इनमें से कौन कामरूप के पाल राजवंश का पहला निर्वाचित राजा था?
- (a)गोविन्दपाल
- (b)धर्मपाल
- (c)ब्रह्मपाल
- (d)जयपाल
सही उत्तर — C, (c) ब्रह्मपाल। कामरूप के पाल वंश की नींव ब्रह्मपाल ने रखी और परंपरा उन्हें निर्वाचित शासक बताती है — यही इस प्रश्न का एकमात्र निर्णायक तथ्य है। पृष्ठभूमि यह है कि प्राचीन कामरूप, अर्थात् आज के असम का क्षेत्र, पर क्रम से तीन राजवंशों का शासन रहा। पहला वर्मन वंश, जिसका सबसे प्रसिद्ध शासक भास्करवर्मन था, हर्षवर्धन का समकालीन और मित्र, और जिसका उल्लेख चीनी यात्री ह्वेनसांग के विवरण में मिलता है। दूसरा म्लेच्छ वंश, जिसे शालस्तंभ वंश भी कहा जाता है। और तीसरा पाल वंश, जो लगभग दसवीं शताब्दी से बारहवीं शताब्दी के आरंभ तक चला। म्लेच्छ वंश का अंतिम शासक उत्तराधिकारी छोड़े बिना चला गया, और तब राज्य के प्रमुखों ने ब्रह्मपाल को राजा चुना। इसी कारण उन्हें 'निर्वाचित' कहा जाता है, और प्रश्न का यह विशेषण किसी अलंकार के लिए नहीं, बल्कि उत्तर को अन्य तीन नामों से अलग करने के लिए रखा गया है। ब्रह्मपाल के बाद रत्नपाल, इंद्रपाल, गोपाल, हर्षपाल, धर्मपाल और अंत में जयपाल इस वंश में हुए। यहीं इस प्रश्न का असली पेच खुलता है : विकल्पों में से दो नाम — धर्मपाल और जयपाल — वास्तव में कामरूप के पाल वंश में आते हैं, किन्तु दोनों में से कोई पहला शासक नहीं है, और उनकी अधिक प्रसिद्धि दूसरे संदर्भों से है। इसलिए यह प्रश्न 'क्या यह नाम इस वंश का है' नहीं पूछता, बल्कि 'इस वंश का पहला निर्वाचित राजा कौन था' पूछता है, और उसका उत्तर केवल ब्रह्मपाल है। एक और भेद ध्यान में रखिए : कामरूप के ये पाल बंगाल-मगध के प्रसिद्ध पाल साम्राज्य से भिन्न हैं। दोनों वंशों के नाम मिलते-जुलते हैं और दोनों के संस्थापक के साथ निर्वाचन की परंपरा जुड़ी है, इसीलिए विकल्प बनाने वालों को यहाँ बहुत गुंजाइश मिल जाती है।
- (a)गोविन्दपाल — गोविन्दपाल का नाम कामरूप की वंशावली से नहीं, बल्कि बंगाल-मगध के पाल वंश के अंतिम चरण से जुड़ा है — वह उस लंबी शृंखला के आख़िरी नामों में गिना जाता है जो गोपाल से शुरू होकर धर्मपाल और देवपाल से होते हुए बारहवीं शताब्दी तक क्षीण होती चली गई। इस विकल्प का काम केवल 'पाल' शब्द के सहारे भ्रम पैदा करना है, क्योंकि दोनों वंशों के शासकों के नाम एक ही प्रत्यय पर समाप्त होते हैं। जो अभ्यर्थी कामरूप के पालों की छोटी सूची — ब्रह्मपाल, रत्नपाल, इंद्रपाल, गोपाल, हर्षपाल, धर्मपाल, जयपाल — एक बार लिखकर देख लेता है, उसके लिए यह विकल्प तुरंत कट जाता है, क्योंकि गोविन्दपाल उस सूची में है ही नहीं।
- (b)धर्मपाल — यह विकल्प दो कारणों से आकर्षक है और दोनों को अलग-अलग समझ लेना चाहिए। पहला, धर्मपाल नाम का एक शासक कामरूप के पाल वंश में सचमुच हुआ, किन्तु वह वंश के अंतिम चरण में आता है, पहला नहीं — और प्रश्न स्पष्ट रूप से पहले निर्वाचित राजा की पहचान माँगता है। दूसरा और बड़ा कारण यह है कि इस नाम की असली प्रसिद्धि बंगाल के पाल सम्राट धर्मपाल की है, जो गोपाल के पुत्र थे, जिन्होंने कन्नौज के लिए हुए त्रिपक्षीय संघर्ष में प्रतिहारों और राष्ट्रकूटों का सामना किया और जिनका नाम विक्रमशिला महाविहार की स्थापना से जुड़ा है। परीक्षा में यही अधिक परिचित नाम मन में पहले आता है, और वही यहाँ चूक कराता है।
