शेयरों में दीर्घावधि निवेश के मूल्य में व्यापक घट-बढ़ होती है। निवेशों के मूल्य में घट-बढ़ के विरुद्ध किया गया प्रावधान किस परिपाटी पर आधारित है?
- (a)रूढ़िवादिता
- (b)पूर्ण प्रस्तुतीकरण
- (c)सारता
- (d)समनुरूपता
सही उत्तर — A, (a) रूढ़िवादिता — निवेशों के मूल्य में संभावित गिरावट के लिए प्रावधान बनाना इसी परिपाटी का सबसे शुद्ध उदाहरण है। रूढ़िवादिता (conservatism), जिसे आधुनिक मानकों में विवेकशीलता या prudence कहा जाता है, एक ही वाक्य में समा जाती है : लाभ का पूर्वानुमान मत कीजिए, पर हर संभावित हानि का प्रावधान कर लीजिए। यह असममित नियम है और वही इसकी पहचान है। यदि शेयरों का बाज़ार मूल्य लागत से ऊपर चला जाए तो वह अप्राप्त लाभ बहियों में नहीं आता; पर यदि मूल्य लागत से नीचे गिरने की आशंका हो तो उसके लिए प्रावधान बना दिया जाता है, भले ही निवेश अभी बेचा ही न गया हो और हानि वास्तव में हुई ही न हो। प्रश्न ठीक इसी असममिति की ओर इशारा करता है — 'घट-बढ़ के विरुद्ध किया गया प्रावधान'। ध्यान दीजिए कि यह प्रावधान लाभ पर प्रभार (charge against profit) है, लाभ का विनियोजन (appropriation) नहीं। इसका अर्थ यह है कि यह लाभ-हानि खाते में तब भी लिखा जाएगा जब फ़र्म को हानि हो रही हो; इसे केवल तभी नहीं रोका जाता जब लाभ न हो। यही बात इसे संचय (reserve) से अलग करती है। विधिक-मानक स्तर पर यही सावधानी अनुशासन के साथ लागू होती है। लेखांकन मानक 13 के अनुसार दीर्घावधि निवेश सामान्यतः लागत पर ही दिखाए जाते हैं, और उनके मूल्य में गिरावट के लिए तभी घटाव किया जाता है जब वह गिरावट अस्थायी न हो; और यह निर्णय हर निवेश के लिए अलग-अलग लिया जाता है, पूरे समूह के लिए एक साथ नहीं। इसीलिए प्रश्न में 'दीर्घावधि' शब्द जान-बूझकर रखा गया है। एक शब्द पर सावधान रहिए : हिन्दी में 'रूढ़िवादिता' रोज़मर्रा में परंपरावादिता या जड़ता के अर्थ में चलता है और उसका स्वर नकारात्मक होता है। लेखांकन में इसका अर्थ केवल सतर्कता है — आशावाद से बचना — और यह एक गुण माना जाता है, दोष नहीं।
- (b)पूर्ण प्रस्तुतीकरण — पूर्ण प्रस्तुतीकरण (full disclosure) यह तय करता है कि वित्तीय विवरणों और उनकी टिप्पणियों में कौन-सी बात बता दी जाए — अपनाई गई लेखांकन नीतियाँ, मूल्यह्रास की विधि, आकस्मिक देयताएँ, तुलन-पत्र की तिथि के बाद की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ। यह परिपाटी बताने से जुड़ी है, प्रावधान बनाने से नहीं। भेद इस उदाहरण से साफ़ हो जाता है : यदि फ़र्म निवेशों के मूल्य में गिरावट का उल्लेख केवल एक टिप्पणी में कर देती और बहियों में कोई प्रावधान न बनाती, तो वह पूर्ण प्रस्तुतीकरण का पालन होता, रूढ़िवादिता का नहीं। प्रावधान बनाना — अर्थात् लाभ घटा देना — रूढ़िवादिता है। हिन्दी शब्द पर एक चेतावनी भी दर्ज कर लीजिए : यहाँ 'प्रस्तुतीकरण' अंग्रेज़ी के disclosure के लिए है, जबकि साधारण हिन्दी में प्रस्तुतीकरण का अर्थ presentation होता है और वाणिज्य की पाठ्यपुस्तकें इस परिपाटी को प्रायः 'पूर्ण प्रकटीकरण' कहती हैं।
