निम्नलिखित में से कौन-से, बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (BIRAC) की स्थापना के प्रमुख उद्देश्य हैं? 1. नवोन्मेष तथा उद्यमशीलता को बढ़ाना 2. प्रमुख सामाजिक क्षेत्रों में किफायती नवोन्मेष को बढ़ावा देना 3. स्टार्ट-अप तथा छोटे और मध्यम उद्यमों को मजबूती प्रदान करना 4. युवा खोजकर्ताओं को जैव प्रौद्योगिकी में एस॰ एम॰ ई॰ की उद्यमशीलता और प्रबंधकीय विकास के लिए बढ़ावा देना नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- (a)केवल 1, 2 और 3
- (b)केवल 1 और 4
- (c)केवल 2, 3 और 4
- (d)1, 2, 3 और 4
सही उत्तर — D, (d) 1, 2, 3 और 4 — चारों ही बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (BIRAC) के घोषित उद्देश्यों में आते हैं। पहले संस्था को पहचानिए। BIRAC भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) द्वारा 2012 में स्थापित एक लाभ-निरपेक्ष सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम है, जो विभाग और उद्योग के बीच अंतरापृष्ठ का काम करता है। उसका मूल विचार यह है कि जैव प्रौद्योगिकी में शोध और उत्पाद के बीच की खाई सबसे चौड़ी होती है : प्रयोगशाला में सिद्ध हो चुका विचार भी बाज़ार तक पहुँचने से पहले वर्षों की जाँच, नियामकीय अनुमोदन और पूँजी माँगता है, और यही वह चरण है जहाँ छोटे उद्यम टिक नहीं पाते। BIRAC इसी चरण में अनुदान, इक्विटी, ऊष्मायन और परामर्श देकर उद्यमों को सहारा देता है। अब चारों कथन इसी भूमिका पर परखिए। कथन 1 — नवोन्मेष तथा उद्यमशीलता को बढ़ाना — संस्था का सबसे व्यापक उद्देश्य है और उसके नाम में निहित शोध-सहायता का सीधा अर्थ है। कथन 2 — प्रमुख सामाजिक क्षेत्रों में किफ़ायती नवोन्मेष को बढ़ावा देना — उस दिशा की बात है जिसमें स्वास्थ्य, कृषि, स्वच्छ ऊर्जा और अपशिष्ट-प्रबंधन जैसे क्षेत्रों के लिए सस्ते समाधान बनाना सम्मिलित है; इसी उद्देश्य से जुड़े कार्यक्रम सामाजिक नवाचार को सहारा देते हैं। कथन 3 — स्टार्ट-अप तथा छोटे और मध्यम उद्यमों को मजबूती देना — BIRAC की अधिकांश योजनाओं का लक्षित समूह ही यही है। कथन 4 — युवा खोजकर्ताओं को जैव प्रौद्योगिकी में उद्यमशीलता और प्रबंधकीय विकास के लिए प्रोत्साहित करना — विश्वविद्यालयों तथा शोध-संस्थानों के युवा शोधकर्ताओं को उद्यमी बनने की ओर मोड़ने से जुड़ा है, और उसी दिशा में युवा उद्यमियों के लिए बनी योजनाएँ चलती हैं। चूँकि चारों कथन संस्था के अपने उद्देश्यों से मेल खाते हैं, उत्तर वही विकल्प है जो चारों को सम्मिलित करता है। दो पठन-संबंधी बातें भी ध्यान में रखिए। पहली, कथन 3 में ‘छोटे और मध्यम उद्यम’ लिखा है और कथन 4 में उसी वस्तु के लिए संक्षिप्त रूप ‘एस॰ एम॰ ई॰’ — दोनों एक ही चीज़ हैं, इसलिए यह मत मान लीजिए कि दोनों कथन अलग-अलग समूहों की बात कर रहे हैं और उनमें से कोई एक बाहर का होगा। दूसरी, ऐसे प्रश्नों में जहाँ ‘सब कुछ सही’ वाला विकल्प मौजूद हो, उसे केवल इस संदेह से मत छोड़िए कि वह बहुत सरल लगता है; प्रत्येक कथन को अलग-अलग परखिए और तभी निर्णय कीजिए।
