निम्नलिखित में से कौन-सी त्रुटि, शेष-परीक्षण (ट्रायल बैलन्स) द्वारा संसूचित नहीं होती है?
- (a)श्री सिंह से की गई ₹1,000 की उधार खरीद गलती से श्री आकाश के खाते में जमा हो गई
- (b)श्री संधु से की गई ₹20,000 की उधार खरीद गलती से रोजनामचे (दैनिक पंजी) में ₹2,000 के रूप में दर्ज हो गई
- (c)एक अस्थायी शेड के स्थायी भवन में रूपांतरण को मरम्मत और रखरखाव व्यय के रूप में दर्ज कर लिया गया
- (d)सहायक अभिलेख बही से खाताबही में दर्ज करने में हुई त्रुटि
सही उत्तर — D, (d) सहायक अभिलेख बही से खाताबही में दर्ज करने में हुई त्रुटि। आयोग की कुंजी यही विकल्प लेती है, और इसके पीछे का सिद्धांत ही असली सीख है : शेष-परीक्षण केवल अंकगणितीय समानता प्रमाणित करता है, इससे अधिक कुछ नहीं। पहले पूछ को ठीक से पढ़िए। प्रश्न नकारात्मक है — पुस्तिका में ‘नहीं’ मोटे अक्षरों में छपा है — इसलिए खोजना यह है कि कौन-सी त्रुटि शेष-परीक्षण से बच निकलती है, न कि यह कि वह किसे पकड़ लेता है। शेष-परीक्षण करता क्या है? खाताबही के सभी नाम (डेबिट) शेष जोड़ता है, सभी जमा (क्रेडिट) शेष जोड़ता है, और दोनों योगों की तुलना करता है। दोनों बराबर निकल आएँ तो इतना ही सिद्ध होता है कि खाताबही तक पहुँचे हर लेन-देन में नाम और जमा बराबर थे। यह सिद्ध नहीं होता कि नाम सही खाते में गया, कि राशि बीजक से मेल खाती है, या कि मद लाभ-हानि खाते की थी या चिट्ठे की। अब लेखन का वह चरण देखिए जिसकी बात कुंजी वाला विकल्प करता है। सहायक अभिलेख बही — क्रय बही, विक्रय बही, वापसी बहियाँ, रोकड़ बही — में लिखा गया आँकड़ा जब खाताबही में उतारा जाता है, उसे लेखन (posting) कहते हैं। इस चरण की त्रुटियाँ एक जैसी नहीं होतीं। यदि सही राशि सही पक्ष पर, पर ग़लत खाते में उतर जाए — जैसे जो जमा एक आपूर्तिकर्ता के खाते में जाना था वह दूसरे के खाते में चला जाए — तो दोनों स्तंभों के योग ज्यों-के-त्यों रहते हैं और शेष-परीक्षण मिल जाता है। इसी आकार की त्रुटियाँ शेष-परीक्षण की पहुँच से बाहर हैं, और इसी अर्थ में यह विकल्प पूछ का उत्तर देता है। जो भेद पकड़कर रखना चाहिए वह एकपक्षीय और द्विपक्षीय त्रुटि का है। यदि दोनों में से केवल एक खाता प्रभावित हुआ — राशि एक खाते में चढ़ी और दूसरे में नहीं, या एक खाते में ग़लत पक्ष पर चढ़ी — तो योग बिगड़ जाते हैं और अंतर सामने आ जाता है; तब तक उस अंतर को उचंत खाते (suspense account) में रखा जाता है जब तक भूल मिल न जाए। किंतु यदि दोनों खाते साथ-साथ ग़लत दिशा में हिलें, या दोनों में समान ग़लत राशि चढ़े, या राशि ग़लत खातों की जोड़ी में चली जाए, तो कुछ भी असंतुलित नहीं होता और उचंत खाते की नौबत ही नहीं आती। यही कारण है कि हर पाठ्यपुस्तक चार परिवारों को ‘शेष-परीक्षण से प्रकट न होने वाली त्रुटियाँ’ कहती है — पूर्ण लोप की त्रुटि, सिद्धांत-त्रुटि, प्रतिपूरक त्रुटि, और लेख-त्रुटि का वह रूप जिसमें सही राशि सही पक्ष पर पर ग़लत खाते में जाती है। इस प्रश्न का विकल्प-समुच्चय इसी क्षेत्र से उठाया गया है, और कुंजी उसमें से विकल्प (d) लेती है।
