किसी मीनार के शिखर का, 10 मीटर ऊँचे भवन के शीर्ष और तल से उन्नयन कोण क्रमशः 30° और 45° हैं। भवन के शीर्ष से मीनार की ऊँचाई (मीटर में) लगभग क्या है (दिया है कि √3 = 1·73)?
- (a)10·65
- (b)13·41
- (c)13·65
- (d)15·41
सही उत्तर — C, (c) 13·65। दो समकोण त्रिभुज खींचिए और यह स्पष्ट रखिए कि पूछा किसे गया है। मान लीजिए मीनार भवन से क्षैतिज दूरी d पर खड़ी है, भवन के शीर्ष के तल से ऊपर मीनार का भाग x है, और भवन 10 मीटर ऊँचा है, इसलिए पूरी मीनार x + 10 है। भवन के तल से मीनार के शिखर का उन्नयन कोण 45° है; उस त्रिभुज की क्षैतिज भुजा d है और ऊर्ध्वाधर भुजा मीनार की पूरी ऊँचाई। अतः tan 45° = (x + 10)/d, और चूँकि tan 45° = 1 है, इसलिए d = x + 10। यही इस प्रश्न की सबसे बड़ी सुविधा है : 45° का उन्नयन क्षैतिज दूरी को ऊँचाई के बराबर कर देता है और एक अज्ञात राशि तुरंत समाप्त हो जाती है। भवन के शीर्ष से उन्नयन कोण 30° है, जिसे छत के तल से चलने वाली क्षैतिज रेखा से मापा जाता है। उस त्रिभुज की क्षैतिज भुजा अब भी d है, किन्तु ऊर्ध्वाधर भुजा केवल x है, अर्थात् छत से ऊपर मीनार का भाग। अतः tan 30° = x/d, अर्थात् x/d = 1/√3, जिससे d = x√3। अब d के दोनों मान बराबर रखिए : x + 10 = x√3, अर्थात् x(√3 − 1) = 10, और x = 10/(√3 − 1)। मान रखने से पहले हर का परिमेयकरण कीजिए — यही वह क़दम है जो अंक तय करता है। अंश और हर दोनों को (√3 + 1) से गुणा कीजिए : x = 10(√3 + 1)/((√3)² − 1) = 10(√3 + 1)/2 = 5(√3 + 1)। अब प्रश्न में दिया गया मान रखिए, √3 = 1·73 : x = 5 × 2·73 = 13·65 मीटर, ठीक-ठीक। यही विकल्प (c) है, और दिए गए करणी-मान पर यह सन्निकट नहीं बल्कि यथार्थ है। यदि इसके बजाय पहले मान रखकर 10 को 0·73 से भाग दिया जाए तो 13·698… आता है, जो छपे हुए किसी मान से नहीं मिलता और अभ्यर्थी को 13·65 तथा 13·41 के बीच अनुमान से चुनना पड़ता है। परिमेयकरण एक भद्दे दशमलव से भाग को एक साधारण गुणा में बदल देता है, और इस प्रश्न में यही यथार्थ मिलान तथा अनुमान के बीच का अंतर है। जाँच के लिए : पूरी मीनार x + 10 = 23·65 मीटर होगी और क्षैतिज दूरी भी उतनी ही 23·65 मीटर, जो भूमि से 45° की दृष्टि-रेखा के अनुरूप है।
- (a)10·65 — चूँकि उत्तर ठीक-ठीक 5(√3 + 1) है, इसलिए हर असत्य विकल्प करणी के किसी न किसी ग़लत मान से मेल खाता है, और 10·65 के लिए √3 का मान लगभग 1·13 होना पड़ेगा — जो प्रश्न में दिए गए 1·73 के आसपास भी नहीं है। इसे ज्यामिति में पीछे की ओर चलकर भी समाप्त किया जा सकता है, जो ऊँचाई और दूरी वाले हर प्रश्न में अच्छी आदत है : यदि छत से ऊपर मीनार का भाग 10·65 मीटर होता तो पूरी मीनार 20·65 मीटर होती, क्षैतिज दूरी भी 45° की शर्त से उतनी ही होती, और तब छत से उन्नयन कोण का स्पर्शज्या-मान 10·65/20·65 निकलता, जो 1/√3 से काफ़ी दूर है। इसलिए यह विकल्प न सूत्र से बनता है और न जाँच से टिकता है।
