अन्तर्राष्ट्रीय संधियों को लागू करने हेतु संसद द्वारा भारत के किसी एक हिस्से या सम्पूर्ण भारत के लिए कानून का निर्माण किया जा सकता है
- (a)सम्बन्धित राज्य की सहमति से
- (b)राज्य की सहमति के बिना
- (c)राज्यों के बहुमत की सहमति द्वारा
- (d)सभी राज्यों की सहमति से
सही — (b), राज्य की सहमति के बिना। प्रश्न अनुच्छेद 253 का ही दूसरे शब्दों में रखा हुआ रूप है, और अनुच्छेद अपने आरंभिक शब्दों में ही उसका उत्तर दे देता है : 'इस अध्याय के पूर्वगामी उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी, संसद को किसी अन्य देश या देशों के साथ की गई किसी संधि, करार या अभिसमय अथवा किसी अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन, संगम या अन्य निकाय में किए गए किसी विनिश्चय के कार्यान्वयन के लिए भारत के राज्यक्षेत्र के सम्पूर्ण भाग या किसी भाग के लिए कोई विधि बनाने की शक्ति है।' सारा भार उसी 'किसी बात के होते हुए भी' वाले खंड पर है। 'इस अध्याय के पूर्वगामी उपबंध' विधायी शक्ति का साधारण विभाजन हैं — अनुच्छेद 246 तथा सातवीं अनुसूची, जो राज्य सूची को राज्यों के लिए सुरक्षित रखते हैं, और अनुच्छेद 249, 250 तथा 252, जो वे सँकरे रास्ते बताते हैं जिनसे संसद राज्य सूची में प्रवेश कर सकती है। अनुच्छेद 253 एक ही प्रयोजन के लिए इन सबको एक ओर हटा देता है। यदि किसी संधि-दायित्व के लिए ऐसे विषय पर विधि बनानी पड़े जो अन्यथा केवल राज्यों का होता, तो संसद सीधे विधि बना सकती है; किसी राज्य की सम्मति नहीं माँगी जाती, कोई संकल्प अपेक्षित नहीं, और कोई राज्य उससे बाहर नहीं रह सकता। जो तीन विकल्प अस्वीकृत होते हैं, उनमें से हर एक सहमति की ऐसी शर्त ले आता है जो किसी दूसरे अनुच्छेद की है। सहमति की वास्तविक आवश्यकता अनुच्छेद 252 में है, और 253 के बग़ल में उसे पढ़ लेना ही यह देखने का सबसे तेज़ तरीक़ा है कि (b) ही क्यों सही है : 252 तभी काम करता है 'यदि उन राज्यों के विधान-मंडलों के सभी सदनों द्वारा उस आशय के संकल्प पारित कर दिए जाएँ', और 253 का आरंभ ही ठीक उस व्यवस्था को हटा देने से होता है। यह भी जानने योग्य है कि UPSC ने यही प्रश्न 2000 में लगभग इन्हीं शब्दों में पूछा था और उसकी प्रकाशित उत्तर-कुंजी 'किसी भी राज्य की सहमति के बिना' को उत्तर बताती है — वही पाठ जो यहाँ विकल्प (b) पर है। यह संवैधानिक स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि है; यह इस प्रश्नपत्र के आयोग की कुंजी नहीं है, जो कभी प्रकाशित हुई ही नहीं।
- (a)सम्बन्धित राज्य की सहमति से — यह अनुच्छेद 252 है, जिसे ग़लत अनुच्छेद में उठा लाया गया है। अनुच्छेद 252 के अंतर्गत संसद दो या अधिक राज्यों के लिए ऐसे विषय पर, जो अन्यथा उसकी सक्षमता से बाहर है, तभी विधि बना सकती है जब उन राज्यों के विधान-मंडलों के सभी सदन उससे ऐसा करने के लिए संकल्प पारित करें, और उससे बना अधिनियम केवल उन्हीं राज्यों पर तथा बाद में संकल्प द्वारा उसे अपनाने वाले किसी अन्य राज्य पर लागू होता है। अनुच्छेद 253 का अस्तित्व ही इस तंत्र को हटाने के लिए है, क्योंकि संधि का दायित्व संघ को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर बाँधता है और उसे राज्य-दर-राज्य सम्मति पर नहीं छोड़ा जा सकता।
- (c)राज्यों के बहुमत की सहमति द्वारा — संविधान का कोई भी उपबंध संसद की विधायी शक्ति को राज्यों के बहुमत की सहमति पर निर्भर नहीं करता। अनुच्छेद 368(2) के परंतुक के अंतर्गत कुछ संविधान संशोधनों के लिए कम से कम आधे राज्यों के विधान-मंडलों का अनुसमर्थन आवश्यक है, और यह विकल्प उसी की प्रतिध्वनि है — पर संधि लागू करने वाली विधि साधारण विधान है, संविधान संशोधन नहीं, और अनुच्छेद 253 ऐसी कोई माँग करता ही नहीं।
