दो तरलों A तथा B को मिलाने पर आदर्श तरल प्राप्त करने के लिए
- (a)मिश्रण की तापीय धारिता शून्य होनी चाहिए
- (b)मिश्रण की एन्ट्रॉपी शून्य होनी चाहिए
- (c)मिश्रण की मुक्त ऊर्जा शून्य होनी चाहिए
- (d)उपर्युक्त में से कोई नहीं
सही उत्तर — (a) मिश्रण की तापीय धारिता शून्य होनी चाहिए। आदर्श विलयन वह है जो पूरे संघटन-परास में राउल्ट के नियम का पालन करता है, अर्थात् प्रत्येक घटक का आंशिक वाष्प दाब उसके मोल-प्रभाज और उसी घटक के शुद्ध अवस्था वाले वाष्प दाब के गुणनफल के बराबर होता है: p(A) = x(A)·p°(A) तथा p(B) = x(B)·p°(B)। भौतिक रूप से यह तभी सम्भव है जब A–B आकर्षण उतना ही प्रबल हो जितना A–A और B–B आकर्षण, जिन्हें अणु शुद्ध तरलों में पहले से अनुभव कर रहे थे। यदि अणुओं के आपस में मिल जाने पर अन्योन्यक्रिया की ऊर्जा में कोई परिवर्तन ही न हो, तो न कोई ऊष्मा देनी पड़ती है, न निकलती है, और न ही कोई संकुचन या प्रसार होता है — इसलिए आदर्शता के दो मापनीय चिह्न हैं ΔH(मिश्रण) = 0 और ΔV(मिश्रण) = 0। विकल्प (a) ठीक यही कहता है। विकल्पों में दी गई शेष दोनों ऊष्मागतिक राशियाँ शून्य हो ही नहीं सकतीं, और यही जान लेना इस प्रश्न को तेज़ बना देता है। मिलाने पर अणुओं के व्यवस्थित होने के तरीक़ों की संख्या सदैव बढ़ती है, इसलिए मिश्रण की एन्ट्रॉपी कड़ाई से धनात्मक होती है: ΔS(मिश्रण) = −nR[x(A) ln x(A) + x(B) ln x(B)], जो समान-मोलर द्विअंगी मिश्रण के लिए R ln 2 = 5.76 जूल प्रति केल्विन प्रति मोल विलयन निकलती है। और चूँकि ΔG = ΔH − TΔS, इसलिए आदर्श विलयन में ΔG(मिश्रण) = 0 − TΔS(मिश्रण) = −TΔS(मिश्रण), अर्थात् एक ऋणात्मक संख्या — समान-मोलर स्थिति में 298 K पर लगभग −1.7 किलोजूल प्रति मोल विलयन। ऋणात्मक मुक्त ऊर्जा ही ठीक वह कारण है जिससे ऐसे दो तरल एक साथ उड़ेलने पर स्वतः मिल जाते हैं। अतः केवल एन्थैल्पी ही शून्य होती है, और (a) ही उत्तर है।
- (b)मिश्रण की एन्ट्रॉपी शून्य होनी चाहिए — सत्य का ठीक उल्टा, और सबसे आकर्षक ग़लत उत्तर, क्योंकि यह सही विकल्प के ठीक बगल में उसी 'शून्य होनी चाहिए' साँचे में बैठा है। मिश्रण की एन्ट्रॉपी हर वास्तविक मिश्रण के लिए धनात्मक होती है, चाहे वह आदर्श हो या न हो — मिलने का सांख्यिकीय अर्थ ही यही है, क्योंकि मिली हुई अवस्था अलग-अलग रखी अवस्था की तुलना में कहीं अधिक आणविक विन्यासों में साकार हो सकती है। यदि ΔS(मिश्रण) शून्य होती, तो मिलने के लिए कोई ऊष्मागतिक प्रेरक बल बचता ही नहीं।
- (c)मिश्रण की मुक्त ऊर्जा शून्य होनी चाहिए — मुक्त ऊर्जा में शून्य परिवर्तन का अर्थ होता कि मिली हुई और बिना मिली अवस्थाएँ समान रूप से स्थायी हैं — तरल अपनी अलग-अलग परतों में पड़े रहते और मिलने की कोई प्रवृत्ति ही न होती। चूँकि आदर्श विलयन के लिए ΔG(मिश्रण) = −TΔS(मिश्रण) है और ΔS(मिश्रण) धनात्मक है, इसलिए ΔG(मिश्रण) सदैव ऋणात्मक होता है। मिलना स्वतःप्रवर्तित है, और यहाँ उसकी स्वतःप्रवर्तिता पूरी तरह एन्ट्रॉपी-चालित है।
- (d)उपर्युक्त में से कोई नहीं — यह इसलिए विफल है कि विकल्प (a) परिभाषक शर्त का सही और पूर्ण कथन है। बचाव वाला विकल्प तभी जीतता है जब शेष तीनों में से हर एक को विफल दिखाया जा सके, और यहाँ उनमें से पहला ही आदर्शता की मानक पाठ्यपुस्तकीय कसौटी है।
