2 और 3 बजे की बीच किस समय एक घड़ी की सुईयाँ साथ-साथ होगी ?
- (a)2 बज कर 10 10/43 मिनट
- (b)2 बज कर 10 10/11 मिनट
- (c)2 बज कर 38 10/11 मिनट
- (d)2 बज कर 38 2/11 मिनट
सही — (b), 2 बज कर 10 10/11 मिनट। हिसाब मिनट-खानों में कीजिए, यानी डायल के साठ विभाजनों में। ठीक 2 बजे मिनट की सुई 12 पर होती है, अर्थात् मिनट-खाना 0 पर, और घंटे की सुई 2 पर, अर्थात् मिनट-खाना 10 पर। इस तरह मिनट की सुई दस खाने पीछे है और दोनों के मिलने के लिए उसे घंटे की सुई पर ठीक दस खाने की बढ़त लेनी होगी। अब चालें देखिए: साठ मिनट में मिनट की सुई साठ खाने चलती है और घंटे की सुई पाँच, इसलिए मिनट की सुई हर घंटे 55 खाने की बढ़त लेती है। एक खाने की बढ़त लेने में 60/55 = 12/11 मिनट लगते हैं, इसलिए दस खानों की बढ़त में 10 × 12/11 = 120/11 मिनट लगते हैं, जो 10 और 10/11 मिनट है। सुइयाँ 2 बज कर 10 10/11 मिनट पर, यानी लगभग 2:10:55 पर, साथ आ जाती हैं। यही परिणाम अंशों में: मिनट की सुई प्रति मिनट 6° तय करती है और घंटे की सुई 0.5°, यानी सापेक्ष चाल 5.5° प्रति मिनट; 2:00 पर घंटे की सुई 60° आगे है, इसलिए यह अंतर 60 ÷ 5.5 = 120/11 मिनट में मिट जाता है। इसे एक बार सामान्य कर लीजिए और गणना दोबारा करनी ही नहीं पड़ेगी: H और H+1 बजे के बीच सुइयाँ H बजकर 60H/11 मिनट पर मिलती हैं। इससे मिलता है 1 बज कर 5 5/11, 2 बज कर 10 10/11, 3 बज कर 16 4/11, और इसी तरह आगे। इसी सूत्र से दो संरचनात्मक तथ्य निकलते हैं जिन्हें साथ रखना चाहिए। मिलन वाले हर उत्तर का हर 11 होता है — यह 55 = 60 − 5 से आता है और कुछ और हो ही नहीं सकता, और छपे हुए विकल्प को ख़ारिज करने का यही सबसे तेज़ तरीका है। और चूँकि लगातार दो मिलनों के बीच का अंतराल 720/11 = 65 5/11 मिनट है, इसलिए सुइयाँ बारह घंटे में 11 बार और दिन भर में 22 बार मिलती हैं, तथा 11 और 12 बजे के बीच एक भी बार नहीं, क्योंकि चक्र का ग्यारहवाँ मिलन ठीक 12 बजे पड़ता है।
- (a)2 बज कर 10 10/43 मिनट — पूर्ण संख्या और अंश का ऊपरी भाग सही है, केवल हर बदल दिया गया है, और यही इसे उस अभ्यर्थी के लिए इस पृष्ठ का सबसे ख़तरनाक विकल्प बनाता है जिसे उत्तर आधा-अधूरा याद है। गणना का कोई चरण 43 नहीं दे सकता: सापेक्ष बढ़त प्रति घंटा 55 मिनट-खाने है, इसलिए घड़ी के मिलन वाले हर उत्तर के हर में 11 होता है। पहले हर जाँचिए और यह विकल्प तत्काल गिर जाता है।
- (c)2 बज कर 38 10/11 मिनट — बाक़ी दोनों से जोड़कर बनाया गया मिश्रण — सही उत्तर का अंश 10/11 लेकर विकल्प (d) की पूर्ण संख्या 38 पर चिपका दिया गया। डायल पर इसके अनुरूप कोई घटना है ही नहीं: 38 10/11 किसी भी पूर्णांक H के लिए 60H/11 नहीं है, इसलिए यह न मिलन का समय है, न समकोण या सीधी रेखा वाला कोई मानक समय। यह केवल इसलिए रखा गया है कि अंश देखकर मिलान करने वाले को फँसाया जा सके।
- (d)2 बज कर 38 2/11 मिनट — घड़ी का सच्चा उत्तर, पर ग़लत घंटे पर रखा हुआ। 38 2/11 = 420/11 = 60 × 7 / 11, इसलिए यह वह क्षण है जब सुइयाँ सात और आठ बजे के बीच मिलती हैं, दो और तीन बजे के बीच नहीं। दो बजकर अड़तीस मिनट पर सुइयाँ साथ हो ही नहीं सकतीं: तब तक मिनट की सुई घंटे की सुई को पार करके उससे लगभग पच्चीस खाने आगे निकल चुकी होती है।
