P, Q, R, S और T पाँच मित्र हैं। P, Q, R और S के भारों का माध्य 50 kg है, जबकि Q, R, S और T के भारों का माध्य भी 50 kg है। निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? 1. T का भार 50 kg है। 2. P और T के भार समान हैं। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- (a)केवल 1
- (b)केवल 2
- (c)1 और 2 दोनों
- (d)न तो 1 और न ही 2
सही उत्तर — B, (b) केवल 2। दोनों माध्यों को योग में बदल दीजिए — यही वह चाल है जिससे इस परिवार का लगभग हर प्रश्न हल हो जाता है। P, Q, R और S के भारों का माध्य 50 kg है और वे चार व्यक्ति हैं, इसलिए P + Q + R + S = 200। Q, R, S और T के भारों का माध्य भी 50 kg है, इसलिए Q + R + S + T = 200। अब दूसरे समीकरण को पहले में से घटाइए : उभयनिष्ठ भाग Q + R + S कट जाता है और शेष रहता है P − T = 0, अर्थात् P = T। इसलिए कथन 2 सही है — P और T के भार समान हैं — और वह किसी भी व्यक्ति के अलग-अलग भार की जानकारी के बिना सही है। कथन 1 इससे अधिक कड़ा दावा करता है, कि T का भार 50 kg है, और आँकड़ों में ऐसा कुछ नहीं जो इसे बाध्य करे। दो समीकरण पाँच अज्ञात राशियों के बीच केवल एक संबंध देते हैं; वे Q + R + S वाले खंड का योग भी तभी तय करते हैं जब उसके साथ P या T में से कोई एक ज्ञात हो, और उस खंड का आपसी बँटवारा तो पूरी तरह खुला रहता है। एक प्रति-उदाहरण इसे तय कर देता है : मान लीजिए P = 80 और Q = R = S = 40। तब P + Q + R + S = 80 + 120 = 200, अर्थात् पहला माध्य 50 है; और Q + R + S + T = 120 + T भी 200 होना चाहिए, जिससे T = 80 निकलता है। प्रश्न की दोनों शर्तें पूरी हो रही हैं और T का भार 80 kg है, 50 kg नहीं। इस उदाहरण में एक बात और ध्यान देने योग्य है : यहाँ P = T = 80 है, ठीक वैसा ही जैसा कथन 2 कहता है। अर्थात् कथन 1 का प्रति-उदाहरण स्वयं कथन 2 का पालन करता है — इससे अधिक स्पष्ट प्रमाण नहीं हो सकता कि दूसरा कथन आँकड़ों से निकलता है और पहला नहीं। जो सिद्धांत यहाँ काम कर रहा है वह सामान्य है और याद रखने योग्य है : यदि समान आकार के दो समूहों का माध्य समान हो और उनके सदस्य एक को छोड़कर सब उभयनिष्ठ हों, तो दोनों असमान सदस्य बराबर होंगे, क्योंकि दोनों समूहों का कुल योग समान है और उभयनिष्ठ खंड दोनों में समान योगदान देता है। समूहों के बारे में शेष सब कुछ — अलग-अलग मान, उनका प्रसार, और यह कि किसी का भार 50 kg है या नहीं — अनिर्धारित बना रहता है।
- (a)केवल 1 — 'केवल 1' दोनों कथनों की सच्चाई उलट देता है। यह उस दावे को स्वीकार करता है जिसे आँकड़े सिद्ध नहीं करते, कि T का भार 50 kg है, और उस दावे को अस्वीकार करता है जिसे आँकड़े सिद्ध करते हैं, कि P और T बराबर हैं। इसके पीछे प्रायः यह फिसलन होती है कि 'माध्य 50 है' से 'हर सदस्य 50 है' निकाल लिया जाए, जो माध्य की सबसे आम ग़लतफ़हमी है : माध्य कुल योग को बराबर बाँटने का कथन है, समुच्चय के किसी एक मान का कथन नहीं। जिन चार व्यक्तियों का औसत भार 50 kg है वे 20, 40, 60 और 80 kg के भी हो सकते हैं। इसलिए इस विकल्प को हटाने के लिए किसी गणना की भी आवश्यकता नहीं, केवल माध्य की परिभाषा पर्याप्त है।
