निम्नलिखित में से कौन-सी एक, कारखाना अधिनियम, 1948 की तीसरी अनुसूची के अधीन उपबंधित है?
- (a)उपजीविकाजन्य परिसंकटों की सूची
- (b)उपजीविकाजन्य रोगों की सूची
- (c)अधिसूचनीय रोगों की सूची
- (d)परिसंकटमय प्रक्रियाओं वाले उद्योगों की सूची
सही उत्तर — C, (c) अधिसूचनीय रोगों की सूची। कारखाना अधिनियम, 1948 की तीसरी अनुसूची उन रोगों की सूची है जिनकी सूचना देना अनिवार्य है, और वह अनुसूची धारा 89 तथा 90 से जुड़ी हुई है। धारा 89 का उपबंध यह है कि यदि किसी कारखाने में काम करने वाला कोई कर्मकार तीसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट किसी रोग से ग्रस्त हो जाए, तो प्रबंधक विहित प्राधिकारियों को उसकी सूचना भेजेगा; और जो चिकित्सा-व्यवसायी ऐसे व्यक्ति का उपचार कर रहा हो, उस पर भी सूचना देने का दायित्व है। धारा 90 सरकार को यह शक्ति देती है कि वह ऐसे मामलों की जाँच करा सके। इसीलिए इस अनुसूची में गिनाए गए रोगों को 'अधिसूचनीय' कहा जाता है — नाम ही उपबंध के प्रयोजन से निकला है। सूची में सीसा, फ़ॉस्फ़ोरस, पारद, मैंगनीज़ और आर्सेनिक जैसे धातु-विषों से होने वाली विषाक्तता, बेंज़ीन तथा कार्बन बाइसल्फ़ाइड की विषाक्तता, क्रोम व्रण, ऐंथ्रैक्स, सिलिकोसिस, ऐस्बेस्टॉसिस, बिसिनोसिस, न्यूमोकोनिओसिस और उपजीविकाजन्य कैंसर जैसे रोग आते हैं। ये सब वे रोग हैं जिनका संबंध किसी विशिष्ट औद्योगिक प्रक्रिया से सीधा जुड़ता है, इसलिए एक भी मामले की सूचना मिल जाने पर निरीक्षण-तंत्र पूरे कारखाने की जाँच कर सकता है। अनुसूचियों का बँटवारा याद रखना यहाँ सबसे उपयोगी है : पहली अनुसूची परिसंकटमय प्रक्रियाओं वाले उद्योगों की सूची है, दूसरी अनुसूची कार्य-वातावरण में कतिपय रासायनिक पदार्थों की अनुज्ञेय मात्रा बताती है, और तीसरी अनुसूची अधिसूचनीय रोगों की। तीनों का विषय स्वास्थ्य और सुरक्षा ही है, इसलिए विकल्प एक-दूसरे से बहुत मिलते-जुलते लगते हैं और भेद केवल अनुसूची-संख्या से होता है।
- (a)उपजीविकाजन्य परिसंकटों की सूची — इस नाम की कोई अनुसूची इस अधिनियम में है ही नहीं, और यही इस विकल्प की पहचान है। परिसंकटों से निपटने की व्यवस्था अधिनियम में अनुसूची के रूप में नहीं, बल्कि परिसंकटमय प्रक्रियाओं से संबंधित अलग अध्याय के रूप में है, जिसकी धाराएँ 41क से 41ज तक चलती हैं। उनमें स्थल मूल्यांकन समिति, अधिभोगी द्वारा सूचना का अनिवार्य प्रकटन, अधिभोगी के विशिष्ट उत्तरदायित्व, जाँच समिति, आपात मानक, अनावृत्ति की अनुज्ञेय सीमाएँ, सुरक्षा प्रबंध में कर्मकारों की भागीदारी तथा आसन्न ख़तरे की चेतावनी देने का कर्मकारों का अधिकार सम्मिलित हैं। अर्थात् 'परिसंकट' शब्द इस अधिनियम में बार-बार आता है, पर किसी सूची के शीर्षक के रूप में नहीं — और विकल्प इसी परिचित शब्द के सहारे खड़ा है।
- (b)उपजीविकाजन्य रोगों की सूची — यह इस समुच्चय का सबसे कुशल जाल है, क्योंकि 'उपजीविकाजन्य रोगों की सूची' नाम का शीर्षक श्रम विधि में सचमुच मिलता है — पर दूसरे अधिनियम में। कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम, 1923 की तीसरी अनुसूची उपजीविकाजन्य रोगों की सूची है, जो भागों में बँटी है और यह तय करती है कि किस रोग पर प्रतिकर का दावा बनेगा। कारखाना अधिनियम की तीसरी अनुसूची का प्रयोजन बिलकुल अलग है : वह प्रतिकर नहीं, सूचना और निरीक्षण से जुड़ी है, इसलिए उसका शीर्षक 'अधिसूचनीय रोग' है। दोनों सूचियों में कई रोग समान भी हैं, जिससे भ्रम और गहरा हो जाता है। भेद रखने का सरल तरीक़ा यह है : प्रतिकर का प्रश्न हो तो 1923 का अधिनियम, और सूचना देने का प्रश्न हो तो 1948 का।
