निम्न में से कौन-सा इलेक्ट्रोफाइल नहीं है ?
- (a)H⁺
- (b)Na⁺
- (c)BF₃⁻
- (d)उपर्युक्त सभी
सही — (b), Na⁺। इलेक्ट्रोफाइल वह स्पीशीज़ है जिसे इलेक्ट्रॉन प्रिय हैं : इलेक्ट्रॉन-न्यून, और नया सहसंयोजक बंध बनाने के लिए इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्रहण करने में समर्थ। इस परिभाषा के दो हिस्से हैं और Na⁺ दूसरे पर विफल हो जाता है। ध्यान रहे कि यह नकारात्मक प्रश्न है — पुस्तिका में 'नहीं' मोटे अक्षरों में छपा है, यद्यपि यहाँ वह बल सादे पाठ में नहीं बचता। अब विकल्प एक-एक करके लीजिए। (a) H⁺ आदर्श उदाहरण है — नंगा प्रोटॉन, जिसमें एक भी इलेक्ट्रॉन नहीं, जो जल से एकाकी युग्म लेकर H₃O⁺ बनाता है और अमोनिया से लेकर NH₄⁺; और चूँकि H⁺ स्पष्ट रूप से इलेक्ट्रोफाइल है, इसलिए विकल्प (d) 'उपर्युक्त सभी' तत्काल ढह जाता है। (c) BF₃ पाठ्यक्रम का मानक उदासीन इलेक्ट्रोफाइल है : उसमें बोरॉन के चारों ओर केवल छह इलेक्ट्रॉन हैं, अर्थात् अपूर्ण अष्टक और एक रिक्त 2p कक्षक, इसलिए वह एकाकी युग्म ग्रहण करके F₃B←NH₃ योगात्मक यौगिक बनाता है। शेष रहा (b)। Na⁺ धनावेशित है, इसीलिए वह इलेक्ट्रोफाइल जैसा दिखता है, पर वह नियॉन का विन्यास पहले ही पा चुका है — पूरा, स्थायी अष्टक, जिसमें युग्म को लेने के लिए कोई नीचे पड़ी रिक्ति है ही नहीं। वह ऋणायनों को स्थिरवैद्युत बल से खींचता है और आयन ही बना रहता है; इलेक्ट्रॉन-युग्म लेकर सहसंयोजक बंध नहीं बनाता। इसलिए क्षार-धातु धनायन मानक अपवाद हैं : केवल आवेश किसी को इलेक्ट्रोफाइल नहीं बनाता, सुलभ रिक्त कक्षक बनाता है। एक छपाई की कठिनाई को छिपाने के बजाय बता देना आवश्यक है। विकल्प (c) पुस्तिका में BF₃ के साथ ऊपर लगे ऋण चिह्न के रूप में छपा है, जिसकी पुष्टि 600 dpi पर हुई है। अक्षरशः पढ़ें तो वह ऋणायन एक अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन लिए होगा और इलेक्ट्रॉन-समृद्ध होगा, अर्थात् वह भी इलेक्ट्रोफाइल नहीं होगा और प्रश्न के दो उत्तर बन जाएँगे, जबकि 'उपर्युक्त में से एक से अधिक' जैसा कोई विकल्प दिया ही नहीं गया। हमारी व्युत्पत्ति संगत पाठ लेती है — कि वह आवेश छपाई की चूक है और अभीष्ट स्पीशीज़ उदासीन BF₃ है — क्योंकि केवल उसी पाठ पर इस प्रश्न का एक ही उत्तर बनता है।
- (a)H⁺ — जितने भी इलेक्ट्रोफाइल हैं उनमें सबसे स्पष्ट, इसलिए यह विषम विकल्प हो ही नहीं सकता। प्रोटॉन में एक भी इलेक्ट्रॉन नहीं होता, जो उसे अधिकतम रूप से इलेक्ट्रॉन-न्यून बनाता है : वह हर उस चीज़ पर आक्रमण करता है जिसके पास एकाकी युग्म या π बंध हो। हर अम्ल-उत्प्रेरित कार्बनिक अभिक्रिया इसी से आरंभ होती है, और सरलतम अम्ल-क्षार रसायन भी, जहाँ अम्ल से आया H⁺ जल से एकाकी युग्म लेकर हाइड्रोनियम आयन बन जाता है। सूची में इसकी उपस्थिति ही विकल्प (d) को समाप्त कर देती है।
- (c)BF₃⁻ — वास्तव में कठिन विकल्प, और यही कारण है कि यहाँ हमारा विश्वास-स्तर उच्च नहीं, मध्यम है। उदासीन BF₃ के रूप में पढ़ें — और प्रश्न का रसायन यही माँगता है — तो वह पाठ्यपुस्तक वाला उदासीन इलेक्ट्रोफाइल है : षट्क वाला बोरॉन, एक रिक्त p कक्षक और एकाकी युग्म की प्रबल भूख, अर्थात् AlCl₃ के साथ खड़ा मानक लूइस अम्ल। जैसा छपा है वैसा, ऊपर लगे ऋण चिह्न सहित पढ़ें, तो वह इलेक्ट्रॉन-समृद्ध स्पीशीज़ होगी और इसलिए वह भी इलेक्ट्रोफाइल नहीं होगी, जिससे प्रश्न के दो उत्तर बन जाएँगे। यह प्रश्न केवल पहले पाठ पर ही ठीक बैठता है।