घड़ी का हर प्रश्न एक ही संख्या पर सिमट जाता है: दोनों सुइयों की सापेक्ष चाल। मिनट की सुई एक घंटे में 360° या 60 मिनट-खाने पूरे करती है; घंटे की सुई उसी घंटे में 30° या 5 मिनट-खाने। इसलिए मिनट की सुई हर घंटे घंटे की सुई पर 55 मिनट-खाने, यानी 330°, की बढ़त लेती है — 5.5° प्रति मिनट। यह तय हो जाने पर तीन मानक स्थितियाँ निकल आती हैं। सुइयाँ तब मिलती हैं जब बढ़त आरंभिक पिछड़न के बराबर हो जाए; तब समकोण पर होती हैं जब उनके बीच 15 मिनट-खाने या 90° का अंतर हो; और तब सीधी रेखा में विपरीत दिशाओं की ओर होती हैं जब यह अंतर 30 मिनट-खाने या 180° हो। पूरे चक्कर की गिनती: सुइयाँ बारह घंटे में 11 बार और दिन भर में 22 बार मिलती हैं; बारह घंटे में 22 बार और दिन भर में 44 बार समकोण पर होती हैं; और बारह घंटे में 11 बार तथा दिन भर में 22 बार आमने-सामने होती हैं। तीनों गिनतियाँ सहज अनुमान से एक कम इसी एक कारण से हैं — घंटे की सुई स्वयं चल रही होती है, इसलिए बारह घंटे में एक पारगमन निगल लिया जाता है।
इस तरह के प्रश्न में कुशल रास्ता गणना नहीं, विकल्प हटाना है। पहले हर देखिए: दो पूर्ण घंटों के बीच मिलन, समकोण और आमने-सामने — तीनों के समयों के हर में 11 आता है, इसलिए 43 वाला विकल्प (a) देखते ही बाहर हो जाता है। दूसरे, मोटी स्थिति देखिए: 2 और 3 के बीच घंटे की सुई 10-मिनट के चिह्न से थोड़ी ही आगे बैठी होती है, और मिनट की सुई उस तक घंटे के आरंभ में ही पहुँच जाती है, इसलिए उत्तर की पूर्ण संख्या छोटी होनी चाहिए — इससे बिना किसी गणना के 38 वाले दोनों विकल्प हट जाते हैं। शेष बचता है (b), और पूरी गणना उसी की पुष्टि करती है। यदि गणना करनी ही हो तो मिलन के लिए सूत्र 60H/11 लीजिए और उसे किसी ज्ञात स्थिति पर जाँच लीजिए: 12 और 1 के बीच सूत्र 0 देता है, और सुइयाँ सचमुच ठीक बारह बजे साथ होती हैं। इस प्रश्नपत्र में तर्कशक्ति के प्रश्न शुद्ध अंक हैं — न कोई स्रोत ग़लत याद रह सकता है, न कोई तथ्य पुराना पड़ सकता है — इसलिए यह अनुशासन बनाने लायक़ है।
- मिनट की सुई हर घंटे घंटे की सुई पर 55 मिनट-खाने (330°) की बढ़त लेती है, यानी 5.5° प्रति मिनट — घड़ी के हर प्रश्न में यही एक संख्या काम आती है।
- सुइयाँ H बजकर 60H/11 मिनट पर मिलती हैं: 1 बजकर 5 5/11, 2 बजकर 10 10/11, 3 बजकर 16 4/11, 7 बजकर 38 2/11, 8 बजकर 43 7/11।
- लगातार दो मिलनों के बीच 720/11 = 65 5/11 मिनट का अंतर होता है, इसलिए सुइयाँ बारह घंटे में 11 बार और चौबीस घंटे में 22 बार मिलती हैं।
- 11 और 12 बजे के बीच कोई मिलन नहीं होता — चक्र का ग्यारहवाँ मिलन ठीक 12:00 पर पड़ता है।
- 2 और 3 बजे के बीच सुइयाँ एक बार समकोण पर होती हैं, 2 बजकर 27 3/11 मिनट पर, और एक बार ठीक आमने-सामने, 2 बजकर 43 7/11 मिनट पर।
विकल्प (d), 38 2/11, वस्तुतः 60 × 7 / 11 है — सात और आठ बजे के बीच का मिलन-समय, दो और तीन बजे के बीच का नहीं। और विकल्प (a) का हर 43 प्रति घंटा 55 खानों से निकल ही नहीं सकता।
