निम्नलिखित में से कौन-सी एक, लेख-त्रुटि नहीं है?
- (a)विक्रय बही में अधिक दिखाना
- (b)रमेश को उधार बिक्री ₹5,000, उसके खाते में जमा किया गया
- (c)मशीनरी लेखा का गलत शेष निकालना
- (d)नकद बिक्री, रोकड़ बही में दर्ज नहीं की गई
सही उत्तर — D, (d) नकद बिक्री, रोकड़ बही में दर्ज नहीं की गई — यही एकमात्र विकल्प है जो लेख-त्रुटि नहीं, बल्कि लोप-त्रुटि है। पहले पूछ पर ठहरिए। प्रश्न नकारात्मक है और पुस्तिका में ‘नहीं’ मोटे अक्षरों में छपा है, इसलिए खोजना उस एक विकल्प को है जो लेख-त्रुटि के परिवार से बाहर पड़ता है। और यहाँ एक दूसरा ‘नहीं’ भी है — विकल्प (d) के भीतर, बिना किसी बल के छपा हुआ — और वही उस विकल्प का पूरा अर्थ तय करता है। लेख-त्रुटि (error of commission) की परिभाषा यह है कि प्रविष्टि की तो गई, पर ग़लत ढंग से : ग़लत राशि से, ग़लत पक्ष पर, ग़लत खाते में, या बही का जोड़ अथवा खाते का शेष ग़लत निकालकर। यहाँ हिन्दी शब्द भ्रम में डाल सकता है — ‘लेख-त्रुटि’ पढ़कर उसे केवल लिखने की लापरवाही मत समझिए; यह वह त्रुटि है जिसमें लेन-देन बहियों में आया तो सही, पर सही जगह या सही रूप में नहीं आया। इसके सामने लोप-त्रुटि (error of omission) रखिए, जिसमें लेन-देन बहियों में आया ही नहीं। इसके दो रूप हैं। पूर्ण लोप में लेन-देन कहीं दर्ज ही नहीं होता, इसलिए नाम और जमा दोनों समान रूप से छूट जाते हैं और शेष-परीक्षण मिल जाने पर भी भूल छिपी रहती है। आंशिक लोप में लेन-देन प्रारंभिक लेखे की बही में तो दर्ज होता है पर खाताबही में चढ़ता नहीं, इसलिए एक ही पक्ष प्रभावित होता है और शेष-परीक्षण उसे पकड़ लेता है। अब कुंजी वाला विकल्प देखिए : नकद बिक्री रोकड़ बही में दर्ज ही नहीं हुई। नकद बिक्री का प्रारंभिक लेखा रोकड़ बही में ही होता है, इसलिए उसमें दर्ज न होने का अर्थ है कि लेन-देन बहियों में प्रविष्ट ही नहीं हुआ — न रोकड़ खाते में, न बिक्री खाते में। यह पूर्ण लोप है, लेख-त्रुटि नहीं, और इसी कारण यह पूछ का उत्तर है। एक और सुंदर बात इस प्रश्नपत्र में यहीं दिखती है : इस प्रश्न के शेष तीनों विकल्प न केवल लेख-त्रुटियाँ हैं, वे एकपक्षीय भी हैं और इसलिए शेष-परीक्षण से पकड़े जाते हैं, जबकि कुंजी वाला विकल्प द्विपक्षीय होने के कारण उससे बच निकलता है। इसे इसी प्रश्नपत्र के शेष-परीक्षण वाले प्रश्न के साथ पढ़िए, तो दोनों मिलकर पूरा वर्गीकरण खड़ा कर देते हैं।
- (a)विक्रय बही में अधिक दिखाना — विक्रय बही में अधिक दिखाना, अर्थात् उसके योग को वास्तविक से अधिक लगा देना, लेख-त्रुटि का ही एक रूप है — जोड़ की त्रुटि। लेन-देन बहियों में दर्ज तो हुए, केवल उनका योग ग़लत निकला, और वही ग़लत योग बिक्री खाते में जमा हो गया, जबकि ग्राहकों के व्यक्तिगत खाते सही राशियों से नाम हुए। इसलिए यह एकपक्षीय त्रुटि है : जमा पक्ष का योग बढ़ा हुआ रहेगा, नाम पक्ष का नहीं, और शेष-परीक्षण दोनों योगों में अंतर दिखा देगा। इसका असर लाभ पर भी पड़ता है, क्योंकि बिक्री बढ़ी हुई दिखने से लाभ भी बढ़ा हुआ दिखता है। चूँकि प्रश्न लेख-त्रुटि से बाहर पड़ने वाला विकल्प माँगता है, यह विकल्प उत्तर नहीं बनता।
