बिन्दुओं (0, 0), (0, 3) और (2, 0) से गुजरने वाले वृत्त की त्रिज्या की लंबाई क्या है?
- (a)2√3
- (b)2√5
- (c)√11/2
- (d)√13/2
सही उत्तर — D, (d) √13/2। पुस्तिका में यह विकल्प ऊपर-नीचे लिखी भिन्न के रूप में छपा है — मूल-चिह्न 13 पर फैला हुआ और नीचे 2 — जिसे यहाँ तिरछी रेखा के साथ एक पंक्ति में लिखा गया है। सबसे छोटा हल लंब-समद्विभाजक से मिलता है। वृत्त का केंद्र प्रत्येक जीवा के लंब-समद्विभाजक पर होता है। बिंदु (0, 0) और (2, 0) दोनों x-अक्ष पर हैं, इसलिए उनकी जीवा का लंब-समद्विभाजक ऊर्ध्वाधर रेखा x = 1 है। बिंदु (0, 0) और (0, 3) दोनों y-अक्ष पर हैं, इसलिए उनकी जीवा का लंब-समद्विभाजक क्षैतिज रेखा y = 1·5 है। दोनों का प्रतिच्छेद केंद्र देता है : (1, 1·5)। अब त्रिज्या केंद्र से किसी भी दिए हुए बिंदु की दूरी है। मूलबिंदु से दूरी लेना सबसे सरल है : √(1² + 1·5²) = √(1 + 2·25) = √3·25। इसे भिन्न के रूप में लिखिए तो √(13/4) मिलता है, अर्थात् √13/2। यही विकल्प (d) है। दूसरा और उससे भी तेज़ रास्ता ज्यामिति का है। मूलबिंदु पर बना कोण समकोण है, क्योंकि एक भुजा x-अक्ष के अनुदिश (2, 0) की ओर जाती है और दूसरी y-अक्ष के अनुदिश (0, 3) की ओर। अर्ध-वृत्त में बना कोण समकोण होता है, और उसका विलोम भी सत्य है — यदि किसी जीवा द्वारा वृत्त के किसी बिंदु पर समकोण बनता हो, तो वह जीवा व्यास होती है। इसलिए (0, 3) और (2, 0) को मिलाने वाली रेखा ही व्यास है। उसकी लंबाई √(2² + 3²) = √13 है, अतः त्रिज्या √13/2। दो पंक्तियों में उत्तर मिल जाता है। तीसरा रास्ता व्यापक समीकरण x² + y² + 2gx + 2fy + c = 0 का है : मूलबिंदु से गुज़रने के कारण c = 0, (0, 3) रखने पर f = −3/2 और (2, 0) रखने पर g = −1; त्रिज्या √(g² + f² − c) = √(1 + 9/4) = √13/2। तीनों रीतियाँ एक ही उत्तर देती हैं, और तीनों में केंद्र (1, 1·5) पर ही बैठता है — यही जाँच भी है।
- (a)2√3 — 2√3 का मान लगभग 3·46 है, जो सही त्रिज्या 1·80 से लगभग दुगुना है — और यही इसका काम है : उस अभ्यर्थी को पकड़ना जो व्यास निकालकर रुक जाता है। व्यास यहाँ ठीक-ठीक √13 है, अर्थात् लगभग 3·61, और वह विकल्पों में है ही नहीं; इसलिए जो अभ्यर्थी व्यास निकालकर निकटतम दिखने वाला विकल्प चुन लेता है, वह यहीं फँसता है। जाँच करके भी इसे काटा जा सकता है : केंद्र को x = 1 पर मानकर त्रिज्या 2√3 लीजिए, तो केंद्र का y-मान ±√11 निकलेगा, और उस केंद्र से (0, 3) की दूरी 2√3 के बराबर नहीं आती। अर्थात् ऐसा कोई वृत्त तीनों बिंदुओं से नहीं गुज़रता। तीन असंरेख बिंदुओं से गुज़रने वाला वृत्त एक ही होता है, इसलिए केंद्र (1, 1·5) तय हो जाने के बाद त्रिज्या का कोई दूसरा मान संभव ही नहीं है।