- (d)उपर्युक्त सभी — 'उपर्युक्त सभी' तभी सही होता है जब सूची की हर वस्तु प्रश्न की शर्त पूरी करे, और यहाँ शर्त नकारात्मक है — इसलिए इसके लिए यह आवश्यक होता कि तीनों में से कोई भी इलेक्ट्रोफाइल न हो। अकेला H⁺ ही इसे हरा देता है — नंगा प्रोटॉन इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्राही का निर्णायक उदाहरण है। इस प्रकार के विकल्प को शेष पर विचार करने से पहले सूची की सबसे स्पष्ट वस्तु पर जाँचिए; वह प्रायः एक ही क़दम में गिर जाता है।
कार्बनिक अभिक्रियाओं का वर्गीकरण इस आधार पर होता है कि इलेक्ट्रॉन कौन-सा साझीदार लाता है। न्यूक्लियोफाइल इलेक्ट्रॉन-समृद्ध होता है और युग्म देता है — हाइड्रॉक्साइड, अमोनिया, कोई हैलाइड आयन, किसी ऐल्कीन का π बादल। इलेक्ट्रोफाइल इलेक्ट्रॉन-न्यून होता है और वह युग्म ग्रहण करता है, और इसी प्रक्रिया में नया सहसंयोजक बंध बनता है। ये कोटियाँ लूइस की क्षार तथा अम्ल की परिभाषाओं पर लगभग ठीक-ठीक बैठ जाती हैं : लूइस क्षार एकाकी युग्म देता है, लूइस अम्ल उसे लेता है। इलेक्ट्रोफाइल तीन संरचनात्मक प्रकार के होते हैं। पहला, रिक्ति वाली धनावेशित स्पीशीज़ — H⁺, NO₂⁺, कार्बधनायन R₃C⁺, ब्रोमीनीकरण में बनने वाला Br⁺। दूसरा, अपूर्ण अष्टक वाले उदासीन अणु — BF₃ तथा AlCl₃, जिनमें केंद्रीय परमाणु के पास केवल छह संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं। तीसरा, प्रबल रूप से ध्रुवित बंध वाले उदासीन अणु, जिनमें एक परमाणु आंशिक धनावेश लिए होता है — कार्बोनिल समूह का कार्बन, ऐल्किल हैलाइड का कार्बन। इन तीनों को जो बात जोड़ती है वह आवेश नहीं, रिक्ति है : ऐसा रिक्त या सुलभ कक्षक जिसमें एकाकी युग्म दिया जा सके। इसीलिए पूर्ण अक्रिय-गैस कोश वाला धनायन, जैसे Na⁺ या K⁺, कार्बनिक रसायन के प्रचलित निरूपण में इस वर्ग से बाहर रखा जाता है, भले ही वह धनावेशित हो।
इस प्रश्न से पार पाने का रास्ता परिभाषा है, जिसे आवेश के चिह्न पर नहीं, रिक्ति पर लगाया जाए। हर स्पीशीज़ से पूछिए : इलेक्ट्रॉन-युग्म के जाने के लिए कोई जगह है क्या? H⁺ में रिक्ति के अलावा कुछ है ही नहीं। BF₃ में बोरॉन पर एक रिक्त 2p कक्षक है। Na⁺ में कोई नहीं — जो 3s इलेक्ट्रॉन उसने खोया उसके बाद उसके पास बंद [Ne] कोश बचता है, और अगला उपलब्ध कक्षक इतनी ऊँची ऊर्जा पर है कि साधारण रसायन में उसका उपयोग नहीं हो सकता। यह एक ऐसी परिपाटी है जिसका किनारा भी है, और वह किनारा जान लेना उपयोगी है : व्यापकतम लूइस अर्थ में छोटे, उच्च आवेश वाले धातु धनायन जल में अम्ल की तरह व्यवहार करते ही हैं, इसीलिए कॉपर सल्फेट का विलयन अम्लीय हो जाता है जबकि सोडियम क्लोराइड का नहीं। अंतर मात्रा का है — Cu²⁺ अपने साथ बँधे जल के अणुओं को इतना ध्रुवित कर देता है कि H⁺ मुक्त हो जाए, Na⁺ नहीं करता — और विद्यालय तथा स्नातक स्तर का कार्बनिक रसायन रेखा इस प्रकार खींचता है कि क्षार-धातु धनायन इस वर्ग से बाहर रहें। प्रश्न इसी ढाँचे में पूछा गया है, और उसके भीतर उत्तर साफ़ है। जो साफ़ नहीं है वह विकल्प (c) पर छपा ऋण चिह्न है, जो पुस्तिका का अपना है और जिसे सुधारकर हटाया नहीं जाना चाहिए : उसे यहाँ इसलिए दर्ज किया गया है कि जो पाठक उसे लक्ष्य करे वह जान ले कि यह कठिनाई वास्तविक है, हमारी प्रतिलिपि की कोई छपाई-भूल नहीं।
