जब टीके के द्वारा शरीर में एन्टीजन प्रवेश करता है तब संक्रमण से लड़ने के लिए एन्टीबाडी की उत्पत्ति होती है
- (a)केवल टी कोशिकाओं द्वारा
- (b)बी एवं टी दोनों कोशिकाओं द्वारा
- (c)केवल बी कोशिकाओं द्वारा
- (d)उपर्युक्त में से कोई नहीं
सही उत्तर — (c) केवल बी कोशिकाओं द्वारा। एन्टीबाडी इम्युनोग्लोबुलिन होती हैं, और मानव शरीर में उन्हें ठीक एक ही प्रकार की कोशिका स्रावित करती है: प्लाज़्मा कोशिका, जो सक्रिय हो जाने पर बी लिम्फोसाइट का ही बना हुआ रूप है। एक अकेली प्लाज़्मा कोशिका प्रति सेकंड हज़ारों एक जैसे एन्टीबाडी अणु उँडेल सकती है, और वे सब उसी एक एन्टीजन के लिए विशिष्ट होते हैं जिसने उसे उत्तेजित किया था। किसी भी उपप्रकार की कोई टी लिम्फोसाइट कभी एन्टीबाडी स्रावित नहीं करती। एनसीईआरटी कक्षा 12 जीव विज्ञान 'मानव स्वास्थ्य तथा रोग' अध्याय में यह श्रम-विभाजन एक ही वाक्य में रख देती है: बी-लिम्फोसाइट रोगजनकों के प्रत्युत्तर में प्रोटीनों की एक सेना बनाती हैं, जिन्हें एन्टीबाडी कहते हैं, जबकि टी-लिम्फोसाइट स्वयं एन्टीबाडी स्रावित नहीं करतीं बल्कि बी कोशिकाओं को उन्हें बनाने में सहायता करती हैं। वही वाक्य पूरा प्रश्न है। जब कोई टीका शरीर में एन्टीजन पहुँचाता है — दुर्बल या मृत रोगजनक, शुद्ध किया हुआ सतही प्रोटीन, वायरल संवाहक, या ऐसा प्रोटीन बनाने का एमआरएनए निर्देश — तो वह एन्टीजन ग्रहण करके प्रदर्शित किया जाता है, सहायक टी कोशिकाएँ उस प्रदर्शन को पहचानकर संकेत छोड़ती हैं, और जिन बी कोशिकाओं के ग्राही उस एन्टीजन से मेल खाते हैं वे विभाजित होकर प्लाज़्मा कोशिकाओं में परिपक्व होती हैं और एन्टीबाडी बनाना शुरू कर देती हैं। उनमें से कुछ इसके बजाय स्मृति बी कोशिकाएँ बन जाती हैं, और इसीलिए सुरक्षा टिकती है। इस पूरी शृंखला के हर चरण को, अन्तिम को छोड़कर, टी कोशिकाओं की आवश्यकता है; और केवल अन्तिम चरण, अर्थात् निर्माण, ही वह है जिसके बारे में प्रश्न पूछ रहा है। इसलिए (a) और (b) दोनों उत्पत्ति का श्रेय ग़लत जगह देते हैं, और चूँकि (c) सही है, बचाव वाला विकल्प (d) टिक नहीं सकता। समग्र प्रतिक्रिया सामूहिक प्रयास है; एन्टीबाडी का कारख़ाना नहीं।
- (a)केवल टी कोशिकाओं द्वारा — सत्य का उल्टा। टी लिम्फोसाइट कोशिका-माध्यित प्रतिरक्षा चलाती हैं — कोशिकाविषी (साइटोटॉक्सिक) टी कोशिकाएँ शरीर की अपनी उन कोशिकाओं को मार डालती हैं जिनके भीतर विषाणु घुस चुका हो, और सहायक टी कोशिकाएँ पूरी प्रतिक्रिया का समन्वय करती हैं — पर वे साइटोकाइन स्रावित करती हैं, इम्युनोग्लोबुलिन नहीं। प्रतिरक्षा की यही शाखा प्रत्यारोपित अंग को अस्वीकार करने के लिए उत्तरदायी है, और इसीलिए प्रत्यारोपण के बाद ऊतक-मिलान तथा प्रतिरक्षा-दमनकारी औषधियों की आवश्यकता पड़ती है।
