसके पहले वाले कार्य-स्तर पर बनाए रखता है, वह मरम्मत है और उसी वर्ष के लाभ-हानि खाते में जाता है। दूसरा क़दम — विकल्प (a) को इसी कसौटी पर रखिए। ₹ 5,000 किसी घिसे-पिटे पुर्जे को निकालने पर खर्च हुए हैं। घिसना-पिटना संपत्ति के सामान्य उपयोग का परिणाम है, और घिसे हुए पुर्जे को हटाना मशीन को उसकी पहले वाली काम करने की दशा में लौटाने की क्रिया है — इससे न मशीन की क्षमता उसके मूल स्तर से ऊपर उठती है, न कोई नई संपत्ति जन्म लेती है। यह पुराने से छुटकारा पाने की लागत है, नए इंजिन को अर्जित करने या उसे लगाने की नहीं; नए इंजिन की अपनी लागत तो अलग से पूँजीगत होगी ही। इसलिए यही एक विकल्प आयगत व्यय है और नकारात्मक पूछ का उत्तर है। तीसरा क़दम — शेष तीनों को एक साथ जाँच लीजिए। विदेश यात्रा, मालभाड़ा तथा बीमा, और उपयोग से पहले की मरम्मत — तीनों एक ही परिवार के हैं : ये संपत्ति को अर्जित करने और उसे काम लायक दशा तक पहुँचाने पर हुए व्यय हैं, इसलिए तीनों मशीनरी खाते में जुड़ते हैं और लाभ-हानि खाते तक मूल्यह्रास के रूप में ही पहुँचते हैं। एक पड़ोसी नियम इस उत्तर को डगमगा सकता है, इसलिए उसे नाम देकर अलग कर लीजिए : ‘नई मशीन के लिए जगह बनाने हेतु पुरानी मशीन को तोड़ने और हटाने पर हुआ व्यय’ पाठ्यपुस्तकों में पूँजीगत माना जाता है, क्योंकि वह नई संपत्ति की स्थल-तैयारी है। यहाँ जो हटाया जा रहा है वह पूरी मशीन नहीं, एक घिसा हुआ पुर्जा है, और उसे हटाना रख-रखाव के सामान्य क्रम की क्रिया है। यही महीन भेद इस प्रश्न का पूरा भार उठाता है।
- (b)नई मशीन खरीदने के लिए विदेश यात्रा पर हुआ व्यय — यह पूँजीगत व्यय है, इसलिए नकारात्मक पूछ का उत्तर नहीं हो सकता। यहाँ निर्णायक बात यात्रा नहीं, यात्रा का प्रयोजन है : विदेश यात्रा नई मशीन खरीदने के लिए की गई है, अर्थात् वह मशीन को अर्जित करने की प्रक्रिया का ही अंग है और लेखा मानक की भाषा में उस संपत्ति पर ‘प्रत्यक्षतः आरोपणीय लागत’ है। इसलिए यह राशि यात्रा-व्यय खाते में नहीं, मशीनरी खाते में जुड़ती है और मशीन के जीवनकाल में मूल्यह्रास के रूप में धीरे-धीरे लाभ-हानि खाते तक पहुँचती है। तुलना कीजिए : यदि वही अधिकारी माल बेचने, ग्राहक खोजने या किसी व्यापार-प्रदर्शनी में भाग लेने विदेश जाता, तो वह यात्रा किसी संपत्ति से नहीं जुड़ती और पूरा व्यय उसी वर्ष का आयगत व्यय होता। इस परिवार के प्रश्नों में विकल्प का पाठ प्रायः ‘किसलिए’ पर टिका होता है, ‘क्या’ पर नहीं — यात्रा दोनों जगह एक जैसी है, प्रयोजन अलग है, और वर्गीकरण प्रयोजन से बदलता है।
- (c)खरीदी गई मशीनरी का मालभाड़ा और बीमा — यह भी पूँजीगत व्यय है और इसीलिए उत्तर नहीं है। मालभाड़ा (carriage inward) मशीन को विक्रेता के परिसर से कारखाने तक लाने की लागत है, और यहाँ जिस बीमे की बात है वह उसी लाने-ले जाने के दौरान का पारगमन बीमा (transit insurance) है; दोनों संपत्ति को उस स्थान तक पहुँचाने पर हुए व्यय हैं जहाँ वह काम कर सके, इसलिए दोनों मशीन की लागत में जुड़ते हैं। यहाँ एक बारीक भेद ध्यान देने