- (b)13·41 — 13·41 इस समुच्चय की निकटतम चूक है और वही अनुमान वाली विधि को दंड देती है। यह करणी का मान लगभग 1·68 लेने के बराबर है, और सही मान के इतने पास बैठता है कि जो अभ्यर्थी जल्दबाज़ी में 10 को 0·73 से भाग देता है, या बीच के किसी क़दम को गोल कर देता है, वह स्वयं को इसी विकल्प के पक्ष में मना सकता है। ज्यामिति से जाँचने पर यह साफ़-साफ़ गिर जाता है : छत से ऊपर 13·41 मीटर का भाग मानने पर पूरी मीनार 23·41 मीटर होगी, क्षैतिज दूरी भी उतनी ही, और छत से उन्नयन कोण का स्पर्शज्या-मान 13·41/23·41 आएगा, जो दिए गए करणी-मान पर 1/√3 नहीं बैठता। इसीलिए परिमेयकरण करके यथार्थ रूप तक पहुँचना सुरक्षित है।
- (d)15·41 — 15·41 के लिए करणी का मान लगभग 2·08 चाहिए, जो 2 से भी बड़ा है और इसलिए असंभव है, क्योंकि 2 का वर्ग 4 होता है और वह 3 से अधिक है। यह प्रस्तुत विकल्पों में सबसे बड़ा है और उस अभ्यर्थी को लुभाता है जिसने दोनों स्पर्शज्या-मान आपस में गड्डमड्ड कर दिए हों — अर्थात् tan 30° को 1/√3 के बजाय √3 ले लिया हो, या 30° का कोण छत से ऊपर के भाग के बजाय मीनार की पूरी ऊँचाई पर माप लिया हो। यहाँ भी पीछे की ओर जाँच काम करती है : 15·41 मीटर का ऊपरी भाग मानने पर मीनार 25·41 मीटर की होगी, क्षैतिज दूरी भी उतनी ही, और छत से उन्नयन कोण का स्पर्शज्या-मान 1/√3 से कहीं अधिक निकलेगा, अर्थात् कोण 30° से बड़ा होगा।
ऊँचाई और दूरी के प्रश्न त्रिकोणमिति के तीन ही तथ्यों पर टिके होते हैं : tan 45° = 1, tan 30° = 1/√3 और tan 60° = √3। इनके साथ एक ही ज्यामितीय विचार जुड़ता है — उन्नयन कोण उस क्षैतिज रेखा से मापा जाता है जिस पर प्रेक्षक की आँख है, इसलिए किसी ऊँचे स्थान से देखने पर त्रिभुज की ऊर्ध्वाधर भुजा केवल उस स्थान से ऊपर का भाग होती है, पूरी वस्तु नहीं। इस प्रश्न की सारी कठिनाई इसी एक बात में है : भूमि से देखने पर ऊर्ध्वाधर भुजा पूरी मीनार है, जबकि छत से देखने पर वह छत के तल से ऊपर का भाग है, और क्षैतिज दूरी दोनों दशाओं में एक ही रहती है। इसीलिए दो समीकरण बनते हैं और उभयनिष्ठ दूरी हटाकर अज्ञात ऊँचाई निकल आती है। तीसरा उपयोगी अभ्यास परिमेयकरण का है : (√3 − 1) या (√3 + 1) जैसे हर वाले व्यंजक में मान रखने से पहले संयुग्मी से गुणा कर लीजिए, क्योंकि परीक्षा के विकल्प प्रायः यथार्थ रूप से बनाए जाते हैं और सन्निकट भाग देने पर उत्तर दो विकल्पों के बीच लटक जाता है। अंत में, प्रश्न में करणी का मान दिया होना स्वयं संकेत है कि उत्तर उसी मान पर यथार्थ मिलेगा, इसलिए गणना के अंत तक करणी को अक्षर के रूप में ही रखिए।