- (b)बी एवं टी दोनों कोशिकाओं द्वारा — यही जाल है, और सचमुच अच्छी जानकारी रखने वाले अभ्यर्थी का उत्तर। अधिकांश प्रोटीन एन्टीजनों के प्रति बी-कोशिका की प्रतिक्रिया के लिए सहायक टी कोशिकाएँ आवश्यक हैं ही — उनके संकेतों के बिना बी कोशिका न एन्टीबाडी का वर्ग बदलती है और न अच्छी स्मृति बनाती है। पर सहायता करना उत्पत्ति करना नहीं है। प्रश्न पूछता है कि एन्टीबाडी की उत्पत्ति किन कोशिकाओं द्वारा होती है, और उसका उत्तर केवल बी कोशिका-वंश है। क्रिया को ध्यान से पढ़िए; यह विकल्प तब सही होता यदि प्रश्न पूछता कि प्रतिक्रिया में कौन-सी कोशिकाएँ भाग लेती हैं।
- (d)उपर्युक्त में से कोई नहीं — यह इसलिए विफल है कि विकल्प (c) ठीक-ठीक सही है। बचाव वाला विकल्प तभी जीत सकता है जब हर नामित विकल्प को विफल दिखाया जा सके, और यहाँ एन्टीबाडी की उत्पत्ति का बी लिम्फोसाइट तथा उनकी प्लाज़्मा कोशिकाओं को दिया जाने वाला मानक पाठ्यपुस्तकीय श्रेय सूची में सीधे मौजूद है।
उपार्जित (अनुकूली) प्रतिरक्षा की दो शाखाएँ हैं, और इन दोनों को अलग-अलग पहचानना इस अध्याय का सबसे अधिक पूछे जाने योग्य विचार है। तरल-माध्यित, अर्थात् एन्टीबाडी-माध्यित प्रतिरक्षा बी लिम्फोसाइट चलाती हैं: एन्टीजन से मिलने पर मेल खाती बी कोशिका बढ़ती है और उसकी संततियाँ प्लाज़्मा कोशिकाएँ बन जाती हैं जो रक्त तथा लसीका में एन्टीबाडी स्रावित करती हैं, जहाँ वह विषों को निष्प्रभावी करती है, विषाणुओं को कोशिकाओं में घुसने से रोकती है और जीवाणुओं पर विनाश के लिए निशान लगा देती है। यह रोगजनकों पर तब काम करती है जब वे कोशिकाओं के बाहर हों। कोशिका-माध्यित प्रतिरक्षा टी लिम्फोसाइट चलाती हैं, जो एन्टीबाडी बिल्कुल भी स्रावित नहीं करतीं: कोशिकाविषी टी कोशिकाएँ शरीर की अपनी संक्रमित कोशिकाओं को नष्ट करती हैं, और सहायक टी कोशिकाएँ संकेतक अणु छोड़कर शेष प्रतिक्रिया को चालू करती हैं। यह उन रोगजनकों पर काम करती है जो भीतर घुस चुके हैं। अक्षर यह दर्ज करते हैं कि कोशिकाएँ कहाँ परिपक्व होती हैं — टी थाइमस के लिए, और बी मूलतः पक्षियों की बर्सा ऑफ़ फ़ैब्रिसियस के लिए, स्तनधारियों में अस्थिमज्जा के लिए। दोनों प्रकार अस्थिमज्जा की स्टेम कोशिकाओं से ही उत्पन्न होते हैं।
दो आदतें इसे सेकंडों में सही करा देती हैं। पहली, कार्यकारी क्रिया पढ़िए। 'किसके द्वारा उत्पत्ति' निर्माण का प्रश्न है, और एन्टीबाडी का निर्माण केवल बी वंश करता है; जो प्रश्न इसके बजाय पूछता कि टीके के प्रति प्रतिरक्षा-प्रतिक्रिया में कौन-सी कोशिकाएँ भाग लेती हैं, उसका उत्तर विकल्प (b) होता। बीपीएससी यह जान-बूझकर करता है — प्रश्नपत्र ऐसे प्रश्नों से भरा है जिनमें ग़लत उत्तर किसी थोड़े भिन्न प्रश्न के बारे में सही कथन होता है। दूसरी, कोशिकाओं की सूची के बजाय दो शाखाओं वाला चित्र मन में रखिए: तरल में एन्टीबाडी बी-कोशिका का काम है, संक्रमित कोशिकाओं को मारना टी-कोशिका का। इससे इससे जुड़ा एक और परीक्षा-तथ्य भी बैठ जाता है, कि टीकाकरण सक्रिय प्रतिरक्षा देता है — शरीर अपनी एन्टीबाडी स्वयं बनाता है और स्मृति कोशिकाएँ रखता है — जबकि बनी-बनाई एन्टीबाडी का इंजेक्शन, जैसे टिटनेस का प्रतिविष या साँप-काटने का प्रतिविष, निष्क्रिय प्रतिरक्षा देता है, जो तुरन्त काम करती है और जल्दी घट जाती है, क्योंकि कोई स्मृति बनती ही नहीं।
