खान अधिनियम, 1952 के उपबंधों के अधीन विशेष अधिकारी, प्रबंधक को अग्रिम में कम-से-कम कितने दिनों की पूर्वसूचना देकर सर्वेक्षण, तलमापन और माप के प्रयोजन से खान में प्रवेश कर सकता है?
- (a)तीन दिन
- (b)पाँच दिन
- (c)सात दिन
- (d)चौदह दिन
सही उत्तर — A, (a) तीन दिन। खान अधिनियम, 1952 की धारा 8 इसी विषय का उपबंध करती है और वहीं यह अवधि दी गई है। धारा 8 के अनुसार सरकार की सेवा में लगा कोई भी ऐसा व्यक्ति, जिसे मुख्य निरीक्षक अथवा किसी निरीक्षक ने लिखित विशेष आदेश से प्राधिकृत किया हो, किसी खान के सर्वेक्षण, तलमापन या माप के प्रयोजन से उस खान में प्रवेश कर सकता है — किन्तु प्रवेश से पहले उसे उस खान के प्रबंधक को कम-से-कम तीन दिन की सूचना देनी होगी। सूचना दे देने के बाद वह दिन हो या रात, किसी भी समय खान अथवा उसके किसी भाग का सर्वेक्षण, तलमापन या माप कर सकता है। इसी धारा में एक अपवाद भी है, और वह उतना ही महत्त्वपूर्ण है जितनी मुख्य अवधि : यदि मुख्य निरीक्षक अथवा निरीक्षक की राय में आपात स्थिति है, तो वह लिखित आदेश से ऐसे व्यक्ति को बिना कोई सूचना दिए प्रवेश की अनुज्ञा दे सकता है। अर्थात् तीन दिन की सूचना सामान्य नियम है, आपात स्थिति में वह पूरी तरह हट जाती है। तीन दिन का यह छोटा-सा समय संयोग नहीं है। सर्वेक्षण और माप निरीक्षण की तुलना में कम हस्तक्षेपकारी काम है, फिर भी उसके लिए खदान में तैयारी करनी पड़ती है — मार्ग खुलवाना, कर्मियों को सूचित करना, सुरक्षा की व्यवस्था। इसलिए विधायिका ने प्रबंधक को इतना समय दिया कि वह प्रबंध कर सके, पर इतना नहीं कि निरीक्षण का प्रयोजन ही मारा जाए। ध्यान दीजिए कि यहाँ 'विशेष अधिकारी' कोई अलग पद नहीं है — वह सरकारी सेवा का कोई व्यक्ति है जिसे लिखित विशेष आदेश से इस काम के लिए प्राधिकृत किया गया हो। यह भेद परीक्षा में उपयोगी है, क्योंकि प्रश्न पद के नाम से बनते हैं और उत्तर उपबंध की भाषा से। एक और जुड़ा हुआ उपबंध याद रखने योग्य है : खान के स्वामी, अभिकर्ता और प्रबंधक पर यह दायित्व है कि वे मुख्य निरीक्षक, प्रत्येक निरीक्षक तथा इस प्रकार प्राधिकृत प्रत्येक व्यक्ति को प्रवेश, निरीक्षण, सर्वेक्षण, माप, परीक्षा या जाँच के लिए सभी उचित सुविधाएँ दें।
- (b)पाँच दिन — धारा 8 में पाँच दिन की कोई अवधि नहीं है, और यह विकल्प केवल इसलिए विश्वसनीय लगता है कि पाँच एक गोल संख्या है। ऐसे संख्यात्मक प्रश्नों में सबसे उपयोगी आदत यह है कि संख्या को उपबंध के प्रयोजन से जोड़कर देखा जाए : सूचना का उद्देश्य प्रबंधक को तैयारी का अवसर देना है, न कि उसे लंबा समय देकर निरीक्षण को निष्प्रभावी बना देना। इसी संतुलन के कारण अवधि छोटी रखी गई है और आपात स्थिति में उसे पूरी तरह हटा देने की व्यवस्था भी की गई है। जिस अभ्यर्थी को ठीक संख्या याद न हो, उसके लिए यह तर्क कम-से-कम सबसे बड़े विकल्पों को काट देता है, यद्यपि पाँच और तीन के बीच निर्णय के लिए उपबंध का सीधा स्मरण ही काम आएगा।
- (c)सात दिन — सात दिन इस समुच्चय में इसलिए रखा गया है कि यह अवधि श्रम विधि में सचमुच मिलती है, पर बिलकुल दूसरे संदर्भ में। मज़दूरी संदाय अधिनियम, 1936 के अधीन मज़दूरी का भुगतान मज़दूरी-अवधि समाप्त होने के बाद सातवें दिन की समाप्ति से पहले करना होता है, जहाँ स्थापन में एक हज़ार से कम व्यक्ति कार्यरत हों, और अन्य दशाओं में दसवें दिन की समाप्ति से पहले। इसी प्रकार अलग-अलग अधिनियमों में सूचना, दावे और अपील की अपनी-अपनी अवधियाँ हैं। इसलिए संख्यात्मक प्रश्नों की तैयारी में अवधियों को अधिनियम के नाम के साथ याद रखना चाहिए, केवल संख्या के रूप में नहीं — अन्यथा एक अधिनियम की अवधि दूसरे के प्रश्न में उत्तर बन जाती है, जो ठीक यही विकल्प करा रहा है।