- (c)1 और 2 दोनों — '1 और 2 दोनों' सही निष्कर्ष स्वीकार करके उसके साथ निराधार निष्कर्ष भी जोड़ देता है। यह उस अभ्यर्थी का स्वाभाविक चुनाव है जिसने P = T पहचान लिया है और फिर यह मान लिया है कि समान माध्य 50 अलग-अलग मान भी तय कर देगा, अथवा जिसने चुपचाप सबसे सरल दशा मान ली है कि पाँचों मित्रों का भार 50 kg है। वह दशा आँकड़ों के साथ संगत अवश्य है, किन्तु संगति और अनिवार्यता दो अलग बातें हैं : इस बनावट में कोई कथन तभी सही होता है जब वह हर संभव दशा में सत्य हो, न कि तब जब वह किसी एक संभव दशा में सत्य हो। P = 80, Q = R = S = 40 और T = 80 वाली दशा दोनों शर्तें पूरी करती है और कथन 1 को गिरा देती है।
- (d)न तो 1 और न ही 2 — 'न तो 1 और न ही 2' उस निष्कर्ष को अस्वीकार कर देता है जो एक ही पंक्ति के बीजगणित से निकल आता है। यह उस अभ्यर्थी का विकल्प है जो देखता है कि दो समीकरणों से पाँच अज्ञात राशियाँ निर्धारित नहीं हो सकतीं और इससे यह निष्कर्ष निकाल लेता है कि कुछ भी नहीं कहा जा सकता। किन्तु अनिर्धारित होना अज्ञान नहीं है : पाँच अज्ञात राशियों वाले दो समीकरण भी उन राशियों पर प्रतिबंध लगाते हैं, और यहाँ वह प्रतिबंध ठीक P = T है, जो एक समीकरण को दूसरे में से घटाने पर मिल जाता है, क्योंकि Q, R और S तीनों कट जाते हैं। यही इस प्रश्न का असली पाठ है — जो अज्ञात राशियाँ दोनों समूहों में उभयनिष्ठ हों, उन्हें हटाइए और जो बचे उसी में उत्तर है।
माध्य से जुड़े प्रश्नों की कुंजी यह है कि माध्य को कभी भी अकेला न छोड़िए, उसे तुरंत कुल योग में बदल दीजिए : n सदस्यों का माध्य m होने का अर्थ है कुल योग n × m। योग में बदलते ही समस्या रैखिक समीकरणों की हो जाती है और उन्हें जोड़ा-घटाया जा सकता है, जबकि माध्य के रूप में वे केवल अनुपात दिखाते हैं। इस प्रश्न में यही एक क़दम पूरा उत्तर दे देता है। दूसरा उपयोगी सिद्धांत उभयनिष्ठ खंड का है : यदि दो समूह अपने अधिकांश सदस्य साझा करते हों, तो उनके योगों का अंतर केवल असाझा सदस्यों का अंतर होता है, इसलिए समान योग वाले समान आकार के दो समूहों में असाझा सदस्य बराबर होते हैं। इसका सामान्य रूप यह है कि किसी समूह में एक सदस्य के स्थान पर दूसरा रखने से माध्य में जो परिवर्तन आता है, वह दोनों सदस्यों के अंतर को समूह के आकार से भाग देने पर मिलता है — और इसी सूत्र से 'औसत में इतनी वृद्धि हुई, तो नया सदस्य कितना है' वाले सारे प्रश्न हल होते हैं। तीसरी बात, कथन-आधारित प्रश्नों में यह भेद निर्णायक है कि कोई कथन आँकड़ों से अनिवार्य रूप से निकलता है या केवल उनके साथ संगत है; परीक्षक प्रायः एक कथन ऐसा रखता है जो सरलतम दशा में सही होता है और सामान्य दशा में नहीं।