- एन्टीबाडी H₂L₂ संरचना वाली इम्युनोग्लोबुलिन है — दो एक जैसी भारी शृंखलाएँ और दो एक जैसी हल्की शृंखलाएँ — जिसे सक्रिय बी लिम्फोसाइट से बनी प्लाज़्मा कोशिकाएँ स्रावित करती हैं।
- इम्युनोग्लोबुलिन के पाँच वर्ग हैं: IgG, IgM, IgA, IgE और IgD। प्राथमिक प्रतिक्रिया में सबसे पहले IgM बनती है; सीरम में सबसे अधिक मात्रा IgG की होती है और अपरा (प्लेसेंटा) पार करने वाला एकमात्र वर्ग भी वही है।
- टी लिम्फोसाइट थाइमस में और बी लिम्फोसाइट अस्थिमज्जा में परिपक्व होती हैं, यद्यपि दोनों की उत्पत्ति अस्थिमज्जा की स्टेम कोशिकाओं से ही होती है; टी कोशिकाएँ साइटोकाइन स्रावित करती हैं, एन्टीबाडी कभी नहीं।
- टीकाकरण स्मृति बी तथा टी कोशिकाओं के माध्यम से सक्रिय प्रतिरक्षा देता है, इसलिए दूसरी बार सामना होने पर एन्टीबाडी की प्रतिक्रिया अधिक तेज़ और कहीं अधिक बड़ी होती है; टिटनेस प्रतिविष या साँप-काटने के प्रतिविष जैसा इंजेक्ट किया गया प्रतिरक्षी-सीरम बिना किसी स्मृति के निष्क्रिय प्रतिरक्षा देता है।
- टी लिम्फोसाइट द्वारा चलाई जाने वाली कोशिका-माध्यित प्रतिरक्षा ही प्रत्यारोपित अंग की अस्वीकृति का कारण बनती है, और इसीलिए प्रत्यारोपण के बाद ऊतक-प्ररूपण तथा प्रतिरक्षा-दमनकारी औषधियाँ आवश्यक होती हैं।
टीके के प्रति प्रतिक्रिया में हर पंक्ति भाग लेती है; पर एन्टीबाडी केवल रेखांकित बी-कोशिका वाली पंक्तियाँ बनाती हैं। इसीलिए 'बी एवं टी दोनों कोशिकाओं द्वारा' प्रतिक्रिया के बारे में सही कथन है और इस प्रश्न का ग़लत उत्तर।
- 'बी एवं टी दोनों कोशिकाओं द्वारा' इसलिए चुन लेना कि सहायक टी कोशिकाएँ सचमुच आवश्यक हैं। वे प्रतिक्रिया को सम्भव बनाती हैं; एन्टीबाडी का निर्माण नहीं करतीं।
- एन्टीजन को एन्टीबाडी से गड्डमड्ड कर देना। एन्टीजन वह बाहरी अणु है जो प्रतिक्रिया भड़काता है; एन्टीबाडी वह प्रोटीन है जो उसके विरुद्ध बनती है।
- यह मान लेना कि टीके में जीवित रोगजनक होना ही चाहिए। उपइकाई, टॉक्सॉइड, वायरल-संवाहक और एमआरएनए टीके केवल एन्टीजन या उसे बनाने का निर्देश ही पहुँचाते हैं।
बीपीएससी प्रतिरक्षा विज्ञान को एक पंक्ति के श्रेय-प्रश्न के रूप में पूछता है — एन्टीबाडी कौन-सी कोशिका बनाती है, कौन-सी इम्युनोग्लोबुलिन पहले आती है, कोई विशेष प्रकार का टीका कैसे काम करता है — और उस अभ्यर्थी को अंक देता है जिसके पास एनसीईआरटी के वाक्य लगभग नहीं, ठीक-ठीक हों। यूपीएससी उसी सामग्री को सर्वोत्तम-वर्णन या कथन-मूल्यांकन के रूप में रखता है, जैसे 2022 में उसका वह प्रश्न कि बी कोशिकाएँ और टी कोशिकाएँ क्या करती हैं, इसलिए यही ज्ञान अपरिचित शब्दों में दोहराए जाने पर भी टिकना चाहिए।
निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन मानव शरीर में बी कोशिकाओं और टी कोशिकाओं की भूमिका का सर्वोत्तम वर्णन करता है?