इस प्रश्न में सबसे अधिक अंक इस बात पर कटते हैं कि अभ्यर्थी पढ़ता क्या है। पूछ स्पष्ट रूप से 'भवन के शीर्ष से मीनार की ऊँचाई' है, अर्थात् छत के तल से ऊपर वाला भाग, न कि भूमि से मीनार की पूरी ऊँचाई। जो अभ्यर्थी पूरी ऊँचाई निकाल लेता है उसे 23·65 मिलेगा, जो विकल्पों में है ही नहीं, और तब वह घबराकर गणना दोबारा करने लगेगा और समय गँवाएगा। इसलिए ऐसे प्रश्नों में सबसे पहले यह लिख लीजिए कि अज्ञात राशि क्या है और उसे कोई नाम दे दीजिए। दूसरी बात, 45° वाली दृष्टि-रेखा को सदैव सुविधा की तरह देखिए — वह क्षैतिज दूरी और ऊँचाई को बराबर कर देती है, इसलिए ऐसे प्रश्न में उसी समीकरण से आरंभ करना चाहिए। तीसरी बात, छपाई की : इस प्रश्न में दशमलव-चिह्न पूरे मद में उठे हुए मध्य-बिंदु के रूप में छपा है — 1·73, 13·65 — और करणी 3 के ऊपर मूल-चिह्न के साथ। यह पुस्तिका की शैली है, कोई मुद्रण-दोष नहीं, और अभ्यर्थी को इसे सामान्य दशमलव की तरह ही पढ़ना चाहिए।
- उन्नयन कोण उसी क्षैतिज रेखा से मापा जाता है जिस पर प्रेक्षक है; इसलिए भूमि से देखने पर त्रिभुज की ऊर्ध्वाधर भुजा मीनार की पूरी ऊँचाई होती है, जबकि भवन की छत से देखने पर वह केवल छत के तल से ऊपर का भाग होती है, और क्षैतिज दूरी दोनों दशाओं में समान रहती है।
- 45° के उन्नयन कोण का अर्थ है tan 45° = 1, अर्थात् क्षैतिज दूरी और ऊँचाई बराबर; इस प्रश्न में इससे d = x + 10 मिल जाता है और एक अज्ञात राशि तुरंत समाप्त हो जाती है, इसीलिए ऐसे प्रश्नों में 45° वाले समीकरण से आरंभ करना सबसे किफ़ायती रहता है।
- 30° के उन्नयन कोण से tan 30° = 1/√3 मिलता है, अर्थात् d = x√3; दोनों समीकरणों में उभयनिष्ठ क्षैतिज दूरी को बराबर रखने पर x + 10 = x√3, अर्थात् x(√3 − 1) = 10 और x = 10/(√3 − 1) निकलता है।
- हर का परिमेयकरण करने पर x = 10(√3 + 1)/2 = 5(√3 + 1) मिलता है, और दिए गए मान √3 = 1·73 पर x = 5 × 2·73 = 13·65 मीटर आता है — यह सन्निकट नहीं, दिए गए करणी-मान पर यथार्थ उत्तर है।
- जाँच के लिए पूरी मीनार x + 10 = 23·65 मीटर होगी और क्षैतिज दूरी भी उतनी ही 23·65 मीटर, जो भूमि से 45° की दृष्टि-रेखा के अनुरूप है; और यही 23·65 वह संख्या है जो पूछ ग़लत पढ़ने वाले अभ्यर्थी को मिलेगी और विकल्पों में नहीं मिलेगी।
- इसका सामान्य रूप याद रखने योग्य है : h ऊँचे भवन के तल से 45° और शीर्ष से 30° का उन्नयन कोण मिलने पर छत से ऊपर मीनार का भाग h(√3 + 1)/2 होता है और पूरी मीनार h(√3 + 3)/2; इसी प्रकार तल से 60° और शीर्ष से 30° की दशा में पूरी मीनार भवन की ऊँचाई की डेढ़ गुनी निकलती है।
- पूछ को 'मीनार की पूरी ऊँचाई' पढ़ लेना, जबकि पूछा गया है 'भवन के शीर्ष से मीनार की ऊँचाई'; पूरी ऊँचाई 23·65 मीटर निकलती है, जो विकल्पों में है ही नहीं और अभ्यर्थी का समय गँवा देती है।