योग्य है, क्योंकि परीक्षा प्रायः उसी पर टिकती है : मशीन के स्थापित होकर चलने लगने के बाद हर वर्ष दिया जाने वाला बीमा प्रीमियम आयगत व्यय है, क्योंकि वह आवर्ती है और किसी स्थायी लाभ को जन्म नहीं देता। एक ही शब्द ‘बीमा’ प्रश्न में कहाँ बैठा है — खरीद के साथ या उपयोग के दौरान — इसी से उसका वर्गीकरण उलट जाता है। यही बात मालभाड़े पर भी लागू है : कच्चे माल या बिक्री-योग्य माल पर चुकाया गया भाड़ा आयगत है, स्थायी संपत्ति पर चुकाया गया भाड़ा पूँजीगत।
- (d)किसी सेकंडहैंड मशीन को खरीदकर उसके उपयोग से पहले उसकी मरम्मत पर व्यय की गई राशि — यह पूँजीगत व्यय का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है और इसीलिए यहाँ जाल की तरह रखा गया है — ‘मरम्मत’ शब्द देखते ही अभ्यर्थी उसे आयगत मान बैठता है। सेकंडहैंड मशीन खरीदने पर वह प्रायः चलने लायक दशा में नहीं होती; उसे उपयोग योग्य बनाने पर जो खर्च होता है वह उसे उस दशा तक पहुँचाने का खर्च है जिसमें वह अभीष्ट रूप से काम कर सके, इसलिए वह मशीन की लागत में जुड़ता है और मूल्यह्रास उसी बढ़ी हुई लागत पर लगता है। निर्णायक शब्द ‘उपयोग से पहले’ है : वही मशीन एक बार चल पड़े और उसके बाद उसकी मरम्मत हो, तो वह खर्च आयगत होगा। सिद्धांततः यह भेद मरम्मत के आकार पर नहीं, समय पर टिका है, और यही जोड़ी — ‘उपयोग से पहले की मरम्मत’ बनाम ‘उपयोग के बाद की मरम्मत’ — इस अध्याय में सबसे अधिक बार पूछी जाती है।
पूँजीगत और आयगत व्यय का भेद लेखांकन का सबसे बुनियादी वर्गीकरण है, क्योंकि उसी से तय होता है कि कोई राशि तुलन-पत्र (balance sheet) में संपत्ति बनकर बैठेगी या लाभ-हानि खाते में उसी वर्ष खर्च होकर मिट जाएगी। पूँजीगत व्यय वह है जिसका लाभ एक लेखा-वर्ष से आगे तक चलता है : नई स्थायी संपत्ति का अर्जन, किसी मौजूदा संपत्ति की क्षमता या उपयोगी जीवन में मूल आकलित स्तर से ऊपर की वृद्धि, और वे सारी लागतें जो संपत्ति को उस स्थान तथा दशा तक पहुँचाती हैं जहाँ वह अभीष्ट रूप से चल सके — क्रय मूल्य, आयात शुल्क, अप्रतिदेय कर, मालभाड़ा, पारगमन बीमा, स्थापना और परीक्षण, तथा उपयोग से पहले की वह मरम्मत जिसके बिना मशीन चल ही नहीं सकती। आयगत व्यय वह है जिसका लाभ उसी वर्ष चुक जाता है : वेतन, किराया, बिजली, आवर्ती बीमा प्रीमियम, और वह मरम्मत जो संपत्ति को उसकी पहले वाली दशा में बनाए रखती है। इन दोनों के बीच एक तीसरी श्रेणी भी परंपरागत रूप से पढ़ाई जाती है — आस्थगित आयगत व्यय (deferred revenue expenditure), जैसे किसी नए उत्पाद का भारी प्रारंभिक विज्ञापन, जो होता तो आयगत है पर जिसका लाभ कुछ वर्षों तक फैला रहता है। एक चेतावनी शब्दावली की भी : ‘पूँजीगत व्यय’ पद बजट और लोक-वित्त में भी चलता है, जहाँ उसका अर्थ है वह सरकारी व्यय जो परिसंपत्ति बनाता है या देयता घटाता है। यह प्रश्न उस अर्थ में नहीं, लेखांकन वाले अर्थ में पूछा गया है, और APFC का प्रश्नपत्र दोनों अर्थ अलग-अलग खंडों में पूछता है।
