आग से मशीनरी के पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण प्राप्त बीमा दावा क्या है?
- (a)पूँजीगत प्राप्ति
- (b)राजस्व प्राप्ति
- (c)पूँजीगत व्यय
- (d)राजस्व व्यय
सही उत्तर — A, (a) पूँजीगत प्राप्ति — क्योंकि जो धन आया है वह किसी स्थायी परिसंपत्ति का स्थान लेने आया है, व्यापार की सामान्य आय के रूप में नहीं। पहला सूत्र यही है : किसी प्राप्ति का स्वरूप उस वस्तु के स्वरूप से तय होता है जिसके बदले वह मिली है। मशीनरी एक स्थायी परिसंपत्ति (fixed asset) है, जो चिट्ठे (बैलेंस शीट) में दिखाई जाती है और जिसे बेचने के लिए नहीं, चलाने के लिए रखा जाता है। आग से वह पूरी तरह नष्ट हो गई, अर्थात् परिसंपत्ति ही समाप्त हो गई; बीमाकर्ता से जो राशि मिली वह उसी समाप्त परिसंपत्ति का प्रतिस्थापन है। इसलिए वह राशि पूँजीगत प्राप्ति है — न वह व्यापार के सामान्य प्रचालन से उपजी है, न वह प्रतिवर्ष दोहराई जाने वाली है। बहीखाते में इसे इस तरह देखिए। मशीनरी खाता उसके अवलिखित मूल्य (बही मूल्य) पर खड़ा है। दावे की राशि मशीनरी खाते में जमा की जाती है और खाता बंद किया जाता है; यदि दावा बही मूल्य से अधिक मिला तो अंतर पूँजीगत लाभ है और यदि कम मिला तो पूँजीगत हानि, और वही अंतर लाभ-हानि खाते में जाता है। ध्यान दीजिए कि लाभ-हानि खाते में पूरा दावा नहीं जाता, केवल अंतर जाता है — यही ‘प्राप्ति’ और ‘आय’ का भेद है। हिन्दी में दोनों को कभी-कभी एक साथ बोल दिया जाता है, पर लेखाशास्त्र में प्राप्ति (receipt) का अर्थ केवल धन का आना है, जबकि आय (income) वह अधिशेष है जो लाभ में जुड़ता है। दो विपरीत स्थितियाँ याद रखिए, क्योंकि आयोग प्रायः उन्हीं को उलटकर पूछता है। यदि आग में माल-स्कंध (स्टॉक) जलता और उसका दावा मिलता, तो वह राजस्व प्राप्ति होती, क्योंकि स्टॉक व्यापारिक मद है। और यदि मशीनरी केवल आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त होती तथा दावा उसकी मरम्मत की लागत भर का होता, तो वह राशि मरम्मत के राजस्व व्यय के विरुद्ध समायोजित होकर राजस्व प्राप्ति मानी जाती। यहाँ स्टेम में ‘पूरी तरह क्षतिग्रस्त’ शब्द इसीलिए रखे गए हैं — वे प्रश्न का निर्णायक अंश हैं। अंत में विकल्प-समुच्चय की बनावट देखिए : उसमें दो प्राप्तियाँ हैं और दो व्यय। पूछ धन के आने की है, इसलिए दोनों व्यय वाले विकल्प पहली ही पंक्ति में हट जाते हैं और वास्तविक निर्णय केवल (a) और (b) के बीच बचता है।
- (b)राजस्व प्राप्ति — राजस्व प्राप्ति वह है जो व्यापार के सामान्य प्रचालन से उपजती है और सामान्यतः दोहराई जाती है — माल की बिक्री, कमीशन, प्राप्त किराया, प्राप्त ब्याज। यहाँ जो नष्ट हुआ वह बेचने के लिए रखा गया माल नहीं, बल्कि उत्पादन के लिए रखी गई स्थायी परिसंपत्ति थी, इसलिए उसका दावा राजस्व प्राप्ति नहीं बनता। यही विकल्प तब सही होता जब आग में माल-स्कंध जलता : स्टॉक व्यापारिक मद है, उसका दावा व्यापार खाते में जाता है और वह राजस्व प्राप्ति कहलाता है। यही विकल्प तब भी सही होता जब मशीन आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त होती और दावा केवल मरम्मत-लागत की भरपाई करता। इसलिए (a) और (b) के बीच का पूरा भेद इस एक बात पर टिका है कि आग ने किस प्रकार की मद को नष्ट किया — स्थायी परिसंपत्ति को, या व्यापारिक स्कंध को।