- (c)सारता — सारता (materiality) यह तय करती है कि कोई मद इतनी महत्त्वपूर्ण है या नहीं कि उसका छूट जाना या ग़लत दिखना पढ़ने वाले के निर्णय को बदल दे। यह मात्रा की कसौटी है, दिशा की नहीं — यह बताती है कि किस मद पर ध्यान देना है, यह नहीं बताती कि हानि के लिए प्रावधान बनाना है और लाभ के लिए नहीं। दूसरे शब्दों में, सारता यह प्रश्न पूछती है 'क्या यह गिरावट इतनी बड़ी है कि दिखाई जाए', जबकि रूढ़िवादिता यह प्रश्न पूछती है 'गिरावट की आशंका है तो क्या उसका प्रावधान बनाना चाहिए' — और प्रश्न दूसरा वाला है। शब्द पर ध्यान दीजिए : 'सारता' हिन्दी में बहुत कम चलने वाला रूप है; वाणिज्य की पाठ्यपुस्तकों में यही परिपाटी प्रायः सारवत्ता या महत्ता कहलाती है, इसलिए इसे पढ़कर कोई नया सिद्धांत मत खोजिए।
- (d)समनुरूपता — समनुरूपता (consistency) कहती है कि एक बार अपनाई गई लेखांकन नीति वर्ष-दर-वर्ष वही रहनी चाहिए, ताकि अलग-अलग वर्षों के विवरण तुलनीय बने रहें; और यदि नीति बदली जाए तो उसे उसके प्रभाव सहित बताना होगा। यह तुलनीयता का नियम है, सतर्कता का नहीं। इस प्रश्न पर लगाइए तो अंतर स्पष्ट है : समनुरूपता यह कहेगी कि निवेशों का मूल्यांकन हर वर्ष एक ही आधार पर कीजिए, पर वह यह नहीं कहेगी कि गिरावट के लिए प्रावधान बनाइए ही। यहाँ एक ढाँचागत बात भी ध्यान देने योग्य है, क्योंकि इसी प्रश्नपत्र में उस पर अलग प्रश्न है : लेखांकन मानक 1 में समनुरूपता एक मूलभूत लेखांकन मान्यता है — चालू व्यवसाय और उपार्जन के साथ — जबकि रूढ़िवादिता यानी विवेकशीलता और सारता उन तीन प्रमुख विचारों में हैं जो लेखांकन नीतियों के चयन और प्रयोग को नियंत्रित करते हैं। यह भेद याद रहे तो ऐसे प्रश्न आधे वहीं हल हो जाते हैं।
लेखांकन की परिपाटियाँ वे व्यावहारिक रीतियाँ हैं जो लंबे प्रयोग से मान्य हुईं और आगे चलकर मानकों में समा गईं। चार सबसे अधिक पूछी जाने वाली परिपाटियाँ ये हैं। रूढ़िवादिता या विवेकशीलता : अनिश्चितता की स्थिति में आय और परिसंपत्ति को अधिक न दिखाइए तथा व्यय और देयता को कम न दिखाइए; इसका सूत्र-वाक्य है 'लाभ का पूर्वानुमान मत कीजिए, हर संभावित हानि का प्रावधान कीजिए'। पूर्ण प्रकटीकरण : हर महत्त्वपूर्ण सूचना विवरणों में या उनकी टिप्पणियों में सामने आनी चाहिए। सारता : केवल वही मद अलग से दिखाई जाए जिसका छूटना या ग़लत होना पढ़ने वाले के निर्णय को बदल दे। समनुरूपता : नीतियाँ वर्ष-दर-वर्ष एक-सी रहें, ताकि तुलना संभव हो। रूढ़िवादिता के प्रयोग परीक्षा में बार-बार लौटते हैं — संदिग्ध ऋणों का प्रावधान, मालसूची का