12 इंच त्रिज्या और 4 इंच मोटाई वाली किसी ठोस वृत्ताकार धात्विक चक्रिका (डिस्क) को पिघलाकर उससे 16 इंच त्रिज्या की एक ठोस चक्रिका बनाई जाती है। इस नई चक्रिका की मोटाई (इंच में) क्या है?
- (a)2
- (b)2·25
- (c)2·50
- (d)2·75
सही उत्तर — B, (b) 2·25 — पिघलाकर ढालने पर आयतन नहीं बदलता, और उसी एक शर्त से नई मोटाई निकल आती है। दोनों चक्रिकाएँ ठोस बेलन ही हैं, इसलिए आयतन = π × त्रिज्या² × मोटाई। पुरानी चक्रिका : π × 12² × 4 = 576π घन इंच। नई चक्रिका : π × 16² × t = 256π t। धातु उतनी ही है, इसलिए 256 t = 576, अर्थात् t = 576/256 = 2·25 इंच। इसे अनुपात से कीजिए तो और तेज़ हो जाता है। आयतन स्थिर रहने पर मोटाई त्रिज्या के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होती है, इसलिए नई मोटाई = पुरानी मोटाई × (पुरानी त्रिज्या ÷ नई त्रिज्या)² = 4 × (12/16)² = 4 × (3/4)² = 4 × 9/16 = 2·25। दो बातें यहीं नोट कर लीजिए। पहली, π दोनों ओर से कट जाता है — जिसने 22/7 रखकर 576 × 22/7 निकालना शुरू किया, उसने केवल समय गँवाया, क्योंकि उत्तर π पर निर्भर ही नहीं है। दूसरी, त्रिज्या 12 से 16 हुई, अर्थात् 4/3 गुना; इसलिए मोटाई (4/3)² = 16/9 गुना घटनी चाहिए, और 4 का 9/16 ठीक 2·25 है। इकाई की भी चिंता मत कीजिए — त्रिज्या और मोटाई दोनों इंच में दी गई हैं और उत्तर भी इंच में ही माँगा गया है, इसलिए कोई रूपांतरण नहीं करना है। एक शब्द पर ध्यान दीजिए : पुस्तिका 'चक्रिका' लिखकर कोष्ठक में '(डिस्क)' भी छापती है। चक्रिका हिन्दी में डिस्क के लिए कम प्रचलित शब्द है, और आयोग ने यहाँ स्वयं उसका अंग्रेज़ी पर्याय दे दिया है, इसलिए भ्रम की जगह नहीं है।
- (a)2 — यह उस अभ्यर्थी का उत्तर है जो त्रिज्या के बढ़ने को रैखिक ढंग से सोचता है — 'त्रिज्या एक-तिहाई बढ़ी, तो मोटाई लगभग आधी हो जाएगी' — या जो 2·25 को पूर्णांक में बदल देता है। इसे उल्टा जाँचिए, यही सबसे साफ़ खंडन है : यदि मोटाई सचमुच 2 इंच होती, तो नई त्रिज्या का वर्ग 576 ÷ 2 = 288 होना चाहिए था, अर्थात् त्रिज्या √288 ≈ 16·97 इंच, लगभग 17 इंच। प्रश्न 16 इंच कहता है, 17 नहीं। दूसरे शब्दों में, मोटाई तभी ठीक आधी होती जब अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल ठीक दुगुना होता, और उसके लिए त्रिज्या 12√2 चाहिए थी। यह जाँच याद रखने लायक़ है — किसी भी विकल्प को आयतन के समीकरण में वापस रखकर देखिए कि वह कौन-सी त्रिज्या माँगता है।
- (c)2·50 — यही उल्टी जाँच यहाँ भी लगाइए : 2·50 इंच मोटाई के लिए नई त्रिज्या का वर्ग 576 ÷ 2·5 = 230·4 होना चाहिए, अर्थात् त्रिज्या लगभग 15·18 इंच — 16 नहीं। यह संख्या उस भूल से भी आ सकती है जिसमें कोई 576/256 को दशमलव में बदलते समय जल्दबाज़ी कर देता है, या 144/256 को 5/8 के आस-पास मान लेता है। सही भिन्न सरल है : 144/256 = 9/16, और 4 × 9/16 = 36/16 = 2·25। जब भी हर 256 जैसी दो की घात हो, भिन्न को दशमलव में बदलने की जगह पहले पूरी तरह छोटा कर लीजिए; 576/256 को 9/4 तक घटा लेने पर उत्तर बिना किसी भाग-गणित के दिख जाता है।
