निम्नलिखित विकल्पों में से सही युग्म चुनें ।
- (a)तृतीय वर्ष योजना – वैश्वीकरण पर ध्यान
- (b)प्रथम पंचवर्षीय योजना – कृषि पर ध्यान
- (c)पांचवीं पंचवर्षीय योजना – उद्योग पर ध्यान
- (d)चौथी पंचवर्षीय योजना – सेवा पर ध्यान
सही — (b) प्रथम पंचवर्षीय योजना – कृषि पर ध्यान। प्रथम योजना 1951 से 1956 तक चली, हैरोड–डोमर मॉडल पर बनाई गई थी, और उसका घोषित ध्येय कृषि का विकास था। कारण वैचारिक नहीं, तात्कालिक था: विभाजन ने भारत को पश्चिमी पंजाब की नहर-सिंचित गेहूँ-भूमि से और पूर्वी बंगाल के जूट से काट दिया था, शरणार्थियों को बसाना था, और कुछ भी करने से पहले खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाना था। पैसा भी उसी प्राथमिकता के पीछे गया — लगभग 2,069 करोड़ रुपये के नियोजित परिव्यय में से 27.2 प्रतिशत सिंचाई और ऊर्जा को तथा 17.4 प्रतिशत कृषि और सामुदायिक विकास को मिला, जबकि उद्योग को केवल 8.6 प्रतिशत। बड़ी बहुउद्देशीय नदी-घाटी परियोजनाएँ इसी योजना की हैं: सतलुज पर भाखड़ा, महानदी पर हीराकुंड और दामोदर घाटी के बाँध — तीनों इसलिए बने कि सिंचाई, बाढ़-नियंत्रण और बिजली एक साथ मिल सकें। यही एकमात्र योजना है जिसने अपने ही लक्ष्य को आराम से पार किया: सकल घरेलू उत्पाद में 2.1 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि का लक्ष्य था और 3.6 प्रतिशत प्राप्त हुई, जिसमें अच्छे मानसून की मदद रही; इस अवधि में प्रति व्यक्ति आय लगभग 8 प्रतिशत बढ़ी। इस पृष्ठ की बाकी हर जोड़ी किसी योजना के साथ ऐसा ध्यान-केंद्र जोड़ देती है जो या तो किसी दूसरी योजना का था या किसी योजना का था ही नहीं, इसलिए (b) ही अकेली जोड़ी है जिसके दोनों हिस्से मेल खाते हैं। एक सावधानी विकल्प की अपनी शब्दावली को लेकर साफ़ कह देनी चाहिए: 'कृषि पर ध्यान' एक संक्षेपण है। प्रथम योजना ने कृषि, सिंचाई और ऊर्जा को एक साथ प्राथमिकता दी और उद्योग की नींव रखने की बात भी स्पष्ट रूप से कही थी; उसने उद्योग की उपेक्षा नहीं की, बस कृषि को पहले रखा।
- (a)तृतीय वर्ष योजना – वैश्वीकरण पर ध्यान — दो तरह से ग़लत। 'तृतीय वर्ष योजना' नाम की कोई योजना कभी रही ही नहीं — प्रश्नपत्र इसे इसी रूप में छापता है जबकि इसकी तीनों सहोदर पंक्तियाँ 'पंचवर्षीय योजना' कहती हैं; यह मुद्रण-दोष प्रश्नपत्र का अपना है (यह हिन्दी और अंग्रेज़ी दोनों स्तंभों में एक-सा छपा है) और यहाँ सुधारा नहीं गया है, जैसा छपा है वैसा ही रखा गया है। दूसरे, वैश्वीकरण किसी भी क्रमांकित योजना का घोषित ध्यान-केंद्र नहीं था: जुलाई 1991 के सुधार सातवीं और आठवीं योजना के बीच के अंतराल में, 1990 से 1992 की दो वार्षिक योजनाओं के दौरान आए, और 1992 से 1997 की आठवीं योजना केवल उसके बाद बनने वाली पहली योजना थी।
- (c)पांचवीं पंचवर्षीय योजना – उद्योग पर ध्यान — जो ध्यान-केंद्र यहाँ नामित है वह किसी दूसरी योजना का है। उद्योग — और विशेष रूप से महालनोबिस मॉडल पर भारी तथा आधारभूत उद्योग — 1956 से 1961 की दूसरी योजना का ज़ोर था, जिसने सोवियत सहायता से भिलाई, ब्रिटिश सहायता से दुर्गापुर और पश्चिम जर्मन सहायता से राउरकेला के इस्पात संयंत्र खड़े किए। 1974 से चली पाँचवीं योजना ने रोज़गार, 'गरीबी हटाओ' के तहत ग़रीबी उन्मूलन और आत्मनिर्भरता पर बल दिया तथा न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम शुरू किया।