यह प्रश्न दिखने में सांख्यिकी का है, किन्तु उसकी परीक्षा तार्किक है : वह यह देखता है कि अभ्यर्थी 'सिद्ध होता है' और 'संभव है' के बीच भेद कर पाता है या नहीं। यही भेद इस प्रश्नपत्र के गणित तथा विवेचन खंड की रीढ़ है, और वह पिछले प्रश्न में भी था, जहाँ दो कथन विशेष दशाओं में सही होकर सामान्य दशा में गिर जाते थे। ऐसे प्रश्नों की सबसे किफ़ायती विधि यह है कि पहले उस कथन को देखा जाए जो सबसे कम दावा करता है, क्योंकि प्रायः वही सही निकलता है, और फिर अधिक दावा करने वाले कथन के लिए एक प्रति-उदाहरण गढ़ने की कोशिश की जाए। प्रति-उदाहरण गढ़ते समय सबसे सरल संख्याएँ चुनिए — यहाँ Q, R और S तीनों को बराबर रख लेना पर्याप्त था — क्योंकि उद्देश्य कोई सुंदर उदाहरण बनाना नहीं, केवल एक ऐसी दशा दिखाना है जो शर्तें पूरी करे और कथन तोड़ दे। एक बात छपाई की भी : पुस्तिका में मित्रों के नाम P से T तक तिरछे अक्षरों में हैं और कथन 1 तथा 2 अपनी-अपनी पंक्ति में, और उनके नीचे कूट वाली पंक्ति अलग रखी गई है; अंक यहाँ कथनों के हैं और विकल्प (a) से (d) तक अक्षरों में हैं।
- माध्य को तुरंत कुल योग में बदल देना इस प्रकार के प्रश्नों की मूल तकनीक है : n सदस्यों का माध्य m होने का अर्थ है कुल योग n × m, और योग के रूप में समीकरण जोड़े-घटाए जा सकते हैं, जबकि माध्य के रूप में वे केवल अनुपात दिखाते हैं और उन पर सीधी बीजगणितीय क्रिया नहीं की जा सकती।
- इस प्रश्न में P + Q + R + S = 200 और Q + R + S + T = 200 है; दूसरे को पहले में से घटाने पर उभयनिष्ठ खंड कट जाता है और P = T निकलता है, इसलिए कथन 2 आँकड़ों से अनिवार्य रूप से सिद्ध होता है।
- कथन 1 सिद्ध नहीं होता : P = 80 तथा Q = R = S = 40 लेने पर दोनों माध्य 50 बने रहते हैं और T = 80 निकलता है, अर्थात् T का 50 kg होना आवश्यक नहीं — और यही प्रति-उदाहरण स्वयं P = T की शर्त पूरी करता है।
- सामान्य सिद्धांत यह है कि यदि समान आकार के दो समूहों का माध्य समान हो और वे एक को छोड़कर सारे सदस्य साझा करते हों, तो दोनों असाझा सदस्य बराबर होंगे; समूहों के भीतर के अलग-अलग मान और उनका प्रसार फिर भी अनिर्धारित रहते हैं।
- कथन-और-कूट वाली बनावट में कोई कथन तभी सही माना जाता है जब वह आँकड़ों की प्रत्येक संभव दशा में सत्य हो; किसी एक संभव दशा में सत्य होना — जैसे यह मान लेना कि पाँचों का भार 50 kg है — पर्याप्त नहीं होता, क्योंकि संगति सिद्ध करना अनिवार्यता सिद्ध करना नहीं है।
- इसी सिद्धांत का सामान्य रूप प्रतिस्थापन का सूत्र है : n सदस्यों वाले किसी समूह में एक सदस्य के स्थान पर दूसरा रखने से माध्य में जो परिवर्तन आता है वह दोनों सदस्यों के अंतर को n से भाग देने पर मिलता है — और इसी से 'औसत इतना बढ़ गया, तो नया सदस्य कितने का है' वाले सभी प्रश्न सीधे हल हो जाते हैं।
