निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन सही है?
- (a)पूँजी आरक्षित निधियाँ सामान्यतः मुक्त या वितरणीय लाभों से सृजित होती हैं।
- (b)लाभांश समकारी आरक्षित निधि, सामान्य आरक्षित निधि का एक उदाहरण है।
- (c)सामान्य आरक्षित निधि का केवल किन्हीं विशेष प्रयोजनों के लिए ही उपयोग किया जा सकता है।
- (d)‘प्रावधान’, लाभ के विरुद्ध प्रभार है।
सही उत्तर — D, (d) ‘प्रावधान’, लाभ के विरुद्ध प्रभार है। यही चारों में एकमात्र कथन है जो लेखांकन की स्थापित परिभाषा से मेल खाता है। प्रावधान (provision) वह राशि है जो किसी ज्ञात दायित्व या ज्ञात हानि के लिए अलग रखी जाती है, जिसकी राशि पूरी निश्चितता से नहीं आँकी जा सकती — ह्रास, संदिग्ध ऋणों का प्रावधान, कराधान का प्रावधान, वारंटी का प्रावधान। इसे लाभ-हानि खाते में नाम किया जाता है, अर्थात् लाभ निकालने से पहले ही घटा दिया जाता है। इसी को ‘लाभ के विरुद्ध प्रभार’ कहते हैं, और इसका सबसे निर्णायक परिणाम यह है कि प्रावधान लाभ की उपलब्धता पर निर्भर नहीं करता : वर्ष में हानि हुई हो तब भी ह्रास और संदिग्ध ऋणों का प्रावधान करना ही पड़ता है, और उससे हानि और बढ़ जाती है। इसके सामने आरक्षित निधि (reserve) रखिए। वह लाभ का विनियोजन है — लाभ निकल जाने के बाद, लाभ-हानि विनियोजन खाते के रास्ते, उसी में से अलग रखी गई राशि, जो उद्यम की वित्तीय स्थिति मज़बूत करने या किसी अनिश्चित भविष्य के लिए रखी जाती है। इसीलिए आरक्षित निधि केवल तभी बनाई जा सकती है जब लाभ हो, और वह चिट्ठे में ‘आरक्षित निधियाँ और अधिशेष’ के नीचे दिखती है। दूसरी ओर प्रावधान या तो दायित्व पक्ष में दिखता है या उस परिसंपत्ति में से घटाकर, जिससे वह जुड़ा है — जैसे संदिग्ध ऋणों का प्रावधान देनदारों में से घटाया जाता है। हिन्दी शब्दावली में एक जगह ठहरिए। ‘प्रभार’ पढ़कर उसे कोई शुल्क या फ़ीस मत समझिए; यहाँ charge का अर्थ है वह मद जो लाभ निकालने से पहले उसमें से काटी जाती है। और ‘विनियोजन’ का अर्थ है निकाले जा चुके लाभ का बँटवारा। यही एक भेद इस पूरे विषय का केंद्र है : प्रभार लाभ बनने से पहले, विनियोजन लाभ बनने के बाद। एक व्यावहारिक कसौटी भी याद रखिए, जिससे विकल्प तुरंत छँटते हैं : जो राशि हानि के वर्ष में भी बनानी पड़े वह प्रावधान है; जो केवल लाभ में से बन सके, और जिसे न बनाने पर लेखांकन ग़लत न कहलाए, वह आरक्षित निधि है।
- (a)पूँजी आरक्षित निधियाँ सामान्यतः मुक्त या वितरणीय लाभों से सृजित होती हैं। — यह कथन उलटा है। पूँजी आरक्षित निधि पूँजीगत लाभों से बनती है, वितरणीय या मुक्त लाभों से नहीं — निगमन से पूर्व का लाभ, प्रतिभूति प्रीमियम, ज़ब्त अंशों के पुनर्निर्गम पर लाभ, ऋणपत्रों के शोधन पर लाभ, और स्थायी परिसंपत्ति की बिक्री पर हुआ पूँजीगत लाभ। इसी कारण उसे साधारणतः लाभांश बाँटने के लिए उपलब्ध नहीं माना जाता; उसके उपयोग सीमित होते हैं, जैसे पूँजीगत हानियों को अपलिखित करना या बोनस अंश निर्गम में सहायता। जो निधि प्रचालन से अर्जित वितरणीय लाभों से बनती है वह सामान्य आरक्षित निधि है, और उसी को ‘मुक्त आरक्षित निधि’ कहा जाता है। इस विकल्प में दोनों के स्रोत आपस में बदल दिए गए हैं, और यही इस प्रकार के कथनों की सबसे आम बनावट है।