- (d)2·75 — 2·75 इंच मोटाई के लिए नई त्रिज्या का वर्ग 576 ÷ 2·75 ≈ 209·45 चाहिए, अर्थात् त्रिज्या लगभग 14·47 इंच, जो प्रश्न की 16 इंच से काफ़ी दूर है। संरचना की दृष्टि से यह विकल्प सही उत्तर के ऊपर बिछाया गया अंतिम काँटा है — 2, 2·25, 2·50, 2·75 की सीढ़ी में सही उत्तर दूसरे पायदान पर है, इसलिए 'बीच वाला चुन लो' जैसी कोई युक्ति यहाँ काम नहीं करती। एक सामान्य नियम भी याद रखिए : त्रिज्या बढ़ने पर मोटाई घटती है, और चूँकि त्रिज्या 12 से 16 हुई है, नई मोटाई पुरानी 4 इंच के आधे से ऊपर पर कहीं होनी चाहिए पर उसके तीन-चौथाई से नीचे — यानी 2 और 3 के बीच। यह मोटा अनुमान चारों विकल्पों को नहीं काटता, इसलिए यहाँ गणना करनी ही होगी।
पिघलाकर ढालने (recasting) के हर प्रश्न की धुरी एक ही वाक्य है — धातु का आयतन अपरिवर्तित रहता है, आकृति बदल जाती है। इसलिए हल का ढाँचा हमेशा यही रहता है : पुरानी आकृति का आयतन लिखिए, नई आकृति का आयतन अज्ञात के साथ लिखिए, और दोनों को बराबर रख दीजिए। यहाँ दोनों आकृतियाँ ठोस बेलन हैं, जिनका आयतन πr²h है, इसलिए π कट जाता है और केवल r²h स्थिर रहता है। इसी से एक बहुत उपयोगी अनुपात निकलता है : r²h = अचर, अर्थात् h ∝ 1/r²। त्रिज्या दुगुनी हो तो मोटाई एक-चौथाई; त्रिज्या 4/3 गुनी हो तो मोटाई 9/16 गुनी। यही अनुपात-वाला रूप परीक्षा में सबसे तेज़ है, क्योंकि उसमें बड़ी संख्याएँ बनती ही नहीं। ध्यान रखिए कि यह नियम केवल तभी लगता है जब दोनों आकृतियों का सूत्र एक ही हो; यदि बेलन को गोले या शंकु में ढाला जाए तो सूत्र बदल जाएँगे और अनुपात वाली छलाँग नहीं लगाई जा सकती।
इस परिवार के प्रश्नों में तीन सूत्र बार-बार लगते हैं — बेलन πr²h, गोला (4/3)πr³, शंकु (1/3)πr²h — और अर्धगोला (2/3)πr³। जब भी प्रश्न कहे 'पिघलाकर बनाई गई', 'ढालकर बनाई गई', 'खींचकर तार बनाया गया' या 'पानी एक पात्र से दूसरे में डाला गया', यही समीकरण लगता है। कुछ प्रश्न इसमें एक परत और जोड़ते हैं : संख्या। जैसे 'एक गोले को पिघलाकर कितनी छोटी गोलियाँ बनेंगी' — वहाँ बड़ा आयतन ÷ छोटा आयतन करना होता है, और उत्तर पूर्णांक ही आना चाहिए, जो स्वयं एक जाँच बन जाती है। इस प्रश्न में इकाई इंच है, जो भारतीय प्रश्नपत्रों में कम दिखती है, पर चूँकि तीनों राशियाँ एक ही इकाई में हैं, कोई रूपांतरण नहीं चाहिए — प्रश्न ने स्वयं कोष्ठक में '(इंच में)' लिखकर यह स्पष्ट कर दिया है। पुस्तिका दशमलव बिंदु को ऊपर उठे मध्य-बिंदु के रूप में छापती है, इसलिए 2·25 का अर्थ 2.25 ही है।
