‘विशेषज्ञ समिति’ गठित करने हेतु उपबंध निम्नलिखित में से किस अधिनियम में है?
- (a)बालक और कुमार श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986
- (b)ठेका श्रम (विनियमन और उत्सादन) अधिनियम, 1970
- (c)भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन तथा सेवाशर्त विनियमन) अधिनियम, 1996
- (d)अंतर-राज्य प्रवासी कामगार (रोजगार और सेवा की शर्तों का विनियमन) अधिनियम, 1979
सही उत्तर — C, (c) भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन तथा सेवाशर्त विनियमन) अधिनियम, 1996। इस अधिनियम की धारा 5 का शीर्षक ही 'विशेषज्ञ समितियाँ' है, और वही यहाँ पूछा गया उपबंध है। धारा 5 के अनुसार समुचित सरकार एक या अधिक विशेषज्ञ समितियाँ गठित कर सकती है, जिनमें भवन अथवा अन्य सन्निर्माण कार्य में विशेष रूप से अर्हित व्यक्ति रखे जाते हैं, और इन समितियों का काम इस अधिनियम के अधीन नियम बनाने के विषय में सरकार को सलाह देना है। ध्यान दीजिए कि यह सलाहकार समिति से अलग निकाय है : सलाहकार समितियाँ त्रिपक्षीय होती हैं और अधिनियम के प्रशासन पर सामान्य सलाह देती हैं, जबकि विशेषज्ञ समिति तकनीकी विशेषज्ञता के लिए बनाई जाती है। यह भेद इसी अधिनियम की बनावट में साफ़ दिखता है। धारा 3 केंद्रीय सलाहकार समिति का उपबंध करती है, धारा 4 राज्य सलाहकार समिति का, और उनके ठीक बाद धारा 5 विशेषज्ञ समितियों का। तीनों एक ही अध्याय में एक के बाद एक आती हैं, इसलिए यदि अभ्यर्थी को अधिनियम की आरंभिक धाराओं का क्रम याद हो तो उत्तर तुरंत मिल जाता है। कारण भी समझने योग्य है कि यह उपबंध इसी अधिनियम में क्यों है। सन्निर्माण उद्योग में काम की परिस्थितियाँ अत्यंत तकनीकी हैं — मचान, उत्थापन उपकरण, विस्फोटक, ऊँचाई पर काम, ध्वस्तीकरण — और इनके लिए नियम बनाने में सामान्य प्रशासनिक अनुभव पर्याप्त नहीं होता। इसीलिए विधायिका ने सरकार को यह शक्ति दी कि वह इस क्षेत्र के जानकारों की समिति बनाकर नियम बनाने से पहले उसकी सलाह ले। यही तर्क इस उपबंध को शेष तीन अधिनियमों से अलग करता है, जिनकी विषय-वस्तु में इस प्रकार की तकनीकी विशेषज्ञता की माँग नहीं है।
- (a)बालक और कुमार श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 — इस अधिनियम में समिति का उपबंध तो है, पर उसका नाम और काम दोनों अलग हैं — यहाँ धारा 5 के अधीन 'तकनीकी सलाहकार समिति' गठित होती है, जो केंद्र सरकार को यह सलाह देती है कि अनुसूची में और कौन-से व्यवसाय या प्रक्रियाएँ जोड़ी जाएँ। अर्थात् इसका काम सूची बढ़ाने पर सलाह देना है, नियम बनाने पर नहीं, और उसका नाम 'विशेषज्ञ समिति' नहीं है। संयोग से धारा-संख्या दोनों अधिनियमों में 5 ही है, जो इस विकल्प को और आकर्षक बना देता है। इस अधिनियम की मुख्य पहचान 2016 के संशोधन से बनती है, जिसने चौदह वर्ष से कम आयु के बालकों के नियोजन पर लगभग पूर्ण प्रतिषेध लगाया और चौदह से अठारह वर्ष के किशोरों को परिसंकटमय व्यवसायों से रोका; तभी अधिनियम के नाम में किशोर जुड़े।
- (b)ठेका श्रम (विनियमन और उत्सादन) अधिनियम, 1970 — इस अधिनियम में त्रिपक्षीय निकाय हैं, विशेषज्ञ समिति नहीं। धारा 3 केंद्रीय सलाहकार बोर्ड का उपबंध करती है और धारा 4 राज्य सलाहकार बोर्ड का; ये बोर्ड ठेका श्रम के उत्सादन और विनियमन से जुड़े विषयों पर समुचित सरकार को सलाह देते हैं और अपनी सहायता के लिए समितियाँ भी गठित कर सकते हैं। अधिनियम का शेष ढाँचा प्रशासनिक है — प्रधान नियोजक के स्थापन का पंजीकरण, ठेकेदार का अनुज्ञापन, और कल्याण तथा स्वास्थ्य से जुड़ी सुविधाएँ, जिनमें ठेकेदार के चूकने पर दायित्व प्रधान नियोजक पर आ जाता है। इसमें कहीं भी नियम बनाने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की समिति का उपबंध नहीं है, इसलिए 'विशेषज्ञ समिति' शब्द यहाँ नहीं मिलेगा।
