निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. आर्थिक मामलों का विभाग, देश की आर्थिक नीतियों और कार्यक्रमों के, जो आर्थिक प्रबंधन के देशी और अंतर्राष्ट्रीय पहलुओं को प्रभावित करते हैं, निरूपण और मॉनीटरन के लिए भारत सरकार की एक नोडल एजेंसी है। 2. आर्थिक मामलों के विभाग का प्रमुख दायित्व केन्द्रीय बजट (रेल बजट समेत) तैयार करना और उसे संसद के समक्ष प्रस्तुत करना, तथा केन्द्रशासित क्षेत्रों और राष्ट्रपति शासन के अधीन राज्यों के लिए बजट तैयार करना है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a)केवल 1
- (b)केवल 2
- (c)1 और 2 दोनों
- (d)न तो 1 और न ही 2
सही उत्तर — C, (c) 1 और 2 दोनों — दोनों कथन आर्थिक मामलों के विभाग के घोषित कार्य-क्षेत्र का ही वर्णन करते हैं। कथन 1 विभाग की अपनी परिचय-पंक्ति है। आर्थिक मामलों का विभाग वित्त मंत्रालय का वह विभाग है जो देश की आर्थिक नीतियों और कार्यक्रमों के निरूपण तथा मॉनीटरन के लिए नोडल एजेंसी है, और इसमें आर्थिक प्रबंधन के देशी तथा अंतर्राष्ट्रीय दोनों पहलू आते हैं। अंतर्राष्ट्रीय पक्ष इसलिए जुड़ा है कि बहुपक्षीय संस्थाओं — विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, एशियाई विकास बैंक — तथा द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग से जुड़े कार्य भी इसी विभाग के पास हैं। कथन 2 बजट से जुड़ा है और यहीं इस प्रश्न का असली परीक्षण है, क्योंकि उसमें कोष्ठक में लिखा है ‘रेल बजट समेत’। बहुत-से अभ्यर्थी यहीं रुक जाते हैं, क्योंकि उन्हें याद रहता है कि रेल बजट अलग से प्रस्तुत होता था। वह स्मृति पुरानी है : रेल बजट 1924 से अलग प्रस्तुत होता आ रहा था, और 2017-18 के बजट से उसे आम बजट में मिला दिया गया। तब से एक ही बजट संसद में प्रस्तुत होता है, जिसमें रेल का लेखा भी सम्मिलित है, इसलिए कोष्ठक वाला यह वाक्यांश आज की स्थिति के अनुरूप है। जब तक रेल बजट अलग प्रस्तुत होता था, तब तक इसी उत्तरदायित्व का वर्णन उसे छोड़कर किया जाता था — इसीलिए पुरानी और नई सामग्री में यह वाक्य अलग-अलग मिलता है। कथन 2 का दूसरा भाग भी विभाग के काम का ही अंग है : बजट प्रभाग केंद्रशासित क्षेत्रों तथा राष्ट्रपति शासन के अधीन राज्यों के लिए भी बजट तैयार करता है। यहाँ एक बारीकी और जोड़ लीजिए, जो दूसरे प्रश्नों में काम आती है — यह व्यवस्था उन केंद्रशासित क्षेत्रों के लिए है जिनका अपना विधानमंडल नहीं है; जिनका अपना विधानमंडल है वे अपना बजट स्वयं प्रस्तुत करते हैं। अतः दोनों कथन सही हैं और उत्तर विकल्प (c) है। इस प्रश्न से एक सामान्य पाठ भी लीजिए : ‘समेत’ या ‘छोड़कर’ जैसे छोटे शब्द कथन-आधारित प्रश्नों में निर्णायक होते हैं, और उनका सही-ग़लत होना प्रायः किसी नीतिगत परिवर्तन की तिथि से बँधा रहता है।
- (a)केवल 1 — इस विकल्प तक पहुँचने का सबसे आम रास्ता कोष्ठक वाला वाक्यांश ‘रेल बजट समेत’ है : अभ्यर्थी को याद रहता है कि रेल बजट अलग प्रस्तुत होता था, और वह कथन 2 को ग़लत मान लेता है। किंतु वह स्मृति 2017 से पहले की है। रेल बजट 1924 से अलग प्रस्तुत होता आ रहा था, और 2017-18 के बजट से उसे आम बजट में मिला दिया गया; तब से संसद में एक ही बजट आता है और उसमें रेल भी सम्मिलित है। इसी दौर में बजट से जुड़े दो और परिवर्तन हुए, जिन्हें साथ याद रखना उपयोगी है — बजट की प्रस्तुति फ़रवरी के अंतिम कार्य-दिवस से हटाकर पहली फ़रवरी कर दी गई, और योजना तथा योजनेतर व्यय का पुराना वर्गीकरण समाप्त कर दिया गया। इसलिए कथन 2 आज की स्थिति में सही है और ‘केवल 1’ अधूरा उत्तर है।