- ठोस बेलन (और ठोस चक्रिका) का आयतन πr²h होता है।
- पिघलाकर ढालने पर आयतन अपरिवर्तित रहता है — यही इस पूरे परिवार का एकमात्र समीकरण है।
- यहाँ π दोनों ओर कट जाता है, इसलिए केवल r²h स्थिर रहता है और उत्तर π के मान पर निर्भर नहीं करता।
- आयतन स्थिर रहने पर मोटाई त्रिज्या के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होती है : नई मोटाई = 4 × (12/16)² = 4 × 9/16 = 2·25 इंच।
- जाँच का उल्टा तरीका : किसी भी विकल्प t के लिए आवश्यक नई त्रिज्या √(576/t) होगी — केवल t = 2·25 पर वह ठीक 16 आती है।
- पुस्तिका 'चक्रिका' के साथ कोष्ठक में '(डिस्क)' भी छापती है, क्योंकि चक्रिका हिन्दी में डिस्क के लिए कम प्रचलित शब्द है।
- अन्य आवश्यक सूत्र : गोला (4/3)πr³, अर्धगोला (2/3)πr³, शंकु (1/3)πr²h।
- मोटाई को त्रिज्या के व्युत्क्रमानुपाती मान लेना; वह त्रिज्या के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
- π का मान रखकर गणना शुरू कर देना; वह दोनों ओर से कट जाता है और केवल समय ले जाता है।
- त्रिज्या की जगह व्यास मान लेना; यहाँ 12 और 16 त्रिज्याएँ ही हैं, पर अनुपात दोनों स्थितियों में एक ही रहता, इसलिए यह भूल इस प्रश्न में दिखती नहीं और अगले प्रश्न में महँगी पड़ती है।
- 2·25 को पूर्णांक बनाकर 2 चुन लेना; विकल्प (a) ठीक इसी जल्दबाज़ी के लिए रखा गया है।
- ऊपर उठे मध्य-बिंदु को कोई और चिह्न समझ लेना; वह केवल दशमलव बिंदु है।
आयतन-संरक्षण के प्रश्न परीक्षाओं में तीन आकारों में आते हैं। पहला सबसे सरल है — एक ही प्रकार की दो आकृतियाँ, जैसे यहाँ बेलन से बेलन, जहाँ अनुपात वाली एक पंक्ति ही उत्तर दे देती है। दूसरा आकृति बदल देता है : गोले को बेलन में, बेलन को शंकु में, अर्धगोलों के पानी को बेलनाकार पात्र में; वहाँ दोनों सूत्र अलग-अलग लिखने पड़ते हैं और π तब भी प्रायः कट जाता है। तीसरा आकार संख्या पूछता है — कितनी गोलियाँ, कितने सिक्के, कितनी बूँदें — और वहाँ उत्तर पूर्णांक आना ही एक जाँच है। तीनों के लिए एक ही तैयारी काफ़ी है : छह-सात सूत्र कंठस्थ कीजिए, और हर प्रश्न में सबसे पहले यह लिखिए कि कौन-सी राशि स्थिर है। इसी प्रश्नपत्र में एक और प्रश्न सात अर्धगोलाकार पात्रों का पानी दूसरे पात्र में डालने का है — वहाँ भी यही एक वाक्य पूरा हल खड़ा कर देता है।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
6 सेमी त्रिज्या के एक ठोस धातु के गोले को पिघलाकर 6 सेमी त्रिज्या का एक ठोस बेलन बनाया जाता है। बेलन की ऊँचाई (सेमी में) क्या होगी?
- (a)4
- (b)6
- (c)8
- (d)12
उत्तर(c) 8
- practice — not a real PYQ
किसी ठोस बेलन की त्रिज्या दुगुनी और ऊँचाई आधी कर दी जाए, तो उसका आयतन पहले की तुलना में कितना हो जाएगा?
- (a)आधा
- (b)दुगुना
- (c)चार गुना
- (d)अपरिवर्तित
उत्तर(b) दुगुना