प्रत्येक R मीटर त्रिज्या वाले सात अर्धगोलाकार पात्र हैं और उनमें से प्रत्येक पात्र जल से पूरा भरा है। इनका जल R की 1·5 गुनी त्रिज्या के एक अर्धगोलाकार पात्र में इस प्रकार पलटा जाता है कि अधिकतम संख्या में छोटे पात्र खाली हो जाते हैं। जब बड़ा पात्र पूरी तरह भर गया हो, तो कितने छोटे पात्र अभी भी पूरे भरे हुए हैं?
- (a)5
- (b)4
- (c)3
- (d)2
सही उत्तर — C, (c) 3। पूरा प्रश्न एक ही तथ्य पर खड़ा है : आयतन त्रिज्या के घन के समानुपाती होता है, इसलिए त्रिज्या 1·5 गुनी होने पर आयतन 1·5 का घन, अर्थात् 3·375 गुना हो जाता है। अर्धगोले का आयतन (2/3)πr³ होता है। छोटे पात्र का आयतन (2/3)πR³ हुआ और बड़े पात्र का (2/3)π(1·5R)³, जो (2/3)πR³ × 3·375 के बराबर है। अर्थात् बड़ा पात्र ठीक 3·375 छोटे पात्रों जितना जल समा सकता है। ध्यान दीजिए कि π और 2/3 दोनों कट जाते हैं, इसलिए इस प्रश्न में कोई वास्तविक गणना करनी ही नहीं पड़ती — केवल 1·5 का घन निकालना है। अब पूछ को ध्यान से पढ़िए। जल इस प्रकार पलटा जाता है कि अधिकतम संख्या में छोटे पात्र ख़ाली हो जाएँ। तीन पात्र पूरे उँडेले जा सकते हैं, क्योंकि 3 इकाई जल बड़े पात्र में समा जाता है। चौथा पात्र पूरा नहीं उँडेला जा सकता, क्योंकि उससे कुल 4 इकाई हो जाती, जो 3·375 से अधिक है; उसमें से केवल 0·375 इकाई डाली जाती है और बड़ा पात्र भर जाता है। अब गिनती कीजिए। सात में से तीन पात्र पूरी तरह ख़ाली हो गए। चौथा पात्र आंशिक रूप से उँडेला गया, इसलिए वह अब न ख़ाली है और न पूरा भरा हुआ। शेष तीन पात्रों को छुआ ही नहीं गया, इसलिए वही अब भी पूरे भरे हुए हैं। सात में से तीन ख़ाली, एक आंशिक, तीन पूरे भरे — उत्तर 3 है। यहीं इस प्रश्न का असली जाल है। जो अभ्यर्थी 3·375 निकालकर सीधे 7 − 3 = 4 कर देता है, वह उस चौथे पात्र को भूल जाता है जिससे जल लिया गया। पूछ 'कितने छोटे पात्र अभी भी पूरे भरे हुए हैं' की है, और आंशिक रूप से उँडेला गया पात्र पूरा भरा नहीं रह जाता। इसलिए घटाने में चार पात्र निकलते हैं, तीन नहीं।
- (a)5 — यह उत्तर तब आता है जब आयतन को त्रिज्या के समानुपाती मान लिया जाए, अर्थात् यह सोच लिया जाए कि 1·5 गुनी त्रिज्या का पात्र 1·5 गुना जल समाएगा। उस दशा में एक पात्र पूरा और दूसरे का आधा उँडेलकर बड़ा पात्र भर जाता है, दो पात्र छू लिए जाते हैं और 7 − 2 = 5 बच रहते हैं। भूल मूल सूत्र की है : अर्धगोले का आयतन (2/3)πr³ है, इसलिए रैखिक माप k गुना होने पर आयतन k³ गुना होता है, न कि k गुना। यही चूक क्षेत्रफल के प्रश्नों में भी होती है, जहाँ रैखिक माप k गुना होने पर क्षेत्रफल k² गुना होता है। एक पंक्ति में याद रखिए — लंबाई k, क्षेत्रफल k², आयतन k³।