- (b)2√5 — 2√5 का मान लगभग 4·47 है, जो इस समुच्चय का सबसे बड़ा विकल्प है और सही उत्तर से ढाई गुना अधिक। ऐसा वृत्त तीनों बिंदुओं से नहीं गुज़र सकता, और यह जाँच से तुरंत दिख जाता है : (0, 0) तथा (2, 0) से समान दूरी पर रहने के लिए केंद्र को रेखा x = 1 पर होना होगा, और त्रिज्या 2√5 मानने पर केंद्र (1, ±√19) पर आएगा; उस बिंदु से (0, 3) की दूरी 2√5 के बराबर नहीं निकलती। व्यावहारिक दृष्टि से भी यह विकल्प संदिग्ध है, क्योंकि तीनों बिंदु 2 और 3 की भुजाओं वाले एक छोटे-से आयत में समा जाते हैं, और उतने पास-पास बिंदुओं का परिवृत्त इतना बड़ा तभी होता जब वे लगभग एक ही रेखा पर हों — यहाँ वे समकोण बनाते हैं, जो इसके ठीक विपरीत स्थिति है।
- (c)√11/2 — यह इस समुच्चय का सबसे निकट का ग़लत उत्तर है — इसका मान लगभग 1·66 है, जबकि सही उत्तर लगभग 1·80 — और यह सही उत्तर से केवल मूल-चिह्न के भीतर की संख्या में भिन्न है। ऐसा अंतर लगभग सदैव एक ही जगह से आता है : 2² + 3² की गणना में चूक। यदि कोई दो का वर्ग करना भूलकर 2 + 9 जोड़ दे तो 11 मिलता है और उत्तर √11/2 बन जाता है; सही जोड़ 4 + 9 = 13 है। यही चूक लंब-समद्विभाजक वाली रीति में भी हो सकती है, यदि 1·5 का वर्ग 2·25 के बजाय कुछ और ले लिया जाए। इसलिए ऐसे प्रश्नों में अंत में एक अंकीय जाँच कर लीजिए : केंद्र (1, 1·5) से तीनों बिंदुओं की दूरी निकालिए और देखिए कि तीनों समान आती हैं या नहीं — √11/2 पर वे समान नहीं आतीं।
निर्देशांक ज्यामिति में वृत्त से जुड़े प्रश्न तीन औज़ारों से हल होते हैं और तीनों याद रखने योग्य हैं। पहला, केंद्र-त्रिज्या रूप (x − h)² + (y − k)² = r², जिससे केंद्र और त्रिज्या सीधे पढ़ लिए जाते हैं। दूसरा, व्यापक रूप x² + y² + 2gx + 2fy + c = 0, जिसमें केंद्र (−g, −f) और त्रिज्या √(g² + f² − c) होती है; मूलबिंदु से गुज़रने वाले वृत्त में c = 0 हो जाता है, जो इस प्रश्न में आधा काम कर देता है। तीसरा, लंब-समद्विभाजक का गुण — केंद्र प्रत्येक जीवा के लंब-समद्विभाजक पर होता है — जो तब सबसे तेज़ काम करता है जब बिंदु अक्षों पर हों, क्योंकि तब समद्विभाजक अक्षों के समांतर सरल रेखाएँ बन जाते हैं। इनके साथ एक ज्यामितीय प्रमेय जोड़ लीजिए : अर्ध-वृत्त में बना कोण समकोण होता है, और उसका विलोम भी सत्य है। इसी विलोम से समकोण त्रिभुज के परिवृत्त का केंद्र कर्ण के मध्य-बिंदु पर आता है और त्रिज्या कर्ण की आधी होती है।
इस प्रश्न की सबसे बड़ी सुविधा यह है कि दिए गए तीनों बिंदु विशेष स्थिति में हैं — एक मूलबिंदु पर, एक x-अक्ष पर और एक y-अक्ष पर। इस स्थिति में तीनों रीतियाँ बहुत छोटी हो जाती हैं, और परीक्षा-कक्ष में यह पहचान लेना कि स्थिति विशेष है, गणना के आधे क़दम बचा देता है। ऐसे प्रश्न में समय गँवाने का सबसे आम कारण यह है कि अभ्यर्थी तीन अज्ञात राशियों वाला व्यापक समीकरण लिखकर तीनों बिंदु रखता है और तीन समीकरण हल करने बैठ जाता है, जबकि दो लंब-समद्विभाजक खींचकर उत्तर दो पंक्तियों में मिल जाता है। छपाई की एक बात भी दर्ज कर लीजिए : विकल्प (c) और (d) पुस्तिका में ऊपर-नीचे लिखी भिन्नों के रूप में छपे हैं, जिनमें मूल-चिह्न केवल ऊपरी संख्या पर फैला है — अर्थात् वे √11/2 और √13/2 हैं, न कि √(11/2) और √(13/2)। विकल्प दो-दो करके एक पंक्ति में छपे हैं।
- वृत्त का केंद्र प्रत्येक जीवा के लंब-समद्विभाजक पर होता है; यहाँ (0, 0) तथा (2, 0) से x = 1 और (0, 0) तथा (0, 3) से y = 1·5 मिलता है, इसलिए केंद्र (1, 1·5) है।