- यह मान लेना कि मिनट की सुई के 10-मिनट चिह्न पर पहुँचते ही सुइयाँ मिल जाएँगी। जब तक वह वहाँ पहुँचती है, घंटे की सुई आगे बढ़ चुकी होती है, और इसीलिए उत्तर 10 नहीं, 10 10/11 है।
- किसी विकल्प को इसलिए स्वीकार कर लेना कि उसकी पूर्ण संख्या सही दिखती है। विकल्प (a) में सही 10 भी है और सही अंश 10 भी, फिर भी वह अकेले हर के कारण ग़लत है।
- जहाँ 55/60 चाहिए वहाँ 60/55 लगा देना, या उल्टा। दिशा इस जाँच से पक्की कीजिए: दस खानों की बढ़त में दस मिनट से थोड़ा अधिक समय लगना चाहिए, कम नहीं।
BPSC ने घड़ी दोनों मानक रूपों में पूछी है — गिनती वाला प्रश्न, कि दिन में सुइयाँ कितनी बार मिलती हैं, और यह गणना वाला, कि दो दिए गए घंटों के बीच ठीक किस समय। UPSC का आधारभूत संख्यात्मक खंड यही सापेक्ष-चाल वाला विचार कोणों के रास्ते पूछता है: किसी बताए गए अंतराल में मिनट की सुई कितने अंश तय करती है, या किसी बताए गए समय पर सुइयों के बीच न्यून कोण कितना है।
दीवार घड़ी में समय 3.25 है; घंटे की सुई और मिनट की सुई के बीच न्यून कोण है
- (a) 60°
- (b) 52 ½°
- (c) 47 ½°
- (d) 42°
उत्तर(c) 47 ½°
वही 5.5° प्रति मिनट, अंतर मिटाने के लिए नहीं, अंतर नापने के लिए इस्तेमाल किया गया। UPSC का कोण-सूत्र |30H − 5.5M| और इस प्रश्न की मिलन-शर्त, दोनों सापेक्ष चाल के एक ही तथ्य के दो पाठ हैं।
एक दिन में घड़ी की घंटे की सुई और मिनट की सुई कितनी बार समकोण पर होती हैं
- (a) 44
- (b) 48
- (c) 24
- (d) 12
उत्तर(a) 44
उसी क्रियाविधि का गिनती वाला रूप। उत्तर 48 नहीं, 44 ठीक उसी कारण से है जिससे यहाँ मिलन 10 पर नहीं, 10 10/11 पर पड़ता है — मिनट की सुई पीछा करती रहती है और घंटे की सुई चलती रहती है।
एक दिन में घड़ी की सूइयाँ कितनी बार मेल खाती हैं ?
- (a) 12
- (b) 23
- (c) 22
- (d) 24
उत्तर(c) 22
दिसंबर 2024 की 70वीं CCE के प्रश्नपत्र ने पूछा था कि जिस घटना का समय यह प्रश्न निकालता है, वह होती कितनी बार है। दोनों उत्तर लगातार दो मिलनों के बीच के उसी 720/11 = 65 5/11 मिनट के अंतराल से निकलते हैं — आधे दिन में ग्यारह, पूरे दिन में बाईस।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
3 और 4 बजे के बीच किस समय घड़ी की सुइयाँ साथ-साथ होंगी ?
- (a)3 बजकर 15 मिनट
- (b)3 बजकर 16 4/11 मिनट
- (c)3 बजकर 16 4/13 मिनट
- (d)3 बजकर 18 2/11 मिनट
उत्तर(b) 3 बजकर 16 4/11 मिनट — H = 3 पर 60H/11 लगाइए, जो 180/11 = 16 4/11 देता है। यह 15 मिनट से थोड़ा बाद इसलिए है कि घंटे की सुई स्वयं 15-खाने के चिह्न से आगे बढ़ चुकी होती है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
एक दिन में घड़ी की सुइयाँ कितनी बार एक-दूसरे के समकोण पर होती हैं ?
- (a)24
- (b)44
- (c)48
- (d)22
उत्तर(b) 44 — हर बारह घंटे के चक्र में सुइयाँ 22 बार लंबवत होती हैं, इसलिए चौबीस घंटे में 44 बार। गिनती 48 नहीं, 44 उसी कारण से है जिससे मिलन 24 नहीं, 22 होते हैं: घंटे की सुई भी चल रही होती है।