- (b)केवल 2 — यह विकल्प कथन 1 को ग़लत मानता है, जबकि वह विभाग के घोषित कार्य-क्षेत्र की सीधी पुनरावृत्ति है। यहाँ भूल प्रायः वित्त मंत्रालय के विभागों को आपस में मिला देने से होती है। वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आर्थिक कार्य, व्यय, राजस्व, वित्तीय सेवाएँ, निवेश और लोक परिसंपत्ति प्रबंधन तथा लोक उद्यम विभाग आते हैं, और इनके काम अलग-अलग हैं : कर-नीति और कर-प्रशासन राजस्व विभाग के पास है, सरकारी व्यय तथा वेतन-आयोग जैसे विषय व्यय विभाग के पास, बैंक और बीमा वित्तीय सेवाएँ विभाग के पास, तथा सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी का प्रबंधन निवेश और लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग के पास। समग्र आर्थिक नीति, बजट, पूँजी बाज़ार, मुद्रा और सिक्का तथा बहुपक्षीय संस्थाओं से संबंध — ये सब आर्थिक मामलों के विभाग के पास हैं। इसलिए कथन 1 सही है।
- (d)न तो 1 और न ही 2 — यह विकल्प दोनों कथनों को अस्वीकार कर देता है, अर्थात् इसमें ऊपर बताई गई दोनों भूलें एक साथ हैं। कथन 1 विभाग की परिचय-पंक्ति ही है, और कथन 2 बजट प्रभाग का वह उत्तरदायित्व, जिसके अंतर्गत आम बजट तैयार करना तथा संसद में प्रस्तुत कराना और केंद्रशासित क्षेत्रों एवं राष्ट्रपति शासन के अधीन राज्यों के बजट बनाना आता है। ‘न तो 1 और न ही 2’ जैसा विकल्प चुनने से पहले यह जाँच लेना उपयोगी है कि क्या दोनों कथनों में कोई तथ्यात्मक भूल सचमुच दिखाई दी, या केवल भाषा भारी लगी। इस प्रश्न में भाषा अवश्य भारी है — लंबे वाक्य, कोष्ठक, और प्रशासनिक शब्दावली — पर तथ्य दोनों जगह ठीक हैं।
वित्त मंत्रालय का काम कई विभागों में बँटा है, और आर्थिक मामलों का विभाग उनमें समग्र आर्थिक नीति और बजट का विभाग है। उसके प्रमुख प्रभागों का विभाजन इस प्रकार समझिए : आर्थिक प्रभाग, जो समष्टि-आर्थिक विश्लेषण करता है और मुख्य आर्थिक सलाहकार के मार्गदर्शन में आर्थिक समीक्षा तैयार करता है; बजट प्रभाग, जो आम बजट तथा केंद्रशासित क्षेत्रों और राष्ट्रपति शासन वाले राज्यों के बजट बनाता है और सरकार के उधार-प्रबंधन से जुड़ा है; पूँजी बाज़ार से संबंधित प्रभाग, जिसके अंतर्गत प्रतिभूति बाज़ार की नीति आती है; अवसंरचना और निवेश से जुड़ा प्रभाग; बहुपक्षीय संस्थाओं तथा द्विपक्षीय सहयोग से जुड़े प्रभाग; और मुद्रा तथा सिक्का प्रभाग, जिसके पास करेंसी, सिक्कों और उनकी छपाई-ढलाई से जुड़े विषय हैं। विभाग वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद से जुड़े कार्यों में भी नोडल भूमिका निभाता है, जिसकी अध्यक्षता वित्त मंत्री करते हैं। इसके साथ बजट-प्रक्रिया के संवैधानिक ढाँचे को भी जोड़कर रखिए — अनुच्छेद 112 का वार्षिक वित्तीय विवरण, अनुच्छेद 266 की संचित निधि, अनुच्छेद 267 की आकस्मिकता निधि, तथा विनियोग और वित्त विधेयक — क्योंकि प्रश्न प्रायः विभाग और प्रक्रिया दोनों को जोड़कर पूछते हैं।
इस प्रश्न की उपयोगिता इसमें है कि यह प्रशासनिक ढाँचे की जानकारी को एक नीतिगत परिवर्तन की तिथि से जोड़ देता है। रेल बजट का आम बजट में विलय 2017-18 से हुआ, और यह परिवर्तन नीति आयोग के अंतर्गत बनी समिति की सिफ़ारिश के बाद किया गया, जिसकी अध्यक्षता बिबेक देबरॉय ने की थी; अलग रेल बजट की परंपरा 1924 में एकवर्थ समिति की सिफ़ारिश से आरंभ हुई थी। विलय के पीछे तर्क यह था कि रेल भी सरकार का ही उपक्रम है, अलग बजट से दोहरी प्रक्रिया और अनावश्यक राजनीतिक प्रदर्शन होता है, और एक ही बजट से संसाधनों की समग्र दृष्टि बनती है। परीक्षा की दृष्टि से इस प्रकार के प्रश्नों में तीन आदतें उपयोगी हैं : किसी विभाग का नाम पढ़ते ही उसके दो-तीन प्रमुख कार्य स्मरण कीजिए; कोष्ठक में लिखे ‘समेत’ या ‘छोड़कर’ जैसे शब्दों पर रुककर सोचिए कि वे किस काल की स्थिति बता रहे हैं; और जहाँ कथन पुराने ढाँचे की बात करता दिखे, वहाँ यह याद कीजिए कि उस ढाँचे में कब परिवर्तन हुआ।