- त्रिज्या केंद्र से किसी भी दिए हुए बिंदु की दूरी है : √(1² + 1·5²) = √3·25 = √13/2, जो लगभग 1·80 होता है।
- मूलबिंदु पर बना कोण समकोण है, इसलिए (0, 3) और (2, 0) को मिलाने वाली जीवा व्यास है; उसकी लंबाई √13 है और त्रिज्या उसकी आधी।
- समकोण त्रिभुज के परिवृत्त का केंद्र कर्ण के मध्य-बिंदु पर होता है और त्रिज्या कर्ण की आधी — यही नियम इस प्रश्न को दो पंक्तियों में हल कर देता है।
- व्यापक समीकरण x² + y² + 2gx + 2fy + c = 0 में केंद्र (−g, −f) और त्रिज्या √(g² + f² − c) होती है; मूलबिंदु से गुज़रने पर c = 0 हो जाता है।
- विकल्प (c) और (d) पुस्तिका में ऊपर-नीचे लिखी भिन्नों के रूप में छपे हैं और मूल-चिह्न केवल ऊपरी संख्या पर फैला है, इसलिए वे √11/2 तथा √13/2 हैं।
- व्यास निकालकर उसे ही उत्तर मान लेना; यहाँ व्यास √13 है और त्रिज्या उसकी आधी, और व्यास विकल्पों में है ही नहीं।
- 2² + 3² की जोड़ में चूक करना; 2 + 9 = 11 करने पर सीधे पड़ोसी ग़लत विकल्प मिल जाता है।
- तीन अज्ञात राशियों वाला समीकरण-निकाय हल करने बैठ जाना, जबकि दोनों बिंदु-युग्म अक्षों पर हैं और लंब-समद्विभाजक तुरंत केंद्र दे देते हैं।
- छपी हुई भिन्न को √(13/2) पढ़ लेना; मूल-चिह्न केवल ऊपरी संख्या पर है, इसलिए मान √13 का आधा है।
निर्देशांक ज्यामिति इस प्रश्नपत्र के संख्यात्मक खंड में नियमित रूप से आती है और वृत्त उसका सबसे आम विषय है। प्रश्न का रूप प्रायः तीन में से एक होता है : दिए गए बिंदुओं से गुज़रने वाले वृत्त की त्रिज्या या केंद्र, दिए गए समीकरण से केंद्र और त्रिज्या पढ़ना, अथवा स्पर्श-रेखा और प्रतिच्छेद से जुड़ी शर्तें। तीनों में सबसे अधिक अंक इस बात से बचते हैं कि अभ्यर्थी हल शुरू करने से पहले आकृति की विशेष स्थिति पहचान ले — कोई बिंदु मूलबिंदु पर है, कोई अक्ष पर, कोई कोण समकोण। इसी प्रश्नपत्र में वृत्त की जीवाओं पर आधारित एक कथन-प्रश्न भी है, इसलिए वृत्त के मूल प्रमेय दोनों जगह काम आते हैं। तैयारी के लिए एक पृष्ठ पर वृत्त के सभी सूत्र और चार-पाँच प्रमेय लिख लीजिए, और हर हल के अंत में यह जाँच जोड़ लीजिए कि निकाले गए केंद्र से तीनों दिए हुए बिंदुओं की दूरी समान आती है या नहीं।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
बिंदुओं (0, 0), (0, 4) और (3, 0) से गुज़रने वाले वृत्त की त्रिज्या क्या है?
- (a)2·5
- (b)5
- (c)3·5
- (d)2
उत्तर(a) 2·5 — मूलबिंदु पर समकोण बनता है, इसलिए (0, 4) और (3, 0) को मिलाने वाली जीवा व्यास है; उसकी लंबाई √(9 + 16) = 5 है और त्रिज्या उसकी आधी, अर्थात् 2·5।
- practice — not a real PYQ
किसी समकोण त्रिभुज के परिवृत्त का केंद्र कहाँ स्थित होता है?
- (a)कर्ण के मध्य-बिंदु पर
- (b)समकोण वाले शीर्ष पर
- (c)त्रिभुज के केंद्रक पर
- (d)सबसे छोटी भुजा के मध्य-बिंदु पर
उत्तर(a) कर्ण के मध्य-बिंदु पर — क्योंकि अर्ध-वृत्त में बना कोण समकोण होता है, इसलिए समकोण त्रिभुज का कर्ण उसके परिवृत्त का व्यास होता है और त्रिज्या कर्ण की आधी।