निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन जिला योजना समिति और महानगर योजना समिति के बारे में सही है/हैं? 1. जिला योजना समिति के मामले में, कम-से-कम 4/5 सदस्य जिला स्तर पर पंचायत के और जिले में नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा, अपने में से निर्वाचित होंगे। उनका अनुपात जिले में नगरीय क्षेत्रों की और ग्रामीण क्षेत्रों की जनसंख्या के अनुपात के अनुसार होगा। 2. महानगर योजना समिति के मामले में, समिति के कम-से-कम 2/3 सदस्य महानगर क्षेत्र में नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों और पंचायतों के अध्यक्षों द्वारा, अपने में से निर्वाचित किए जाएँगे। उनकी सीटों के अंश का अनुपात उस क्षेत्र में नगरपालिकाओं की और पंचायतों की जनसंख्या के अनुपात पर आधारित होगा। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- (a)केवल 1
- (b)केवल 2
- (c)1 और 2 दोनों
- (d)न तो 1 और न ही 2
सही उत्तर — C, (c) 1 और 2 दोनों — दोनों कथन संविधान के अनुच्छेद 243ZD तथा 243ZE की व्यवस्था दोहराते हैं, जिन्हें 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा जोड़ा गया था। कथन 1 जिला योजना समिति के बारे में है। अनुच्छेद 243ZD के अनुसार प्रत्येक राज्य में जिला स्तर पर एक जिला योजना समिति गठित की जाती है, जिसका काम जिले की पंचायतों तथा नगरपालिकाओं द्वारा तैयार योजनाओं को समेकित करना और पूरे जिले के लिए विकास योजना का प्रारूप बनाना है। उसकी संरचना के बारे में संविधान एक न्यूनतम शर्त रखता है : समिति के कुल सदस्यों में से कम-से-कम चार-बटा-पाँच सदस्य जिला स्तर की पंचायत तथा जिले की नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा, अपने में से ही, निर्वाचित होंगे — और यह निर्वाचन जिले की ग्रामीण तथा नगरीय जनसंख्या के अनुपात में होगा। कथन 1 यही कहता है। इतना ध्यान रखिए कि संविधान का पाठ अनुपात में पहले ग्रामीण और फिर नगरीय क्षेत्रों का नाम लेता है, जबकि यहाँ छपे कथन में क्रम उलटा है; अनुपात वही रहता है, केवल नाम लेने का क्रम बदला है। कथन 2 महानगर योजना समिति के बारे में है। अनुच्छेद 243ZE के अनुसार प्रत्येक महानगर क्षेत्र में एक महानगर योजना समिति गठित की जाती है, जो पूरे महानगर क्षेत्र के लिए विकास योजना का प्रारूप तैयार करती है। यहाँ न्यूनतम अंश दो-बटा-तीन है : समिति के कम-से-कम दो-तिहाई सदस्य उस क्षेत्र की नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों तथा पंचायतों के अध्यक्षों द्वारा, अपने में से ही, निर्वाचित होंगे, और उनके बीच सीटों का बँटवारा उस क्षेत्र की नगरपालिकाओं तथा पंचायतों की जनसंख्या के अनुपात पर आधारित होगा। कथन 2 यही कहता है। अतः दोनों कथन सही हैं। इस प्रश्न में असली परीक्षा दो भिन्नों की है — जिला योजना समिति के लिए चार-बटा-पाँच और महानगर योजना समिति के लिए दो-बटा-तीन — और उन्हें आपस में बदल देना ही यहाँ की सबसे आम भूल है। भिन्नों को याद रखने का एक सहारा यह है कि जिला योजना समिति में निर्वाचित सदस्यों का अनुपात अधिक कड़ा रखा गया है, क्योंकि वहाँ ग्रामीण और नगरीय दोनों निकायों का प्रतिनिधित्व एक साथ साधना था। दो और बातें साथ रखिए : महानगर क्षेत्र वह क्षेत्र है जिसकी जनसंख्या दस लाख या उससे अधिक हो और जो एक या अधिक जिलों में फैला हो तथा दो या अधिक नगरपालिकाओं या पंचायतों या अन्य संलग्न क्षेत्रों से बना हो, और जिसे राज्यपाल लोक अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करते हैं; तथा दोनों समितियों के अध्यक्ष तैयार विकास योजना राज्य सरकार को अग्रेषित करते हैं।
