1939 में जब सुभाष चंद्र बोस ने इस्तीफा दिया तब भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के अध्यक्ष कौन बने ?
- (a)जवाहर लाल नेहरू
- (b)राजेंद्र प्रसाद
- (c)अबुल कलाम आज़ाद
- (d)उपरोक्त में से एक से अधिक
सही — (b), राजेंद्र प्रसाद। बोस लगातार दो बार काँग्रेस अध्यक्ष रहे: 18 जनवरी 1938 से, जब उन्होंने हरिपुरा अधिवेशन की अध्यक्षता की, और फिर 29 जनवरी 1939 से, जब उन्होंने गांधी द्वारा समर्थित उम्मीदवार पट्टाभि सीतारमैया के विरुद्ध चुनाव लड़कर पुनर्निर्वाचन जीता। दूसरा कार्यकाल तीन महीने चला। मार्च 1939 में त्रिपुरी में काँग्रेस के पुराने नेतृत्व ने टकराव को अनिवार्य बना दिया, और कार्य समिति के पंद्रह में से तीन को छोड़कर सभी सदस्यों ने उनके अधीन काम करने के बजाय इस्तीफ़ा दे दिया — वे तीन अपवाद थे स्वयं बोस, उनके भाई शरत बोस, और जवाहरलाल नेहरू। कार्यपालिका के बिना रह जाने पर बोस ने 29 अप्रैल 1939 को अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया, और उनकी जगह लेकर 1939 का कार्यकाल पूरा करने के लिए डॉ० राजेंद्र प्रसाद चुने गए। बोस ने आगे चलकर 22 जून 1939 को अखिल भारतीय फ़ॉरवर्ड ब्लॉक का गठन किया और उन्हें काँग्रेस के पद से निष्कासित कर दिया गया। प्रसाद के लिए यह कुर्सी नई नहीं थी: वे इससे पहले अक्टूबर 1934 के बंबई अधिवेशन में एक बार काँग्रेस अध्यक्ष रह चुके थे, और तीसरी बार 17 नवंबर 1947 से यह पद सँभालने वाले थे, जब जे० बी० कृपलानी ने इस्तीफ़ा दिया। इस पृष्ठ पर बिहार से जुड़ा नाम भी वही हैं — जन्म 3 दिसंबर 1884 को ज़िरादेई में, जो आज सीवान ज़िले में है; 1917 के चंपारण सत्याग्रह में गांधी के प्रमुख सहयोगी; 8 अगस्त 1942 के भारत छोड़ो प्रस्ताव के बाद पटना के सदाक़त आश्रम से गिरफ़्तार और 15 जून 1945 तक बांकीपुर में बंदी; 11 दिसंबर 1946 से संविधान सभा के अध्यक्ष; और अंततः भारतीय गणराज्य के प्रथम राष्ट्रपति। चूँकि तीन नामित नेताओं में ठीक एक ही सही है, विकल्प (d) टिक नहीं सकता: इस तरह का बचाव विकल्प तभी उपलब्ध होता है जब शेष विकल्पों में से कम-से-कम दो एक साथ सत्य हों, और यहाँ नेहरू तथा आज़ाद, दोनों तिथियों पर विफल हो जाते हैं।
- (a)जवाहर लाल नेहरू — हर बार वर्ष ग़लत। नेहरू ने 1929 के लाहौर अधिवेशन की अध्यक्षता की, जिसमें पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ, फिर 1936 में लखनऊ और 1937 में फ़ैज़पुर की, और फिर 1946 में। 1939 में वे कार्य समिति के उन तीन ही सदस्यों में थे जिन्होंने बोस के विरुद्ध हुए विद्रोह में इस्तीफ़ा नहीं दिया — यानी संकट के ठीक बीच में उपस्थित, पर वह व्यक्ति नहीं जिसे यह पद मिला।