- (d)सभी राज्यों की सहमति से — पाठ से सबसे दूर। संसद के विधि बनाने की शर्त के रूप में राज्यों की सर्वसम्मति संविधान में कहीं नहीं आती; अनुच्छेद 368 की संशोधन-प्रक्रिया भी केवल आधे राज्यों की माँग करती है। यहाँ इसकी माँग करने का अर्थ यह होता कि किसी एक राज्य के इनकार से भारत के लिए अपनी हस्ताक्षरित संधि का पालन असंभव हो जाए — और ठीक यही परिणाम रोकने के लिए अनुच्छेद 253 का वह आरंभिक खंड लिखा गया था।
संविधान अनुच्छेद 246 तथा सातवीं अनुसूची से विधायी शक्ति बाँटता है — संघ सूची, राज्य सूची, समवर्ती सूची — और फिर संसद को राज्य सूची तक पहुँचने के पाँच रास्ते देता है, जिनमें से हर एक का अपना उत्प्रेरक है। अनुच्छेद 249 : राज्य सभा उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से संकल्प करे कि राष्ट्रीय हित में किसी नामित राज्य-सूची विषय पर विधि बननी चाहिए, और तब संसद उतने समय तक ऐसा कर सकती है जितने समय वह संकल्प प्रवृत्त रहे, जो एक बार में अधिकतम एक वर्ष है। अनुच्छेद 250 : आपात की उद्घोषणा प्रवर्तन में हो, और संसद उसकी अवधि तक राज्य सूची के किसी भी विषय पर विधि बना सके। अनुच्छेद 252 : दो या अधिक राज्य विधान-मंडल संकल्प पारित करके संसद को विधि बनाने के लिए आमंत्रित करें, और उससे बनी विधि उन पर तथा बाद में उसे अपनाने वाले किसी भी राज्य पर लागू हो। अनुच्छेद 253 : किसी संधि, करार, अभिसमय या अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन के विनिश्चय को कार्यान्वित करना हो, और संसद बिना किसी राज्य की किसी भूमिका के सम्पूर्ण भारत या उसके किसी भाग के लिए विधि बना सके। अनुच्छेद 356 : राष्ट्रपति शासन के दौरान राज्य की अपनी विधायी शक्ति का प्रयोग संसद द्वारा या उसके प्राधिकार से किया जाए। इन पाँचों में अनुच्छेद 253 एक दृष्टि से सबसे व्यापक है और दूसरी दृष्टि से सबसे सँकरा — उसे किसी की अनुमति नहीं चाहिए, पर वह केवल किसी अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को लागू करने के प्रयोजन से ही है।
इस परिवार के प्रश्नों तक इस सवाल के साथ पहुँचिए कि उत्प्रेरक क्या है, क्योंकि हर अनुच्छेद का ठीक एक उत्प्रेरक है। राज्य सभा का संकल्प : 249। आपात : 250। राज्यों के संकल्प : 252। अन्तर्राष्ट्रीय दायित्व : 253। राष्ट्रपति शासन : 356। एक बार उत्प्रेरक अलग-अलग हो जाएँ, तो संधि वाले प्रश्न में 'सम्बन्धित राज्य की सहमति' देने वाला विकल्प साफ़ दिखता है कि वह किसी दूसरे अनुच्छेद का उत्तर है। अनुच्छेद 253 की भारतीय विधि में वास्तविक उपस्थिति भी है, जिसे सिद्धांत के बजाय साक्ष्य के रूप में साथ रखना चाहिए। पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 अपने आरंभ में ही यह उल्लेख करता है कि जून 1972 में स्टॉकहोम में हुए मानव पर्यावरण पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में, जिसमें भारत ने भाग लिया था, कुछ विनिश्चय लिए गए — यही 'किसी अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में किए गए विनिश्चय' वाला अनुच्छेद 253 का आधार है। पर्यावरण, वन तथा वन्यजीव से जुड़े विषय सूचियों के आर-पार असहज ढंग से बैठते हैं, और उन पर राष्ट्रीय ढाँचा संधि वाले रास्ते से ही खड़ा किया गया। व्यापक संवैधानिक बिंदु यह है कि भारत का संघवाद जान-बूझकर असममित है : संधि करना संघ की कार्यपालिका शक्ति है, और अनुच्छेद 253 यह सुनिश्चित करता है कि उससे जुड़ी विधायी शक्ति राज्यों द्वारा रोकी न जा सके, ताकि देश बाहर एक स्वर में बोल सके और भीतर उसे निभा भी सके। (छपाई की एक बात : विकल्प (b) हिन्दी में 'राज्य की सहमति के बिना' छपा है, जबकि अंग्रेज़ी स्तंभ 'किसी भी राज्य' कहता है; आशय दोनों में एक ही है — किसी राज्य की सहमति अपेक्षित नहीं।)