- (d)परिसंकटमय प्रक्रियाओं वाले उद्योगों की सूची — यह सूची इसी अधिनियम में है, पर तीसरी अनुसूची में नहीं — यह पहली अनुसूची है, और वह अधिनियम की उस परिभाषा से जुड़ी है जो 'परिसंकटमय प्रक्रिया' को परिभाषित करती है। उस सूची में वे उद्योग गिनाए गए हैं जिनमें प्रयुक्त कच्चा माल या प्रक्रिया कर्मकारों के स्वास्थ्य अथवा पर्यावरण के लिए ख़तरा उत्पन्न कर सकती है — जैसे पेट्रोलियम और उससे जुड़े उद्योग, रंग तथा रंजक, कीटनाशक, चमड़ा शोधन, ऐस्बेस्टॉस और खनिज तेल से बनने वाले उत्पाद। अर्थात् यह विकल्प सही सूची का नाम देता है और उसे ग़लत अनुसूची में रख देता है, जो अनुसूची-आधारित प्रश्नों की सबसे आम रचना है। स्मरण का सूत्र यही है : पहली अनुसूची उद्योग, दूसरी रसायन की मात्रा, तीसरी रोग।
कारखाना अधिनियम, 1948 का ढाँचा अध्यायों में बँटा है और उनका क्रम स्वयं एक स्मरण-सहायक है : निरीक्षण-तंत्र, स्वास्थ्य, सुरक्षा, परिसंकटमय प्रक्रियाएँ, कल्याण, काम के घंटे, किशोरों का नियोजन, अवकाश, और फिर दंड तथा प्रकीर्ण उपबंध। स्वास्थ्य वाले अध्याय में स्वच्छता, कचरे का निपटान, संवातन और तापमान, धूल और धुआँ, कृत्रिम आर्द्रीकरण, भीड़ से बचाव, प्रकाश, पेय जल, शौचालय तथा थूकदान जैसे उपबंध हैं। सुरक्षा वाले अध्याय में मशीनरी की बाड़ लगाना, उत्थापन उपकरण, दाब-पात्र, आँखों की सुरक्षा तथा आग से बचाव आते हैं। परिसंकटमय प्रक्रियाओं वाला अध्याय 1987 के संशोधन से जोड़ा गया, जो भोपाल गैस त्रासदी के बाद आया और जिसने अधिभोगी पर सूचना-प्रकटन तथा आपात-योजना का दायित्व डाला। अनुसूचियाँ इसी ढाँचे को व्यावहारिक बनाती हैं — पहली उद्योगों की सूची, दूसरी रासायनिक अनावृत्ति की सीमाएँ, और तीसरी वे रोग जिनकी सूचना देना अनिवार्य है।
अनुसूची-आधारित प्रश्न इस परीक्षा में लगभग हर वर्ष आते हैं और उनकी रचना सदैव एक-सी होती है : सही नाम को ग़लत संख्या के साथ जोड़ देना, अथवा किसी दूसरे अधिनियम की अनुसूची का नाम रख देना। इसलिए तैयारी का सबसे किफ़ायती रूप यह है कि प्रत्येक बड़े श्रम अधिनियम की अनुसूचियाँ एक पंक्ति में लिख ली जाएँ। कारखाना अधिनियम के लिए वह पंक्ति है — पहली : परिसंकटमय प्रक्रियाओं वाले उद्योग; दूसरी : कार्य-वातावरण में रसायनों की अनुज्ञेय मात्रा; तीसरी : अधिसूचनीय रोग। कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम के लिए — पहली : निःशक्तता के प्रतिशत; दूसरी : वे व्यक्ति जो कर्मचारी माने जाते हैं; तीसरी : उपजीविकाजन्य रोग। इन दो पंक्तियों से इस प्रश्न जैसे कई प्रश्न सीधे हल हो जाते हैं। भाषा की एक बात भी दर्ज कर लीजिए : पुस्तिका में occupational के लिए 'उपजीविकाजन्य' शब्द छपा है, जो सरकारी विधिक हिन्दी का शब्द है; सामान्य पाठ्यपुस्तकों में इसी अर्थ में 'व्यावसायिक' मिलता है, इसलिए एक ही रोग-सूची दो अलग नामों से पढ़ने पर भ्रम नहीं होना चाहिए।
- कारखाना अधिनियम, 1948 की तीसरी अनुसूची अधिसूचनीय रोगों की सूची है और वह धारा 89 तथा 90 से जुड़ी है; धारा 89 प्रबंधक तथा चिकित्सा-व्यवसायी पर सूचना देने का दायित्व डालती है।
- इसी अधिनियम की पहली अनुसूची परिसंकटमय प्रक्रियाओं वाले उद्योगों की सूची है और दूसरी अनुसूची कार्य-वातावरण में कतिपय रासायनिक पदार्थों की अनुज्ञेय मात्रा बताती है।