- (c)अबुल कलाम आज़ाद — सबसे तीखा जाल, क्योंकि यह केवल एक वर्ष से चूकता है। आज़ाद 1940 के रामगढ़ अधिवेशन में काँग्रेस अध्यक्ष चुने गए — रामगढ़ तब बिहार प्रांत में था, आज झारखंड में है — और युद्ध के वर्षों तक लगातार 1946 तक इस पद पर रहे, जो उस दौर की सबसे लंबी अध्यक्षता है। जिस अभ्यर्थी को इतना याद है कि 'आज़ाद ने 1940 के दशक के आरंभ में काँग्रेस का नेतृत्व किया', वह उन्हें यहाँ चुन बैठता है — एक कार्यकाल पहले।
- (d)उपरोक्त में से एक से अधिक — यह तभी चलता जब (a), (b) और (c) में से दो या अधिक एक साथ सत्य होते, जबकि यहाँ वे परस्पर अनन्य हैं — किसी भी क्षण यह पद एक ही व्यक्ति के पास होता है, और 29 अप्रैल 1939 के बाद वह व्यक्ति राजेंद्र प्रसाद थे। नेहरू के कार्यकाल और आज़ाद का कार्यकाल उसके दोनों ओर पड़ते हैं, और यही व्यवस्था इस विकल्प को लुभावना दिखाती है, सही नहीं बनाती।
1938 से 1940 के बीच की काँग्रेस अध्यक्षता द्वितीय विश्वयुद्ध की पूर्वबेला में पार्टी की आंतरिक राजनीति की धुरी है, और इस पद के किसी भी अन्य दौर से अधिक बार पूछी जाती है। बोस, जो 1938 में हरिपुरा में गांधी की स्वीकृति से चुने गए थे, जनवरी 1939 में गांधी की इच्छा के विरुद्ध फिर खड़े हुए और जीत गए। विवाद व्यक्तिगत ही नहीं, विषयगत भी था: बोस अंग्रेज़ों को अल्टीमेटम देना चाहते थे और उन्हें संदेह था कि पुराना नेतृत्व भारत सरकार अधिनियम 1935 की संघीय योजना पर समझौता कर लेगा, जबकि नेतृत्व को उनकी इस तत्परता पर आपत्ति थी कि अहिंसा की प्रतिबद्धता को ढीला किया जाए और अधिकार अपने ही हाथों में केंद्रित किए जाएँ। मार्च 1939 के त्रिपुरी अधिवेशन ने वह प्रस्ताव पारित किया जिसमें बोस से कहा गया कि वे गांधी की इच्छा के अनुरूप कार्य समिति नामित करें; जब वे ऐसा न कर सके, उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया। इसके तात्कालिक परिणाम थे जून 1939 में बना फ़ॉरवर्ड ब्लॉक, और 1940 के रामगढ़ से आरंभ हुई आज़ाद की लंबी युद्धकालीन अध्यक्षता — वही अध्यक्षता जिसके अधीन काँग्रेस ने युद्ध-प्रयास को अस्वीकार किया, 1940 में व्यक्तिगत सत्याग्रह चलाया और 1942 में भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित किया।
इस प्रकार के उत्तराधिकार वाले प्रश्नों का उत्तर अलग-अलग तथ्यों के बजाय एक छोटी शृंखला याद रखकर निकलता है, और काँग्रेस अध्यक्षता की 1939 के आसपास की शृंखला यह है: 1936 और 1937 में नेहरू, 1938 में हरिपुरा तथा 1939 में त्रिपुरी में बोस, 1939 का शेष कार्यकाल पूरा करते राजेंद्र प्रसाद, 1940 के रामगढ़ से 1946 तक आज़ाद, 1946 से 1947 तक कृपलानी, और नवंबर 1947 से फिर प्रसाद। इसे छह की एक कड़ी की तरह याद कीजिए और इस दशक का हर प्रश्न — विभाजन के समय अध्यक्ष कौन था, भारत छोड़ो के समय कौन, बोस के बाद कौन — इसी सूची से निकल आता है। इस पृष्ठ पर निर्णायक तथ्य केवल इतना है कि आज़ाद का कार्यकाल 1940 में आरंभ हुआ, 1939 में नहीं; यह एक वर्ष ठीक कर लीजिए और प्रश्न समाप्त। बिहार के पाठक के पास एक अतिरिक्त लंगर है: 1939 में जिसने यह कुर्सी सँभाली वह सीवान के थे, और जिस अधिवेशन ने उनके उत्तराधिकारी को चुना वह रामगढ़ में हुआ, जो तब बिहार प्रांत के भीतर था। दोनों ब्योरे उसी तरह के हैं जिन्हें कोई राज्य आयोग जाँचना पसंद करता है।