- (c)पूँजीगत व्यय — यह विकल्प दिशा ही उलट देता है : व्यय का अर्थ है धन का जाना, जबकि प्रश्न में धन आया है। पूँजीगत व्यय वह है जो किसी स्थायी परिसंपत्ति को प्राप्त करने, उसे उपयोग-योग्य बनाने, या उसकी अर्जन-क्षमता तथा आयु बढ़ाने पर किया जाता है — मशीन का क्रय-मूल्य, उसकी ढुलाई और स्थापना पर व्यय, या किसी अस्थायी शेड को स्थायी भवन में बदलने पर किया गया व्यय। नई मशीन खरीदने पर उसका मूल्य पूँजीगत व्यय होता, किंतु पुरानी मशीन के नष्ट होने पर मिला दावा किसी भी अर्थ में व्यय नहीं है। विकल्प-समुच्चय में दो व्यय इसीलिए रखे गए हैं कि जल्दबाज़ी में पढ़ने वाला केवल ‘पूँजीगत’ शब्द देखकर टिक लगा दे।
- (d)राजस्व व्यय — राजस्व व्यय दिन-प्रतिदिन चलने वाले खर्च हैं जिनका लाभ उसी लेखा-वर्ष में समाप्त हो जाता है — मज़दूरी, वेतन, भाड़ा, मशीन की साधारण मरम्मत, और बीमा की वार्षिक किश्त। यहाँ एक बारीक जाल है जिसे पहचान लेना चाहिए : बीमा की जो किश्त हर वर्ष चुकाई जाती है वह वास्तव में राजस्व व्यय ही है, किंतु प्रश्न किश्त के बारे में नहीं, उसके बदले मिले दावे के बारे में है। किश्त का स्वरूप दावे का स्वरूप तय नहीं करता; दावे का स्वरूप उस मद से तय होता है जो नष्ट हुई, और वह मद स्थायी परिसंपत्ति थी। इसलिए यह विकल्प दो कारणों से हटता है — यह व्यय है, प्राप्ति नहीं, और यह उस मद का स्वरूप भी नहीं पकड़ता जो नष्ट हुई।
पूँजीगत और राजस्व का भेद लेखाशास्त्र की रीढ़ है, और इसका पूरा तर्क एक प्रश्न पर टिका है : यह मद इसी वर्ष में समाप्त हो जाएगी, या आगे के वर्षों तक चलेगी? जो प्राप्ति या व्यय एक ही लेखा-वर्ष के प्रचालन से जुड़ी है वह राजस्व मद है और लाभ-हानि खाते में जाती है; जो किसी स्थायी परिसंपत्ति के अर्जन, विक्रय, नाश या पूँजी-संरचना से जुड़ी है वह पूँजीगत मद है और चिट्ठे में जाती है। इसी से चार सामान्य श्रेणियाँ बनती हैं — पूँजीगत प्राप्ति (परिसंपत्ति की बिक्री, अंश या ऋणपत्र निर्गम, स्थायी परिसंपत्ति के नाश पर बीमा दावा), राजस्व प्राप्ति (माल की बिक्री, कमीशन, प्राप्त ब्याज, स्टॉक के नाश पर बीमा दावा), पूँजीगत व्यय (मशीन का क्रय, स्थापना व्यय, परिसंपत्ति में स्थायी सुधार) और राजस्व व्यय (मज़दूरी, मरम्मत, बीमा किश्त, भाड़ा)। एक शब्द पर विशेष ध्यान दीजिए : ‘प्राप्ति’ का अर्थ केवल धन का आना है, ‘आय’ नहीं। बीमा दावा पूरा-का-पूरा लाभ नहीं है; लाभ केवल वह अंतर है जो दावे और मशीनरी के अवलिखित मूल्य के बीच निकलता है, और वही पूँजीगत लाभ या हानि कहलाता है।
आयोग यह भेद इसलिए बार-बार पूछता है कि इसी पर यह निर्भर है कि कोई मद किस विवरण में जाएगी, और एक ही ग़लती दो जगह असर डालती है। यदि पूँजीगत मद को राजस्व मान लिया जाए तो उस वर्ष का लाभ कम दिखता है और परिसंपत्तियाँ भी कम दिखती हैं; यदि राजस्व मद को पूँजीगत मान लिया जाए तो लाभ बढ़ा-चढ़ाकर दिखता है और चिट्ठे में ऐसी परिसंपत्ति खड़ी हो जाती है जो है ही नहीं। यही कारण है कि इसी प्रश्नपत्र में आगे यह भेद एक दूसरे रूप में लौटता है, जहाँ अस्थायी शेड को स्थायी भवन में बदलने के व्यय को मरम्मत व्यय लिख देने को सिद्धांत-त्रुटि कहा गया है। परीक्षा की दृष्टि से तीन प्रश्न क्रम से पूछिए : धन आया या गया? जो मद इसमें शामिल है वह स्थायी परिसंपत्ति है या व्यापारिक स्कंध? और उसका प्रभाव इसी वर्ष तक सीमित है या आगे भी चलेगा? इन्हीं तीन उत्तरों से चारों श्रेणियों में से एक अपने आप चुन ली जाती है।
- मशीनरी स्थायी परिसंपत्ति है, इसलिए उसके पूर्ण नाश पर मिला बीमा दावा उस परिसंपत्ति का प्रतिस्थापन है और पूँजीगत प्राप्ति कहलाता है; वह व्यापार के सामान्य प्रचालन से उपजी आवर्ती आय नहीं है।