- (b)रमेश को उधार बिक्री ₹5,000, उसके खाते में जमा किया गया — यहाँ लेन-देन दर्ज तो हुआ, पर ग़लत पक्ष पर — रमेश को उधार बिक्री पर उसका खाता ₹5,000 से नाम होना चाहिए था, और उसे जमा कर दिया गया। यह लेख-त्रुटि का शास्त्रीय उदाहरण है, और इसका अंकगणितीय परिणाम ध्यान देने योग्य है : नाम पक्ष में ₹5,000 कम पड़ गए और जमा पक्ष में ₹5,000 अधिक चढ़ गए, इसलिए शेष-परीक्षण के दोनों योगों में अंतर ₹10,000 का आएगा, अर्थात् राशि का दुगुना। ग़लत पक्ष वाली त्रुटियों में यह दुगुने का नियम हमेशा लगता है और इसी से ऐसी भूल खोजी जाती है। लोप यहाँ कुछ भी नहीं हुआ, इसलिए यह विकल्प पूछ का उत्तर नहीं है।
- (c)मशीनरी लेखा का गलत शेष निकालना — मशीनरी खाते का ग़लत शेष निकालना भी लेख-त्रुटि है — शेष निकालने की त्रुटि। खाते में प्रविष्टियाँ सही हैं, केवल उनका शेष ग़लत निकाला गया, और वही ग़लत शेष शेष-परीक्षण में चला गया। यह भी एकपक्षीय है, इसलिए दोनों योग असंतुलित होंगे और भूल पकड़ में आ जाएगी; जब तक वह मिले नहीं, अंतर उचंत खाते में रखा जाता है। ध्यान दीजिए कि यहाँ मशीनरी के वर्गीकरण पर कोई प्रश्न नहीं है — मद सही खाते में ही है — इसलिए यह सिद्धांत-त्रुटि भी नहीं है। जो विकल्प खोजा जा रहा है वह लेख-त्रुटि के बाहर का होना चाहिए, और यह उसी के भीतर है।
लेखांकन की त्रुटियाँ मुख्यतः चार परिवारों में बाँटी जाती हैं, और यह प्रश्न पहले दो के बीच का भेद माँगता है। लोप-त्रुटि में लेन-देन बहियों में आया ही नहीं : पूर्ण लोप में कहीं नहीं, आंशिक लोप में प्रारंभिक बही तक तो पहुँचा पर खाताबही तक नहीं। लेख-त्रुटि में लेन-देन आया, पर ग़लत रूप में — ग़लत राशि, ग़लत पक्ष, ग़लत खाता, बही का ग़लत जोड़, या खाते का ग़लत शेष। सिद्धांत-त्रुटि में प्रविष्टि संतुलित है, पर मद ग़लत श्रेणी में चली गई है, जैसे पूँजीगत व्यय को राजस्व मान लेना। प्रतिपूरक त्रुटि में दो या अधिक भूलें एक-दूसरे का प्रभाव काट देती हैं। इन चारों को एक दूसरी कसौटी पर भी बाँटिए — एकपक्षीय या द्विपक्षीय — क्योंकि शेष-परीक्षण केवल एकपक्षीय भूलों को पकड़ता है। इस प्रश्न के तीनों ग़लत विकल्प लेख-त्रुटियाँ हैं और तीनों एकपक्षीय, इसलिए शेष-परीक्षण उन्हें पकड़ लेगा; कुंजी वाला विकल्प पूर्ण लोप है, इसलिए वह द्विपक्षीय है और शेष-परीक्षण से बच निकलता है। इसी कारण नकद बिक्री का लोप जैसी भूलें रोकड़ के भौतिक सत्यापन, नकदी-पर्ची की क्रम-संख्या की जाँच या बिक्री के मिलान से ही पकड़ी जाती हैं।
व्यावहारिक दृष्टि से पूर्ण लोप सबसे ख़तरनाक त्रुटि है, क्योंकि उसका कोई अंकगणितीय चिह्न बचता ही नहीं : बहियाँ पूरी तरह संतुलित दिखती हैं और फिर भी बिक्री, रोकड़ और लाभ तीनों कम दिखते हैं। नकद बिक्री का दर्ज न होना इसी कारण आंतरिक नियंत्रण के अध्ययन में एक मानक उदाहरण है, और उसी के विरुद्ध क्रमांकित नकदी-पर्चियाँ, दैनिक रोकड़ का भौतिक मिलान, तथा कर्तव्यों का पृथक्करण जैसी व्यवस्थाएँ बनाई जाती हैं। परीक्षा की दृष्टि से इस प्रश्न की सबसे बड़ी सीख यह है कि त्रुटि का नाम उसके परिणाम से नहीं, उसकी बनावट से तय होता है : यह मत पूछिए कि भूल से लाभ बढ़ा या घटा, यह पूछिए कि लेन-देन बहियों में आया या नहीं, और यदि आया तो कहाँ ग़लत हुआ। यही तर्क इसी प्रश्नपत्र के शेष-परीक्षण वाले प्रश्न में भी काम आता है, जहाँ पूछ यह है कि कौन-सी त्रुटि शेष-परीक्षण से बच निकलती है।