लागत या निवल वसूली योग्य मूल्य में से जो कम हो उस पर मूल्यांकन, बट्टे का प्रावधान, स्वतः अर्जित ख्याति को दर्ज न करना, और यही निवेश-मूल्य में गिरावट का प्रावधान। एक चेतावनी भी इसी के साथ चलती है : रूढ़िवादिता को अति तक ले जाना स्वयं दोष बन जाता है, क्योंकि तब गुप्त संचय बनते हैं और लाभ जान-बूझकर कम दिखाया जाता है, जो सही और उचित चित्र देने के कर्तव्य के विरुद्ध है।
इस प्रश्न में 'दीर्घावधि' शब्द केवल सजावट नहीं है। लेखांकन मानक 13 में निवेशों को दो भागों में बाँटा गया है : चालू निवेश, जो लागत और उचित मूल्य में से जो कम हो उस पर दिखाए जाते हैं, और दीर्घावधि निवेश, जो सामान्यतः लागत पर ही दिखाए जाते हैं। दीर्घावधि निवेश के मूल्य में गिरावट के लिए घटाव तभी किया जाता है जब गिरावट अस्थायी न हो, और यह निर्णय हर निवेश के लिए अलग-अलग होता है। इसका कारण भी तार्किक है : दीर्घावधि निवेश बेचने के लिए नहीं रखे जाते, इसलिए बाज़ार का हर उतार-चढ़ाव उनके लेखांकन मूल्य को नहीं हिलाना चाहिए — पर स्थायी गिरावट को अनदेखा करना विवेकशीलता के विरुद्ध होगा। साझेदारी के लेखों में इसी विचार से 'निवेश उतार-चढ़ाव संचय' रखा जाता है, जो साझेदार के प्रवेश या अवकाश-ग्रहण के समय बाँटा जाता है। परीक्षा की दृष्टि से यह प्रश्न उस समूह का है जो चार परिपाटियों के नाम विकल्पों में रखकर एक उदाहरण देता है — और ऐसे हर प्रश्न में एक ही युक्ति काम करती है : उदाहरण को पढ़कर पूछिए कि यह किस चीज़ को नियंत्रित कर रहा है — मात्रा को, दिशा को, बताने को, या समय के साथ एकरूपता को।
- रूढ़िवादिता (conservatism), जिसे आधुनिक मानकों में विवेकशीलता या prudence कहते हैं, का सूत्र है : लाभ का पूर्वानुमान मत कीजिए, पर हर संभावित हानि का प्रावधान कीजिए।
- निवेशों के मूल्य में गिरावट का प्रावधान इसी असममिति का उदाहरण है — अप्राप्त लाभ दर्ज नहीं होता, पर अप्राप्त हानि का प्रावधान बन जाता है।
- यह प्रावधान लाभ पर प्रभार है, लाभ का विनियोजन नहीं — इसलिए हानि के वर्ष में भी बनाया जाता है।
- लेखांकन मानक 13 : चालू निवेश लागत और उचित मूल्य में से जो कम हो उस पर; दीर्घावधि निवेश सामान्यतः लागत पर, और गिरावट के लिए घटाव तभी जब वह अस्थायी न हो, तथा निर्णय हर निवेश के लिए अलग-अलग।
- लेखांकन मानक 1 में मूलभूत मान्यताएँ तीन हैं — चालू व्यवसाय, समनुरूपता और उपार्जन; जबकि विवेकशीलता, रूप पर सार की प्रधानता और सारता वे तीन प्रमुख विचार हैं जो लेखांकन नीतियों के चयन को नियंत्रित करते हैं।
- रूढ़िवादिता के अन्य प्रयोग : संदिग्ध ऋणों का प्रावधान, मालसूची का लागत या निवल वसूली योग्य मूल्य में से जो कम हो उस पर मूल्यांकन, तथा स्वतः अर्जित ख्याति को बहियों में दर्ज न करना।
- अति रूढ़िवादिता स्वयं दोष है, क्योंकि उससे गुप्त संचय बनते हैं और लाभ जान-बूझकर कम दिखता है।