- (d)चौथी पंचवर्षीय योजना – सेवा पर ध्यान — कोई भी योजना सेवा क्षेत्र के इर्द-गिर्द कभी नहीं बनी। 1969 से 1974 की चौथी योजना गाडगिल सूत्र के आधार पर 'स्थिरता के साथ विकास और आत्मनिर्भरता की उत्तरोत्तर प्राप्ति' के लक्ष्य पर गढ़ी गई थी, और उसके पड़ाव थे 1969 में चौदह बड़े बैंकों का राष्ट्रीयकरण, हरित क्रांति का प्रसार तथा खाद्यान्नों के बफ़र स्टॉक की शुरुआत। सेवाएँ उत्पादन की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा क्षेत्र दशकों बाद बनीं, और वह भी वृद्धि से, किसी योजना के निर्णय से नहीं।
भारत ने 1951 से 2017 के बीच बारह पंचवर्षीय योजनाएँ चलाईं। इन्हें योजना आयोग बनाता था — वह निकाय जो मार्च 1950 के एक मंत्रिमंडलीय संकल्प से बना था और जिसका उल्लेख संविधान में कहीं नहीं है — और अंतिम स्वीकृति राष्ट्रीय विकास परिषद देती थी। परीक्षा की दृष्टि से मूल बात घोषित प्राथमिकताओं का क्रम है। पहली (1951–56): कृषि, सिंचाई और ऊर्जा, हैरोड–डोमर मॉडल पर। दूसरी (1956–61): भारी और आधारभूत उद्योग, महालनोबिस मॉडल पर, साथ में 1956 का औद्योगिक नीति प्रस्ताव। तीसरी (1961–66): स्वतः-पोषित वृद्धि, जो 1962 और 1965 के युद्धों तथा 1964–65 के सूखे से बिगड़ गई और 5.6 प्रतिशत के लक्ष्य के मुक़ाबले केवल 2.4 प्रतिशत ही दे पाई; इसके बाद तीन वार्षिक योजनाएँ आईं, यानी 1966 से 1969 का 'योजना अवकाश'। चौथी (1969–74): स्थिरता के साथ विकास और आत्मनिर्भरता। पाँचवीं (1974–79): ग़रीबी उन्मूलन, जो 1978 में जनता सरकार द्वारा अस्वीकार किए जाने पर बीच में ही समाप्त कर दी गई। छठी (1980–85) और सातवीं (1985–90)। फिर दो वार्षिक योजनाएँ (1990–92), जिनमें सुधार आए। आठवीं (1992–97): पहली योजना जिसने मानव विकास को समस्त विकास-प्रयास का केंद्र कहा, और वही योजना जिसमें औद्योगिक लाइसेंसिंग व्यावहारिक रूप से समाप्त कर दी गई। बारहवीं (2012–17) अंतिम थी; 1 जनवरी 2015 को योजना आयोग की जगह नीति आयोग आ गया।
'सही युग्म चुनिए' वाला प्रश्न एक तथ्य की नहीं, चार स्वतंत्र तथ्यों की परीक्षा है, और कारगर क्रम यह है कि पहले संरचनात्मक रूप से असंभव को हटाइए, तथ्य बाद में जाँचिए। यहाँ विकल्प (a) उसके पहले ही शब्द पर गिर जाता है: इस शृंखला में 'तृतीय वर्ष योजना' नाम की कोई योजना है ही नहीं, और उदारता से उसे तीसरी योजना मान भी लें तो वैश्वीकरण 1991 की परिघटना है, 1961–66 की नहीं। बचती हैं तीन योजना-और-ध्यान जोड़ियाँ। दो ध्यान-केंद्र पक्के कर लीजिए — कृषि पहली योजना को और भारी उद्योग दूसरी को — तो विकल्प (c) तुरंत ढह जाता है, क्योंकि उद्योग का लेबल सूची में चार योजनाएँ नीचे खिसका दिया गया है। विकल्प (d) एक अलग कसौटी पर गिरता है: 'सेवा' किसी योजना के उद्देश्य के रूप में आती ही नहीं, इसलिए उसे ख़ारिज करने के लिए चौथी योजना का कोई ब्योरा याद रखने की ज़रूरत ही नहीं। जो बचता है वही (b) है। इस प्रारूप का सामान्य पाठ यह है कि किसी जोड़ी को झूठा बनाने का सबसे आम तरीक़ा लेबल खिसकाना है: परीक्षक एक सही विवरण उठाकर उसी शृंखला की ग़लत मद से जोड़ देता है — विकल्प (c) और (d) ठीक यही करते हैं।