- (a)केवल 1, 2 और 3 — यह विकल्प कथन 4 को बाहर कर देता है, जबकि युवा खोजकर्ताओं को जैव प्रौद्योगिकी में उद्यमशीलता तथा प्रबंधकीय विकास की ओर प्रोत्साहित करना संस्था के घोषित उद्देश्यों में है। यह कथन संदिग्ध इसलिए लगता है कि वह शेष तीन से अधिक विशिष्ट है और उसमें ‘प्रबंधकीय विकास’ जैसा शब्द है, जो शोध-संस्था के मुहावरे से कुछ अलग सुनाई देता है। पर BIRAC का पूरा तर्क ही यह है कि वैज्ञानिक विचार को उत्पाद बनने के लिए प्रबंधन, विपणन और नियामकीय समझ चाहिए, और युवा शोधकर्ताओं में यही कौशल विकसित करना उसके काम का अंग है — इसी दिशा में युवा उद्यमियों के लिए बनी योजनाएँ और ऊष्मायन केंद्र काम करते हैं। यह भी ध्यान दीजिए कि कथन 3 और कथन 4 एक ही समूह — लघु और मध्यम उद्यम — की बात दो अलग रूपों में करते हैं।
- (b)केवल 1 और 4 — यह विकल्प कथन 2 और कथन 3 दोनों को बाहर कर देता है, अर्थात् संस्था के काम का सबसे बड़ा हिस्सा ही छोड़ देता है। किफ़ायती नवोन्मेष सामाजिक क्षेत्रों के लिए BIRAC की घोषित प्राथमिकता है — स्वास्थ्य, कृषि, पोषण और स्वच्छता जैसे क्षेत्रों में ऐसे समाधान, जो देश की क्रय-शक्ति के भीतर हों — और यही जैव प्रौद्योगिकी की सार्वजनिक वित्त-पोषित शोध-सहायता का औचित्य भी है। इसी तरह स्टार्ट-अप तथा छोटे और मध्यम उद्यमों को सशक्त करना उसकी लगभग हर योजना का लक्ष्य-समूह है, चाहे वह आरंभिक चरण का अनुदान हो, ऊष्मायन केंद्रों का जाल हो, अथवा इक्विटी और निधियों के माध्यम से दी जाने वाली सहायता। इसलिए इन दोनों कथनों को हटाकर बनने वाला उत्तर संस्था के काम का बहुत छोटा और अधूरा चित्र देता है।
- (c)केवल 2, 3 और 4 — यह विकल्प कथन 1 को बाहर कर देता है, जो सबसे विचित्र है, क्योंकि नवोन्मेष तथा उद्यमशीलता को बढ़ाना ही वह छतरी है जिसके नीचे शेष तीनों उद्देश्य आते हैं। संस्था का नाम ही उद्योग को शोध-सहायता देने का है, और उसकी पूरी संरचना — अनुदान, इक्विटी, ऊष्मायन, परामर्श — इसी एक लक्ष्य की ओर है कि विचार से उत्पाद तक की यात्रा आसान हो। ऐसे विकल्प इसलिए रखे जाते हैं कि जो अभ्यर्थी सूची को ऊपर से नीचे पढ़ने के बजाय बीच से पढ़ना शुरू करता है, वह पहला कथन छोड़ बैठे, अथवा उसे इतना सामान्य मानकर हटा दे कि वह किसी भी संस्था पर लागू हो सकता है। सामान्य होना ग़लत होना नहीं है : प्रश्न यह पूछ रहा है कि उद्देश्य संस्था के हैं या नहीं, न कि यह कि वे केवल इसी संस्था के हैं।