- (d)जयपाल — जयपाल कामरूप के पाल वंश का अंतिम शासक था, अर्थात् इस विकल्प का नाम वंश में तो सही है पर स्थान बिलकुल उलटा — प्रश्न पहले शासक का पूछता है और यह अंतिम है। इस उलटाव का लाभ उठाने के लिए ही यह विकल्प रखा गया है, क्योंकि जिस अभ्यर्थी ने सूची देखी है पर क्रम याद नहीं रखा, वह पहचान के आधार पर इसे चुन सकता है। इसके अलावा इसी नाम का एक और शासक कहीं अधिक प्रसिद्ध है — पंजाब और काबुल क्षेत्र का हिंदूशाही शासक जयपाल, जिसका संघर्ष सबुक्तगीन और महमूद ग़ज़नवी से हुआ। दो अलग-अलग क्षेत्रों के एक ही नाम वाले शासक इस तरह के प्रश्नों में सबसे आम जाल हैं।
प्राचीन कामरूप का इतिहास तीन राजवंशों में बँटा है और यही विभाजन परीक्षा की दृष्टि से सबसे उपयोगी ढाँचा है। पहला वर्मन वंश, जिसकी स्थापना पुष्यवर्मन ने की और जिसका सबसे प्रसिद्ध शासक भास्करवर्मन था — हर्षवर्धन का समकालीन तथा मित्र, जिसका उल्लेख ह्वेनसांग के विवरण में और जिसके निधनपुर ताम्रपत्र अभिलेख में मिलता है। दूसरा म्लेच्छ वंश, जिसे शालस्तंभ वंश भी कहते हैं। तीसरा पाल वंश, जिसकी नींव ब्रह्मपाल ने रखी और जो लगभग बारहवीं शताब्दी के आरंभ तक चला। इस तीसरे वंश की दो बातें विशेष हैं। एक, इसका आरंभ निर्वाचन से हुआ — पिछला वंश उत्तराधिकारी के बिना समाप्त हुआ और प्रमुखों ने ब्रह्मपाल को चुना। दो, यह वंश बंगाल-मगध के पाल साम्राज्य से पूर्णतः भिन्न है, यद्यपि नाम और कालखंड दोनों में आंशिक समानता है। इन दोनों को अलग रखना ही इस प्रश्न-परिवार की तैयारी का मूल है।
इस प्रश्न में 'निर्वाचित' शब्द केवल विवरण नहीं, संकेत है। भारतीय इतिहास में राजा के निर्वाचन की परंपरा दो प्रसिद्ध प्रसंगों में मिलती है और दोनों लगभग एक ही कालखंड के हैं : बंगाल में गोपाल का चुनाव, जिसे अराजकता के दौर के अंत से जोड़ा जाता है, और कामरूप में ब्रह्मपाल का चुनाव, जो म्लेच्छ वंश के निस्संतान अंत के बाद हुआ। यह समानता अपने आप में स्मरणीय है, पर परीक्षा में यही समानता जाल भी बनती है, क्योंकि प्रश्न में यदि केवल 'निर्वाचित' पढ़ा जाए तो मन तुरंत गोपाल की ओर जाता है। इसलिए ऐसे प्रश्न में सबसे पहले क्षेत्र पकड़िए — यहाँ कामरूप — और फिर उस क्षेत्र की वंशावली पर जाइए। पूर्वोत्तर भारत का इतिहास प्रायः कम पढ़ा जाता है, इसलिए इससे आने वाले प्रश्न अपेक्षाकृत सीधे होते हैं और उनका उत्तर एक छोटी-सी सूची याद रखने भर से मिल जाता है।
- कामरूप के पाल वंश की स्थापना ब्रह्मपाल ने की और परंपरा के अनुसार वे निर्वाचित राजा थे; म्लेच्छ वंश के उत्तराधिकारी-विहीन अंत के बाद प्रमुखों ने उन्हें चुना।
- इस वंश का क्रम है — ब्रह्मपाल, रत्नपाल, इंद्रपाल, गोपाल, हर्षपाल, धर्मपाल और जयपाल; इसलिए विकल्पों के दो नाम वंश में तो हैं, पर पहले शासक नहीं हैं।
