FAOSTAT (फूड ऐंड ऐग्रीकल्चर ऑर्गनाइज़ेशन कॉरपोरेट स्टैटिस्टिकल डेटाबेस) के अनुसार, भारत के दुग्ध उत्पादन के बारे में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से सही है/हैं? 1. वर्ष 2021–22 में, दुग्ध उत्पादन में भारत का स्थान विश्व में दूसरा था। 2. वर्ष 2021–22 में, विश्वव्यापी दुग्ध उत्पादन में भारत का 24% अंशदान था। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- (a)केवल 1
- (b)केवल 2
- (c)1 और 2 दोनों
- (d)न तो 1 और न ही 2
सही उत्तर — B, (b) केवल 2 — भारत का 24% अंशदान वाला कथन सही है, पर उसका स्थान दूसरा नहीं, पहला है। कथन 1 ग़लत है। वर्ष 2021–22 में दुग्ध उत्पादन में भारत विश्व में दूसरे नहीं, पहले स्थान पर था। सरकार ने फ़रवरी 2023 में संसद को दी गई जानकारी में और जून 2023 की एक तथ्य-पत्रिका में यही बात दोहराई है : भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक है। यह कोई नया स्थान नहीं है, बल्कि ऑपरेशन फ़्लड के बाद बनी स्थिति का ही परिणाम है। कथन 2 सही है। उसी जानकारी में यह भी दर्ज है कि भारत विश्व के दुग्ध उत्पादन में 24 प्रतिशत का अंशदान करता है, और यह आँकड़ा प्रश्न में नामित FAOSTAT से ही लिया गया बताया जाता है। संख्याएँ भी साथ रख लीजिए, क्योंकि वे कथन 2 को ठोस आधार देती हैं : भारत का दुग्ध उत्पादन 2013–14 के 137·7 मिलियन टन से बढ़कर 2021–22 में 221·1 मिलियन टन हो गया, अर्थात् 61 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि; और प्रति व्यक्ति दुग्ध उपलब्धता इसी अवधि में 303 ग्राम प्रतिदिन से बढ़कर 444 ग्राम प्रतिदिन हो गई। एक तर्क-आधारित जाँच भी यहीं सीख लीजिए, जो ऐसे हर प्रश्न में काम आती है। यदि किसी एक देश का अंशदान विश्व उत्पादन का लगभग एक-चौथाई हो, तो उसका दूसरे स्थान पर होना अपने-आप में असंगत लगता है — एक-चौथाई हिस्सा रखने वाला देश प्रायः शीर्ष पर ही होता है। यानी दोनों कथनों को साथ पढ़ते ही यह दिखने लगता है कि वे आपस में मेल नहीं खाते, और उसी असंगति से सही कथन छाँटा जा सकता है। एक बात यह भी जान लीजिए कि यह आँकड़ा आगे बढ़ चुका है। पशुपालन और डेयरी विभाग की मूलभूत पशुपालन सांख्यिकी, 2024 के अनुसार 2023–24 में भारत का दुग्ध उत्पादन 239·30 मिलियन टन रहा, जो पिछले वर्ष से 3·78 प्रतिशत अधिक है, विश्व उत्पादन में भारत का अंशदान लगभग 24·76 प्रतिशत बताया गया है, और प्रति व्यक्ति उपलब्धता 471 ग्राम प्रतिदिन। प्रश्न 2021–22 के बारे में है, इसलिए उत्तर 24 प्रतिशत वाले कथन पर ही जाएगा।
- (a)केवल 1 — यह विकल्प ठीक उलटा चुनाव है — वह उस कथन को स्वीकार करता है जो ग़लत है और उसे छोड़ देता है जो सही है। दूसरा स्थान वाला दावा इसलिए विश्वसनीय लगता है कि भारत अनेक कृषि उपजों में दूसरे स्थान पर है, इसलिए 'दूसरा' सुनकर मन चौंकता नहीं। पर दूध उन थोड़ी-सी उपजों में है जिनमें भारत निर्विवाद रूप से पहले स्थान पर है, और सरकार के अपने वक्तव्य यही कहते हैं। इसके साथ यह विकल्प 24 प्रतिशत वाले कथन को भी अस्वीकार करता है, जो सरकार द्वारा संसद में दिया गया आँकड़ा है। ऐसे प्रश्नों में सबसे सुरक्षित आदत यह है कि रैंक वाले कथन को सबसे अधिक संदेह से पढ़िए, क्योंकि रैंक बदलकर पूछना परीक्षा की सबसे सस्ती और सबसे सफल चाल है।