गलत वर्गीकरण का असर केवल एक खाते तक सीमित नहीं रहता। किसी आयगत व्यय को पूँजीगत मान लेने से उस वर्ष का लाभ बढ़ा हुआ दिखता है और संपत्तियाँ भी बढ़ी हुई; उलटा करने पर लाभ घटा हुआ दिखता है और संपत्तियाँ कम। यही कारण है कि परीक्षक इस अध्याय से सीधा सैद्धांतिक प्रश्न न पूछकर सीमांत उदाहरणों की सूची रख देता है और पूछता है कि उनमें से कौन-सा बाहर का है। इस प्रश्न के चारों विकल्प ठीक उसी बनावट के हैं — चारों मशीन से जुड़े हैं, चारों में एक-एक शब्द निर्णायक है, और तीन में वह शब्द अर्जन की ओर इशारा करता है जबकि एक में रख-रखाव की ओर। इसलिए हल करने की विधि यह नहीं है कि परिभाषा दोहराई जाए, बल्कि यह है कि हर विकल्प से पूछा जाए : ‘यह पैसा संपत्ति को खड़ा करने या काम लायक बनाने में लगा, या उसे चालू हालत में बनाए रखने में?’ पहला उत्तर मिले तो पूँजीगत, दूसरा मिले तो आयगत। दूसरी बात, नकारात्मक पूछ वाले ऐसे प्रश्नों में चारों विकल्पों को वर्गीकृत करके ही आगे बढ़ना चाहिए — तीन एक श्रेणी में और एक अकेला बचे, तभी उत्तर पर भरोसा किया जा सकता है; केवल पहला ‘अजीब’ दिखने वाला विकल्प चुन लेना इसी अध्याय में सबसे अधिक अंक कटवाता है।
- पूँजीगत व्यय वह है जो नई स्थायी संपत्ति खड़ी करे, किसी मौजूदा संपत्ति की अर्जन-क्षमता या उपयोगी जीवन को उसके मूल आकलित स्तर से आगे बढ़ाए, अथवा संपत्ति को उस स्थान और दशा तक पहुँचाए जहाँ वह अभीष्ट रूप से चल सके; शेष सब आयगत है।
- AS 10 (संशोधित) तथा Ind AS 16 के अनुसार स्थायी संपत्ति की लागत में क्रय मूल्य के साथ वे सभी ‘प्रत्यक्षतः आरोपणीय लागतें’ जुड़ती हैं जो उसे कार्य-योग्य दशा तक लाने के लिए आवश्यक हों — मालभाड़ा, पारगमन बीमा, स्थापना, परीक्षण और स्थल-तैयारी इसी में आते हैं।
- किसी घिसे-पिटे पुर्जे को निकालने पर हुआ व्यय संपत्ति को उसकी पहले वाली दशा में लौटाने की क्रिया है; वह न क्षमता बढ़ाता है, न नई संपत्ति बनाता है, इसलिए आयगत व्यय है — भले ही उसके बाद नया इंजिन लगाया जाना हो, जिसकी अपनी लागत अलग से पूँजीगत होगी।
- सेकंडहैंड मशीन पर ‘उपयोग से पहले’ की गई मरम्मत पूँजीगत है और ‘उपयोग के बाद’ की गई मरम्मत आयगत — भेद मरम्मत के आकार पर नहीं, उसके समय पर टिका है।
- एक ही मद का वर्गीकरण उसके प्रयोजन से बदल जाता है : स्थायी संपत्ति खरीदने के लिए की गई यात्रा और उस पर चुकाया गया मालभाड़ा पूँजीगत हैं, जबकि बिक्री बढ़ाने की यात्रा और बिक्री-योग्य माल पर चुकाया गया भाड़ा आयगत।
- आयगत व्यय को पूँजीगत मान लेने से उस वर्ष का लाभ और संपत्तियाँ दोनों बढ़ी हुई दिखती हैं, और उलटी भूल से दोनों घटी हुई; इसीलिए यह वर्गीकरण अंकेक्षण (audit) में भी नियमित रूप से जाँचा जाता है।
- शब्दावली की चेतावनी : ‘पूँजीगत व्यय’ पद बजट और लोक-वित्त में भी प्रयुक्त होता है, जहाँ उसका अर्थ परिसंपत्ति बनाने या देयता घटाने वाला सरकारी व्यय है; यह प्रश्न लेखांकन वाले अर्थ में पूछा गया है।
- ‘मरम्मत’ शब्द देखते ही उसे आयगत मान लेना; उपयोग से पहले की गई मरम्मत, जिसके बिना संपत्ति चल ही नहीं सकती, पूँजीगत होती है।