- इलेक्ट्रोफाइल वह इलेक्ट्रॉन-न्यून स्पीशीज़ है जो सहसंयोजक बंध बनाने के लिए इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्रहण करती है; अभिक्रिया-क्रियाविधि की भाषा में यही लूइस अम्ल का नाम है, जबकि न्यूक्लियोफाइल वह लूइस क्षार है जो युग्म देता है।
- H⁺ आदर्श इलेक्ट्रोफाइल है — उसमें एक भी इलेक्ट्रॉन नहीं — और वह एकाकी युग्म ग्रहण करके जल के साथ H₃O⁺ तथा अमोनिया के साथ NH₄⁺ बनाता है।
- BF₃ में बोरॉन परमाणु के पास केवल छह संयोजी इलेक्ट्रॉन और एक रिक्त 2p कक्षक होता है, जो उसे उदासीन इलेक्ट्रोफाइल तथा उत्कृष्ट लूइस अम्ल बनाता है; अमोनिया के साथ वह F₃B←NH₃ योगात्मक यौगिक बनाता है।
- Na⁺ का विन्यास नियॉन जैसा है — पूर्ण अष्टक, जिसमें कोई सुलभ रिक्त कक्षक नहीं — इसलिए वह आयनिक ढंग से क्रिया करता है और धनावेश होने पर भी परिपाटी से इलेक्ट्रोफाइल के वर्ग से बाहर रखा जाता है।
- पुस्तिका विकल्प (c) को BF₃ के साथ ऊपर लगे ऋण चिह्न सहित छापती है, जिसकी पुष्टि पृष्ठ को 600 dpi पर पढ़कर हुई; अक्षरशः पढ़ने पर वह ऋणायन इलेक्ट्रॉन-समृद्ध होगा और प्रश्न के दो सही उत्तर बन जाएँगे, जबकि 'उपर्युक्त में से एक से अधिक' जैसा कोई विकल्प दिया ही नहीं गया।
कसौटी रिक्त कक्षक है, धनावेश नहीं। Na⁺ के पास आवेश है और रिक्ति नहीं, और ठीक इसीलिए वही वह अपवाद है जिस पर यह प्रश्न खड़ा किया गया है।
- धनावेश को ही इलेक्ट्रोफाइल होने के बराबर मान लेना। Na⁺ तथा K⁺ पूर्ण अक्रिय-गैस कोश वाले धनायन हैं और परिपाटी से इस वर्ग से बाहर हैं; कसौटी सुलभ रिक्त कक्षक है।
- यह मान लेना कि उदासीन अणु इलेक्ट्रोफाइल हो ही नहीं सकता। BF₃ तथा AlCl₃ उदासीन हैं और मानक उदाहरण हैं, क्योंकि बोरॉन तथा ऐलुमिनियम आठ नहीं, छह इलेक्ट्रॉन पर टिके होते हैं।
- 'उपर्युक्त सभी' को यों ही छोड़ देना। नकारात्मक प्रश्न में वह यह दावा करता है कि तीनों में से कोई भी इलेक्ट्रोफाइल नहीं है, और इसे झुठलाने के लिए एक स्पष्ट प्रतिउदाहरण — यहाँ H⁺ — पर्याप्त है।
BPSC रसायन को एक ही परिभाषा के रूप में पूछता है, जिसे चार स्पीशीज़ पर जाँचना होता है, और जनवरी 2025 की इस पुनर्परीक्षा ने ऐसे कई एक-पंक्ति वाले प्रश्नों को अपने विज्ञान खंड में एक साथ रखा है। UPSC ने अपने सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र में इलेक्ट्रोफाइल का सीधा प्रश्न कभी नहीं रखा; वह इसी रसायन तक तिरछे रास्ते से पहुँचता है — लवण के जल-अपघटन, आयनिक बंधन तथा आवर्त प्रवृत्तियों के माध्यम से — इसलिए यह परिभाषा किसी नाम-पट्टी की तरह नहीं, व्यवहार की व्याख्या के रूप में साथ रखनी पड़ती है।
कॉपर सल्फेट का जलीय विलयन प्रकृति में अम्लीय होता है, क्योंकि यह लवण किससे गुज़रता है ?
