निम्नलिखित में से किसने यह सिफारिश की कि संघ और राज्य सरकारों के लोक स्वास्थ्य व्यय साथ-साथ इस प्रगामी रीति से बढ़ाए जाने चाहिए ताकि ये वर्ष 2025 तक सकल घरेलू उत्पाद के 2·5 प्रतिशत तक पहुँच जाएँ?
- (a)समष्टि अर्थशास्त्र (मैक्रोइकोनॉमिक्स) एवं स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय आयोग, 2005
- (b)स्वास्थ्य पर संसदीय स्थायी समिति, 2022
- (c)पंद्रहवाँ वित्त आयोग
- (d)कस्तूरीरंगन समिति
सही उत्तर — C, (c) पंद्रहवाँ वित्त आयोग। प्रश्न में जो वाक्य उद्धृत है वह किसी सामान्य आग्रह का सारांश नहीं है, बल्कि पंद्रहवें वित्त आयोग की अपनी शब्दावली है — संघ और राज्यों का लोक स्वास्थ्य व्यय, दोनों को साथ मिलाकर, प्रगामी रीति से इस प्रकार बढ़ाया जाए कि वह 2025 तक सकल घरेलू उत्पाद के 2·5 प्रतिशत तक पहुँच जाए। आयोग ने अपनी 2021–26 की रिपोर्ट में स्वास्थ्य क्षेत्र पर एक पूरा अध्याय रखा और यह उसी अध्याय की प्रमुख संस्तुति है। तीन बातें इस विकल्प को तय कर देती हैं। पहली, सिफ़ारिश की भाषा ही 'संघ और राज्य सरकारों के व्यय साथ-साथ' की है। संघ और राज्यों के बीच संसाधनों के बँटवारे तथा राज्यों के व्यय की दिशा पर संस्तुति देना संविधान के अनुच्छेद 280 के अधीन वित्त आयोग का अपना कार्यक्षेत्र है। कोई मंत्रालय-स्तरीय आयोग या संसदीय समिति राज्यों के व्यय को अपने प्रस्ताव में इस तरह जोड़कर नहीं गिनती, क्योंकि संघ-राज्य वित्तीय संबंध उसका विषय ही नहीं है। दूसरी, 2·5 प्रतिशत और 2025 का यह युग्म राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 के लक्ष्य से मेल खाता है, जिसने सरकारी स्वास्थ्य व्यय को इसी स्तर तक ले जाने की बात कही थी। पंद्रहवें वित्त आयोग ने उस लक्ष्य को केवल दोहराया नहीं, उसे अपनी औपचारिक संस्तुति बना दिया — और यही इस प्रश्न का असली पेच है, क्योंकि लक्ष्य का उद्गम नीति में है और प्रश्न में उद्धृत सिफ़ारिश आयोग की है। तीसरी, आयोग ने स्वास्थ्य पर यह अकेली संस्तुति नहीं दी। उसने यह भी कहा कि राज्य 2022 तक अपने बजट का 8 प्रतिशत से अधिक भाग स्वास्थ्य पर व्यय करें, तथा 2025 तक कुल स्वास्थ्य व्यय का दो-तिहाई प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल पर लगे। जो अभ्यर्थी इन तीनों को एक साथ पढ़ चुका है, वह पहली पंक्ति देखते ही आयोग को पहचान लेता है। पंद्रहवें वित्त आयोग का गठन नवंबर 2017 में हुआ और इसकी अध्यक्षता एन. के. सिंह ने की।
- (a)समष्टि अर्थशास्त्र (मैक्रोइकोनॉमिक्स) एवं स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय आयोग, 2005 — यह आयोग स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन गठित हुआ था और उसका काम विश्लेषणात्मक था — रोग-भार, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था के आपसी संबंध, तथा आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की लागत का आकलन। उसका 2005 का प्रतिवेदन इसी परिवार का दस्तावेज़ है और वह लोक स्वास्थ्य व्यय