- शब्दावली की टकराहटें : 'रूढ़िवादिता' साधारण हिन्दी में परंपरावादिता के अर्थ में चलता है; 'पूर्ण प्रस्तुतीकरण' का अर्थ यहाँ full disclosure है, जिसे पाठ्यपुस्तकें पूर्ण प्रकटीकरण कहती हैं; 'सारता' materiality है, जिसे प्रायः सारवत्ता कहा जाता है; और 'समनुरूपता' consistency है।
- 'रूढ़िवादिता' को नकारात्मक अर्थ में लेकर उसे ग़लत विकल्प मान लेना; लेखांकन में यह सतर्कता का नाम है और एक गुण है।
- पूर्ण प्रकटीकरण और रूढ़िवादिता का घालमेल; पहला बताने से जुड़ा है, दूसरा प्रावधान बनाने से।
- सारता को दिशा का नियम मान लेना; वह केवल यह तय करती है कि मद महत्त्वपूर्ण है या नहीं।
- समनुरूपता को परिपाटी मानकर वहीं रुक जाना; लेखांकन मानक 1 में वह एक मूलभूत मान्यता भी है, और यही भेद एक अलग प्रश्न में पूछा गया है।
- प्रावधान को संचय समझ लेना; प्रावधान लाभ पर प्रभार है और हानि के वर्ष में भी बनता है।
इस विषय से प्रश्न तीन ढंग से आते हैं। पहला यही है — एक व्यावहारिक उदाहरण देकर पूछना कि वह किस परिपाटी पर टिका है, और विकल्पों में चार परिपाटियों के नाम रख देना; यहाँ बचाव यह है कि उदाहरण को पढ़कर पहले तय कीजिए कि वह किस चीज़ को नियंत्रित कर रहा है। दूसरा ढंग वर्गीकरण का है : पूछना कि दी गई सूची में से कौन मूलभूत मान्यता है और कौन नीतियों के चयन का प्रमुख विचार — इसी प्रश्नपत्र में दोनों तरफ़ से यह पूछा गया है। तीसरा ढंग व्यवहार का है : कोई लेखांकन उपचार देकर पूछना कि वह सही है या नहीं, जैसे स्वतः अर्जित ख्याति को दर्ज करना या मालसूची को बाज़ार मूल्य पर दिखाना; वहाँ उत्तर लगभग हमेशा विवेकशीलता से निकलता है। तैयारी के लिए सबसे अच्छा अभ्यास यह है कि हर परिपाटी के सामने दो-दो व्यावहारिक उदाहरण लिखकर एक पृष्ठ बना लीजिए, क्योंकि परीक्षा नाम नहीं, उदाहरण पूछती है।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
लेखांकन मानक 1 के अनुसार, लेखांकन नीतियों के चयन और प्रयोग को नियंत्रित करने वाले तीन प्रमुख विचार कौन-से हैं?
- (a)विवेकशीलता, रूप पर सार की प्रधानता, सारता
- (b)चालू व्यवसाय, समनुरूपता, उपार्जन
- (c)पूर्ण प्रकटीकरण, सारता, समनुरूपता
- (d)उपार्जन, मिलान, विवेकशीलता
उत्तर(a) विवेकशीलता, रूप पर सार की प्रधानता, सारता
- practice — not a real PYQ
निम्नलिखित में से कौन-सा रूढ़िवादिता (विवेकशीलता) की परिपाटी का प्रयोग नहीं है?
- (a)संदिग्ध ऋणों के लिए प्रावधान बनाना
- (b)मालसूची को लागत या निवल वसूली योग्य मूल्य में से जो कम हो उस पर दिखाना
- (c)स्वतः अर्जित ख्याति को बहियों में परिसंपत्ति के रूप में दर्ज करना
- (d)निवेशों के मूल्य में गिरावट के लिए प्रावधान बनाना
उत्तर(c) स्वतः अर्जित ख्याति को बहियों में परिसंपत्ति के रूप में दर्ज करना