विजयनगर साम्राज्य के राजवंश और राजाओं के निम्नलिखित युग्मों में से कौन-सा एक सही सुमेलित नहीं है?
- (a)संगम राजवंश : हरिहर II
- (b)सलुवा राजवंश : तिम्मा
- (c)अराविदु राजवंश : तिरुमल
- (d)तुलुव राजवंश : गुंडा
सही उत्तर — D, (d) तुलुव राजवंश : गुंडा। पुस्तिका में 'नहीं' मोटे अक्षरों में छपा है, इसलिए पूछ उलटी है — तीन युग्म सही सुमेलित हैं और जो एक ग़लत है, वही उत्तर है। तुलुव राजवंश की वंशावली सुनिश्चित है और उसमें गुंडा नाम का कोई शासक नहीं आता। इस वंश की नींव तुलुव नरस नायक ने रखी, जो अंतिम सलुवा शासक के संरक्षक के रूप में वास्तविक सत्ता चला रहे थे। उनके बाद वीर नरसिंह राय (1505–1509) गद्दी पर आए, फिर कृष्णदेवराय (1509–1529), जिनके काल में विजयनगर अपने चरम पर पहुँचा, फिर अच्युत देवराय, वेंकट प्रथम और अंत में सदाशिव राय, जिनके नाम पर शासन चलता रहा जबकि सत्ता राम राय के हाथ में थी। यह पूरी सूची तुलुव वंश की है और इसमें गुंडा कहीं नहीं है, इसलिए यही युग्म ग़लत सुमेलित है। शेष तीन युग्मों को जाँच लीजिए, क्योंकि इस साँचे में सही युग्मों की पहचान ही उत्तर तक ले जाती है। हरिहर II संगम वंश के शासक थे — बुक्क प्रथम के पुत्र, जिन्होंने लगभग 1377 से 1404 तक शासन किया और महाराजाधिराज की उपाधि धारण की; उनके काल में राज्य पश्चिमी तट की ओर बढ़ा। सलुवा वंश की स्थापना सलुवा नरसिंह ने 1485 में अंतिम संगम शासक को हटाकर की, और उनके बाद तिम्मा का अल्पकालीन शासन आया, इसलिए तिम्मा सलुवा वंश के ही हैं। अराविदु वंश की स्थापना तिरुमल ने 1565 के तालीकोटा युद्ध के बाद की, जब राजधानी हटाकर पेनुकोंडा ले जाई गई; तिरुमल राम राय के भाई थे। इस प्रकार (a), (b) और (c) तीनों सही सुमेलित हैं और केवल (d) का युग्म बनता ही नहीं — यही कुंजी है।
- (a)संगम राजवंश : हरिहर II — यह युग्म सही सुमेलित है, इसलिए नकारात्मक पूछ में इसे चुनना भूल होगी। संगम विजयनगर का पहला राजवंश था; हरिहर प्रथम और बुक्क प्रथम ने 1336 में तुंगभद्रा के तट पर विजयनगर की स्थापना की और परंपरा उनके साथ विद्यारण्य का नाम जोड़ती है। हरिहर II बुक्क प्रथम के पुत्र थे और उन्होंने लगभग 1377 से 1404 तक शासन किया; उन्होंने महाराजाधिराज की उपाधि ली और राज्य का विस्तार पश्चिमी तट की ओर हुआ। इसी वंश में आगे देवराय प्रथम और देवराय द्वितीय जैसे प्रसिद्ध शासक हुए। संगम वंश 1485 तक चला, जब सलुवा नरसिंह ने सत्ता अपने हाथ में ले ली।
- (b)सलुवा राजवंश : तिम्मा — यह युग्म भी सही है और इसी कारण यह विकल्प सबसे कुशल जाल बनता है — तिम्मा का नाम कृष्णदेवराय के प्रसिद्ध मंत्री तिम्मरस के कारण जाना-पहचाना लगता है, और अभ्यर्थी उसे तुलुव काल से जोड़ बैठता है। किन्तु सलुवा वंश की अपनी छोटी-सी वंशावली में तिम्मा का नाम आता है : सलुवा नरसिंह ने 1485 में इस वंश की नींव रखी, उनके बाद तिम्मा का अल्पकालीन शासन रहा, और फिर नरसिंह राय द्वितीय, जिनके संरक्षक तुलुव नरस नायक थे। यही संरक्षकता आगे तुलुव वंश के उदय का रास्ता बनी। इसलिए तिम्मा सलुवा वंश के ही हैं और यह युग्म सही सुमेलित है।