- (a)श्री सिंह से की गई ₹1,000 की उधार खरीद गलती से श्री आकाश के खाते में जमा हो गई — आयोग की कुंजी इस विकल्प को नहीं लेती। यह जो वर्णन करता है वह लेख-त्रुटि (error of commission) का ग़लत-खाता वाला रूप है : श्री सिंह से उधार खरीद पर क्रय खाता नाम और श्री सिंह का खाता जमा होना चाहिए था, जमा श्री आकाश के खाते में चला गया। दोनों ही लेनदार हैं, पक्ष सही है और राशि सही है, इसलिए खाताबही के जमा शेषों का योग नहीं बदलता — अर्थात् यह भी उसी आकार की त्रुटि है जिस पर शेष-परीक्षण चुप रह जाता है। ऐसी भूल पकड़ी कहीं और जाती है : श्री सिंह का खाता उनके भेजे विवरण से नहीं मिलेगा, और श्री आकाश उस जमा पर आपत्ति करेंगे जो उन्होंने अर्जित की ही नहीं। शुद्धिकरण सीधा है — श्री आकाश का खाता ₹1,000 से नाम कीजिए और श्री सिंह का खाता उतने से जमा।
- (b)श्री संधु से की गई ₹20,000 की उधार खरीद गलती से रोजनामचे (दैनिक पंजी) में ₹2,000 के रूप में दर्ज हो गई — आयोग की कुंजी इस विकल्प को भी नहीं लेती। यह मूल-प्रविष्टि की त्रुटि (error of original entry) है : भूल खाताबही में उतारने से पहले, प्रारंभिक लेखे की बही में हो चुकी है, और खाताबही उसी भूल को ईमानदारी से दोहरा देती है। क्रय ₹18,000 कम दर्ज होगा और श्री संधु का खाता भी ₹18,000 कम जमा होगा, इसलिए दोनों पक्ष साथ-साथ हिलते हैं और बहियाँ आपस में सुसंगत बनी रहती हैं। ध्यान दीजिए कि ग़लत आँकड़ा कहाँ लिखा गया — रोजनामचे में, खाताबही में नहीं — और यही इसे कुंजी वाले विकल्प से अलग करता है, जहाँ भूल लेखन के चरण पर होती है। इसे पकड़ने का व्यावहारिक रास्ता बीजक से मिलान या आपूर्तिकर्ता के खाता-विवरण से मिलान है।
- (c)एक अस्थायी शेड के स्थायी भवन में रूपांतरण को मरम्मत और रखरखाव व्यय के रूप में दर्ज कर लिया गया — आयोग की कुंजी इस विकल्प को नहीं लेती। यह सिद्धांत-त्रुटि (error of principle) है : अस्थायी शेड को स्थायी भवन में बदलने से परिसंपत्ति में सुधार होता है और उसकी आयु बढ़ती है, इसलिए वह व्यय पूँजीगत है और भवन खाते में जाना चाहिए था, जबकि उसे मरम्मत और रखरखाव में डालकर इसी वर्ष के लाभ से काट दिया गया। परिणाम दोहरा है — लाभ भी कम दिखेगा और परिसंपत्तियाँ भी, और आगे के हर वर्ष का ह्रास भी कम पड़ता रहेगा। किंतु प्रविष्टि स्वयं संतुलित है : नाम और जमा बराबर हैं, केवल नाम ग़लत खाते में गया है, इसलिए योग नहीं बिगड़ते। इसी प्रश्नपत्र का पूँजीगत बनाम राजस्व वाला प्रश्न इसी भेद की दूसरी दिशा है।