BIRAC जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 2012 में स्थापित एक लाभ-निरपेक्ष सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम है, जिसका काम उद्योग और शोध के बीच सेतु बनना है। उसका कार्य-प्रतिरूप उद्यम की अवस्था के अनुसार बँटा हुआ है : आरंभिक अवस्था में विचार को सिद्ध करने के लिए अनुदान, जैसे बायोटेक्नोलॉजी इग्निशन ग्रांट; युवा उद्यमियों और विद्यार्थियों के लिए बने कार्यक्रम, जैसे ई-युवा तथा सितारे; ऊष्मायन केंद्रों का जाल, जिसे बायोनेस्ट कहा जाता है, जहाँ नवोदित उद्यमों को प्रयोगशाला और स्थान मिलता है; उन्नत अवस्था के लिए बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री पार्टनरशिप प्रोग्राम तथा लघु व्यवसाय नवाचार अनुसंधान पहल; तथा पूँजी के स्तर पर बीज निधि, लीप निधि और निधियों की निधि जैसी व्यवस्थाएँ। अनुवाद-शोध के लिए पेस तथा सामाजिक नवाचार के लिए स्पर्श जैसे कार्यक्रम भी इसी ढाँचे का अंग हैं। इस पूरे ढाँचे का उद्देश्य वही चार बातें हैं जो इस प्रश्न में गिनाई गई हैं — नवोन्मेष और उद्यमशीलता, सामाजिक क्षेत्रों में किफ़ायती समाधान, स्टार्ट-अप तथा लघु और मध्यम उद्यमों की मज़बूती, और युवा शोधकर्ताओं का उद्यमी तथा प्रबंधकीय विकास।
इस प्रकार के प्रश्न शासन और विज्ञान-नीति के उस भाग से आते हैं जहाँ किसी संस्था का नाम, उसका मूल मंत्रालय या विभाग, और उसका घोषित उद्देश्य जोड़कर पूछा जाता है। इसलिए तैयारी करते समय हर संस्था के लिए चार बातें एक पंक्ति में लिख लीजिए : किसने स्थापित की, कब, किस रूप में, और किसके लिए। BIRAC के मामले में उत्तर होगा — जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने, 2012 में, लाभ-निरपेक्ष सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम के रूप में, नवोदित जैव प्रौद्योगिकी उद्यमों के लिए। यहाँ यह भी ध्यान रखिए कि सरकार की नवाचार-सहायता की व्यवस्थाएँ कई हैं और उनके नाम आपस में मिल जाते हैं, इसलिए उन्हें अलग-अलग रखिए : जैव प्रौद्योगिकी विभाग विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत आता है, और उसी मंत्रालय में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग तथा वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग भी हैं। ऐसे प्रश्नों में विकल्प प्रायः इन्हीं परिचित नामों से बनाए जाते हैं, इसलिए संस्था का मूल विभाग याद रखना उत्तर तक पहुँचने का सबसे छोटा रास्ता है।
- BIRAC अर्थात् बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल की स्थापना जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 2012 में एक लाभ-निरपेक्ष सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम के रूप में की गई थी।
- उसका काम उद्योग और शोध के बीच अंतरापृष्ठ का है — नवोदित जैव प्रौद्योगिकी उद्यमों को अनुदान, इक्विटी, ऊष्मायन और परामर्श देकर विचार से उत्पाद तक की यात्रा आसान बनाना।
- प्रश्न में गिनाए गए चारों उद्देश्य संस्था के घोषित उद्देश्यों से मेल खाते हैं, इसलिए उत्तर वही विकल्प है जो चारों को सम्मिलित करता है।