- अनुच्छेद 253, पूरा : 'इस अध्याय के पूर्वगामी उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी, संसद को किसी अन्य देश या देशों के साथ की गई किसी संधि, करार या अभिसमय अथवा किसी अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन, संगम या अन्य निकाय में किए गए किसी विनिश्चय के कार्यान्वयन के लिए भारत के राज्यक्षेत्र के सम्पूर्ण भाग या किसी भाग के लिए कोई विधि बनाने की शक्ति है।'
- अनुच्छेद 252 इसका विपरीत है : संसद दो या अधिक राज्यों के लिए तभी विधि बना सकती है 'यदि उन राज्यों के विधान-मंडलों के सभी सदनों द्वारा उस आशय के संकल्प पारित कर दिए जाएँ', और तब वह अधिनियम उन राज्यों पर तथा बाद में संकल्प द्वारा उसे अपनाने वाले किसी अन्य राज्य पर लागू होता है।
- अनुच्छेद 249 के लिए राज्य सभा का ऐसा संकल्प चाहिए जिसे उपस्थित तथा मत देने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई का समर्थन प्राप्त हो, और वह एक बार में अधिकतम एक वर्ष तक चलता है; अनुच्छेद 250 केवल तभी काम करता है जब आपात की उद्घोषणा प्रवृत्त हो।
- पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 अपने आरंभिक शब्दों में जून 1972 में स्टॉकहोम में हुए मानव पर्यावरण पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के विनिश्चयों का उल्लेख करता है — यही अनुच्छेद 253 के अंतर्गत बनी विधि का उत्कृष्ट उदाहरण है।
- कम से कम आधे राज्यों के विधान-मंडलों का अनुसमर्थन केवल अनुच्छेद 368(2) के परंतुक के अंतर्गत संविधान के प्रगुंफित उपबंधों के लिए आवश्यक है, और उसका किसी संधि को लागू करने वाले साधारण विधान से कोई सम्बन्ध नहीं।

- अनुच्छेद 252 की सहमति वाली शर्त को अनुच्छेद 253 में ले आना। राज्यों के संकल्प केवल 252 को चाहिए; 253 का आरंभ ही उस पूरे अध्याय की व्यवस्था को अलग रख देने से होता है।
- विधायी सहमति और संशोधन के अनुसमर्थन को आपस में मिला देना। आधे राज्यों वाली शर्त अनुच्छेद 368(2) के परंतुक की तथा संविधान संशोधनों की है, साधारण विधि की नहीं।
- यह मान लेना कि अनुच्छेद 253 एक सामान्य अधिभावी उपबंध है। वह विषय की दृष्टि से असीमित है पर प्रयोजन की दृष्टि से कसकर सीमित — विधि किसी संधि, करार, अभिसमय या किसी अन्तर्राष्ट्रीय निकाय के विनिश्चय के कार्यान्वयन के लिए ही होनी चाहिए।
BPSC इसे ऐसे वाक्य के रूप में पूछता है जिसे अनुच्छेद के पाठ से पूरा करना है, और जनवरी 2025 की इस पुनर्परीक्षा ने संघ लोक सेवा आयोग के 2000 के प्रश्न को लगभग शब्दशः दोहरा दिया, केवल विकल्पों का क्रम बदलकर। UPSC की अपनी वर्तमान आदत भिन्न है : वह अनुच्छेद 253 को केंद्र-राज्य विधायी सम्बन्धों वाले कथन-समुच्चय में रखता है, या किसी पर्यावरण-विधि के प्रश्न के रास्ते उस तक पहुँचता है — इसलिए वहाँ वाक्य पहचान लेना अब पर्याप्त नहीं।
अन्तर्राष्ट्रीय संधियों को लागू करने के लिए संसद सम्पूर्ण भारत या उसके किसी भाग के लिए कोई भी विधि बना सकती है
- (a) सभी राज्यों की सहमति से
- (b) राज्यों के बहुमत की सहमति से
- (c) सम्बन्धित राज्यों की सहमति से
- (d) किसी भी राज्य की सहमति के बिना
उत्तर(d) किसी भी राज्य की सहमति के बिना