शेष-परीक्षण खाताबही के शेषों की एक सूची है, जिसका उद्देश्य केवल यह जाँचना है कि नाम पक्ष का योग जमा पक्ष के योग के बराबर है या नहीं। इसलिए त्रुटियों को दो वर्गों में बाँटा जाता है। एकपक्षीय त्रुटियाँ, जिनमें दोहरे लेखे का केवल एक पक्ष प्रभावित होता है — किसी बही का ग़लत जोड़, किसी खाते में लेखन का रह जाना, ग़लत पक्ष पर लेखन, या खाते का ग़लत शेष निकालना — योगों को असंतुलित कर देती हैं और शेष-परीक्षण उन्हें पकड़ लेता है; अंतर को अस्थायी रूप से उचंत खाते में रखकर काम आगे बढ़ाया जाता है। द्विपक्षीय त्रुटियाँ योगों को छूती ही नहीं, इसलिए वे बच निकलती हैं, और पाठ्यपुस्तकें उनके चार परिवार गिनाती हैं : पूर्ण लोप की त्रुटि, जिसमें लेन-देन बहियों में आया ही नहीं; लेख-त्रुटि का ग़लत-खाता वाला रूप, जिसमें सही राशि सही पक्ष पर ग़लत खाते में चली जाती है; सिद्धांत-त्रुटि, जिसमें पूँजीगत मद को राजस्व या राजस्व को पूँजीगत मान लिया जाता है; और प्रतिपूरक त्रुटि, जिसमें दो या अधिक भूलें एक-दूसरे का प्रभाव काट देती हैं। हिन्दी शब्दावली में एक सावधानी : ‘लेख-त्रुटि’ पढ़कर उसे केवल लिखने की लापरवाही मत समझिए — यह error of commission का अनुवाद है, जिसमें प्रविष्टि की गई तो सही, पर ग़लत खाते में, ग़लत राशि से, या ग़लत पक्ष पर।
यह प्रश्न इसलिए महत्त्वपूर्ण है कि यह लेखांकन की एक बड़ी ग़लतफ़हमी तोड़ता है — यह मान लेना कि शेष-परीक्षण मिल जाने से खाते सही हैं। मिला हुआ शेष-परीक्षण केवल यह कहता है कि जोड़ बराबर हैं; वह लेन-देन के छूट जाने, ग़लत खाते में चले जाने, या ग़लत श्रेणी में डाल दिए जाने पर मौन रहता है। इसी सीमा से लेखापरीक्षा का औचित्य निकलता है, और इसी से नियंत्रण की वे व्यवस्थाएँ भी — आपूर्तिकर्ताओं के खाता-विवरण से मिलान, बैंक समाधान विवरण, स्कंध का भौतिक सत्यापन, और परिसंपत्ति पंजी का खाताबही से मिलान। एक और व्यावहारिक बात : जब शेष-परीक्षण नहीं मिलता तो अंतर उचंत खाते में डालकर अंतिम खाते बना लिए जाते हैं, पर उचंत खाता समाधान नहीं है — वह एक चिह्न है कि कहीं एकपक्षीय भूल बची हुई है, और उसे खोजकर बंद करना ही पड़ता है। परीक्षा में इसी कारण यह पूछा जाता है कि किसी दी हुई भूल से उचंत खाता प्रभावित होगा या नहीं; उत्तर उसी एकपक्षीय-द्विपक्षीय भेद से निकलता है।
- शेष-परीक्षण केवल अंकगणितीय समानता प्रमाणित करता है — यह नहीं बताता कि राशि सही खाते में गई, बीजक से मेल खाती है, या सही श्रेणी में डाली गई।
- एकपक्षीय त्रुटियाँ योग बिगाड़ती हैं और पकड़ी जाती हैं : बही का ग़लत जोड़, लेखन का रह जाना, ग़लत पक्ष पर लेखन, खाते का ग़लत शेष निकालना; अंतर अस्थायी रूप से उचंत खाते में रखा जाता है।
- द्विपक्षीय त्रुटियाँ योग नहीं बिगाड़तीं और शेष-परीक्षण से प्रकट नहीं होतीं — पूर्ण लोप, ग़लत-खाता वाली लेख-त्रुटि, सिद्धांत-त्रुटि और प्रतिपूरक त्रुटि।