- (b)लाभांश समकारी आरक्षित निधि, सामान्य आरक्षित निधि का एक उदाहरण है। — लाभांश समकारी आरक्षित निधि सामान्य आरक्षित निधि का उदाहरण नहीं, बल्कि विशिष्ट आरक्षित निधि का उदाहरण है। उसका प्रयोजन नाम में ही लिखा है : अच्छे वर्षों में लाभ का एक भाग अलग रखकर उन वर्षों में लाभांश की दर स्थिर बनाए रखना जब लाभ कम हो। सामान्य आरक्षित निधि की पहचान इसके विपरीत है — उसके साथ कोई प्रयोजन जुड़ा ही नहीं होता, वह उद्यम की सामान्य वित्तीय मज़बूती के लिए रखी जाती है। दोनों बनती लाभ में से ही हैं और दोनों विनियोजन हैं, इसलिए भेद स्रोत का नहीं, प्रयोजन के निर्दिष्ट होने का है। यही भेद अगले विकल्प में उलटकर दोबारा रखा गया है, इसलिए (b) और (c) को साथ पढ़िए।
- (c)सामान्य आरक्षित निधि का केवल किन्हीं विशेष प्रयोजनों के लिए ही उपयोग किया जा सकता है। — यह भी उलटा कथन है। सामान्य आरक्षित निधि की परिभाषा ही यह है कि वह किसी विशेष प्रयोजन से बँधी नहीं होती : उसका उपयोग अप्रत्याशित हानियों को झेलने, कार्यशील पूँजी बढ़ाने, लाभांश की दर बनाए रखने या व्यवसाय के विस्तार में — किसी भी वैध प्रयोजन में — किया जा सकता है, और इसी कारण उसे मुक्त आरक्षित निधि कहा जाता है। जो निधियाँ केवल निर्दिष्ट प्रयोजन के लिए रखी जाती हैं वे विशिष्ट आरक्षित निधियाँ हैं — लाभांश समकारी निधि, ऋणपत्र शोधन निधि, संयंत्र प्रतिस्थापन निधि। ध्यान दीजिए कि यह विकल्प और (b) एक ही भेद के दो सिरे हैं, और दोनों में विशेषताएँ आपस में अदल-बदल दी गई हैं; ऐसे जोड़े पहचान लेने पर दोनों एक साथ कट जाते हैं।
यह प्रश्न लेखांकन के एक ही भेद के चारों ओर घूमता है — प्रभार बनाम विनियोजन। प्रावधान लाभ के विरुद्ध प्रभार है : किसी ज्ञात दायित्व या हानि के लिए, जिसकी राशि निश्चित नहीं, लाभ-हानि खाते में नाम की गई राशि, जो लाभ हो या हानि, बनानी ही पड़ती है। आरक्षित निधि लाभ का विनियोजन है : लाभ निकल जाने के बाद उसमें से अलग रखी गई राशि, जो केवल लाभ होने पर ही बन सकती है। इससे आगे आरक्षित निधियाँ दो तरह से बाँटी जाती हैं। स्रोत के आधार पर — राजस्व आरक्षित निधि, जो प्रचालन के वितरणीय लाभों से बनती है, और पूँजी आरक्षित निधि, जो पूँजीगत लाभों से बनती है और साधारणतः लाभांश के लिए उपलब्ध नहीं होती। प्रयोजन के आधार पर — सामान्य आरक्षित निधि, जो किसी प्रयोजन से बँधी नहीं, और विशिष्ट आरक्षित निधि, जो किसी नामित प्रयोजन के लिए रखी जाती है, जैसे लाभांश समकारी निधि या ऋणपत्र शोधन निधि। इन दोनों वर्गीकरणों को आपस में गड्डमड्ड कर देना ही इस प्रश्न के तीनों ग़लत कथनों का स्रोत है। एक शब्द पर सावधानी : ‘प्रभार’ का अर्थ यहाँ शुल्क नहीं, बल्कि लाभ निकालने से पहले की जाने वाली कटौती है; और ‘गुप्त आरक्षित निधि’ जैसे पद इससे अलग विषय हैं, जिनमें परिसंपत्तियाँ जान-बूझकर कम दिखाई जाती हैं।
इस भेद का महत्त्व केवल परिभाषा तक सीमित नहीं है, वह सीधे लाभ की गणना और लाभांश की क्षमता तय करता है। यदि किसी प्रावधान को आरक्षित निधि मान लिया जाए तो लाभ बढ़ा-चढ़ाकर दिखेगा और उस पर लाभांश बाँट दिया जाएगा, जो वास्तव में अर्जित ही नहीं हुआ था; और यदि आरक्षित निधि को प्रावधान मान लिया जाए तो लाभ कम दिखेगा और अंशधारकों को उनका उचित प्रतिफल नहीं मिलेगा। इसी कारण कंपनी विधि में ‘मुक्त आरक्षित निधियाँ’ अलग से परिभाषित की गई हैं, अर्थात् वे निधियाँ जो लाभांश के रूप में वितरण के लिए उपलब्ध हैं, और पूँजी आरक्षित निधि तथा पुनर्मूल्यांकन से उत्पन्न अधिशेष सामान्यतः उससे बाहर रखे जाते हैं। इसी से विवेकशीलता की धारणा भी जुड़ती है, जिसे लेखाकरण मानक–1 नीतियों के चयन को नियंत्रित करने वाले विचारों में गिनाता है : संभावित हानियों के लिए प्रावधान कीजिए, अनर्जित लाभ मत गिनिए। परीक्षा में इसीलिए ह्रास और संदिग्ध ऋणों का प्रावधान बार-बार आते हैं — वे प्रावधान के सबसे स्पष्ट उदाहरण हैं।