- पहली योजना (1951–56): हैरोड–डोमर मॉडल, ध्येय-वाक्य 'कृषि का विकास'; लगभग 2,069 करोड़ रुपये के परिव्यय में से 27.2 प्रतिशत सिंचाई और ऊर्जा को तथा 17.4 प्रतिशत कृषि और सामुदायिक विकास को, जबकि उद्योग को 8.6 प्रतिशत।
- इसका लक्ष्य 2.1 प्रतिशत सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि था और प्राप्ति 3.6 प्रतिशत रही; भाखड़ा, हीराकुंड और दामोदर घाटी परियोजनाएँ इसी योजना में शुरू हुईं।
- दूसरी योजना (1956–61): महालनोबिस मॉडल और तीव्र औद्योगीकरण; भिलाई (सोवियत संघ), दुर्गापुर (ब्रिटेन) और राउरकेला (पश्चिम जर्मनी) के इस्पात संयंत्र; लक्ष्य 4.5 प्रतिशत, प्राप्ति 4.27 प्रतिशत।
- तीसरी योजना (1961–66): लक्ष्य 5.6 प्रतिशत, किंतु 1962 और 1965 के युद्धों तथा 1964–65 के सूखे के बाद प्राप्ति केवल 2.4 प्रतिशत, जिससे तीन वार्षिक योजनाएँ बनानी पड़ीं — 1966 से 1969 का 'योजना अवकाश'।
- चौथी योजना (1969–74) गाडगिल सूत्र पर आधारित थी और उसी में 1969 का चौदह बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ; पाँचवीं योजना (1974 से) ने रोज़गार, गरीबी हटाओ और आत्मनिर्भरता पर बल दिया और 1978 में जनता सरकार ने उसे अस्वीकार कर दिया।

- उद्योग को पाँचवीं योजना से जोड़ बैठना। उद्योग वाली योजना दूसरी है, महालनोबिस मॉडल पर; पाँचवीं 'गरीबी हटाओ' वाली योजना है।
- 'तृतीय वर्ष योजना' को ऐसी मुद्रण-चूक मान लेना जिसे पढ़ते हुए आगे निकल जाना चाहिए। तीसरी पंचवर्षीय योजना मान लेने पर भी जोड़ी ग़लत ही रहती है, क्योंकि वैश्वीकरण 1991 की परिघटना है।
- यह मान लेना कि प्रथम योजना ने उद्योग को छोड़ ही दिया था। उसने कृषि को प्राथमिकता दी और फिर भी परिव्यय का 8.6 प्रतिशत उद्योग को गया; जोड़ी इसलिए सही है कि कृषि पहले आई, इसलिए नहीं कि उद्योग था ही नहीं।
BPSC को मिलान-युग्म वाला प्रारूप पसंद है और वह उसे एक ही शृंखला से भरता है, ताकि केवल भीतरी क्रम की परीक्षा हो — यहाँ चार योजनाएँ और चार ध्यान-केंद्र, जिनमें एक लेबल खिसका दिया गया है। UPSC ने यही योजना-और-उद्देश्य का मिलान कथन-प्रश्न के रूप में पूछा है, जैसे यह कि क्या दूसरी योजना ने भारी उद्योग पर बल दिया और क्या आयात प्रतिस्थापन तीसरी योजना में शुरू हुआ, तथा एकल-उत्तर प्रश्न के रूप में यह कि किस योजना ने सबसे पहले मानव विकास को समस्त विकास-प्रयास का केंद्र कहा।
भारतीय नियोजन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. द्वितीय पंचवर्षीय योजना ने भारी उद्योगों की स्थापना पर बल दिया। 2. तृतीय पंचवर्षीय योजना ने औद्योगीकरण की रणनीति के रूप में आयात प्रतिस्थापन की अवधारणा प्रस्तुत की। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं ?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर(a) केवल 1
UPSC उसी कथन को सही ठहराता है कि उद्योग दूसरी योजना का है — और यही वह तथ्य है जो यहाँ विकल्प (c) को झूठा कर देता है। वही पंक्ति परीक्षक की प्रिय चाल भी दिखाती है: एक सही विवरण को शृंखला में एक क़दम आगे खिसका देना और पूछना कि आपने ध्यान दिया या नहीं।
निम्नलिखित में से किस पंचवर्षीय योजना ने मानव विकास को समस्त विकास-प्रयासों का केंद्र माना ?