- आर्थिक मामलों का विभाग वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आता है और देश की आर्थिक नीतियों तथा कार्यक्रमों के निरूपण और मॉनीटरन की नोडल एजेंसी है, जिसमें देशी तथा अंतर्राष्ट्रीय दोनों पहलू सम्मिलित हैं।
- विभाग का बजट प्रभाग आम बजट तैयार करता है तथा केंद्रशासित क्षेत्रों और राष्ट्रपति शासन के अधीन राज्यों के बजट भी बनाता है; अपना विधानमंडल रखने वाले केंद्रशासित क्षेत्र अपना बजट स्वयं प्रस्तुत करते हैं।
- रेल बजट 1924 से अलग प्रस्तुत होता आ रहा था और 2017-18 के बजट से उसे आम बजट में मिला दिया गया, इसलिए आज संसद में एक ही बजट आता है जिसमें रेल भी सम्मिलित है।
- अलग रेल बजट की परंपरा एकवर्थ समिति की सिफ़ारिश से आरंभ हुई थी, और विलय नीति आयोग के अंतर्गत बिबेक देबरॉय की अध्यक्षता वाली समिति की सिफ़ारिश के बाद किया गया।
- इसी दौर में बजट की प्रस्तुति फ़रवरी के अंतिम कार्य-दिवस से हटाकर पहली फ़रवरी कर दी गई और योजना तथा योजनेतर व्यय का वर्गीकरण समाप्त कर दिया गया।
- आर्थिक समीक्षा विभाग के आर्थिक प्रभाग द्वारा मुख्य आर्थिक सलाहकार के मार्गदर्शन में तैयार की जाती है, और बहुपक्षीय संस्थाओं तथा मुद्रा एवं सिक्का से जुड़े विषय भी इसी विभाग के पास हैं।
- कोष्ठक के ‘रेल बजट समेत’ को पुरानी स्मृति से ग़लत मान लेना; विलय 2017-18 से हो चुका है।
- वित्त मंत्रालय के विभागों के काम आपस में मिला देना; कर राजस्व विभाग के पास हैं, व्यय व्यय विभाग के पास, और समग्र आर्थिक नीति तथा बजट आर्थिक मामलों के विभाग के पास।
- केंद्रशासित क्षेत्रों के बजट की बात को सभी क्षेत्रों पर लागू मान लेना; अपना विधानमंडल रखने वाले क्षेत्र अपना बजट स्वयं प्रस्तुत करते हैं।
- लंबे और प्रशासनिक भाषा वाले कथन को केवल भाषा के कारण संदिग्ध मान लेना; तथ्य दोनों कथनों में ठीक हैं।
- ‘समेत’ और ‘छोड़कर’ जैसे शब्दों को हल्के में पढ़ जाना; कथन-आधारित प्रश्नों में यही शब्द निर्णायक होते हैं।
शासन और अर्थव्यवस्था के इस भाग से प्रश्न तीन ढंग से आते हैं। पहला ढंग कथन-आधारित है, जैसा यहाँ है, जिसमें किसी विभाग या संस्था का कार्य-क्षेत्र देकर सही-ग़लत पुछवाया जाता है, और परीक्षा प्रायः किसी एक कोष्ठक या एक विशेषण पर टिकी होती है। दूसरा ढंग सुमेलन का है : विभाग और उसका कार्य, अथवा संस्था और उसका मूल मंत्रालय जोड़ना। तीसरा ढंग तिथि और सुधार का है : रेल बजट का विलय कब हुआ, बजट की तिथि कब बदली, योजना-योजनेतर वर्गीकरण कब समाप्त हुआ, वस्तु एवं सेवा कर कब लागू हुआ। तीनों के लिए एक ही तैयारी उपयोगी है — वित्त मंत्रालय के विभागों की एक तालिका बनाइए, हर विभाग के आगे तीन प्रमुख कार्य लिखिए, और बजट-सुधारों की एक छोटी कालरेखा साथ रख लीजिए।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
रेल बजट को आम बजट में किस वर्ष से मिला दिया गया?
- (a)2014-15
- (b)2016-17
- (c)2017-18
- (d)2019-20
उत्तर(c) 2017-18
- practice — not a real PYQ
आर्थिक समीक्षा (Economic Survey) मुख्यतः किसके द्वारा तैयार की जाती है?
- (a)व्यय विभाग द्वारा
- (b)आर्थिक मामलों के विभाग के आर्थिक प्रभाग द्वारा, मुख्य आर्थिक सलाहकार के मार्गदर्शन में
- (c)नीति आयोग द्वारा
- (d)भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा
उत्तर(b) आर्थिक मामलों के विभाग के आर्थिक प्रभाग द्वारा, मुख्य आर्थिक सलाहकार के मार्गदर्शन में