- तीसरी अनुसूची में सीसा, फ़ॉस्फ़ोरस, पारद, मैंगनीज़ तथा आर्सेनिक की विषाक्तता, क्रोम व्रण, ऐंथ्रैक्स, सिलिकोसिस, ऐस्बेस्टॉसिस, बिसिनोसिस और उपजीविकाजन्य कैंसर जैसे रोग आते हैं।
- उपजीविकाजन्य रोगों की सूची कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम, 1923 की तीसरी अनुसूची है, जो प्रतिकर के दावे का आधार तय करती है — यही इस प्रश्न का सबसे बड़ा भ्रम-बिंदु है।
- परिसंकटमय प्रक्रियाओं से जुड़ा अध्याय 1987 के संशोधन से जोड़ा गया और उसमें स्थल मूल्यांकन समिति, सूचना का अनिवार्य प्रकटन, आपात मानक तथा कर्मकारों का चेतावनी देने का अधिकार सम्मिलित हैं।
- पुस्तिका में occupational के लिए 'उपजीविकाजन्य' शब्द प्रयुक्त है, जबकि सामान्य पाठ्यपुस्तकों में इसी अर्थ में 'व्यावसायिक' मिलता है — अर्थ एक ही है।
- 'उपजीविकाजन्य रोगों की सूची' को कारखाना अधिनियम की अनुसूची मान लेना; वह कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम, 1923 की तीसरी अनुसूची है।
- सही सूची को ग़लत अनुसूची-संख्या के साथ जोड़ लेना; परिसंकटमय प्रक्रियाओं वाले उद्योगों की सूची पहली अनुसूची में है, तीसरी में नहीं।
- 'परिसंकटों की सूची' जैसे प्रशंसनीय पर अस्तित्वहीन शीर्षक पर विश्वास कर लेना; अधिनियम में इस नाम की कोई अनुसूची नहीं है।
- सूचना और प्रतिकर के प्रयोजनों को एक मान लेना; अधिसूचनीय रोग की सूचना निरीक्षण के लिए है, प्रतिकर के लिए अलग अधिनियम और अलग सूची है।
कारखाना अधिनियम इस प्रश्नपत्र के श्रम खंड का सबसे नियमित विषय है और उससे प्रश्न प्रायः चार कोणों से आते हैं : अनुसूचियाँ, संख्यात्मक सीमा-मान जैसे काम के घंटे और अवकाश, कल्याण-सुविधाओं की शर्तें, और परिसंकटमय प्रक्रियाओं वाला अध्याय। अनुसूची वाले प्रश्न सबसे सरल होते हैं यदि तीनों अनुसूचियों के शीर्षक याद हों, और सबसे कठिन यदि केवल विषय-वस्तु का अस्पष्ट स्मरण हो, क्योंकि विकल्प जान-बूझकर एक-दूसरे से मिलते-जुलते बनाए जाते हैं। तैयारी में इसलिए शीर्षकों को क्रम-संख्या के साथ याद कीजिए, न कि केवल विषय के साथ। इसके अतिरिक्त एक तुलना-तालिका बना लीजिए, जिसमें कारखाना अधिनियम, खान अधिनियम और कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम की अनुसूचियाँ आमने-सामने हों — क्योंकि परीक्षा का सबसे आम जाल एक अधिनियम की सूची को दूसरे अधिनियम के प्रश्न में रख देना है।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
कारखाना अधिनियम, 1948 की पहली अनुसूची में निम्नलिखित में से क्या दिया गया है?
- (a)परिसंकटमय प्रक्रियाओं वाले उद्योगों की सूची
- (b)अधिसूचनीय रोगों की सूची
- (c)कार्य-वातावरण में रसायनों की अनुज्ञेय मात्रा
- (d)निःशक्तता के प्रतिशत की सूची
उत्तर(a) परिसंकटमय प्रक्रियाओं वाले उद्योगों की सूची — यही पहली अनुसूची है। अधिसूचनीय रोग तीसरी अनुसूची में हैं, रसायनों की अनुज्ञेय मात्रा दूसरी में, और निःशक्तता के प्रतिशत की सूची कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम, 1923 की अनुसूची है।
- practice — not a real PYQ
कारखाना अधिनियम, 1948 की किस धारा के अधीन प्रबंधक को अधिसूचनीय रोग की सूचना देनी होती है?
- (a)धारा 88
- (b)धारा 89
- (c)धारा 90
- (d)धारा 91
उत्तर(b) धारा 89 — यही धारा तीसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट रोगों की सूचना का उपबंध करती है। धारा 88 कतिपय दुर्घटनाओं की सूचना से संबंधित है और धारा 90 ऐसे मामलों की जाँच कराने की शक्ति देती है।