- उसकी योजनाएँ उद्यम की अवस्था के अनुसार बँटी हैं — आरंभिक अवस्था के लिए बायोटेक्नोलॉजी इग्निशन ग्रांट, युवाओं के लिए ई-युवा तथा सितारे, ऊष्मायन के लिए बायोनेस्ट, और उन्नत अवस्था के लिए बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री पार्टनरशिप प्रोग्राम तथा लघु व्यवसाय नवाचार अनुसंधान पहल।
- पूँजी के स्तर पर बीज निधि, लीप निधि तथा निधियों की निधि जैसी व्यवस्थाएँ हैं, और अनुवाद-शोध के लिए पेस तथा सामाजिक नवाचार के लिए स्पर्श जैसे कार्यक्रम।
- कथन 3 का ‘छोटे और मध्यम उद्यम’ तथा कथन 4 का ‘एस॰ एम॰ ई॰’ एक ही समूह के दो रूप हैं, अलग-अलग समूह नहीं।
- ‘सब कुछ सही’ वाले विकल्प को केवल इस संदेह से छोड़ देना कि वह बहुत सरल लगता है; हर कथन को अलग-अलग परखना चाहिए।
- किसी उद्देश्य को इसलिए हटा देना कि वह बहुत सामान्य लगता है; प्रश्न यह पूछता है कि उद्देश्य संस्था का है या नहीं, न कि यह कि वह केवल उसी संस्था का है।
- कथन 3 और कथन 4 को अलग-अलग समूहों की बात मान लेना; ‘छोटे और मध्यम उद्यम’ तथा ‘एस॰ एम॰ ई॰’ एक ही हैं।
- संस्था का मूल विभाग भूल जाना; BIRAC जैव प्रौद्योगिकी विभाग की संस्था है, और विकल्पों में मंत्रालय के दूसरे विभाग रख दिए जाते हैं।
- प्रबंधकीय विकास जैसे शब्द को शोध-संस्था के लिए अटपटा मानकर कथन हटा देना; उत्पाद बनने के लिए प्रबंधन और नियामकीय समझ भी आवश्यक है।
संस्थाओं से जुड़े प्रश्न तीन ढंग से आते हैं। पहला ढंग उद्देश्यों की सूची का है, जैसा यहाँ है, जिसमें तीन-चार उद्देश्य गिनाकर पूछा जाता है कि कौन-से सही हैं; ऐसे प्रश्नों में सबसे तेज़ रास्ता यह है कि पहले संस्था का एक-पंक्ति परिचय स्मरण कीजिए और फिर हर कथन को उसी परिचय पर परखिए। दूसरा ढंग मूल विभाग या मंत्रालय जोड़ने का है, और वहाँ विकल्प एक ही मंत्रालय के भिन्न विभागों से बनाए जाते हैं। तीसरा ढंग योजनाओं का है : किस योजना का उद्देश्य क्या है, वह किस अवस्था के उद्यम के लिए है, अथवा उसका संचालन कौन करता है। तीनों के लिए एक ही तैयारी काम आती है — संस्था के नाम के आगे स्थापना-वर्ष, मूल विभाग, विधिक रूप, लक्ष्य-समूह और दो प्रमुख योजनाएँ लिख लीजिए, और इसी ढाँचे में दूसरी संस्थाओं की प्रविष्टियाँ भी बनाइए।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (BIRAC) की स्थापना किसके द्वारा की गई थी?
- (a)विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग
- (b)जैव प्रौद्योगिकी विभाग
- (c)वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद
- (d)भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद
उत्तर(b) जैव प्रौद्योगिकी विभाग
- practice — not a real PYQ
BIRAC की कौन-सी योजना जैव प्रौद्योगिकी में आरंभिक अवस्था के उद्यमियों को विचार सिद्ध करने के लिए अनुदान देती है?
- (a)बायोटेक्नोलॉजी इग्निशन ग्रांट
- (b)बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री पार्टनरशिप प्रोग्राम
- (c)बायोनेस्ट
- (d)पेस
उत्तर(a) बायोटेक्नोलॉजी इग्निशन ग्रांट