बढ़ाने के पक्ष में तर्क देता है, किन्तु प्रश्न में जिस रूप में सिफ़ारिश उद्धृत है — संघ और राज्यों का व्यय एक साथ जोड़कर, प्रगामी वृद्धि, और 2025 की समय-सीमा — वह वित्त आयोग की भाषा है, किसी मंत्रालय-गठित विशेषज्ञ आयोग की नहीं। इस विकल्प का असली काम यह है कि '2005' पढ़ते ही अभ्यर्थी को लगे कि लक्ष्य पुराना है, जबकि 2·5 प्रतिशत–2025 वाला युग्म राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 और उसके बाद के दस्तावेज़ों का है।
- (b)स्वास्थ्य पर संसदीय स्थायी समिति, 2022 — आयोग की कुंजी इस विकल्प को नहीं लेती, और इसका कारण समझ लेना अपने आप में उपयोगी है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण संबंधी विभाग-संबद्ध संसदीय स्थायी समिति एक निगरानी निकाय है : वह मंत्रालय की अनुदान माँगों की जाँच करती है, विधेयकों और चुनी हुई विषय-वस्तुओं पर प्रतिवेदन देती है, और स्वास्थ्य पर सरकारी व्यय बढ़ाने का आग्रह उसने एक से अधिक बार किया है। किन्तु उसकी संस्तुतियाँ संसद के प्रति कार्यपालिका की जवाबदेही के ढाँचे में आती हैं और वे बाध्यकारी नहीं होतीं; संघ और राज्यों के व्यय को एक साथ जोड़कर सकल घरेलू उत्पाद के अनुपात में लक्ष्य नियत करना उस ढाँचे का काम नहीं है। प्रश्न में उद्धृत वाक्य पंद्रहवें वित्त आयोग की 2021–26 की रिपोर्ट का है, इसलिए कुंजी (c) पर जाती है।
- (d)कस्तूरीरंगन समिति — के. कस्तूरीरंगन का नाम दो प्रसिद्ध समितियों से जुड़ा है और दोनों का स्वास्थ्य व्यय से कोई संबंध नहीं है। पहली, उनकी अध्यक्षता वाली समिति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 का प्रारूप तैयार किया। दूसरी, पश्चिमी घाट पर गाडगिल समिति की रिपोर्ट की समीक्षा के लिए बना उच्च स्तरीय कार्य समूह भी उन्हीं की अध्यक्षता में था, जिसने पश्चिमी घाट के लगभग 37 प्रतिशत भाग को पारिस्थितिकी दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र मानने की सिफ़ारिश की थी। वे स्वयं अंतरिक्ष वैज्ञानिक रहे हैं और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अध्यक्ष भी। इस विकल्प का काम केवल एक जाना-पहचाना नाम रखकर पहचान-आधारित अनुमान को पुरस्कृत करना है, इसलिए ऐसे प्रश्नों में यह पूछिए कि उस नाम की समिति का विषय क्या था।
लोक स्वास्थ्य व्यय पर भारत में तीन संख्याएँ बार-बार लौटती हैं और उन्हें अलग-अलग रखना ही इस प्रश्न की तैयारी है। पहली, वर्तमान सरकारी स्वास्थ्य व्यय सकल घरेलू उत्पाद के लगभग एक प्रतिशत के आसपास रहा है — संघ और राज्यों को मिलाकर। दूसरी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 ने इसे 2025 तक 2·5 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा। तीसरी, पंद्रहवें वित्त आयोग ने अपनी 2021–26 की रिपोर्ट में उसी लक्ष्य को औपचारिक संस्तुति बनाया और साथ में दो और संस्तुतियाँ जोड़ीं — राज्य अपने बजट का 8 प्रतिशत से अधिक स्वास्थ्य पर लगाएँ, और कुल स्वास्थ्य व्यय का दो-तिहाई प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल पर हो। ध्यान रखने योग्य बात यह है कि भारत में स्वास्थ्य राज्य सूची का विषय है, इसलिए कुल सरकारी स्वास्थ्य व्यय का बड़ा भाग राज्य करते हैं और कोई भी लक्ष्य केवल संघ के बजट से पूरा नहीं हो सकता। यही कारण है कि सिफ़ारिश की भाषा 'संघ और राज्य सरकारें साथ-साथ' की है, और यही वह सुराग़ भी है जो विकल्प तय कर देता है।