- नकारात्मक पूछ को सकारात्मक पढ़ लेना — यहाँ ‘नहीं’ मोटे अक्षरों में छपा है, फिर भी तीन में से किसी एक पूँजीगत मद पर उँगली रुक जाना आम भूल है।
- ‘पुरानी मशीन हटाकर नई के लिए जगह बनाने का व्यय पूँजीगत होता है’ वाले पड़ोसी नियम को यहाँ लगा देना; इस विकल्प में पूरी मशीन नहीं, एक घिसा हुआ पुर्जा हटाया जा रहा है और वह रख-रखाव के क्रम की क्रिया है।
- बीमे को एक ही श्रेणी में बाँध देना; खरीद के समय का पारगमन बीमा पूँजीगत है, पर चालू मशीन का वार्षिक बीमा प्रीमियम आयगत।
- लेखांकन वाले ‘पूँजीगत व्यय’ और बजट वाले ‘पूँजीगत व्यय’ को एक मान लेना; दोनों की परिभाषाएँ अलग दस्तावेज़ों से आती हैं और APFC का प्रश्नपत्र दोनों अलग-अलग खंडों में पूछता है।
यह अध्याय इस प्रश्नपत्र के लेखाशास्त्र खंड में लगभग नियमित है और तीन ही आकारों में आता है। पहला आकार यही है — चार सीमांत मदों की सूची और यह पूछ कि कौन-सी बाहर की है, प्रायः ‘नहीं’ के साथ। दूसरा आकार संख्यात्मक है : मशीन का क्रय मूल्य, मालभाड़ा, स्थापना और उपयोग से पहले की मरम्मत देकर पूछा जाता है कि मशीनरी खाता किस राशि पर डेबिट होगा — वहाँ केवल सही मदों को जोड़ना होता है। तीसरा आकार कथन-आधारित है, जिसमें पूँजीगत व्यय की परिभाषा या आस्थगित आयगत व्यय के उदाहरण पर दो-तीन कथन रखकर कूट पूछा जाता है। तीनों की तैयारी एक ही अभ्यास से हो जाती है : पाठ्यपुस्तक की सीमांत मदों की सूची लेकर हर मद के सामने वह एक शब्द लिख लीजिए जो उसका वर्गीकरण तय करता है — ‘उपयोग से पहले’, ‘खरीदने के लिए’, ‘चालू हालत में बनाए रखने के लिए’। परीक्षा में विकल्प का पूरा वाक्य पढ़ने की ज़रूरत नहीं पड़ती, वही एक शब्द ढूँढ़ना पर्याप्त होता है।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
एक फर्म ने ₹ 2,00,000 में एक सेकंडहैंड मशीन खरीदी, उसे कारखाने तक लाने पर ₹ 10,000 मालभाड़ा दिया, उपयोग से पहले उसे चलने योग्य बनाने की मरम्मत पर ₹ 25,000 खर्च किए और स्थापना पर ₹ 15,000। मशीनरी खाता किस राशि से डेबिट होगा?
- (a)₹ 2,00,000
- (b)₹ 2,10,000
- (c)₹ 2,25,000
- (d)₹ 2,50,000
उत्तर(d) ₹ 2,50,000 — क्रय मूल्य ₹ 2,00,000 में मालभाड़ा ₹ 10,000, उपयोग से पहले की मरम्मत ₹ 25,000 और स्थापना ₹ 15,000 जोड़े जाते हैं, क्योंकि चारों मिलकर मशीन को उस दशा तक पहुँचाते हैं जिसमें वह चल सके।
- practice — not a real PYQ
निम्नलिखित में से कौन-सा एक आयगत (राजस्व) व्यय है?
- (a)नई मशीन को कारखाने तक लाने पर चुकाया गया मालभाड़ा
- (b)नई मशीन की स्थापना पर हुआ व्यय
- (c)मशीन के स्थापित होकर चलने लगने के बाद प्रतिवर्ष चुकाया जाने वाला बीमा प्रीमियम
- (d)सेकंडहैंड मशीन की उपयोग से पहले की गई मरम्मत पर हुआ व्यय
उत्तर(c) मशीन के स्थापित होकर चलने लगने के बाद प्रतिवर्ष चुकाया जाने वाला बीमा प्रीमियम — यह आवर्ती है और मशीन की क्षमता या जीवन में कोई वृद्धि नहीं करता, इसलिए उसी वर्ष के लाभ-हानि खाते में जाता है; शेष तीनों मशीन को अर्जित करने या काम लायक बनाने पर हुए व्यय हैं और उसकी लागत में जुड़ते हैं।