- (a) अपोहन
- (b) विद्युत्-अपघटन
- (c) जल-अपघटन
- (d) प्रकाश-अपघटन
उत्तर(c) जल-अपघटन
इस कार्ड के केंद्रीय विचार की सबसे तीखी परीक्षा। Cu²⁺ अपने साथ बँधे जल को इतना ध्रुवित कर देता है कि H⁺ मुक्त हो जाए, इसलिए कॉपर सल्फेट का विलयन अम्लीय होता है — जबकि सोडियम क्लोराइड का विलयन उदासीन रहता है, क्योंकि बंद कोश वाला Na⁺ ऐसा कुछ करता ही नहीं। यही विरोध वह कारण है जिससे यहाँ Na⁺ विषम विकल्प है।
आयनिक यौगिकों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. आयनिक यौगिक ऐल्कोहॉल में अविलेय होते हैं। 2. ठोस अवस्था में आयनिक यौगिक विद्युत् के अच्छे चालक होते हैं। इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं ?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर(a) केवल 1
Na⁺ वास्तव में जो व्यवहार दिखाता है, वही। सोडियम का रसायन किसी जालक या विलयन में दर्शक आयन का रसायन है — स्थिरवैद्युत, सहसंयोजक नहीं — और यही वह तथ्य है जो उसे इलेक्ट्रोफाइल के वर्ग से बाहर रखता है।
0.1 एन HCl समाधान का पीएच मान है लगभग :
- (a) 1.0
- (b) 11.0
- (c) 10
- (d) 2.0
उत्तर(a) 1.0
आयोग 2025 में आगे चलकर 71वीं CCE में उसी स्पीशीज़ पर लौटा, इस बार मात्रात्मक पक्ष से : pH इसके अलावा कुछ नहीं कि H⁺ कितना उपस्थित है, और H⁺ ही वह इलेक्ट्रोफाइल है जिसकी स्पष्टता इस कार्ड के विकल्प (d) को ढहा देती है।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित में से कौन लूइस अम्ल की तरह कार्य करता है ?
- (a)NH₃
- (b)BF₃
- (c)H₂O
- (d)Cl⁻
उत्तर(b) BF₃ — बोरॉन के पास केवल छह संयोजी इलेक्ट्रॉन और एक रिक्त 2p कक्षक होता है, इसलिए वह एकाकी युग्म ग्रहण करता है। अमोनिया, जल तथा क्लोराइड आयन — तीनों के पास देने के लिए एकाकी युग्म हैं, इसलिए वे लूइस क्षार हैं।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
इलेक्ट्रोफाइल का सबसे उपयुक्त वर्णन वह स्पीशीज़ है जो
- (a)सहसंयोजक बंध बनाने के लिए इलेक्ट्रॉन-युग्म देती है
- (b)सहसंयोजक बंध बनाने के लिए इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्रहण करती है
- (c)सदैव ऋणावेश लिए होती है
- (d)सदैव एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन रखती है
उत्तर(b) सहसंयोजक बंध बनाने के लिए इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्रहण करती है — अभिक्रिया-क्रियाविधि की भाषा में यही लूइस अम्ल है। जो स्पीशीज़ युग्म देती है वह न्यूक्लियोफाइल है, और जिसमें अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हो वह मुक्त मूलक।