- प्रावधान किसी ज्ञात दायित्व या हानि के लिए अलग रखी गई वह राशि है जिसका परिमाण निश्चितता से नहीं आँका जा सकता; वह लाभ-हानि खाते में नाम होती है और इसलिए लाभ के विरुद्ध प्रभार कहलाती है।
- प्रावधान लाभ की उपलब्धता पर निर्भर नहीं है — हानि के वर्ष में भी ह्रास और संदिग्ध ऋणों का प्रावधान करना पड़ता है; आरक्षित निधि केवल लाभ में से बनाई जा सकती है।
- आरक्षित निधि लाभ का विनियोजन है और चिट्ठे में आरक्षित निधियों तथा अधिशेष के नीचे दिखती है, जबकि प्रावधान दायित्व पक्ष में या संबंधित परिसंपत्ति में से घटाकर दिखाया जाता है।
- पूँजी आरक्षित निधि पूँजीगत लाभों से बनती है — प्रतिभूति प्रीमियम, ज़ब्त अंशों के पुनर्निर्गम पर लाभ, निगमन से पूर्व का लाभ — और साधारणतः लाभांश के लिए उपलब्ध नहीं होती।
- सामान्य आरक्षित निधि किसी प्रयोजन से बँधी नहीं होती और इसी कारण उसे मुक्त आरक्षित निधि कहा जाता है; लाभांश समकारी निधि और ऋणपत्र शोधन निधि विशिष्ट आरक्षित निधियों के उदाहरण हैं।
- ह्रास, संदिग्ध ऋणों का प्रावधान, कराधान का प्रावधान और वारंटी का प्रावधान — ये प्रावधान के प्रतिनिधि उदाहरण हैं और परीक्षा में इन्हीं से पहचान पूछी जाती है।
- ‘प्रभार’ को शुल्क के अर्थ में पढ़ लेना; यहाँ इसका अर्थ है लाभ निकालने से पहले की जाने वाली कटौती।
- पूँजी आरक्षित निधि और सामान्य आरक्षित निधि के स्रोत आपस में बदल देना; पहली पूँजीगत लाभों से बनती है, दूसरी वितरणीय लाभों से।
- सामान्य और विशिष्ट आरक्षित निधि की विशेषताएँ अदल-बदल देना; प्रयोजन से बँधी निधि विशिष्ट होती है, सामान्य नहीं।
- आरक्षित निधि को हानि के वर्ष में भी बनाई जा सकने वाली मद मान लेना; विनियोजन के लिए पहले लाभ होना आवश्यक है।
- ह्रास को विनियोजन समझ लेना; वह प्रावधान है और लाभ-हानि खाते में नाम होता है।
यह विषय तीन रूपों में लौटता है। पहला रूप यही है — चार कथन देकर सही या ग़लत छँटवाना, जिसमें ग़लत कथन प्रायः दो श्रेणियों की विशेषताएँ आपस में बदलकर बनाए जाते हैं; ऐसे प्रश्नों में विकल्पों को जोड़ों में पढ़िए, क्योंकि दो विकल्प अकसर एक ही भेद के दो सिरे होते हैं और साथ-साथ कटते हैं। दूसरा रूप उदाहरण-आधारित है : कोई मद देकर पूछना कि वह प्रावधान है या आरक्षित निधि, और वहाँ सबसे तेज़ कसौटी यह है कि क्या वह हानि के वर्ष में भी बनानी पड़ती। तीसरा रूप संख्यात्मक है, जिसमें संदिग्ध ऋणों के प्रावधान की गणना या ह्रास का प्रभाव पूछा जाता है और यह देखा जाता है कि अभ्यर्थी उसे लाभ-हानि खाते में नाम करता है या विनियोजन खाते में। तैयारी के लिए एक दो-स्तंभ वाली सूची बना लीजिए — बाईं ओर प्रावधान के उदाहरण, दाईं ओर आरक्षित निधियों के, और प्रत्येक के आगे यह लिख दीजिए कि वह कहाँ नाम होता है और चिट्ठे में कहाँ दिखता है।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
निम्नलिखित में से कौन-सा एक प्रावधान का उदाहरण है?
- (a)सामान्य आरक्षित निधि
- (b)संदिग्ध ऋणों के लिए रखी गई राशि
- (c)लाभांश समकारी आरक्षित निधि
- (d)प्रतिभूति प्रीमियम
उत्तर(b) संदिग्ध ऋणों के लिए रखी गई राशि
- practice — not a real PYQ
पूँजी आरक्षित निधि सामान्यतः किससे सृजित होती है?
- (a)प्रचालन से अर्जित वितरणीय लाभ से
- (b)पूँजीगत लाभों से, जैसे ज़ब्त अंशों के पुनर्निर्गम पर हुआ लाभ
- (c)बैंक से लिए गए दीर्घकालिक ऋण से
- (d)वर्ष के ह्रास प्रावधान की बची हुई राशि से
उत्तर(b) पूँजीगत लाभों से, जैसे ज़ब्त अंशों के पुनर्निर्गम पर हुआ लाभ