- (a)केवल 1 — यह विकल्प कथन 2 को ग़लत मान लेता है, और ऐसा प्रायः दोनों भिन्नों को आपस में बदल देने से होता है। महानगर योजना समिति के लिए संविधान में निर्धारित न्यूनतम अंश दो-बटा-तीन है, चार-बटा-पाँच नहीं; और वहाँ निर्वाचक-मंडल भी भिन्न है — उस क्षेत्र की नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्य तथा पंचायतों के अध्यक्ष, जो अपने में से ही सदस्य चुनते हैं। सीटों का बँटवारा उस क्षेत्र की नगरपालिकाओं और पंचायतों की जनसंख्या के अनुपात पर आधारित होता है, अर्थात् वही आनुपातिक तर्क जो जिला योजना समिति में ग्रामीण और नगरीय जनसंख्या के बीच लगाया गया है। इसलिए कथन 2 में कोई भूल नहीं है और ‘केवल 1’ अधूरा उत्तर है।
- (b)केवल 2 — यह विकल्प कथन 1 को ग़लत मानता है, जबकि वह अनुच्छेद 243ZD की व्यवस्था ही दोहराता है : समिति के कम-से-कम चार-बटा-पाँच सदस्य जिला स्तर की पंचायत तथा जिले की नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा, अपने में से, निर्वाचित होते हैं, और यह अनुपात जिले की ग्रामीण तथा नगरीय जनसंख्या के अनुपात के अनुसार होता है। संदेह प्रायः अनुपात में नाम लेने के क्रम से उपजता है — संविधान का पाठ पहले ग्रामीण क्षेत्रों का उल्लेख करता है और यहाँ पहले नगरीय क्षेत्रों का — किंतु यह क्रम अनुपात को बदलता नहीं, दोनों रूप एक ही बँटवारा बताते हैं। शेष एक-बटा-पाँच सदस्यों के बारे में संविधान मौन है और उस भाग की व्यवस्था राज्य विधि पर छोड़ी गई है, जिसमें प्रायः अधिकारी और विशेषज्ञ नामनिर्दिष्ट किए जाते हैं।
- (d)न तो 1 और न ही 2 — यह विकल्प दोनों कथनों को अस्वीकार कर देता है, अर्थात् इसमें दोनों भूलें एक साथ हैं। ऐसा उत्तर तब बनता है जब अभ्यर्थी भिन्नों को लेकर अनिश्चित हो और लंबे कथनों को पढ़ने के बजाय दोनों को संदिग्ध मानकर आगे बढ़ जाए। यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि दोनों कथन बनावट में समांतर हैं — पहला जिला स्तर की व्यवस्था बताता है, दूसरा महानगर स्तर की — और दोनों में एक ही तर्क काम कर रहा है : निर्वाचित सदस्यों का एक निर्धारित न्यूनतम अंश, अपने में से ही निर्वाचन, और जनसंख्या के अनुपात पर आधारित बँटवारा। जब दो कथन इस तरह समांतर हों, तो उन्हें साथ-साथ पढ़िए और केवल वे बिंदु मिलाइए जहाँ वे भिन्न हैं — यहाँ वे बिंदु हैं भिन्न का मान और निर्वाचक-मंडल की बनावट।
74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 ने नगरीय स्थानीय शासन को संवैधानिक दर्जा दिया और उसी के साथ नियोजन की दो समितियाँ जोड़ीं, ताकि गाँव और शहर की योजनाएँ अलग-अलग टापुओं की तरह न बनें। अनुच्छेद 243ZD जिला योजना समिति की व्यवस्था करता है : उसका काम जिले की पंचायतों तथा नगरपालिकाओं की योजनाओं को समेकित कर पूरे जिले की विकास योजना का प्रारूप बनाना है, और उसमें कम-से-कम चार-बटा-पाँच सदस्य निर्वाचित सदस्यों में से ही, ग्रामीण तथा नगरीय जनसंख्या के अनुपात में, चुने जाते हैं। प्रारूप बनाते समय समिति को साझा हित के विषयों पर ध्यान देना होता है — स्थानिक नियोजन, जल तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों का बँटवारा, अवसंरचना का समेकित विकास और पर्यावरण संरक्षण — तथा उपलब्ध संसाधनों की मात्रा और प्रकार पर भी। अनुच्छेद 243ZE महानगर योजना समिति की व्यवस्था करता है, जिसमें कम-से-कम दो-बटा-तीन सदस्य नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों तथा पंचायतों के अध्यक्षों में से, उनकी जनसंख्या के अनुपात में, चुने जाते हैं। महानगर क्षेत्र की परिभाषा अनुच्छेद 243P में है — दस लाख या अधिक जनसंख्या वाला क्षेत्र, जो एक या अधिक जिलों में फैला हो और दो या अधिक नगरपालिकाओं या पंचायतों या अन्य संलग्न क्षेत्रों से बना हो, तथा जिसे राज्यपाल लोक अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करें। दोनों समितियों के अध्यक्ष तैयार योजना राज्य सरकार को अग्रेषित करते हैं।
