रसायन-विज्ञान में नोबेल पुरस्कार, 2022 किसके लिए प्रदान किया गया?
- (a)CRISPR/Cas9 जेनेटिक सीजर्स
- (b)क्लिक केमिस्ट्री और बायो-ऑर्थोगोनल केमिस्ट्री
- (c)लिथियम-आयन बैटरी
- (d)पैलियोजीनोमिक्स
सही उत्तर — B, (b) क्लिक केमिस्ट्री और बायो-ऑर्थोगोनल केमिस्ट्री — वर्ष 2022 के रसायन-विज्ञान के नोबेल पुरस्कार का आधिकारिक प्रशस्ति-वाक्य ठीक यही है। यह पुरस्कार तीन वैज्ञानिकों को संयुक्त रूप से मिला — कैरोलिन आर० बर्टोज़ी, मॉर्टन पी० मेल्डल और के० बैरी शार्पलेस — और प्रशस्ति में कहा गया कि यह 'क्लिक केमिस्ट्री और बायो-ऑर्थोगोनल केमिस्ट्री के विकास के लिए' है। दोनों पदों का अर्थ समझ लीजिए, क्योंकि उन्हीं से यह विकल्प पहचाना जाता है। क्लिक केमिस्ट्री कोई एक अभिक्रिया नहीं, अणु बनाने की एक सोच है : बड़े अणु को कठिन और लंबी संश्लेषण-शृंखलाओं से गढ़ने के बजाय छोटे-छोटे टुकड़ों को ऐसी अभिक्रियाओं से जोड़ दीजिए जो तेज़ हों, लगभग पूरी उपज दें, चुनिंदा हों और मामूली परिस्थितियों में चल जाएँ — जैसे दो टुकड़े 'क्लिक' करके जुड़ गए हों। इसका आदर्श उदाहरण ताँबे की उत्प्रेरणा वाली ऐज़ाइड-ऐल्काइन अभिक्रिया है, जिससे ट्राइऐज़ोल वलय बनती है, और जिसे मेल्डल तथा शार्पलेस ने स्वतंत्र रूप से विकसित किया। बायो-ऑर्थोगोनल केमिस्ट्री इसी विचार को जीवित कोशिका के भीतर ले जाती है : ऐसी अभिक्रियाएँ जो जीवित तंत्र के अपने रसायन को छेड़े बिना उसके भीतर चल सकें। यहाँ अड़चन ताँबा था, जो कोशिकाओं के लिए विषैला है। बर्टोज़ी ने ताँबे के बिना चलने वाला रूप विकसित किया, जिसमें ऐल्काइन को एक वलय में तानकर ही अभिक्रियाशील बना दिया जाता है। इसी से कोशिका-सतह पर बैठे शर्करा-अणुओं का नक़्शा बनाना और लक्षित औषधियों की दिशा में काम करना संभव हुआ। एक रोचक तथ्य साथ रख लीजिए : शार्पलेस को रसायन-विज्ञान का नोबेल दूसरी बार मिला — पहली बार 2001 में — और वे दो बार यह पुरस्कार पाने वाले गिने-चुने वैज्ञानिकों में आ गए। इस प्रश्न की बनावट भी ध्यान देने योग्य है : चारों विकल्प असली नोबेल पुरस्कारों के विषय हैं, बस अलग-अलग वर्षों और श्रेणियों के। इसलिए 'कौन-सा सुनने में बड़ा लगता है' वाली युक्ति यहाँ काम नहीं करती।
- (a)CRISPR/Cas9 जेनेटिक सीजर्स — यह विषय असली है, पर वर्ष दूसरा है। CRISPR/Cas9 की 'आनुवंशिक कैंची' के विकास के लिए रसायन-विज्ञान का नोबेल पुरस्कार वर्ष 2020 में दिया गया था, और वह इमैनुएल शार्पेंटिए तथा जेनिफ़र ए० डाउडना को मिला। यह पुरस्कार इसलिए भी याद रखा जाता है कि विज्ञान की किसी श्रेणी में यह पहला अवसर था जब पुरस्कार केवल दो महिलाओं को संयुक्त रूप से