- (d)अंतर-राज्य प्रवासी कामगार (रोजगार और सेवा की शर्तों का विनियमन) अधिनियम, 1979 — यह अधिनियम ठेका श्रम अधिनियम की तर्ज़ पर बना है और उसका ढाँचा भी वैसा ही प्रशासनिक है : स्थापनों का पंजीकरण करने वाले पंजीकरण अधिकारी, ठेकेदारों को अनुज्ञप्ति देने वाले अनुज्ञापन अधिकारी, और अनुपालन देखने वाले निरीक्षक। इसकी अपनी विशेष पहचान उन अधिकारों से बनती है जो प्रवासी कामगार को दिए गए हैं — विस्थापन भत्ता, यात्रा भत्ता, तथा गृह-राज्य लौटने की व्यवस्था — क्योंकि यही वे कठिनाइयाँ हैं जो दूसरे राज्य में काम करने पर उठती हैं। किसी विशेषज्ञ समिति का उपबंध इसमें नहीं है। यह विकल्प इसलिए रखा गया है कि तीनों में से दो अधिनियम ठेकेदार-आधारित नियोजन से जुड़े हैं और अभ्यर्थी उनके उपबंध आपस में मिला बैठता है।
भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम, 1996 असंगठित क्षेत्र के सबसे बड़े श्रमिक-समूहों में से एक के लिए बना है और उसका ढाँचा तीन भागों में समझा जा सकता है। पहला भाग सलाहकार निकायों का है — धारा 3 के अधीन केंद्रीय सलाहकार समिति, धारा 4 के अधीन राज्य सलाहकार समिति और धारा 5 के अधीन विशेषज्ञ समितियाँ। दूसरा भाग पंजीकरण का है : निर्धारित संख्या से अधिक सन्निर्माण कर्मकार लगाने वाले स्थापन का पंजीकरण, और स्वयं कर्मकारों का हिताधिकारी के रूप में पंजीकरण, जिसके लिए आयु और कार्य-दिवसों की शर्तें हैं। तीसरा भाग कल्याण और सुरक्षा का है : राज्य स्तर पर कल्याण बोर्डों का गठन, जो पंजीकृत कर्मकारों को सहायता देते हैं, तथा काम के घंटे, दुर्घटना से बचाव और सुरक्षा उपायों के उपबंध। इस अधिनियम के साथ उसी वर्ष का एक उपकर अधिनियम भी है, जिसके अधीन सन्निर्माण की लागत पर उपकर लगाकर कल्याण बोर्डों के लिए निधि जुटाई जाती है — यही व्यवस्था इस क़ानून को अन्य श्रम क़ानूनों से अलग करती है।
श्रम विधि के प्रश्नों में सबसे आम साँचा यही है : एक उपबंध का नाम देकर पूछना कि वह किस अधिनियम में है। ऐसे प्रश्न में अभ्यर्थी की सहायता दो आदतें करती हैं। पहली, प्रत्येक अधिनियम की एक-दो 'हस्ताक्षर' विशेषताएँ याद रखना — जैसे विशेषज्ञ समिति और उपकर सन्निर्माण अधिनियम की पहचान हैं, तकनीकी सलाहकार समिति बाल श्रम अधिनियम की, प्रधान नियोजक का दायित्व ठेका श्रम अधिनियम का, और विस्थापन तथा यात्रा भत्ता अंतर-राज्य प्रवासी कामगार अधिनियम का। दूसरी, उपबंध के पीछे का तर्क देखना : जिस उद्योग में तकनीकी जोखिम अधिक है, वहीं नियम बनाने के लिए विशेषज्ञों की सलाह का उपबंध रखा जाएगा। यह तर्क अकेला भी इस प्रश्न में सही विकल्प तक पहुँचा देता है, क्योंकि चारों में से केवल सन्निर्माण ही ऐसा क्षेत्र है जहाँ काम की तकनीक स्वयं ख़तरे का स्रोत है।
- भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम, 1996 की धारा 5 विशेषज्ञ समितियों का उपबंध करती है; समुचित सरकार सन्निर्माण कार्य में विशेष रूप से अर्हित व्यक्तियों की समिति बनाकर नियम बनाने के विषय में सलाह ले सकती है।
- इसी अधिनियम की धारा 3 केंद्रीय सलाहकार समिति और धारा 4 राज्य सलाहकार समिति का उपबंध करती है, इसलिए तीनों समिति-उपबंध लगातार धाराओं में हैं।