इन समितियों का उद्देश्य नीचे से ऊपर की ओर नियोजन है : पंचायतें और नगरपालिकाएँ अपने-अपने स्तर पर योजना बनाएँ, और जिला या महानगर स्तर पर उन्हें जोड़कर एक समेकित योजना बने। व्यवहार में इनका कार्यान्वयन असमान रहा है — अनेक राज्यों में समितियाँ देर से गठित हुईं और उनकी भूमिका औपचारिक रह गई — और यही बात विभिन्न आयोगों तथा वित्त आयोगों की रिपोर्टों में उठाई जाती रही है, विशेषकर नगरीय नियोजन के संदर्भ में, जहाँ महानगर क्षेत्रों में कई प्राधिकरण साथ-साथ काम करते हैं और उनके बीच समन्वय का प्रश्न बना रहता है। परीक्षा की दृष्टि से इस भाग से आने वाले प्रश्न प्रायः तीन बिंदुओं पर टिकते हैं : समिति का नाम और अनुच्छेद, निर्वाचित सदस्यों का न्यूनतम अंश, और महानगर क्षेत्र की जनसंख्या-सीमा। इन्हीं तीन बिंदुओं को एक साथ लिखकर याद कर लेना इस विषय के अधिकांश प्रश्नों के लिए पर्याप्त है।
- जिला योजना समिति की व्यवस्था अनुच्छेद 243ZD में है और महानगर योजना समिति की अनुच्छेद 243ZE में; दोनों 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा जोड़े गए।
- जिला योजना समिति के कम-से-कम चार-बटा-पाँच सदस्य जिला स्तर की पंचायत तथा जिले की नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा, अपने में से, जिले की ग्रामीण और नगरीय जनसंख्या के अनुपात में निर्वाचित होते हैं।
- महानगर योजना समिति के कम-से-कम दो-बटा-तीन सदस्य उस क्षेत्र की नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों तथा पंचायतों के अध्यक्षों द्वारा, अपने में से, उनकी जनसंख्या के अनुपात में निर्वाचित होते हैं।
- जिला योजना समिति का काम जिले की पंचायतों तथा नगरपालिकाओं की योजनाओं को समेकित कर पूरे जिले के लिए विकास योजना का प्रारूप तैयार करना है।
- महानगर क्षेत्र वह क्षेत्र है जिसकी जनसंख्या दस लाख या अधिक हो, जो एक या अधिक जिलों में फैला हो और दो या अधिक नगरपालिकाओं या पंचायतों या अन्य संलग्न क्षेत्रों से बना हो, तथा जिसे राज्यपाल लोक अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करें।
- दोनों समितियों के अध्यक्ष तैयार विकास योजना राज्य सरकार को अग्रेषित करते हैं।
- दोनों भिन्न आपस में बदल देना; जिला योजना समिति के लिए चार-बटा-पाँच और महानगर योजना समिति के लिए दो-बटा-तीन है।
- निर्वाचक-मंडल की बनावट मिला देना; महानगर योजना समिति में नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्य तथा पंचायतों के अध्यक्ष सदस्य चुनते हैं।
- अनुपात में नाम लेने के क्रम को अर्थ का अंतर मान लेना; संविधान का पाठ पहले ग्रामीण क्षेत्रों का उल्लेख करता है, पर अनुपात वही रहता है।
- महानगर क्षेत्र की जनसंख्या-सीमा भूल जाना; वह दस लाख या अधिक है और अधिसूचना राज्यपाल जारी करते हैं।
- लंबे कथनों को पढ़े बिना दोनों को संदिग्ध मान लेना; दोनों कथन समांतर हैं और केवल दो बिंदुओं पर भिन्न हैं।
स्थानीय शासन के इस भाग से प्रश्न तीन ढंग से आते हैं। पहला ढंग कथन-आधारित है, जैसा यहाँ है, और उसमें प्रायः दोनों समितियों की समांतर व्यवस्थाएँ रखकर देखा जाता है कि अभ्यर्थी भिन्न और निर्वाचक-मंडल ठीक-ठीक याद रखता है या नहीं। दूसरा ढंग अनुच्छेद जोड़ने का है : कौन-सी व्यवस्था किस अनुच्छेद में है, और यहाँ 243ZD तथा 243ZE के साथ-साथ 243I और 243Y जैसे अनुच्छेद भी विकल्पों में रख दिए जाते हैं। तीसरा ढंग परिभाषा का है : महानगर क्षेत्र किसे कहते हैं, अधिसूचना कौन जारी करता है, और योजना किसे अग्रेषित की जाती है। तीनों के लिए तैयारी का सरल ढंग यह है कि दोनों समितियों की एक तुलनात्मक तालिका बनाइए, जिसमें अनुच्छेद, न्यूनतम अंश, निर्वाचक-मंडल, आनुपातिक आधार और योजना अग्रेषित करने वाला अधिकारी एक साथ दिखें।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
संविधान के अनुसार महानगर क्षेत्र (Metropolitan area) के लिए न्यूनतम जनसंख्या कितनी निर्धारित है?
- (a)पाँच लाख
- (b)दस लाख
- (c)बीस लाख
- (d)पचास लाख
उत्तर(b) दस लाख
- practice — not a real PYQ
जिला योजना समिति और महानगर योजना समिति की व्यवस्था संविधान के किन अनुच्छेदों में की गई है?
- (a)अनुच्छेद 243ZD और 243ZE
- (b)अनुच्छेद 243G और 243W
- (c)अनुच्छेद 243P और 243Q
- (d)अनुच्छेद 243I और 243Y
उत्तर(a) अनुच्छेद 243ZD और 243ZE