मिला। तकनीक का सार यह है कि जीवाणुओं की एक प्राकृतिक प्रतिरक्षा-व्यवस्था को उपकरण में बदलकर जीनोम के किसी चुने हुए स्थान पर सटीक काट लगाई जा सकती है, जिससे जीन-संपादन सुलभ और सस्ता हुआ। हिन्दी स्तंभ यहाँ अंग्रेज़ी पद को देवनागरी में लिप्यंतरित कर देता है — 'जेनेटिक सीजर्स' — इसलिए जिसने अंग्रेज़ी में 'genetic scissors' पढ़ा हो उसे ही यह वाक्यांश कुछ कहेगा।
- (c)लिथियम-आयन बैटरी — यह भी असली पुरस्कार है, पर 2022 का नहीं। लिथियम-आयन बैटरी के विकास के लिए रसायन-विज्ञान का नोबेल वर्ष 2019 में जॉन बी० गुडइनफ़, एम० स्टैनली विटिंघम और अकीरा योशिनो को दिया गया। यह पुरस्कार इसलिए भी चर्चित रहा कि गुडइनफ़ उस समय सत्तानबे वर्ष के थे और नोबेल पाने वाले सबसे अधिक आयु के व्यक्ति बने। विषय की दृष्टि से यह पुरस्कार आज के जीवन से सीधे जुड़ा है — मोबाइल, लैपटॉप और विद्युत वाहन सब इसी भंडारण-तकनीक पर टिके हैं — और इसीलिए यह विकल्प पहली नज़र में सबसे 'महत्त्वपूर्ण' लग सकता है। पर प्रश्न महत्त्व नहीं, वर्ष पूछ रहा है। नोबेल से जुड़े प्रश्नों में यही सबसे बड़ी सावधानी है : विषय पहचान लेना आधा काम है, उसे सही वर्ष और सही श्रेणी से जोड़ना पूरा काम।
- (d)पैलियोजीनोमिक्स — यह इस प्रश्न का सबसे तीखा जाल है, क्योंकि यह उसी वर्ष का पुरस्कार है — केवल श्रेणी दूसरी है। पैलियोजीनोमिक्स, अर्थात् प्राचीन जीनोम का अध्ययन, के लिए स्वांते पाबो को वर्ष 2022 का पुरस्कार मिला, पर वह रसायन-विज्ञान का नहीं, शरीर-क्रिया विज्ञान या चिकित्सा का था, और प्रशस्ति थी 'विलुप्त मानव-वंशों के जीनोम तथा मानव विकास से संबंधित उनकी खोजों के लिए'। पाबो के काम ने नीएंडरथल का जीनोम अनुक्रमित किया और डेनिसोवा नाम के एक अब तक अज्ञात मानव-वंश की पहचान की, तथा यह दिखाया कि आज के मनुष्यों में इन विलुप्त वंशों का कुछ आनुवंशिक अंश मौजूद है। यानी जिस अभ्यर्थी को केवल इतना याद है कि '2022 में जीनोम वाला कोई नोबेल था', वह यहीं फँसता है। नोबेल दोहराते समय हर पंक्ति में तीन चीज़ें लिखिए — वर्ष, श्रेणी और विषय — क्योंकि प्रश्न इन्हीं तीनों में से किसी एक को बदलकर पूछा जाता है।
क्लिक केमिस्ट्री का विचार यह है कि रसायनज्ञ प्रकृति की नक़ल करके जटिल अणु बनाने की कोशिश करने के बजाय कुछ ऐसी विश्वसनीय अभिक्रियाओं का छोटा-सा संग्रह रखें जो हर बार, लगभग बिना उपोत्पाद के, तेज़ी से और सरल परिस्थितियों में काम करें, और उन्हीं से टुकड़े जोड़ते चले जाएँ। इस सोच का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण ताँबे की उत्प्रेरणा वाली वह अभिक्रिया है जिसमें ऐज़ाइड और ऐल्काइन जुड़कर एक