- (a) तृतीय पंचवर्षीय योजना
- (b) पंचम पंचवर्षीय योजना
- (c) षष्ठ पंचवर्षीय योजना
- (d) अष्टम पंचवर्षीय योजना
उत्तर(d) अष्टम पंचवर्षीय योजना
वही कौशल एकल-उत्तर रूप में — एक घोषित ध्यान-केंद्र को सही योजना से जोड़िए। यह आठवीं योजना को 1991 के बाद की योजना के रूप में भी पक्का कर देता है, और वही स्मृति 'वैश्वीकरण' को विकल्प (a) की तीसरी योजना से दूर रखती है।
निम्नलिखित भारतीय पूँजीपतियों में से कौन “बॉम्बे प्लान” का रचनाकार नहीं था ?
- (a) जे. आर. डी. टाटा
- (b) धीरूभाई अंबानी
- (c) जी. डी. बिड़ला
- (d) श्री राम
उत्तर(b) धीरूभाई अंबानी
दिसंबर 2024 के 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के प्रश्नपत्र ने 1944 की उस निजी-क्षेत्र रूपरेखा के बारे में पूछा था जो राजकीय नियोजन से पहले आई। बॉम्बे योजना और प्रथम पंचवर्षीय योजना एक ही कहानी के दो सिरे हैं — स्वतंत्रता से पहले उद्योगपतियों का नियोजित अर्थव्यवस्था का प्रस्ताव, और उसके बाद योजना आयोग द्वारा उसे साकार करना।
निम्नलिखित में से कौन-सा वैश्वीकरण और भारत पर उसके प्रभाव के बारे में सही नहीं है ?
- (a) इसने वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार का विस्तार किया है।
- (b) इससे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का प्रवाह बढ़ा है।
- (c) निर्यात में वृद्धि आयात में वृद्धि से अधिक है।
- (d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर(c) निर्यात में वृद्धि आयात में वृद्धि से अधिक है।
जिस शब्द को विकल्प (a) ग़लत जगह रखता है, 69वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा ने उसी को उसकी अपनी ज़मीन पर परखा। वहाँ वैश्वीकरण को 1991 के बाद की प्रक्रिया माना गया है जिसके व्यापार और निवेश पर मापे जा सकने वाले प्रभाव हैं — और ठीक इसीलिए वह 1960 के दशक की किसी योजना का घोषित ध्यान-केंद्र नहीं हो सकता।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारत की द्वितीय पंचवर्षीय योजना किस मॉडल पर आधारित थी ?
- (a)हैरोड–डोमर मॉडल
- (b)महालनोबिस मॉडल
- (c)गाडगिल सूत्र
- (d)मज़दूरी-वस्तु मॉडल
उत्तर(b) महालनोबिस मॉडल — दूसरी योजना (1956–61) पी. सी. महालनोबिस के निवेश-आवंटन ढाँचे पर चली और उसने संसाधन भारी तथा आधारभूत उद्योग की ओर मोड़े। हैरोड–डोमर मॉडल पहली योजना के पीछे था और गाडगिल सूत्र चौथी योजना से केंद्रीय सहायता के बँटवारे को तय करता था।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारतीय नियोजन में 'योजना अवकाश' किस अवधि को कहा जाता है ?
- (a)1962–65
- (b)1966–69
- (c)1978–80
- (d)1990–92
उत्तर(b) 1966–69 — तीसरी योजना के 5.6 प्रतिशत के लक्ष्य के मुक़ाबले केवल 2.4 प्रतिशत वृद्धि देने के बाद पंचवर्षीय योजना की जगह तीन वार्षिक योजनाएँ बनाई गईं। 1990–92 का अंतराल भी दो वार्षिक योजनाओं से भरा गया था, पर यह शब्द परंपरागत रूप से उसके लिए नहीं चलता।