- (b)4 — यह इस समुच्चय का सबसे निकट का ग़लत उत्तर है और सबसे अधिक चुना जाने वाला भी, क्योंकि इसमें गणित पूरी तरह सही होता है और केवल गिनती में चूक होती है। अभ्यर्थी 1·5 का घन निकालकर 3·375 तक ठीक पहुँचता है, देखता है कि तीन पात्र पूरे उँडेले जा सकते हैं, और सीधे 7 − 3 = 4 कर देता है। पर बड़ा पात्र तीन पात्रों से पूरा नहीं भरता — उसमें 0·375 इकाई और चाहिए, जो चौथे पात्र से ली जाती है। वह चौथा पात्र अब पूरा भरा हुआ नहीं रह जाता, इसलिए 'पूरे भरे हुए' पात्रों की गिनती में वह नहीं आएगा। यही कारण है कि सही घटाव 7 − 4 है। पूछ के शब्द 'अभी भी पूरे भरे हुए' इसी भेद को पकड़ने के लिए रखे गए हैं।
- (d)2 — यह उत्तर तब आता है जब 3·375 को ऊपर की ओर गोल करके चार पात्र पूरे उँडेल दिए जाएँ और फिर पाँचवें को भी आंशिक मानकर घटा दिया जाए, अर्थात् 7 − 4 − 1 = 2। यहाँ दो अलग-अलग भूलें एक साथ हो रही हैं : पहली, चार पात्र पूरे उँडेलना संभव ही नहीं है, क्योंकि 4 इकाई जल 3·375 इकाई के पात्र में नहीं समाएगा और अतिरिक्त जल बह जाएगा; दूसरी, आंशिक रूप से उपयोग में आया पात्र एक ही है, दो नहीं। भिन्नात्मक उत्तर आने पर उसे किस दिशा में गोल करना है, यह प्रश्न की भौतिक स्थिति से तय होता है — पात्र में उसकी क्षमता से अधिक जल नहीं डाला जा सकता, इसलिए यहाँ नीचे की ओर ही जाना होगा।
इस प्रश्न का आधार मापन का वह नियम है जिसे समरूपता का नियम कहा जा सकता है : यदि दो समरूप आकृतियों के संगत रैखिक माप k के अनुपात में हों, तो उनके पृष्ठीय क्षेत्रफल k² के अनुपात में और आयतन k³ के अनुपात में होते हैं। गोले का आयतन (4/3)πr³, अर्धगोले का (2/3)πr³, शंकु का (1/3)πr²h और बेलन का πr²h होता है — पर इनमें से किसी भी सूत्र को पूरा लगाने की आवश्यकता तब नहीं पड़ती जब प्रश्न केवल अनुपात पूछ रहा हो, क्योंकि सभी अचर राशियाँ कट जाती हैं। इसी कारण ऐसे प्रश्न देखने में लंबे और हल करने में छोटे होते हैं। दूसरा विचार जो यहाँ काम करता है, वह भरने और उँडेलने के प्रश्नों का सामान्य ढाँचा है : कुल उपलब्ध आयतन को लक्ष्य-पात्र की धारिता से भाग दीजिए, पूर्णांक भाग बताता है कि कितने पात्र पूरे उँडेले जा सकते हैं, और शेषफल बताता है कि अगले पात्र से कितना लिया जाएगा। तीसरा, और इस प्रश्न में निर्णायक, यह है कि पूछ किस राशि की है — ख़ाली पात्रों की, छुए गए पात्रों की, या पूरे भरे पात्रों की।
संख्यात्मक अभियोग्यता के खंड में इस तरह के प्रश्न जान-बूझकर ऐसे बनाए जाते हैं कि गणना सरल हो और भूल पढ़ने में हो। यहाँ सारी गणना 1·5 का घन निकालने भर की है, जो 3·375 है; उसके बाद का पूरा काम शब्दों को ठीक-ठीक पढ़ने का है। इसीलिए ऐसे प्रश्नों में सबसे उपयोगी आदत यह है कि उत्तर लिखने से पहले पूछ को दोबारा पढ़ लिया जाए और यह जाँच लिया जाए कि गिनती किस समूह की माँगी गई है। छपाई की एक बात भी दर्ज कर लीजिए : इस पुस्तिका में दशमलव-चिह्न उठे हुए मध्य-बिंदु के रूप में छपा है, इसलिए प्रश्न में '1·5 गुनी' का अर्थ डेढ़ गुनी ही है, और यही शैली इस प्रश्नपत्र के अन्य संख्यात्मक प्रश्नों में भी मिलती है। साथ ही R तिरछे अक्षर में छपा है, जो चर राशि की सामान्य मुद्रण-शैली है।
- अर्धगोले का आयतन (2/3)πr³ होता है; इसलिए त्रिज्या 1·5 गुनी होने पर आयतन 1·5 का घन, अर्थात् 3·375 गुना हो जाता है।