पाँच-सदस्यीय ट्राइऐज़ोल वलय बनाते हैं; वह जल में भी चलती है, कमरे के ताप पर भी, और बहुत चुनिंदा होती है। इसी को जीवित तंत्र में उतारने का प्रयास बायो-ऑर्थोगोनल केमिस्ट्री कहलाया, जिसका अर्थ है ऐसी अभिक्रियाएँ जो कोशिका के भीतर की अपनी रसायन-प्रक्रियाओं के साथ टकराएँ नहीं — न उन्हें बाधित करें, न उनसे बाधित हों। यहाँ ताँबे की विषाक्तता बाधा थी, और उसका उत्तर ताँबे को हटाकर ऐल्काइन को एक वलय में तानकर स्वयं अभिक्रियाशील बना देने में मिला। इसका सबसे जाना-पहचाना प्रयोग कोशिका-सतह की शर्कराओं पर निशान लगाकर उनका नक़्शा बनाना है, जो पहले संभव नहीं था।
नोबेल पुरस्कारों से जुड़े प्रश्न परीक्षा में लगभग हर वर्ष आते हैं, और उनकी तैयारी का तरीक़ा विषय-वस्तु से अधिक व्यवस्थित सूची बनाने का है। इस प्रश्न के चारों विकल्प यही दिखाते हैं : हर विकल्प एक असली पुरस्कार है, केवल वर्ष या श्रेणी बदली हुई है — 2020 का रसायन, 2019 का रसायन, 2022 का चिकित्सा और 2022 का रसायन। इसलिए तैयारी में हर पुरस्कार के सामने तीन चीज़ें लिखना ही पर्याप्त सुरक्षा है : वर्ष, श्रेणी और विषय, और यदि संभव हो तो विजेताओं के नाम। एक भाषा-टिप्पणी भी दर्ज कर लीजिए, क्योंकि यह हिन्दी-माध्यम के अभ्यर्थी के लिए महत्त्वपूर्ण है : इस प्रश्न में हिन्दी स्तंभ अनुवाद नहीं करता, लिप्यंतरण करता है — 'क्लिक केमिस्ट्री', 'बायो-ऑर्थोगोनल केमिस्ट्री', 'जेनेटिक सीजर्स', 'पैलियोजीनोमिक्स'। तकनीकी पदों के लिए यह उचित ही है, क्योंकि इनके प्रचलित हिन्दी पर्याय हैं ही नहीं; पर इसका अर्थ यह भी है कि इन पदों को अंग्रेज़ी रूप में पहचानना अनिवार्य है, क्योंकि देवनागरी में लिखे होने पर भी वे हिन्दी शब्द नहीं हैं।
- वर्ष 2022 का रसायन-विज्ञान का नोबेल पुरस्कार कैरोलिन आर० बर्टोज़ी, मॉर्टन पी० मेल्डल और के० बैरी शार्पलेस को 'क्लिक केमिस्ट्री और बायो-ऑर्थोगोनल केमिस्ट्री के विकास के लिए' दिया गया।
- क्लिक केमिस्ट्री का आदर्श उदाहरण ताँबे की उत्प्रेरणा वाली ऐज़ाइड-ऐल्काइन अभिक्रिया है, जिससे ट्राइऐज़ोल वलय बनती है; इसे मेल्डल और शार्पलेस ने स्वतंत्र रूप से विकसित किया।
- बायो-ऑर्थोगोनल केमिस्ट्री जीवित तंत्र के भीतर बिना उसकी अपनी रसायन-प्रक्रियाओं को छेड़े चलने वाली अभिक्रियाओं की शाखा है; बर्टोज़ी ने ताँबे के बिना चलने वाला रूप विकसित किया।
- बैरी शार्पलेस को रसायन-विज्ञान का नोबेल दूसरी बार मिला — पहली बार 2001 में।
- CRISPR/Cas9 आनुवंशिक कैंची के लिए रसायन-विज्ञान का नोबेल 2020 में इमैनुएल शार्पेंटिए और जेनिफ़र ए० डाउडना को मिला।