- मान रखने से पहले परिमेयकरण न करना; 10 को 0·73 से भाग देने पर 13·698… आता है, जो किसी छपे हुए मान से नहीं मिलता और अनुमान से चुनने पर पड़ोसी विकल्प की ओर खींच लेता है।
- छत से मापे जाने वाले 30° के कोण को मीनार की पूरी ऊँचाई पर लगा देना; उस त्रिभुज की ऊर्ध्वाधर भुजा केवल छत से ऊपर का भाग है, और यही चूक सबसे बड़े विकल्प तक ले जाती है।
- tan 30° और tan 60° के मान आपस में बदल देना; 30° का मान 1/√3 है और 60° का √3, और इस प्रश्न में यह अदला-बदली उत्तर को दो गुना से भी अधिक बढ़ा देती है।
ऊँचाई और दूरी का एक प्रश्न इस प्रश्नपत्र के संख्यात्मक खंड में लगभग निश्चित रहता है, और उसका साँचा प्रायः यही होता है — दो कोण, दो प्रेक्षण-बिंदु, और एक ज्ञात ऊँचाई। कोणों का युग्म लगभग सदैव 30° और 45°, अथवा 30° और 60° होता है, क्योंकि इनके स्पर्शज्या-मान करणी में सुंदर बैठते हैं और उत्तर 5(√3 + 1) जैसे यथार्थ रूप में आता है। इसीलिए प्रश्न में करणी का मान भी दे दिया जाता है, और विकल्प उसी मान पर बनाए जाते हैं — जिससे यह भी पता चलता है कि प्रत्येक असत्य विकल्प करणी के किसी न किसी ग़लत मान के बराबर होगा। तैयारी के लिए तीन बातें पर्याप्त हैं : मानक कोणों की तालिका, उन्नयन कोण को प्रेक्षक के तल से मापने का नियम, और परिमेयकरण का अभ्यास। इनके साथ अंत में एक जाँच जोड़ लीजिए — निकाली गई ऊँचाई से कोण वापस निकालकर देखिए कि वह दिया गया कोण बनता है या नहीं।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
किसी 20 मीटर ऊँचे भवन के तल तथा शीर्ष से एक मीनार के शिखर के उन्नयन कोण क्रमशः 60° और 30° हैं। मीनार की कुल ऊँचाई (मीटर में) कितनी है?
- (a)20
- (b)30
- (c)40
- (d)60
उत्तर(b) 30 — मान लीजिए मीनार की कुल ऊँचाई h और क्षैतिज दूरी d है। तल से 60° का अर्थ है h = d√3, और शीर्ष से 30° का अर्थ है (h − 20) = d/√3। दूसरे को पहले में रखने पर h − 20 = h/3 मिलता है, अर्थात् 2h/3 = 20 और h = 30 मीटर। ध्यान रहे कि यहाँ पूछ पूरी ऊँचाई की है, छत से ऊपर वाले भाग की नहीं, जो 10 मीटर होता।
- practice — not a real PYQ
यदि किसी मीनार के शिखर का किसी बिंदु से उन्नयन कोण 45° है, तो उस बिंदु की मीनार के पाद से क्षैतिज दूरी और मीनार की ऊँचाई के बीच क्या संबंध होगा?
- (a)दूरी ऊँचाई की आधी होगी
- (b)दूरी ऊँचाई के बराबर होगी
- (c)दूरी ऊँचाई की √3 गुनी होगी
- (d)दूरी ऊँचाई की दुगुनी होगी
उत्तर(b) दूरी ऊँचाई के बराबर होगी — उन्नयन कोण 45° होने पर tan 45° = 1 होता है, और चूँकि स्पर्शज्या ऊँचाई तथा क्षैतिज दूरी का अनुपात है, दोनों बराबर हो जाते हैं। यही सुविधा ऊँचाई और दूरी के प्रश्नों में 45° वाले समीकरण से आरंभ करने का कारण है, क्योंकि वह एक अज्ञात राशि तुरंत समाप्त कर देता है।