- (c)1 और 2 दोनों — यह विकल्प उस अभ्यर्थी के लिए है जो दोनों कथनों को अलग-अलग परखने के बजाय दोनों को 'सुनने में ठीक' मानकर स्वीकार कर लेता है। पर दोनों एक साथ सही नहीं हो सकते, और यह बिना किसी आँकड़े के भी दिख जाता है : विश्व उत्पादन का लगभग एक-चौथाई हिस्सा रखने वाला देश दूसरे स्थान पर हो, इसका अर्थ होगा कि पहले स्थान वाले का हिस्सा इससे भी बड़ा है, और तब उन दोनों का मिला-जुला हिस्सा ही विश्व उत्पादन का आधा हो जाएगा — जो दूध जैसी उपज में, जो लगभग हर देश में होती है, असंभव है। यही कारण है कि कथन-आधारित प्रश्नों में कथनों की आपसी संगति जाँचना एक बहुत कारगर उपकरण है। यहाँ असंगति पकड़ लेने के बाद केवल यह तय करना बचता है कि दोनों में से कौन-सा गिरता है, और वह रैंक वाला कथन है।
- (d)न तो 1 और न ही 2 — यह विकल्प उस अभ्यर्थी को पकड़ता है जो कथन 1 को तो ठीक ही अस्वीकार कर देता है — क्योंकि उसे पता है कि भारत पहले स्थान पर है — पर फिर 24 प्रतिशत जैसे विशिष्ट आँकड़े पर संदेह करके उसे भी छोड़ देता है। यह अति-सावधानी यहाँ महँगी पड़ती है : 24 प्रतिशत कोई अनुमान नहीं, वही आँकड़ा है जो सरकार ने FAOSTAT के हवाले से संसद में रखा और जून 2023 की तथ्य-पत्रिका में दोहराया। आँकड़ों वाले कथनों को परखने का व्यावहारिक तरीक़ा यह है कि उन्हें किसी दूसरी ज्ञात संख्या से मिलाकर देखिए : भारत का उत्पादन 2021–22 में लगभग 221 मिलियन टन था, और विश्व का कुल दुग्ध उत्पादन उससे लगभग चार गुना के आसपास आँका जाता है, इसलिए लगभग एक-चौथाई का अंशदान संगत बैठता है। संदेह करना अच्छी आदत है, पर संदेह को भी किसी कसौटी पर उतारना चाहिए।
इस प्रश्न में दो अलग-अलग चीज़ें पूछी गई हैं और उन्हें अलग-अलग रखना ही हल है : एक, विश्व में भारत का स्थान, और दो, विश्व उत्पादन में उसका प्रतिशत हिस्सा। स्थान क्रम बताता है, हिस्सा परिमाण। भारत दोनों कसौटियों पर ऊपर है — वह पहले स्थान पर है और उसका हिस्सा लगभग एक-चौथाई है — पर प्रश्न ने पहले वाले को बदलकर 'दूसरा' कर दिया है। भारत के दुग्ध क्षेत्र की जो पृष्ठभूमि इस प्रश्न को अर्थ देती है, वह ऑपरेशन फ़्लड है : राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड द्वारा 1970 में आरंभ किया गया यह कार्यक्रम तीन चरणों में 1996 तक चला, वर्गीज़ कुरियन के नेतृत्व में आनंद-प्रतिरूप की सहकारी समितियों को देश भर में फैलाया, और उसी से भारत दुग्ध में आत्मनिर्भर बना। इसी को श्वेत क्रांति कहा जाता है। भारत की डेयरी की एक और विशेषता ध्यान देने योग्य है : यहाँ उत्पादन बड़े फ़ार्मों से नहीं, करोड़ों छोटे और सीमांत किसानों तथा भूमिहीन परिवारों की एक-दो पशुओं वाली इकाइयों से आता है, और उसमें महिलाओं की भागीदारी बहुत बड़ी है — इसीलिए दुग्ध क्षेत्र को ग्रामीण आय और महिला-सशक्तीकरण दोनों का साधन माना जाता है।
आँकड़ों का स्रोत समझ लेना इस प्रश्न के लिए उपयोगी है। भारत के दुग्ध उत्पादन के आधिकारिक अनुमान पशुपालन और डेयरी विभाग समेकित प्रतिदर्श सर्वेक्षण के आधार पर निकालता है और उन्हें मूलभूत पशुपालन सांख्यिकी नाम के वार्षिक प्रकाशन में जारी करता है; वहीं से वे संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन के आँकड़ा-कोष FAOSTAT तक पहुँचते हैं, जिसका नाम प्रश्न में लिया गया है। इसलिए 24 प्रतिशत वाला आँकड़ा FAOSTAT और भारत सरकार दोनों के हवाले से मिलता है। संख्याओं की चाल भी देख लीजिए, क्योंकि परीक्षा में वर्ष बदलकर पूछा जाता है : 2013–14 में 137·7 मिलियन टन, 2021–22 में 221·1 मिलियन टन, और मूलभूत पशुपालन सांख्यिकी, 2024 के अनुसार 2023–24 में 239·30 मिलियन टन। प्रति व्यक्ति उपलब्धता 2013–14 के 303 ग्राम प्रतिदिन से बढ़कर 2021–22 में 444 और 2023–24 में 471 ग्राम प्रतिदिन हो गई। इसका अर्थ यह है कि इस विषय के प्रश्न में वर्ष पढ़ना अनिवार्य है — यह प्रश्न 2021–22 का है, इसलिए उसी वर्ष का आँकड़ा लागू होगा।