- 'माध्य 50 है' से 'हर सदस्य 50 है' निकाल लेना; माध्य कुल योग को बराबर बाँटने का कथन है, किसी एक मान का नहीं, और चार व्यक्ति 20, 40, 60 तथा 80 kg के होकर भी 50 kg का औसत दे सकते हैं।
- यह मान लेना कि दो समीकरणों से पाँच अज्ञात राशियाँ न निकलने का अर्थ है कि कुछ भी सिद्ध नहीं किया जा सकता; उभयनिष्ठ राशियाँ काटने पर एक स्पष्ट संबंध बच जाता है।
- सरलतम दशा चुपचाप मान लेना — जैसे पाँचों का भार 50 kg — और उसी के आधार पर कथन को सही ठहरा देना; बनावट यह पूछती है कि कथन हर संभव दशा में सत्य है या नहीं।
- दोनों कथनों को एक साथ पढ़कर 'दोनों सही लगते हैं' के आधार पर कूट चुन लेना; प्रत्येक कथन को अलग-अलग जाँचना ही इस बनावट की सुरक्षित विधि है।
औसत से जुड़े प्रश्न इस प्रश्नपत्र के संख्यात्मक खंड में लगभग निश्चित रूप से आते हैं और वे तीन रूपों में मिलते हैं : सीधी गणना, जिसमें कोई सदस्य जुड़ता या हटता है; कथन-और-कूट, जैसा यहाँ है; और आँकड़ा-तालिका पर आधारित प्रश्न, जिसमें औसत की तुलना करनी होती है। इनमें कथन वाला रूप सबसे अधिक अंक तय करता है, क्योंकि उसमें गणना कम और तर्क अधिक है। इसलिए तैयारी में दो चीज़ें अभ्यास कीजिए : माध्य को तुरंत योग में बदलना, और किसी कथन को तोड़ने के लिए सबसे सरल संख्याओं से प्रति-उदाहरण गढ़ना। साथ ही यह ध्यान रखिए कि परीक्षक प्रायः एक कथन ऐसा रखता है जो केवल सममित या सरलतम दशा में सही होता है — यही जाल इस प्रश्नपत्र के ज्यामिति वाले कथन-प्रश्न में भी दोहराया गया है।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
पाँच संख्याओं का माध्य 30 है। यदि उनमें से एक संख्या हटा दी जाए तो शेष चार संख्याओं का माध्य 32 हो जाता है। हटाई गई संख्या क्या है?
- (a)18
- (b)22
- (c)26
- (d)28
उत्तर(b) 22 — पाँच संख्याओं का कुल योग 5 × 30 = 150 है और शेष चार का कुल योग 4 × 32 = 128; अतः हटाई गई संख्या 150 − 128 = 22 है। यही उस तकनीक का सीधा प्रयोग है कि माध्य को पहले कुल योग में बदल लिया जाए और फिर दोनों योगों का अंतर लिया जाए।
- practice — not a real PYQ
छह व्यक्तियों A, B, C, D, E और F में A, B, C तथा D की आयु का माध्य 24 वर्ष है, और B, C, D तथा E की आयु का माध्य भी 24 वर्ष है। इससे निश्चित रूप से क्या निष्कर्ष निकलता है?
- (a)E की आयु 24 वर्ष है
- (b)A और E की आयु समान है
- (c)B, C और D तीनों की आयु 24 वर्ष है
- (d)A की आयु E से अधिक है
उत्तर(b) A और E की आयु समान है — दोनों समूहों का आकार समान है और उनका माध्य भी समान, इसलिए दोनों का कुल योग 96 वर्ष है; उभयनिष्ठ खंड B + C + D दोनों में समान योगदान देता है, अतः घटाने पर A = E निकलता है। शेष तीनों निष्कर्ष आँकड़ों से बाध्य नहीं हैं, क्योंकि अलग-अलग आयु का बँटवारा पूरी तरह खुला रहता है।