- (a) वे शरीर को पर्यावरणीय एलर्जनों से बचाती हैं।
- (b) वे शरीर के दर्द और शोथ को कम करती हैं।
- (c) वे शरीर में प्रतिरक्षा-दमनकारी के रूप में कार्य करती हैं।
- (d) वे शरीर को रोगजनकों से होने वाले रोगों से बचाती हैं।
उत्तर(d) वे शरीर को रोगजनकों से होने वाले रोगों से बचाती हैं।
वही दो प्रकार की कोशिकाएँ, पर इस स्तर पर पूछी गईं कि वे किसलिए हैं, न कि यह कि एन्टीबाडी कौन स्रावित करती है। दोनों प्रश्नों को साथ पढ़ने पर वह सीमा-रेखा दिखती है जो अभ्यर्थी को पकड़नी है: बी और टी कोशिकाएँ मिलकर रोगजनकों से रक्षा करती हैं, पर एन्टीबाडी का निर्माण केवल बी वंश करता है।
प्रतिजन (एन्टीजन) वह पदार्थ है जो
- (a) हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करता है
- (b) विषाक्तता के उपचार में प्रयोग होता है
- (c) शरीर का ताप घटाता है
- (d) प्रतिरक्षी (एन्टीबाडी) के निर्माण को उत्तेजित करता है
उत्तर(d) प्रतिरक्षी (एन्टीबाडी) के निर्माण को उत्तेजित करता है
उसी शब्दावली का दूसरा आधा, जिस पर यह प्रश्न टिका है। टीका एन्टीजन पहुँचाकर काम करता है; एन्टीजन एन्टीबाडी के निर्माण को उत्तेजित करता है; और जो कोशिका उसे बनाती है वह बी लिम्फोसाइट की प्लाज़्मा कोशिका है।
संक्रमण के प्रत्युत्तर में इम्युनोग्लोबुलिन का कौन-सा वर्ग सबसे पहले बनता है?
- (a) IgG
- (b) IgA
- (c) IgM
- (d) IgE
उत्तर(c) IgM
71वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा इसी प्रक्रिया में एक स्तर और गहरे गई: यह स्थापित हो जाने के बाद कि एन्टीबाडी बी कोशिकाएँ बनाती हैं, वह पूछती है कि वे सबसे पहले कौन-सा वर्ग बनाती हैं। प्राथमिक प्रतिक्रिया में IgM आती है और बाद में IgG का बोलबाला होता है — यह भेद इस कार्ड के साथ साथ ले जाने योग्य है।
कोविड के टीके प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को कैसे उत्तेजित करते हैं?
- (a) जीवित दुर्बलीकृत सार्स-कोव-2 विषाणु पहुँचाकर
- (b) वास्तविक सार्स-कोव-2 विषाणु पहुँचाकर
- (c) सार्स-कोव-2 विषाणु का हानिरहित टुकड़ा पहुँचाकर
- (d) सार्स-कोव-2 विषाणु के विरुद्ध एन्टीबाडी पहुँचाकर
उत्तर(c) सार्स-कोव-2 विषाणु का हानिरहित टुकड़ा पहुँचाकर
69वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा ने इसी शृंखला का अगला सिरा जाँचा — कि टीका शरीर में क्या डालता है। उसके विकल्प (d) पर ध्यान दीजिए, जो एन्टीजन के बजाय एन्टीबाडी का इंजेक्शन बताता है: वह निष्क्रिय प्रतिरक्षा है, टीकाकरण नहीं, और यही भेद इस प्रश्न का उत्तर भी तय करता है।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
मानव शरीर में एन्टीबाडी किसके द्वारा स्रावित होती हैं ?
- (a)कोशिकाविषी टी कोशिकाएँ
- (b)बी लिम्फोसाइट से बनी प्लाज़्मा कोशिकाएँ
- (c)महाभक्षकाणु (मैक्रोफेज)
- (d)प्राकृतिक मारक (नैचुरल किलर) कोशिकाएँ
उत्तर(b) बी लिम्फोसाइट से बनी प्लाज़्मा कोशिकाएँ — वही प्रभावकारी कोशिकाएँ जिनमें सक्रिय बी लिम्फोसाइट बदल जाती है। महाभक्षकाणु एन्टीजन प्रस्तुत करते हैं और रोगजनकों को निगलते हैं, पर कोई इम्युनोग्लोबुलिन स्रावित नहीं करते।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
साँप के काटे व्यक्ति को साँप-प्रतिविष सीरम का इंजेक्शन देना किसका उदाहरण है ?
- (a)सक्रिय प्रतिरक्षा
- (b)निष्क्रिय प्रतिरक्षा
- (c)सहज (जन्मजात) प्रतिरक्षा
- (d)स्वप्रतिरक्षा
उत्तर(b) निष्क्रिय प्रतिरक्षा — बनी-बनाई एन्टीबाडी बाहर से दी जाती हैं, इसलिए सुरक्षा तुरन्त आरम्भ होती है पर जल्दी घट जाती है, क्योंकि रोगी की अपनी बी कोशिकाएँ कभी सक्रिय हुई ही नहीं और कोई स्मृति कोशिका बनी ही नहीं।