- लिथियम-आयन बैटरी के लिए रसायन-विज्ञान का नोबेल 2019 में जॉन बी० गुडइनफ़, एम० स्टैनली विटिंघम और अकीरा योशिनो को मिला।
- पैलियोजीनोमिक्स के लिए वर्ष 2022 का पुरस्कार स्वांते पाबो को मिला, पर वह शरीर-क्रिया विज्ञान या चिकित्सा का था, रसायन-विज्ञान का नहीं।
- इस प्रश्न में हिन्दी स्तंभ तकनीकी पदों का अनुवाद नहीं, लिप्यंतरण करता है, इसलिए उन्हें अंग्रेज़ी रूप में पहचानना आवश्यक है।
- विषय पहचानकर वर्ष न जाँचना; चारों विकल्प असली पुरस्कार हैं, केवल वर्ष या श्रेणी अलग है।
- पैलियोजीनोमिक्स को उसी वर्ष का होने के कारण चुन लेना; वह 2022 का चिकित्सा का पुरस्कार है, रसायन का नहीं।
- क्लिक केमिस्ट्री को कोई एक अभिक्रिया मान लेना; वह अणु बनाने की एक सोच है, जिसका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण ऐज़ाइड-ऐल्काइन अभिक्रिया है।
- बायो-ऑर्थोगोनल का अर्थ 'जैविक' भर समझ लेना; उसका अर्थ है जीवित तंत्र के अपने रसायन के समकोण पर, अर्थात् उससे टकराए बिना चलने वाला।
- देवनागरी में लिखे तकनीकी पदों को हिन्दी शब्द मान लेना; वे अंग्रेज़ी पदों का लिप्यंतरण भर हैं।
नोबेल पुरस्कारों से प्रश्न तीन ढंग से आते हैं। पहला यही — वर्ष और श्रेणी देकर विषय पुछवाना, जहाँ विकल्पों में आस-पास के वर्षों के असली पुरस्कार रखे जाते हैं; बचाव का एक ही तरीक़ा है कि हर पुरस्कार वर्ष, श्रेणी और विषय की तिकड़ी के रूप में याद हो। दूसरा उल्टा है : विषय या विजेता का नाम देकर वर्ष या श्रेणी पुछवाना। तीसरा तथ्य-आधारित है : कौन दो बार विजेता रहा, कौन सबसे कम या सबसे अधिक आयु का था, किस वर्ष कोई पुरस्कार नहीं दिया गया, या शांति पुरस्कार किस संस्था को मिला। इनके अलावा अर्थशास्त्र का पुरस्कार अलग से ध्यान माँगता है, क्योंकि वह अल्फ़्रेड नोबेल की वसीयत का मूल पुरस्कार नहीं, बाद में स्थापित स्मृति-पुरस्कार है। तैयारी के लिए पिछले पाँच वर्षों की एक छोटी तालिका पर्याप्त है, बशर्ते उसमें श्रेणी का स्तंभ अवश्य हो।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
CRISPR/Cas9 'आनुवंशिक कैंची' के विकास के लिए रसायन-विज्ञान का नोबेल पुरस्कार किस वर्ष दिया गया था?
- (a)2018
- (b)2019
- (c)2020
- (d)2022
उत्तर(c) 2020
- practice — not a real PYQ
वर्ष 2022 का शरीर-क्रिया विज्ञान या चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार किस विषय पर दिया गया था?
- (a)क्लिक केमिस्ट्री और बायो-ऑर्थोगोनल केमिस्ट्री
- (b)विलुप्त मानव-वंशों के जीनोम तथा मानव विकास से संबंधित खोजें
- (c)लिथियम-आयन बैटरी का विकास
- (d)mRNA टीका प्रौद्योगिकी
उत्तर(b) विलुप्त मानव-वंशों के जीनोम तथा मानव विकास से संबंधित खोजें