- बोस की दोनों काँग्रेस अध्यक्षताएँ 18 जनवरी 1938 (हरिपुरा) से और 29 जनवरी 1939 (त्रिपुरी) से चलीं; दूसरी से उन्होंने 29 अप्रैल 1939 को इस्तीफ़ा दिया।
- बोस के पुनर्निर्वाचन के बाद काँग्रेस कार्य समिति के पंद्रह में से तीन को छोड़कर सभी सदस्यों ने उनके अधीन काम करने के बजाय इस्तीफ़ा दे दिया; अपवाद थे बोस, उनके भाई शरत बोस और जवाहरलाल नेहरू।
- राजेंद्र प्रसाद तीन बार काँग्रेस अध्यक्ष रहे — 1934 में बंबई, 1939 में बोस के इस्तीफ़े के बाद, और 17 नवंबर 1947 से जे० बी० कृपलानी के इस्तीफ़े के बाद।
- अबुल कलाम आज़ाद 1940 के रामगढ़ अधिवेशन में चुने गए — रामगढ़ तब बिहार प्रांत में था — और युद्ध भर 1946 तक इस पद पर रहे।
- बोस ने 22 जून 1939 को अखिल भारतीय फ़ॉरवर्ड ब्लॉक का गठन किया; और राजेंद्र प्रसाद, जिनका जन्म 3 दिसंबर 1884 को सीवान ज़िले के ज़िरादेई में हुआ, आगे चलकर भारत के प्रथम राष्ट्रपति बने।
विकल्प (d) के लिए तीनों नामों में से दो का एक साथ सत्य होना ज़रूरी है, जबकि अध्यक्ष पद एक समय में एक ही व्यक्ति के पास होता है: 29 अप्रैल 1939 के बाद वह व्यक्ति राजेंद्र प्रसाद थे, जिनका जन्म सीवान ज़िले के ज़िरादेई में हुआ — इस प्रश्न का बिहार वाला लंगर, और उसके साथ वह रामगढ़ अधिवेशन जिसने उनका उत्तराधिकारी चुना।
- अबुल कलाम आज़ाद को उत्तर बना देना। उनकी अध्यक्षता 1940 में रामगढ़ से आरंभ हुई, बोस के इस्तीफ़े के अगले वर्ष — और यह प्रश्न उसी एक वर्ष के अंतर पर बना है।
- यह मान लेना कि नेहरू ने ही कुर्सी सँभाली होगी, क्योंकि उस दौर की दूसरी बड़ी शख़्सियत वही थे। वे उन तीन में थे जिन्होंने कार्य समिति से इस्तीफ़ा नहीं दिया, पर अध्यक्ष पद उन्होंने नहीं सँभाला।
- अप्रैल 1939 में काँग्रेस अध्यक्ष पद से बोस के इस्तीफ़े को उनके बाद के काँग्रेस-पद से निष्कासन और जनवरी 1941 के भारत से पलायन से गड्डमड्ड कर देना।
BPSC स्वतंत्रता संग्राम को 'कौन और कब' के स्मरण के रूप में पूछता है और जहाँ भी संभव हो बिहार की शख़्सियतों तक पहुँचता है — राजेंद्र प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिन्हा, श्रीकृष्ण सिंह — इसलिए किसी पद और नाम वाला ऐसा प्रश्न ठीक उसकी शैली में बैठता है, जिसमें चौथे नाम की जगह चौथा विकल्प 'उपरोक्त में से एक से अधिक' रख दिया जाता है। UPSC उसी दौर को पद के बजाय परिणाम के रास्ते जाँचना पसंद करता है: इस्तीफ़े के बाद बोस ने कौन-सा दल बनाया, किस नेता ने युद्ध को अवसर माना, विभाजन के क्षण काँग्रेस अध्यक्ष कौन था।
काँग्रेस से अलग होने के बाद सुभाष चंद्र बोस ने 1939 में किस दल की स्थापना की?