पच्चीस वर्ष पहले के संघ लोक सेवा आयोग के प्रश्नपत्र का शब्दशः वही प्रश्न — और उसकी प्रकाशित उत्तर-कुंजी 'किसी भी राज्य की सहमति के बिना' को उत्तर बताती है। केवल विकल्पों का क्रम अलग है, और ठीक इसीलिए अभ्यर्थी को उत्तर अनुच्छेद 253 के बारे में एक वाक्य के रूप में याद रखना चाहिए, कभी किसी अक्षर के रूप में नहीं।
भारत की संसद को राज्य सूची की किसी मद पर राष्ट्रीय हित में विधि बनाने की शक्ति तब प्राप्त होती है जब उस आशय का संकल्प पारित किया जाए
- (a) लोकसभा द्वारा अपनी कुल सदस्य-संख्या के साधारण बहुमत से
- (b) लोकसभा द्वारा अपनी कुल सदस्य-संख्या के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से
- (c) राज्यसभा द्वारा अपनी कुल सदस्य-संख्या के साधारण बहुमत से
- (d) राज्यसभा द्वारा उपस्थित तथा मत देने वाले अपने सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से
उत्तर(d) राज्यसभा द्वारा उपस्थित तथा मत देने वाले अपने सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से
राज्य सूची तक पहुँचने का सहोदर रास्ता, पर उत्प्रेरक अलग। अनुच्छेद 249 को उपस्थित तथा मत देने वाले सदस्यों के दो-तिहाई से पारित राज्यसभा का संकल्प चाहिए और वह एक बार में एक वर्ष चलता है; अनुच्छेद 253 को न कोई संकल्प चाहिए न सहमति, और वह तब तक चलता है जब तक संधि का दायित्व। दोनों को साथ पढ़ना ही सहमति की शर्त को एक से दूसरे में जाने से रोकता है।
भारतीय संविधान के विभिन्न सूचियों के निम्नलिखित विषयों पर विचार कीजिए। निम्नलिखित में से कौन विषय समवर्त्ती सूची में आते है ? 1) वन्यजीवों की सुरक्षा 2) कृषि पर आय 3) विद्युत उपभोग अथवा विक्री पर कर 4) मूल्य नियंत्रण इनमें से :
- (a) 1 तथा 4 सही है
- (b) 2 तथा 3 सही है
- (c) केवल 4 सही है
- (d) केवल 2 सही है
उत्तर(a) 1 तथा 4 सही है
शक्तियों का वही विभाजन, जिसे अनुच्छेद 253 अधिभावी करता है, और जिसे 2025 में आगे चलकर 71वीं CCE में सीधे पूछा गया। कोई विषय किस सूची में बैठता है, यह जानना ही 'इस अध्याय के पूर्वगामी उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी' शब्दों का बल दिखाई देने योग्य बनाता है — वन्यजीवों की सुरक्षा संशोधन द्वारा समवर्ती सूची में आ गई, पर अनुच्छेद 253 के अंतर्गत तो विशुद्ध रूप से राज्य का विषय भी पहुँच के भीतर होता।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
किस अनुच्छेद के अंतर्गत संसद राज्य सूची के विषय पर तभी विधि बना सकती है जब दो या अधिक राज्यों के विधान-मंडल उससे ऐसा करने का अनुरोध करते हुए संकल्प पारित कर दें ?
- (a)अनुच्छेद 249
- (b)अनुच्छेद 250
- (c)अनुच्छेद 252
- (d)अनुच्छेद 253
उत्तर(c) अनुच्छेद 252 — उससे बना अधिनियम उन राज्यों पर तथा बाद में अपने विधान-मंडल के संकल्प द्वारा उसे अपनाने वाले किसी अन्य राज्य पर लागू होता है। अनुच्छेद 249 को राज्य सभा का संकल्प चाहिए, अनुच्छेद 250 को आपात की उद्घोषणा, और अनुच्छेद 253 को कोई सहमति नहीं।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 किस अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में लिए गए विनिश्चयों को प्रभावी करने के लिए बनाया गया था ?
- (a)मानव पर्यावरण पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन, स्टॉकहोम, 1972
- (b)पर्यावरण तथा विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन, रियो दे जनेरो, 1992
- (c)पक्षकारों का तीसरा सम्मेलन, क्योतो, 1997
- (d)पक्षकारों का इक्कीसवाँ सम्मेलन, पेरिस, 2015
उत्तर(a) मानव पर्यावरण पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन, स्टॉकहोम, 1972 — अधिनियम के आरंभिक शब्द उन्हीं विनिश्चयों का उल्लेख करते हैं, और यही अनुच्छेद 253 के अंतर्गत बने विधान का मानक उदाहरण है।