- समरूप आकृतियों में रैखिक माप k गुना होने पर क्षेत्रफल k² गुना और आयतन k³ गुना होता है — यही इस प्रश्न का एकमात्र सूत्र है।
- बड़े पात्र में 3·375 छोटे पात्र जितना जल समाता है, इसलिए तीन पात्र पूरे उँडेले जा सकते हैं और चौथे से केवल 0·375 भाग लिया जाता है।
- सात में से तीन पात्र पूरी तरह ख़ाली होते हैं, एक आंशिक रूप से उपयोग में आता है, और शेष तीन अछूते रहकर पूरे भरे रह जाते हैं — उत्तर 3 है।
- अनुपात वाले मापन-प्रश्नों में π तथा अन्य अचर राशियाँ कट जाती हैं, इसलिए पूरा सूत्र लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती और गणना केवल घन निकालने भर की रह जाती है।
- पुस्तिका में दशमलव-चिह्न उठे हुए मध्य-बिंदु के रूप में छपा है, इसलिए '1·5 गुनी त्रिज्या' का अर्थ डेढ़ गुनी त्रिज्या है।
- आयतन को त्रिज्या के समानुपाती मान लेना; अनुपात घन का होता है, इसलिए डेढ़ गुनी त्रिज्या पर आयतन 3·375 गुना होता है, 1·5 गुना नहीं।
- आंशिक रूप से उँडेले गए पात्र को गिनती से छोड़ देना; वह पात्र अब पूरा भरा हुआ नहीं रह जाता, इसलिए घटाव 7 − 4 है, 7 − 3 नहीं।
- भिन्नात्मक उत्तर को ऊपर की ओर गोल कर देना; पात्र में उसकी क्षमता से अधिक जल नहीं समाता, इसलिए यहाँ नीचे की ओर ही गोल किया जाता है।
- पूछ को 'कितने पात्र ख़ाली हुए' पढ़ लेना, जबकि पूछा गया है कि कितने अब भी पूरे भरे हुए हैं — दोनों के उत्तर अलग हैं।
मापन इस प्रश्नपत्र के संख्यात्मक खंड का नियमित विषय है और उससे प्रायः दो प्रकार के प्रश्न आते हैं। पहला प्रकार वही है जो यहाँ दिखता है — अनुपात पर आधारित, जिसमें कोई वास्तविक संख्या दी ही नहीं जाती और उत्तर सूत्रों के घातांक से निकल आता है। दूसरा प्रकार गलाकर आकृति बदलने का है, जिसमें आयतन अपरिवर्तित रहने के नियम से अज्ञात माप निकाला जाता है; इसी प्रश्नपत्र में धातु की चकती को गलाकर दूसरी आकृति बनाने वाला प्रश्न भी है। दोनों प्रकारों की तैयारी एक ही तालिका से हो जाती है, जिसमें प्रत्येक ठोस का आयतन-सूत्र और उसका घातांक-ढाँचा लिखा हो। इसके साथ एक अभ्यास और जोड़िए : हल के अंत में पूछ को दोबारा पढ़कर यह मिलान कीजिए कि जो राशि निकाली गई है वही माँगी भी गई थी। इस प्रश्न में अंक ठीक इसी अंतिम मिलान से बचते हैं।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
यदि किसी अर्धगोलाकार पात्र की त्रिज्या दुगुनी कर दी जाए, तो उसका आयतन कितना गुना हो जाएगा?
- (a)8 गुना
- (b)6 गुना
- (c)4 गुना
- (d)2 गुना
उत्तर(a) 8 गुना — अर्धगोले का आयतन (2/3)πr³ है, इसलिए त्रिज्या दुगुनी करने पर आयतन 2 का घन, अर्थात् 8 गुना हो जाता है।
- practice — not a real PYQ
किसी बेलनाकार पात्र की त्रिज्या और ऊँचाई दोनों 1·5 गुनी कर दी जाएँ, तो उसका आयतन कितना गुना हो जाएगा?
- (a)3·375 गुना
- (b)2·25 गुना
- (c)4·5 गुना
- (d)1·5 गुना
उत्तर(a) 3·375 गुना — बेलन का आयतन πr²h है, इसलिए दोनों माप 1·5 गुने होने पर आयतन (1·5)² × 1·5 = 3·375 गुना हो जाता है; यही अनुपात मूल प्रश्न में भी आता है।