- प्राचीन कामरूप पर क्रम से तीन वंशों का शासन रहा — वर्मन, म्लेच्छ (शालस्तंभ) और पाल; वर्मन वंश का सबसे प्रसिद्ध शासक भास्करवर्मन था।
- भास्करवर्मन हर्षवर्धन का समकालीन और मित्र था, उसका उल्लेख ह्वेनसांग के विवरण में मिलता है और निधनपुर ताम्रपत्र उसी के अभिलेख हैं।
- कामरूप का पाल वंश बंगाल-मगध के पाल साम्राज्य से भिन्न है; बंगाल के पाल वंश की स्थापना गोपाल ने की, जिन्हें भी परंपरा निर्वाचित बताती है — यही समानता विकल्पों का सबसे बड़ा जाल है।
- बंगाल के धर्मपाल गोपाल के पुत्र थे, कन्नौज के त्रिपक्षीय संघर्ष के प्रमुख पात्र, और उनका नाम विक्रमशिला महाविहार की स्थापना से जुड़ा है।
- 'निर्वाचित' पढ़ते ही बंगाल के गोपाल की ओर चले जाना; वह परंपरा सही है पर दूसरे क्षेत्र की है, और प्रश्न कामरूप का पूछता है।
- धर्मपाल को केवल बंगाल के सम्राट के रूप में पहचानना या कामरूप वाले धर्मपाल को पहला शासक मान लेना; वे इस वंश के अंतिम चरण में आते हैं।
- जयपाल को चुन लेना, जो इसी वंश का अंतिम शासक था — नाम सही, स्थान उलटा; और इसी नाम का एक प्रसिद्ध हिंदूशाही शासक भी है।
- कामरूप के पालों और बंगाल-मगध के पालों को एक ही वंश मान लेना; नाम का प्रत्यय समान होने से यह भूल बहुत आम है।
पूर्वोत्तर भारत से आने वाले प्रश्न प्रायः तीन बिंदुओं पर केंद्रित रहते हैं : भास्करवर्मन और हर्ष का संबंध, कामरूप के वंशों का क्रम, और अहोम काल के प्रसंग जैसे सरायघाट का युद्ध। इस प्रश्नपत्र का साँचा 'निम्नलिखित में से कौन' वाला सीधा पहचान-प्रश्न है, जिसमें चारों विकल्प एक ही परिवार के नाम होते हैं और भेद केवल क्रम या क्षेत्र का होता है। ऐसे प्रश्नों में सबसे किफ़ायती तैयारी यह है कि हर क्षेत्रीय वंश की छोटी वंशावली एक पंक्ति में लिखकर याद कर ली जाए — पहला शासक, एक-दो प्रसिद्ध शासक और अंतिम शासक। इससे 'पहला', 'अंतिम' और 'निर्वाचित' जैसे विशेषणों पर बने प्रश्न सीधे कट जाते हैं। साथ में उन नामों की एक अलग सूची भी बनाइए जो एक से अधिक वंशों में आते हैं — धर्मपाल, गोपाल, जयपाल जैसे — क्योंकि विकल्प प्रायः उन्हीं पर बनते हैं।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
कामरूप के वर्मन वंश का वह शासक कौन था जो हर्षवर्धन का समकालीन और मित्र था तथा जिसका उल्लेख ह्वेनसांग के विवरण में मिलता है?
- (a)भास्करवर्मन
- (b)पुष्यवर्मन
- (c)सुस्थितवर्मन
- (d)महेंद्रवर्मन
उत्तर(a) भास्करवर्मन — उसने हर्षवर्धन से मैत्री की, कन्नौज तथा प्रयाग की सभाओं में भाग लिया और उसके निधनपुर ताम्रपत्र अभिलेख महत्त्वपूर्ण स्रोत हैं। पुष्यवर्मन इसी वंश का संस्थापक था और महेंद्रवर्मन पल्लव शासक।
- practice — not a real PYQ
बंगाल के पाल वंश की स्थापना किसने की, जिन्हें परंपरा के अनुसार प्रमुखों ने चुना था?
- (a)गोपाल
- (b)धर्मपाल
- (c)देवपाल
- (d)महिपाल
उत्तर(a) गोपाल — बंगाल में अराजकता के दौर के बाद उन्हें चुना गया और उन्होंने पाल वंश की नींव रखी। धर्मपाल उनके पुत्र थे, देवपाल धर्मपाल के उत्तराधिकारी और महिपाल बाद के शासक।