- वर्ष 2021–22 में दुग्ध उत्पादन में भारत विश्व में पहले स्थान पर था, इसलिए 'दूसरा' कहने वाला कथन ग़लत है।
- उसी वर्ष विश्व के दुग्ध उत्पादन में भारत का अंशदान 24 प्रतिशत बताया गया, और यही आँकड़ा FAOSTAT के हवाले से संसद में रखा गया।
- भारत का दुग्ध उत्पादन 2013–14 के 137·7 मिलियन टन से बढ़कर 2021–22 में 221·1 मिलियन टन हुआ — 61 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि।
- प्रति व्यक्ति दुग्ध उपलब्धता 2013–14 में 303 ग्राम प्रतिदिन थी और 2021–22 में 444 ग्राम प्रतिदिन।
- आँकड़ा आगे बढ़ चुका है : मूलभूत पशुपालन सांख्यिकी, 2024 के अनुसार 2023–24 में उत्पादन 239·30 मिलियन टन, वृद्धि 3·78 प्रतिशत, अंशदान लगभग 24·76 प्रतिशत और प्रति व्यक्ति उपलब्धता 471 ग्राम प्रतिदिन।
- भारत के दुग्ध आँकड़े पशुपालन और डेयरी विभाग के समेकित प्रतिदर्श सर्वेक्षण से आते हैं और वहीं से FAOSTAT तक पहुँचते हैं।
- ऑपरेशन फ़्लड राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड ने 1970 में आरंभ किया, वह तीन चरणों में 1996 तक चला और वर्गीज़ कुरियन उसका नेतृत्व करते रहे; इसी को श्वेत क्रांति कहा जाता है।
- भारत का दुग्ध उत्पादन मुख्यतः छोटे, सीमांत और भूमिहीन परिवारों की एक-दो पशुओं वाली इकाइयों से आता है, जिनमें महिलाओं की भागीदारी बहुत बड़ी है।
- रैंक वाले कथन को बिना जाँचे स्वीकार कर लेना; दूध में भारत पहले स्थान पर है, दूसरे पर नहीं।
- 24 प्रतिशत जैसे विशिष्ट आँकड़े को केवल इसलिए अस्वीकार कर देना कि वह बहुत ठीक-ठाक लगता है; यह सरकार द्वारा FAOSTAT के हवाले से दिया गया आँकड़ा है।
- दोनों कथनों की आपसी संगति न जाँचना; एक-चौथाई हिस्सा और दूसरा स्थान एक साथ नहीं टिक सकते।
- वर्ष अनदेखा कर देना; अंशदान का आँकड़ा 2023–24 तक बढ़कर लगभग 24·76 प्रतिशत हो चुका है, पर प्रश्न 2021–22 का है।
- कुल उत्पादन और प्रति व्यक्ति उपलब्धता को एक मान लेना; दोनों अलग-अलग आँकड़े हैं और अलग-अलग पूछे जाते हैं।
आँकड़ा-आधारित समसामयिक प्रश्न तीन ढंग से आते हैं। पहला रैंक वाला है — भारत किस उपज या सूचकांक में किस स्थान पर है, जहाँ सबसे आम चाल पहले को दूसरा और दूसरे को पहला कर देना है। दूसरा हिस्सा या मात्रा वाला है — प्रतिशत अंशदान, कुल उत्पादन या प्रति व्यक्ति उपलब्धता, जहाँ वर्ष पढ़ना निर्णायक होता है क्योंकि आँकड़े हर वर्ष बदलते हैं। तीसरा स्रोत वाला है — कौन-सी रिपोर्ट या कौन-सा आँकड़ा-कोष यह संख्या देता है, जहाँ FAOSTAT, मूलभूत पशुपालन सांख्यिकी, आर्थिक सर्वेक्षण और कृषि सांख्यिकी एक झलक में बार-बार लौटते हैं। तीनों के लिए एक ही तैयारी काफ़ी है : भारत जिन उपजों में पहले या दूसरे स्थान पर है उनकी एक छोटी सूची बनाइए, हर पंक्ति में वर्ष और स्रोत भी लिख लीजिए, और उसे वर्ष में एक बार ताज़ा कर लीजिए।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
ऑपरेशन फ़्लड (श्वेत क्रांति) का नेतृत्व किस संस्था ने किया था?
- (a)भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद
- (b)राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड
- (c)भारतीय खाद्य निगम
- (d)राष्ट्रीय बीज निगम
उत्तर(b) राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड
- practice — not a real PYQ
ऑपरेशन फ़्लड के तीनों चरण लगभग किस अवधि में चले?
- (a)1950 से 1970
- (b)1970 से 1996
- (c)1991 से 2005
- (d)2000 से 2015
उत्तर(b) 1970 से 1996