- (d)चौदह दिन — चौदह दिन खान अधिनियम की इस धारा से नहीं, बल्कि औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 22 से जुड़ी संख्या है, जिसके अधीन लोक उपयोगी सेवा में हड़ताल के लिए नियोजक को सूचना देने और उसके बाद प्रतीक्षा करने की व्यवस्था चौदह दिन की है। यही परिचय इस विकल्प को आकर्षक बनाता है। तर्क की दृष्टि से भी चौदह दिन यहाँ बहुत लंबे हैं : सर्वेक्षण और माप का प्रयोजन खदान की वास्तविक स्थिति दर्ज करना है, और दो सप्ताह की पूर्वसूचना उस प्रयोजन को कमज़ोर कर देती। धारा 8 की व्यवस्था इसके ठीक उलटी दिशा में जाती है — सामान्य दशा में केवल तीन दिन, और आपात स्थिति में लिखित आदेश से बिना किसी सूचना के प्रवेश।
खान अधिनियम, 1952 का प्रशासनिक ढाँचा अपने आरंभिक अध्यायों में ही खड़ा हो जाता है। धारा 5 के अधीन केंद्र सरकार मुख्य निरीक्षक तथा निरीक्षकों की नियुक्ति करती है; उसके बाद की धाराएँ निरीक्षकों के कृत्य और शक्तियाँ बताती हैं; धारा 8 सर्वेक्षण, तलमापन और माप के लिए विशेष रूप से प्राधिकृत व्यक्ति की शक्ति का उपबंध करती है; और उसके साथ की धारा में यह दायित्व है कि खान के स्वामी, अभिकर्ता और प्रबंधक इन सबको उचित सुविधाएँ दें। इसके आगे प्रमाणकर्ता शल्य-चिकित्सक तथा कर्मकारों की चिकित्सा-परीक्षा के उपबंध आते हैं। अधिनियम का शेष भाग खान की सुरक्षा, स्वास्थ्य और काम के घंटों से जुड़ा है — भूमिगत तथा खुली खदान के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएँ, साप्ताहिक विश्राम, और भूमिगत काम में नियोजन पर आयु-संबंधी प्रतिषेध। पूरे ढाँचे की तर्क-रेखा एक ही है : खनन स्वाभाविक रूप से जोखिम भरा काम है, इसलिए निरीक्षण-तंत्र को व्यापक शक्तियाँ दी गई हैं और प्रबंधन पर सहयोग का दायित्व डाला गया है।
श्रम विधि के संख्यात्मक प्रश्न इस परीक्षा में हर वर्ष आते हैं और वे स्मरण की परीक्षा कम, संगठित स्मरण की परीक्षा अधिक होते हैं। एक ही परीक्षा में दिन, सप्ताह, मास और वर्ष की दर्जनों अवधियाँ पूछी जाती हैं — सूचना की अवधि, दावे की अवधि, अभिलेख परिरक्षण की अवधि, भुगतान की अवधि — और वे सब अलग-अलग अधिनियमों की हैं। इसलिए तैयारी में इन्हें एक तालिका में अधिनियम-वार लिखिए, न कि संख्या-वार, क्योंकि परीक्षा का जाल ठीक यही है कि एक अधिनियम की परिचित संख्या दूसरे अधिनियम के प्रश्न में विकल्प बनाकर रख दी जाती है। दूसरी उपयोगी आदत यह है कि हर अवधि के साथ उसका अपवाद भी याद रखा जाए : यहाँ अपवाद आपात स्थिति का है, जिसमें मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक लिखित आदेश से बिना सूचना के प्रवेश की अनुज्ञा दे सकता है। परीक्षा में अगला प्रश्न प्रायः उसी अपवाद पर आता है।
- खान अधिनियम, 1952 की धारा 8 के अधीन सर्वेक्षण, तलमापन या माप के प्रयोजन से खान में प्रवेश करने वाले प्राधिकृत व्यक्ति को प्रबंधक को कम-से-कम तीन दिन की पूर्वसूचना देनी होती है।
- इसी धारा में अपवाद है कि आपात स्थिति की राय बनने पर मुख्य निरीक्षक अथवा निरीक्षक लिखित आदेश से बिना किसी सूचना के प्रवेश की अनुज्ञा दे सकता है।