- (c)अराविदु राजवंश : तिरुमल — यह युग्म भी सही सुमेलित है। अराविदु विजयनगर का चौथा और अंतिम राजवंश था और उसकी स्थापना तिरुमल ने की। पृष्ठभूमि यह है कि 1565 के तालीकोटा युद्ध में दक्कन की सल्तनतों के संघ ने विजयनगर को पराजित किया और वास्तविक शासक राम राय मारे गए; इसके बाद राजधानी विजयनगर उजड़ गई और राम राय के भाई तिरुमल ने पेनुकोंडा को केंद्र बनाकर नए वंश की नींव रखी। बाद में सत्ता का केंद्र चंद्रगिरि और वेल्लोर तक हटता गया। इसलिए अराविदु और तिरुमल का जोड़ा सही है, और नकारात्मक पूछ में इसे उत्तर मानना उसी भूल का दूसरा रूप होगा जो पूछ को सीधा पढ़ लेने से होती है।
विजयनगर साम्राज्य (1336–1646) पर चार राजवंशों ने शासन किया और उनका क्रम याद रखना इस पूरे विषय की रीढ़ है : संगम, सलुवा, तुलुव और अराविदु। संगम वंश की स्थापना हरिहर प्रथम और बुक्क प्रथम ने तुंगभद्रा के तट पर की; सलुवा वंश 1485 में सलुवा नरसिंह के साथ शुरू हुआ; तुलुव वंश 1505 में वीर नरसिंह राय के साथ, जिसमें कृष्णदेवराय सबसे प्रसिद्ध हुए; और अराविदु वंश 1565 के तालीकोटा युद्ध के बाद तिरुमल के साथ, जब राजधानी पेनुकोंडा ले जाई गई। इन चारों की संधि-रेखाएँ ही परीक्षा में सबसे अधिक पूछी जाती हैं, क्योंकि हर बार सत्ता का हस्तांतरण संरक्षकता से अधिग्रहण की ओर बढ़ा — सलुवा नरसिंह अंतिम संगम शासक के सेनापति थे, तुलुव नरस नायक अंतिम सलुवा शासक के संरक्षक, और राम राय अंतिम तुलुव शासक सदाशिव राय के नाम पर शासन चलाने वाले। यही दोहराव विकल्प बनाने वालों को नाम आपस में बदलने का अवसर देता है।
नकारात्मक युग्म-प्रश्न का सबसे सुरक्षित तरीक़ा यह है कि पूछ पढ़ते ही हाशिये पर 'ग़लत ढूँढ़ना है' लिख लिया जाए और फिर हर विकल्प के आगे सही या ग़लत का निशान लगाते हुए चला जाए। इस प्रश्न में तीन युग्म पहले ही प्रयास में सही निकल जाते हैं और चौथा अपने आप बच जाता है। ध्यान रखिए कि यह प्रश्न सुमेलन (Match List) का नहीं है — यहाँ कोई सूची–I और सूची–II नहीं है और न कोई कूट; प्रत्येक विकल्प स्वयं एक युग्म है और उनमें से एक ग़लत है। दोनों साँचों की रणनीति अलग होती है : सुमेलन में एक-दो निश्चित जोड़े बनाकर कूट से मिलान किया जाता है, जबकि युग्म-प्रश्न में हर विकल्प की स्वतंत्र जाँच होती है। छपाई की एक बात भी दर्ज करने योग्य है — हिन्दी स्तंभ में युग्म का जोड़-चिह्न अपूर्ण विराम अर्थात् कोलन है, जबकि अंग्रेज़ी स्तंभ में वही जोड़ एम-डैश से बना है। अर्थ पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
- विजयनगर पर चार राजवंशों ने शासन किया — संगम (1336 से), सलुवा (1485 से), तुलुव (1505 से) और अराविदु (1565 के बाद); प्रश्न इन्हीं चारों में से एक ग़लत युग्म खोजने को कहता है।
- तुलुव वंश की वंशावली में गुंडा नाम का कोई शासक नहीं है : तुलुव नरस नायक, वीर नरसिंह राय, कृष्णदेवराय, अच्युत देवराय, वेंकट प्रथम और सदाशिव राय — यही इस वंश का क्रम है।