राउल्ट का नियम, जिसे फ्रांस्वा-मारी राउल्ट ने 1887 में प्रकाशित किया, कहता है कि वाष्पशील तरलों के विलयन में प्रत्येक घटक का आंशिक वाष्प दाब उसके मोल-प्रभाज के अनुक्रमानुपाती होता है, और अनुपात-स्थिरांक उस शुद्ध घटक का वाष्प दाब होता है। जो विलयन इसका पालन हर संघटन और हर ताप पर करता है, उसे आदर्श कहते हैं। आदर्शता वस्तुतः बलों के बारे में कथन है: अणुओं को यह पता ही नहीं चलना चाहिए कि उनके पड़ोसी उनकी अपनी जाति के हैं या दूसरी जाति के। वास्तविक युग्म इसके निकट तब आते हैं जब दोनों तरल संरचना और रसायन में समान हों — बेन्ज़ीन के साथ टॉलूईन, n-हेक्सेन के साथ n-हेप्टेन, क्लोरोबेन्ज़ीन के साथ ब्रोमोबेन्ज़ीन, एथिल ब्रोमाइड के साथ एथिल आयोडाइड। जहाँ बल भिन्न होते हैं, वहाँ विलयन विचलन दिखाता है। यदि A–B आकर्षण A–A और B–B के औसत से दुर्बल हो, तो निकल भागने की प्रवृत्ति बढ़ती है, वाष्प दाब राउल्ट के पूर्वानुमान से अधिक हो जाता है और ΔH(मिश्रण) धनात्मक होता है — यही धनात्मक विचलन है, जैसे एथेनॉल और जल में। यदि A–B आकर्षण अधिक प्रबल हो, जैसे तब जब क्लोरोफॉर्म ऐसीटोन से हाइड्रोजन बन्ध बनाता है, तो वाष्प दाब पूर्वानुमान से नीचे गिरता है, ΔH(मिश्रण) ऋणात्मक होता है और मिश्रण गरम हो जाता है।
इसका उत्तर देने के लिए परिभाषा याद रखना अनिवार्य नहीं है। इसके बदले तीनों विकल्पों पर ऊष्मागतिकी का दूसरा नियम चला दीजिए। मिश्रण की मुक्त ऊर्जा ऋणात्मक होनी ही चाहिए, अन्यथा कुछ मिलता ही नहीं — अतः (c) बाहर। मिश्रण की एन्ट्रॉपी धनात्मक होनी ही चाहिए, क्योंकि मिलना अव्यवस्था बढ़ाने वाली उत्कृष्ट प्रक्रिया है — अतः (b) बाहर। बचती है एन्थैल्पी, इन तीनों में एकमात्र जो शून्य होने के लिए स्वतंत्र है, और रसायन का एक भी सूत्र याद किए बिना निराकरण पूरा हो जाता है। एक सावधानी यह है कि ΔH(मिश्रण) = 0 आवश्यक तो है, पर अपने आप में पूरी परिभाषा नहीं: आदर्श विलयन में ΔV(मिश्रण) = 0 भी होता है, और मूल परिभाषा राउल्ट के नियम का पालन है, जिसके ये दोनों शून्य परिणाम हैं। बीपीएससी इनमें से केवल एक ही देता है, इसलिए (a) टिकता है। यह भी देखने योग्य है कि शून्य एन्थैल्पी प्रयोगशाला में क्या पूर्वानुमान करती है: बेन्ज़ीन को टॉलूईन में उड़ेलिए और मिश्रण कक्ष-ताप पर ही बना रहता है, जबकि सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल को जल में उड़ेलना — जो प्रबल रूप से अनादर्श मिश्रण है — बीकर को इतना गरम कर देता है कि पकड़ा न जाए।
- वाष्पशील तरलों के द्विअंगी विलयन के लिए राउल्ट का नियम: p(कुल) = x(A)·p°(A) + x(B)·p°(B); जो विलयन इसका पालन पूरे संघटन-परास में करे, वही आदर्श है।
- आदर्श विलयन के चिह्न: ΔH(मिश्रण) = 0 और ΔV(मिश्रण) = 0, जिसमें A–A, B–B तथा A–B अन्तराआण्विक बल समान प्रबलता के होते हैं।
- ΔS(मिश्रण) = −nR[x(A) ln x(A) + x(B) ln x(B)] सदैव धनात्मक होता है; समान-मोलर द्विअंगी मिश्रण के लिए यह R ln 2 ≈ 5.76 J K⁻¹ प्रति मोल विलयन है, जिससे 298 K पर ΔG(मिश्रण) ≈ −1.7 kJ प्रति मोल आता है।