- सूचना दे देने के बाद प्राधिकृत व्यक्ति दिन या रात किसी भी समय खान अथवा उसके किसी भाग का सर्वेक्षण, तलमापन या माप कर सकता है।
- यहाँ 'विशेष अधिकारी' कोई पृथक स्थायी पद नहीं है — वह सरकारी सेवा का कोई व्यक्ति है जिसे मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक ने लिखित विशेष आदेश से इस प्रयोजन के लिए प्राधिकृत किया हो।
- खान के स्वामी, अभिकर्ता और प्रबंधक पर यह दायित्व है कि वे मुख्य निरीक्षक, प्रत्येक निरीक्षक तथा इस प्रकार प्राधिकृत प्रत्येक व्यक्ति को प्रवेश, निरीक्षण, सर्वेक्षण, माप और जाँच के लिए सभी उचित सुविधाएँ दें।
- अन्य अधिनियमों की मिलती-जुलती अवधियाँ अलग हैं : मज़दूरी संदाय अधिनियम, 1936 में भुगतान की सातवें या दसवें दिन वाली व्यवस्था, और औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 22 में लोक उपयोगी सेवा की हड़ताल से जुड़ी चौदह दिन की व्यवस्था।
- एक अधिनियम की परिचित अवधि दूसरे अधिनियम के प्रश्न में मान लेना; सात और चौदह दिन दोनों श्रम विधि में मिलते हैं, पर दूसरे उपबंधों में।
- आपात स्थिति वाले अपवाद को भूल जाना; तीन दिन की सूचना सामान्य नियम है और आपात स्थिति में वह पूरी तरह हट जाती है।
- 'विशेष अधिकारी' को कोई पृथक वैधानिक पद मान लेना; वह लिखित विशेष आदेश से प्राधिकृत सरकारी सेवक होता है।
- सर्वेक्षण के लिए प्रवेश और सामान्य निरीक्षण के लिए प्रवेश को एक मान लेना; दोनों की शक्तियाँ अलग धाराओं में हैं और उनकी शर्तें भी अलग हैं।
खान अधिनियम से इस परीक्षा में प्रायः एक प्रश्न आता है और उसका रूप लगभग सदैव संख्यात्मक या प्राधिकारी-आधारित होता है : कितने दिन की सूचना, किसकी अनुज्ञा, किस अधिकारी की शक्ति। ऐसे प्रश्नों में सामान्य समझ बहुत दूर तक साथ नहीं देती, इसलिए इस अधिनियम की दस-बारह प्रमुख संख्याएँ अलग से याद रखनी पड़ती हैं। सबसे किफ़ायती तरीक़ा यह है कि खान अधिनियम, कारखाना अधिनियम और औद्योगिक विवाद अधिनियम की समय-सीमाओं की एक साझा तालिका बनाई जाए, जिसमें प्रत्येक पंक्ति में अधिनियम, धारा, विषय और अवधि हो। इससे वह जाल टूट जाता है जिस पर ऐसे प्रश्न टिके होते हैं — एक अधिनियम की संख्या दूसरे के विकल्प में रख देना। इसके साथ हर उपबंध का अपवाद भी लिख लीजिए, क्योंकि अगला प्रश्न प्रायः अपवाद पर ही बनता है।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
खान अधिनियम, 1952 की धारा 8 के अधीन किस दशा में बिना कोई पूर्वसूचना दिए खान में प्रवेश की अनुज्ञा दी जा सकती है?
- (a)जब मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक की राय में आपात स्थिति हो और वह लिखित आदेश दे
- (b)जब प्रबंधक मौखिक अनुमति दे दे
- (c)जब ज़िला मजिस्ट्रेट आदेश करे
- (d)किसी भी दशा में नहीं
उत्तर(a) जब मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक की राय में आपात स्थिति हो और वह लिखित आदेश दे — यही धारा 8 का अपवाद है, जिसमें तीन दिन की सूचना की शर्त हट जाती है।
- practice — not a real PYQ
औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 22 के अधीन लोक उपयोगी सेवा में हड़ताल से जुड़ी सूचना की अवधि कितने दिन की है?
- (a)चौदह दिन
- (b)सात दिन
- (c)तीन दिन
- (d)इक्कीस दिन
उत्तर(a) चौदह दिन — लोक उपयोगी सेवा में हड़ताल के लिए यही अवधि निर्धारित है, और खान अधिनियम की तीन दिन वाली अवधि से इसका कोई संबंध नहीं है।