- लेख-त्रुटि (error of commission) में प्रविष्टि की तो जाती है पर ग़लत ढंग से — ग़लत राशि, ग़लत पक्ष, ग़लत खाता, बही का ग़लत जोड़, या खाते का ग़लत शेष।
- लोप-त्रुटि (error of omission) में लेन-देन बहियों में आता ही नहीं; पूर्ण लोप में कहीं दर्ज नहीं होता और आंशिक लोप में प्रारंभिक बही में दर्ज होकर खाताबही में नहीं चढ़ता।
- नकद बिक्री का प्रारंभिक लेखा रोकड़ बही में होता है, इसलिए उसका रोकड़ बही में दर्ज न होना पूर्ण लोप है — न रोकड़ खाता प्रभावित होता है, न बिक्री खाता।
- पूर्ण लोप द्विपक्षीय होने के कारण शेष-परीक्षण से नहीं पकड़ा जाता, जबकि आंशिक लोप एकपक्षीय होने के कारण पकड़ा जाता है।
- ग़लत पक्ष पर की गई प्रविष्टि से शेष-परीक्षण के दोनों योगों में राशि के दुगुने का अंतर आता है — रमेश वाले उदाहरण में ₹5,000 की भूल ₹10,000 का अंतर बनाती है।
- प्रश्न नकारात्मक है और पुस्तिका में स्टेम का ‘नहीं’ मोटे अक्षरों में छपा है, जबकि विकल्प (d) के भीतर का ‘नहीं’ बिना बल के छपा है और वही उस विकल्प को लोप बनाता है।
- नकारात्मक पूछ पढ़कर भी लेख-त्रुटि का उदाहरण चुन लेना; पुस्तिका में ‘नहीं’ मोटे अक्षरों में छपा है और वही खोज की दिशा तय करता है।
- विकल्प (d) के भीतर छपे बिना-बल वाले ‘नहीं’ को अनदेखा कर देना; वही उस विकल्प को लोप बनाता है, और नकारात्मक प्रश्न में एक और नकार पढ़ना ध्यान माँगता है।
- ‘लेख-त्रुटि’ को केवल लिखने की लापरवाही समझ लेना; यह error of commission है, जिसमें प्रविष्टि ग़लत खाते, ग़लत राशि या ग़लत पक्ष पर होती है।
- पूर्ण लोप और आंशिक लोप को एक मान लेना; पहला शेष-परीक्षण से नहीं पकड़ा जाता, दूसरा पकड़ा जाता है।
- ग़लत पक्ष वाली भूल में अंतर को राशि के बराबर मान लेना; वहाँ अंतर सदा राशि का दुगुना होता है।
त्रुटियों के वर्गीकरण से प्रश्न प्रायः तीन ढंग से आते हैं। पहला ढंग यही है — चार उदाहरण देकर पूछना कि कौन-सा किसी एक श्रेणी में नहीं आता, और विकल्पों में तीन उदाहरण एक ही परिवार से तथा एक बाहर से रखना; ऐसे प्रश्नों में सबसे तेज़ रास्ता यह है कि हर विकल्प पर एक ही प्रश्न पूछिए — लेन-देन बहियों में आया या नहीं। दूसरा ढंग नाम पूछने का है : एक भूल देकर उसकी श्रेणी पुछवाना, जहाँ लेख-त्रुटि और सिद्धांत-त्रुटि के बीच का भेद निर्णायक होता है। तीसरा ढंग प्रभाव पूछने का है : यह पूछना कि दी गई भूल से शेष-परीक्षण मिलेगा या नहीं, अंतर कितना होगा, उचंत खाता प्रभावित होगा या नहीं, और शुद्धिकरण प्रविष्टि क्या होगी। तीनों के लिए एक ही अभ्यास काम आता है — बीस-पच्चीस उदाहरणों की सूची बनाकर प्रत्येक के आगे तीन बातें लिख लीजिए : श्रेणी, एकपक्षीय है या द्विपक्षीय, और शुद्धिकरण प्रविष्टि।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
कोई लेन-देन प्रारंभिक लेखे की बही में दर्ज हो जाए किंतु खाताबही में न चढ़ाया जाए, तो वह कौन-सी त्रुटि कहलाती है?
- (a)पूर्ण लोप की त्रुटि
- (b)आंशिक लोप की त्रुटि
- (c)सिद्धांत-त्रुटि
- (d)प्रतिपूरक त्रुटि
उत्तर(b) आंशिक लोप की त्रुटि
- practice — not a real PYQ
रमेश को की गई ₹5,000 की उधार बिक्री उसके खाते में जमा कर दी गई, जबकि बिक्री खाता सही रूप से जमा हुआ। शेष-परीक्षण के दोनों योगों में कितना अंतर आएगा?
- (a)कोई अंतर नहीं आएगा
- (b)₹5,000
- (c)₹10,000
- (d)₹2,500
उत्तर(c) ₹10,000