- लगभग आदर्श युग्म: बेन्ज़ीन–टॉलूईन, n-हेक्सेन–n-हेप्टेन, क्लोरोबेन्ज़ीन–ब्रोमोबेन्ज़ीन, एथिल ब्रोमाइड–एथिल आयोडाइड।
- धनात्मक विचलन (ΔH > 0, जैसे एथेनॉल–जल) से निम्नतम-क्वथनांक स्थिरक्वाथी (एज़ियोट्रोप) बनता है — लगभग 95% एथेनॉल, जो 351.1 K पर उबलता है; ऋणात्मक विचलन (ΔH < 0, जैसे नाइट्रिक अम्ल–जल) से उच्चतम-क्वथनांक स्थिरक्वाथी बनता है — लगभग 68% HNO₃, जो 393.5 K पर उबलता है। इनमें से किसी को भी साधारण प्रभाजी आसवन से आगे पृथक् नहीं किया जा सकता।
शून्य होने के लिए केवल एन्थैल्पी ही स्वतंत्र है। मिश्रण की एन्ट्रॉपी को बढ़ना ही होगा और मुक्त ऊर्जा को गिरना ही होगा, वरना कुछ मिलता ही नहीं — इसलिए विकल्प (b) और (c) कोई परिभाषा याद करने से पहले ही दूसरे नियम से बाहर हो जाते हैं।
- 'आदर्श' को 'कुछ भी नहीं बदलता' पढ़ लेना और इसीलिए जो भी राशि शून्य बताई गई हो उस पर निशान लगा देना। केवल एन्थैल्पी और आयतन परिवर्तन शून्य होते हैं; एन्ट्रॉपी और मुक्त ऊर्जा नहीं।
- यह मान लेना कि ऊष्माक्षेपी मिश्रण आदर्श होगा। क्लोरोफॉर्म और ऐसीटोन ऊष्मा इसलिए छोड़ते हैं कि वे एक-दूसरे से हाइड्रोजन बन्ध बनाते हैं, और यह आदर्शता का उदाहरण नहीं, उससे ऋणात्मक विचलन है।
- यह भूल जाना कि आदर्श विलयन का राउल्ट-व्यवहार पूरे संघटन-परास में और सभी तापों पर टिकना चाहिए — बहुत से वास्तविक युग्म केवल एक सँकरे परास में ही लगभग आदर्श होते हैं।
बीपीएससी कसौटी को सपाट रखकर पूछता है कि राशि कौन-सी है, और एनसीईआरटी कक्षा 12 रसायन की एक साफ़ पंक्ति पर अंक दे देता है। यूपीएससी विलयन-ऊष्मागतिकी को इस नंगी परिभाषात्मक शक्ल में कम ही पूछता है; जब वह प्रारम्भिक परीक्षा में आता भी है तो अनुप्रयोग के रूप में आता है — विलेय क्वथनांक क्यों बढ़ा देता है, हिमरोधी (एंटीफ़्रीज़) कैसे काम करता है, या मिश्रण को एक निश्चित शुद्धता से आगे पृथक् क्यों नहीं किया जा सकता — इसलिए यह कसौटी केवल याद किए वाक्य की तरह नहीं, व्याख्या की तरह प्रयोग करने योग्य होनी चाहिए।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
निम्नलिखित तरल-युग्मों में से कौन-सा लगभग पूर्णतः आदर्श विलयन बनाता है ?
- (a)क्लोरोफॉर्म और ऐसीटोन
- (b)बेन्ज़ीन और टॉलूईन
- (c)एथेनॉल और जल
- (d)नाइट्रिक अम्ल और जल
उत्तर(b) बेन्ज़ीन और टॉलूईन — रासायनिक और संरचनात्मक दृष्टि से एक जैसे, इसलिए A–B बल A–A तथा B–B बलों से मेल खाते हैं और ΔH(मिश्रण) व्यावहारिक रूप से शून्य होता है। क्लोरोफॉर्म–ऐसीटोन तथा नाइट्रिक अम्ल–जल ऋणात्मक विचलन दिखाते हैं और एथेनॉल–जल धनात्मक।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
राउल्ट के नियम से ऋणात्मक विचलन दिखाने वाला द्विअंगी तरल मिश्रण बनाएगा
- (a)निम्नतम-क्वथनांक स्थिरक्वाथी
- (b)उच्चतम-क्वथनांक स्थिरक्वाथी
- (c)कोई स्थिरक्वाथी नहीं
- (d)एक आदर्श विलयन
उत्तर(b) उच्चतम-क्वथनांक स्थिरक्वाथी — अधिक प्रबल A–B आकर्षण वाष्प दाब को राउल्ट के पूर्वानुमान से नीचे ले आता है, इसलिए मिश्रण दोनों शुद्ध तरलों में से किसी से भी ऊँचे ताप पर उबलता है। नाइट्रिक अम्ल और जल, लगभग 68% HNO₃ जो 393.5 K पर उबलता है, इसका मानक उदाहरण है।