वित्त आयोग का गठन राष्ट्रपति संविधान के अनुच्छेद 280 के अधीन प्रत्येक पाँचवें वर्ष या उससे पहले करते हैं। उसका मूल काम संघ और राज्यों के बीच करों की शुद्ध आगम का बँटवारा, राज्यों को सहायता अनुदान के सिद्धांत, तथा राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के आधार पर पंचायतों और नगरपालिकाओं के संसाधन बढ़ाने के उपाय सुझाना है। पंद्रहवें वित्त आयोग का गठन नवंबर 2017 में हुआ, अध्यक्ष एन. के. सिंह थे, और इसकी अंतिम रिपोर्ट 2021–26 की पाँच वर्ष की अवधि के लिए है — इसी रिपोर्ट में स्वास्थ्य को एक अलग अध्याय मिला, जो वित्त आयोगों की परंपरा में अपेक्षाकृत नई बात है। परीक्षा की दृष्टि से यह प्रश्न उस श्रेणी का है जहाँ चारों विकल्प असली निकाय हैं और भेद केवल कार्यक्षेत्र का है : एक विश्लेषणात्मक आयोग, एक संसदीय निगरानी समिति, एक संवैधानिक वित्त आयोग और एक ऐसा नाम जो शिक्षा तथा पर्यावरण से जुड़ा है। ऐसे प्रश्न में सबसे पहले यह पूछिए कि उद्धृत वाक्य किस निकाय के अधिकार-क्षेत्र की भाषा बोल रहा है।
- पंद्रहवें वित्त आयोग ने अपनी 2021–26 की रिपोर्ट में संस्तुति दी कि संघ और राज्य सरकारों का लोक स्वास्थ्य व्यय, साथ मिलाकर, प्रगामी रीति से बढ़ाकर 2025 तक सकल घरेलू उत्पाद के 2·5 प्रतिशत तक पहुँचाया जाए — प्रश्न में यही वाक्य उद्धृत है।
- इसी रिपोर्ट में आयोग ने यह भी कहा कि राज्य 2022 तक अपने बजट का 8 प्रतिशत से अधिक भाग स्वास्थ्य पर व्यय करें, और 2025 तक कुल स्वास्थ्य व्यय का दो-तिहाई प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल पर लगाया जाए।
- 2·5 प्रतिशत का लक्ष्य पहले राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 में रखा गया था; वित्त आयोग ने उसे अपनी औपचारिक संस्तुति के रूप में दोहराया, इसलिए दोनों दस्तावेज़ एक ही संख्या बोलते हैं और प्रश्न 'किसने सिफ़ारिश की' पूछकर उन्हें अलग करता है।
- वित्त आयोग संविधान के अनुच्छेद 280 के अधीन राष्ट्रपति द्वारा प्रत्येक पाँचवें वर्ष या उससे पहले गठित किया जाता है; पंद्रहवें आयोग का गठन नवंबर 2017 में हुआ और उसकी अध्यक्षता एन. के. सिंह ने की।
- स्वास्थ्य संविधान की राज्य सूची का विषय है, इसलिए कुल सरकारी स्वास्थ्य व्यय में राज्यों का हिस्सा बड़ा रहता है और जीडीपी-अनुपात वाला कोई भी लक्ष्य संघ और राज्यों के व्यय को जोड़कर ही नापा जाता है।
- के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली समिति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 का प्रारूप तैयार किया, और पश्चिमी घाट पर गाडगिल रिपोर्ट की समीक्षा करने वाला उच्च स्तरीय कार्य समूह भी उन्हीं की अध्यक्षता में था — स्वास्थ्य व्यय उनके किसी प्रतिवेदन का विषय नहीं रहा।