- सहायक अभिलेख बही से खाताबही तक के लेखन में सही राशि सही पक्ष पर ग़लत खाते में चली जाए, तो दोनों स्तंभों के योग अछूते रहते हैं और शेष-परीक्षण मिल जाता है।
- पूर्ण लोप शेष-परीक्षण से नहीं पकड़ा जाता, किंतु आंशिक लोप — जैसे बही में दर्ज होकर खाताबही में न चढ़ना — एकपक्षीय होने के कारण पकड़ा जाता है।
- प्रश्न नकारात्मक है और पुस्तिका में ‘नहीं’ मोटे अक्षरों में छपा है; पूछ यह है कि कौन-सी त्रुटि शेष-परीक्षण से बच निकलती है।
- नकारात्मक पूछ को उलट देना और वह त्रुटि चुन लेना जो शेष-परीक्षण पकड़ लेता है; पुस्तिका में ‘नहीं’ मोटे अक्षरों में छपा है, इसे पढ़कर आगे बढ़िए।
- मिले हुए शेष-परीक्षण को खातों की शुद्धता का प्रमाण मान लेना; वह केवल दोनों योगों की बराबरी कहता है।
- पूर्ण लोप और आंशिक लोप को एक मान लेना; पहला शेष-परीक्षण से नहीं पकड़ा जाता, दूसरा एकपक्षीय होने के कारण पकड़ा जाता है।
- सिद्धांत-त्रुटि को अंकगणितीय भूल समझ लेना; वहाँ नाम और जमा बराबर ही रहते हैं, केवल मद ग़लत श्रेणी में चली जाती है।
- ‘लेख-त्रुटि’ को केवल लिखने की लापरवाही समझ लेना; यह error of commission है, जिसमें प्रविष्टि ग़लत खाते, ग़लत राशि या ग़लत पक्ष पर होती है।
इस विषय से प्रश्न तीन ढंग से आते हैं। पहला ढंग यही है — चार भूलें देकर पूछना कि कौन-सी शेष-परीक्षण से पकड़ी जाएगी या नहीं पकड़ी जाएगी; ऐसे प्रश्नों में विकल्प जान-बूझकर उसी क्षेत्र से उठाए जाते हैं जहाँ दोनों पक्ष साथ-साथ हिलते हैं, इसलिए पढ़ते समय हर विकल्प पर यही जाँचिए कि नाम और जमा दोनों प्रभावित हुए या केवल एक। दूसरा ढंग नाम पूछने का है : कोई एक भूल देकर पूछना कि वह लोप-त्रुटि है, लेख-त्रुटि है, सिद्धांत-त्रुटि है या प्रतिपूरक त्रुटि। तीसरा ढंग उचंत खाते का है — यह पूछना कि दी गई भूल से उचंत खाता प्रभावित होगा या नहीं, अथवा शुद्धिकरण प्रविष्टि क्या होगी। तीनों एक ही कौशल पर टिके हैं, इसलिए अभ्यास इस तरह कीजिए : हर भूल पर तीन प्रश्न लिखिए — कौन-कौन से खाते प्रभावित हुए, योग बिगड़े या नहीं, और शुद्धिकरण प्रविष्टि क्या होगी।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
निम्नलिखित में से कौन-सी त्रुटि शेष-परीक्षण (ट्रायल बैलन्स) द्वारा पकड़ी जाएगी?
- (a)किसी लेन-देन का बहियों में बिल्कुल दर्ज न होना
- (b)क्रय बही के योग को ₹100 कम लगाना
- (c)मशीन की खरीद को क्रय खाते में नाम कर देना
- (d)दो भूलों का एक-दूसरे के प्रभाव को ठीक-ठीक काट देना
उत्तर(b) क्रय बही के योग को ₹100 कम लगाना
- practice — not a real PYQ
किसी लेन-देन को सही राशि से, सही पक्ष पर, किंतु ग़लत व्यक्ति के खाते में दर्ज कर देना किस श्रेणी की त्रुटि है?
- (a)लोप-त्रुटि
- (b)लेख-त्रुटि
- (c)सिद्धांत-त्रुटि
- (d)प्रतिपूरक त्रुटि
उत्तर(b) लेख-त्रुटि