- 1996 के इसी परिवार का एक अलग उपकर अधिनियम सन्निर्माण की लागत पर उपकर लगाता है, जिससे राज्य कल्याण बोर्डों की निधि बनती है — यह इस क़ानून की विशिष्ट पहचान है।
- बालक और कुमार श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 में धारा 5 के अधीन तकनीकी सलाहकार समिति बनती है, जो अनुसूची में व्यवसाय और प्रक्रियाएँ जोड़ने पर सलाह देती है।
- ठेका श्रम (विनियमन और उत्सादन) अधिनियम, 1970 में केंद्रीय सलाहकार बोर्ड (धारा 3) और राज्य सलाहकार बोर्ड (धारा 4) हैं, तथा स्थापन का पंजीकरण और ठेकेदार का अनुज्ञापन इसकी मुख्य प्रशासनिक व्यवस्था है।
- अंतर-राज्य प्रवासी कामगार अधिनियम, 1979 की विशेष पहचान विस्थापन भत्ता, यात्रा भत्ता और गृह-राज्य लौटने की व्यवस्था है; उसमें विशेषज्ञ समिति का कोई उपबंध नहीं है।
- 'तकनीकी सलाहकार समिति' और 'विशेषज्ञ समिति' को एक मान लेना; पहली बाल श्रम अधिनियम की है और दूसरी सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम की।
- सलाहकार बोर्ड और विशेषज्ञ समिति में भेद न करना; बोर्ड त्रिपक्षीय और सामान्य सलाह के लिए होते हैं, विशेषज्ञ समिति तकनीकी सलाह के लिए।
- ठेका श्रम अधिनियम और अंतर-राज्य प्रवासी कामगार अधिनियम के उपबंध आपस में मिला देना; दोनों का ढाँचा मिलता-जुलता है पर विशेष उपबंध अलग हैं।
- धारा-संख्या के संयोग से भ्रमित होना; दोनों समिति-उपबंध अपने-अपने अधिनियम की धारा 5 में हैं, इसलिए केवल संख्या याद रखना पर्याप्त नहीं।
इस प्रश्नपत्र में श्रम विधि से बीस से अधिक प्रश्न आते हैं और उनका सबसे आम रूप यही 'कौन-से अधिनियम में' वाला होता है। दूसरा आम रूप संख्यात्मक है — कितने दिन, कितने कर्मचारी, कितनी अवधि — और तीसरा किसी प्राधिकारी की पहचान का। तीनों की तैयारी एक साथ हो सकती है, यदि हर अधिनियम के लिए चार पंक्तियाँ लिख ली जाएँ : उसका उद्देश्य, उसका लागू होने का सीमा-मान, उसके प्रमुख प्राधिकारी और निकाय, और दो-तीन ऐसे उपबंध जो केवल उसी में मिलते हैं। यही अंतिम पंक्ति सबसे अधिक काम आती है, क्योंकि प्रश्न प्रायः उसी अनोखे उपबंध पर बनते हैं जो किसी एक अधिनियम की पहचान हो। साथ में यह भी ध्यान रखिए कि इन सभी अधिनियमों को चार श्रम संहिताओं में समाहित किया गया है, इसलिए प्रश्न कभी-कभी पुराने अधिनियम और नई संहिता दोनों के नाम एक साथ रखकर पूछा जाता है।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन तथा सेवा शर्त विनियमन) अधिनियम, 1996 की किस धारा में विशेषज्ञ समितियों के गठन का उपबंध है?
- (a)धारा 3
- (b)धारा 4
- (c)धारा 5
- (d)धारा 7
उत्तर(c) धारा 5 — इसी धारा के अधीन समुचित सरकार सन्निर्माण कार्य में विशेष रूप से अर्हित व्यक्तियों की विशेषज्ञ समितियाँ गठित करती है। धारा 3 केंद्रीय सलाहकार समिति और धारा 4 राज्य सलाहकार समिति का उपबंध करती है।
- practice — not a real PYQ
बालक और कुमार श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 के अधीन गठित उस निकाय का नाम क्या है जो अनुसूची में व्यवसाय और प्रक्रियाएँ जोड़ने पर केंद्र सरकार को सलाह देता है?
- (a)तकनीकी सलाहकार समिति
- (b)विशेषज्ञ समिति
- (c)केंद्रीय सलाहकार बोर्ड
- (d)कल्याण बोर्ड
उत्तर(a) तकनीकी सलाहकार समिति — यही इस अधिनियम की धारा 5 के अधीन गठित होती है। विशेषज्ञ समिति सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम, 1996 की व्यवस्था है और केंद्रीय सलाहकार बोर्ड ठेका श्रम अधिनियम, 1970 की।