- (a) इंडियन फ़्रीडम पार्टी
- (b) आज़ाद हिंद फ़ौज
- (c) रिवोल्यूशनरी फ़्रंट
- (d) फ़ॉरवर्ड ब्लॉक
उत्तर(d) फ़ॉरवर्ड ब्लॉक
उसी घटना का दूसरा आधा। UPSC ने पूछा कि अध्यक्ष पद से इस्तीफ़े के बाद बोस ने क्या किया; BPSC पूछता है कि उनके छोड़े हुए पद पर कौन आया। दोनों 1939 के उन्हीं तीन महीनों पर घूमते हैं, और फ़ॉरवर्ड ब्लॉक ही वह चीज़ है जो उस इस्तीफ़े को क्षणिक नाराज़गी नहीं, स्थायी विच्छेद बनाती है।
भारत के विभाजन के समय भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के अध्यक्ष थे
- (a) सी० राजगोपालाचारी
- (b) जे० बी० कृपलानी
- (c) जवाहरलाल नेहरू
- (d) मौलाना अबुल कलाम आज़ाद
उत्तर(b) जे० बी० कृपलानी
वही कौशल, आठ वर्ष आगे खिसकाकर: काँग्रेस अध्यक्षता को किसी निश्चित क्षण से बाँधिए। दोनों प्रश्नों में आज़ाद को चारे के रूप में रखा गया है, और दोनों में वे तिथियों पर ही हारते हैं — यहाँ एक वर्ष देर से, वहाँ एक वर्ष पहले।
भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के 1912 पटना अधिवेशन के अध्यक्ष कौन थे ?
- (a) सर एस. पी. सिन्हा
- (b) सैय्यद मोहम्मद बहादुर
- (c) आर. एन. मधुलकर
- (d) सैय्यद हसन इमाम
उत्तर(c) आर. एन. मधुलकर
दिसंबर 2024 की 70वीं CCE के प्रश्नपत्र ने ठीक यही पूछा था — किसी नामित क्षण पर काँग्रेस अध्यक्ष कौन था — और वह भी पटना में हुए अधिवेशन के लिए। आयोग इस पद और वर्ष पर बार-बार लौटता है, इसलिए अधिवेशन-वार अध्यक्षों की सूची सूची की तरह ही याद कर लेनी चाहिए।
मार्च 1939 में बिहार के मुख्यमन्त्री कौन बने ?
- (a) अनुग्रह नारायण सिंह
- (b) राजेन्द्र प्रसाद
- (c) श्री कृष्ण सिंह
- (d) उपरोक्त में से कोई नही
उत्तर(d) उपरोक्त में से कोई नही
71वीं CCE ने उसी वर्ष के उसी महीने को प्रांतीय पक्ष से जाँचा, और वहाँ राजेंद्र प्रसाद को भटकाने वाले विकल्प के रूप में रखा। यह जानना कि 1939 में वे क्या कर रहे थे — काँग्रेस की अध्यक्षता सँभाल रहे थे, बिहार का नेतृत्व नहीं — दोनों प्रश्नों का उत्तर दे देता है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
1939 में सुभाष चंद्र बोस भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के अध्यक्ष के रूप में किस अधिवेशन में पुनर्निर्वाचित हुए थे ?
- (a)हरिपुरा
- (b)त्रिपुरी
- (c)रामगढ़
- (d)फ़ैज़पुर
उत्तर(b) त्रिपुरी — हरिपुरा 1938 की उनकी पहली अध्यक्षता थी, रामगढ़ ने 1940 में आज़ाद को चुना, और फ़ैज़पुर 1937 में नेहरू का अधिवेशन था।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
1940 के रामगढ़ अधिवेशन में भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के अध्यक्ष कौन थे ?
- (a)राजेंद्र प्रसाद
- (b)सुभाष चंद्र बोस
- (c)अबुल कलाम आज़ाद
- (d)जे० बी० कृपलानी
उत्तर(c) अबुल कलाम आज़ाद — 1940 में रामगढ़ में, जो तब बिहार प्रांत में था, चुने जाकर वे युद्ध के वर्षों तक 1946 तक इस पद पर रहे। 1946 में कृपलानी ने उनका स्थान लिया।