- हरिहर II संगम वंश के शासक थे, बुक्क प्रथम के पुत्र, जिन्होंने लगभग 1377–1404 तक शासन किया और महाराजाधिराज की उपाधि धारण की।
- सलुवा वंश की स्थापना 1485 में सलुवा नरसिंह ने अंतिम संगम शासक को हटाकर की; उनके बाद तिम्मा का अल्पकालीन शासन रहा और फिर नरसिंह राय द्वितीय, जिनके संरक्षक तुलुव नरस नायक थे।
- 1565 के तालीकोटा युद्ध में दक्कन की सल्तनतों के संघ ने विजयनगर को पराजित किया और राम राय मारे गए; उसके बाद राम राय के भाई तिरुमल ने अराविदु वंश की नींव रखी और राजधानी पेनुकोंडा ले जाई गई।
- तुलुव वंश के कृष्णदेवराय (1509–1529) ने तेलुगु में आमुक्तमाल्यद की रचना की और उनका दरबार अष्टदिग्गज कवियों के लिए प्रसिद्ध रहा।
- नकारात्मक पूछ को सीधा पढ़ लेना; पुस्तिका में 'नहीं' मोटे अक्षरों में छपा है और उत्तर वही युग्म है जो ग़लत सुमेलित है।
- तिम्मा को कृष्णदेवराय के मंत्री तिम्मरस से जोड़कर सलुवा वाले युग्म को ग़लत मान लेना; तिम्मा सलुवा वंश के शासक थे और वह युग्म सही है।
- इस प्रश्न को सूची–I और सूची–II वाला सुमेलन मान लेना; यहाँ कोई कूट नहीं है, प्रत्येक विकल्प स्वयं एक युग्म है और उसकी अलग से जाँच करनी होती है।
- अराविदु वंश की स्थापना को तालीकोटा से पहले का मान लेना; वंश की नींव युद्ध के बाद पड़ी और राजधानी तभी पेनुकोंडा ले जाई गई।
विजयनगर से प्रश्न लगभग सदैव तीन में से किसी एक कोण से आता है : राजवंशों का क्रम और उनके संस्थापक, कृष्णदेवराय का काल, अथवा हम्पी का स्थापत्य और विदेशी यात्रियों के विवरण। इनमें राजवंश-क्रम वाला कोण सबसे अधिक लौटता है, क्योंकि चार वंश और उनके संस्थापक मिलकर विकल्प बनाने की बहुत गुंजाइश देते हैं — नाम आपस में बदल देना पर्याप्त होता है और अभ्यर्थी को ठीक-ठीक वंशावली याद न हो तो वह फँस जाता है। नकारात्मक युग्म-पूछ इसी कारण इस विषय पर बार-बार आती है, और इसी प्रश्नपत्र में ऐसा एक और युग्म-प्रश्न प्राचीन ग्रंथों पर भी है। तैयारी का सबसे किफ़ायती तरीक़ा यह है कि चारों वंशों के संस्थापक, उनका आरंभ-वर्ष और एक-एक प्रसिद्ध शासक एक पंक्ति में लिख लिए जाएँ, और साथ में वे तीन संधि-बिंदु भी जहाँ संरक्षक ने सत्ता ली — क्योंकि विकल्प प्रायः उन्हीं संधि-बिंदुओं पर बनाए जाते हैं।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
तालीकोटा के युद्ध के बाद पेनुकोंडा को केंद्र बनाकर विजयनगर के किस राजवंश की स्थापना हुई?
- (a)अराविदु
- (b)सलुवा
- (c)तुलुव
- (d)संगम
उत्तर(a) अराविदु — 1565 के तालीकोटा युद्ध में पराजय और राम राय की मृत्यु के बाद उनके भाई तिरुमल ने पेनुकोंडा को केंद्र बनाकर अराविदु वंश की नींव रखी। संगम, सलुवा और तुलुव तीनों इस युद्ध से पहले के वंश हैं।
- practice — not a real PYQ
तेलुगु ग्रंथ 'आमुक्तमाल्यद' की रचना विजयनगर के किस शासक ने की?
- (a)कृष्णदेवराय
- (b)हरिहर II
- (c)सलुवा नरसिंह
- (d)अच्युत देवराय
उत्तर(a) कृष्णदेवराय — तुलुव वंश के इस शासक ने तेलुगु में आमुक्तमाल्यद लिखा और उनका दरबार अष्टदिग्गज कवियों के लिए प्रसिद्ध रहा।