- लक्ष्य के उद्गम और सिफ़ारिश करने वाले निकाय को एक मान लेना; 2·5 प्रतिशत का लक्ष्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 में आता है, जबकि प्रश्न में उद्धृत सिफ़ारिश पंद्रहवें वित्त आयोग की है।
- विकल्प में छपे वर्ष को प्रमाण मान लेना — '2005' और '2022' पढ़कर अभ्यर्थी सोचता है कि तिथि से मामला तय हो जाएगा, जबकि यहाँ भेद कार्यक्षेत्र का है, तिथि का नहीं।
- 'संघ और राज्य सरकारें साथ-साथ' वाले संकेत को अनदेखा कर देना; यही वाक्यांश बताता है कि सिफ़ारिश उस निकाय की है जिसका काम संघ-राज्य वित्तीय संबंध है।
- कस्तूरीरंगन के नाम को किसी भी नीतिगत लक्ष्य से जोड़ लेना; उनका संबंध राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के प्रारूप और पश्चिमी घाट पर बने उच्च स्तरीय कार्य समूह से है।
इस प्रश्नपत्र में स्वास्थ्य और वित्त आयोग दोनों एक से अधिक बार लौटते हैं, और उनका साँचा प्रायः दो में से एक होता है। पहला साँचा यही है — एक संख्यात्मक लक्ष्य दिया जाता है और पूछा जाता है कि उसकी सिफ़ारिश किसने की; ऐसे प्रश्न में चारों विकल्प असली निकाय होते हैं और भेद उनके अधिकार-क्षेत्र से निकलता है। दूसरा साँचा कथन-आधारित होता है, जिसमें आयोग की संस्तुतियों के दो-तीन कथन देकर सही कथन चुनने को कहा जाता है, जैसा इसी प्रश्नपत्र में पंद्रहवें वित्त आयोग पर अलग से पूछा गया है। तैयारी के लिए तीन चीज़ें पर्याप्त हैं : आयोग का नाम, अध्यक्ष और अवधि; उसकी तीन-चार सबसे उद्धृत संस्तुतियाँ अपनी संख्याओं के साथ; और वह संवैधानिक अनुच्छेद जिसके अधीन वह बना है। साथ में यह आदत बना लीजिए कि सिफ़ारिश की भाषा पढ़कर निकाय पहचानें — 'संघ और राज्यों को मिलाकर', 'हस्तांतरण', 'अनुदान' जैसे शब्द वित्त आयोग की ओर ले जाते हैं।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
पंद्रहवें वित्त आयोग की अध्यक्षता निम्नलिखित में से किसने की?
- (a)एन. के. सिंह
- (b)वाई. वी. रेड्डी
- (c)सी. रंगराजन
- (d)विजय केलकर
उत्तर(a) एन. के. सिंह — पंद्रहवें वित्त आयोग का गठन नवंबर 2017 में हुआ और उसकी अध्यक्षता एन. के. सिंह ने की। वाई. वी. रेड्डी चौदहवें वित्त आयोग के, सी. रंगराजन बारहवें के और विजय केलकर तेरहवें वित्त आयोग के अध्यक्ष थे।
- practice — not a real PYQ
भारत में वित्त आयोग का गठन संविधान के किस अनुच्छेद के अधीन किया जाता है?
- (a)अनुच्छेद 263
- (b)अनुच्छेद 275
- (c)अनुच्छेद 280
- (d)अनुच्छेद 282
उत्तर(c) अनुच्छेद 280 — इसी अनुच्छेद के अधीन राष्ट्रपति प्रत्येक पाँचवें वर्ष या उससे पहले वित्त आयोग गठित करते हैं। अनुच्छेद 263 अंतर-राज्य परिषद से, अनुच्छेद 275 राज्यों को सहायता अनुदान से और अनुच्छेद 282 संघ या राज्य द्वारा किसी लोक प्रयोजन के लिए दिए जाने वाले अनुदान से संबंधित है।