- लेखांकन में दावे की राशि मशीनरी खाते में जमा करके खाता बंद किया जाता है; दावे और अवलिखित मूल्य का अंतर ही पूँजीगत लाभ या हानि के रूप में लाभ-हानि खाते में जाता है, पूरा दावा नहीं।
- इसके विपरीत, आग में नष्ट माल-स्कंध का बीमा दावा राजस्व प्राप्ति है, क्योंकि स्टॉक व्यापारिक मद है — यही इस प्रश्न का सबसे आम उलटा रूप है।
- मशीन के आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त होने पर मरम्मत-लागत की भरपाई करने वाला दावा भी राजस्व प्राप्ति होता है और मरम्मत व्यय के विरुद्ध समायोजित किया जाता है; स्टेम का ‘पूरी तरह क्षतिग्रस्त’ इसीलिए निर्णायक है।
- बीमा की वार्षिक किश्त राजस्व व्यय है, किंतु किश्त का स्वरूप दावे का स्वरूप तय नहीं करता — दावे का स्वरूप उस मद से तय होता है जो नष्ट हुई।
- विकल्प-समुच्चय में दो प्राप्तियाँ और दो व्यय रखे गए हैं; पूछ धन के आने की है, इसलिए दोनों व्यय पहली पंक्ति में ही हट जाते हैं।
- ‘पूँजीगत’ शब्द देखकर टिक लगा देना और यह न देखना कि विकल्प प्राप्ति की बात कर रहा है या व्यय की; समुच्चय में दो व्यय केवल इसी भूल के लिए रखे गए हैं।
- स्टॉक के दावे और मशीनरी के दावे को एक मान लेना; पहला राजस्व प्राप्ति है, दूसरा पूँजीगत, और भेद केवल नष्ट हुई मद के स्वरूप से आता है।
- स्टेम के ‘पूरी तरह क्षतिग्रस्त’ को हल्के में लेना; आंशिक क्षति पर मरम्मत-लागत की भरपाई करने वाला दावा राजस्व प्राप्ति होता।
- बीमा किश्त राजस्व व्यय है, इसलिए दावा भी राजस्व मद होगा — यह सममिति मान लेना; दावे का स्वरूप किश्त से नहीं, नष्ट हुई मद से तय होता है।
- पूरे दावे को लाभ मान लेना; लाभ-हानि खाते में केवल दावे और अवलिखित मूल्य का अंतर जाता है।
यह भेद इस स्तर की परीक्षाओं में तीन रूपों में लौटता है। पहला रूप यही है — कोई एक लेन-देन देकर चार श्रेणियों में से एक चुनवाना, और विकल्पों में जान-बूझकर दो प्राप्तियाँ तथा दो व्यय रख देना, ताकि केवल विशेषण पढ़ने वाला फँसे। दूसरा रूप कथन-आधारित होता है, जिसमें तीन-चार लेन-देन गिनाकर पूछा जाता है कि उनमें से कौन-से पूँजीगत हैं; वहाँ स्थापना व्यय, स्थायी सुधार और साधारण मरम्मत को अलग-अलग पहचानना पड़ता है। तीसरा रूप त्रुटि-सुधार का है, जिसमें पूँजीगत मद को राजस्व लिख देने की भूल दी जाती है और पूछा जाता है कि वह किस श्रेणी की त्रुटि है और लाभ तथा परिसंपत्तियों पर उसका क्या असर पड़ा — इसी प्रश्नपत्र में वह रूप भी मौजूद है। तैयारी का सबसे किफ़ायती तरीक़ा यह है कि पंद्रह-बीस सामान्य लेन-देनों की एक सूची बनाकर उन्हें चारों श्रेणियों में बाँट लीजिए, और हर बार तीन प्रश्न पूछिए : धन आया या गया, मद स्थायी परिसंपत्ति है या व्यापारिक स्कंध, और प्रभाव इसी वर्ष तक है या आगे तक।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
आग में नष्ट हो गए माल-स्कंध (स्टॉक) के लिए बीमा कंपनी से प्राप्त दावा क्या है?
- (a)पूँजीगत प्राप्ति
- (b)राजस्व प्राप्ति
- (c)पूँजीगत व्यय
- (d)आस्थगित राजस्व व्यय
उत्तर(b) राजस्व प्राप्ति
- practice — not a real PYQ
निम्नलिखित में से कौन-सा एक पूँजीगत व्यय है?
- (a)मशीन की वार्षिक बीमा किश्त
- (b)नई मशीन की ढुलाई और स्थापना पर किया गया व्यय
- (c)कारखाने की दीवारों की सफ़ेदी
- (d)विक्रय कर्मचारियों का वेतन
उत्तर(b) नई मशीन की ढुलाई और स्थापना पर किया गया व्यय