सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख नगर का नाम क्या है जिसका पश्चिमी एशिया से व्यापारिक सम्बन्ध था ?
- (a)कालीबंगा (कालीबंगन)
- (b)रोपार
- (c)लोथाल
- (d)उपर्युक्त में से कोई नहीं
सही — (c) लोथाल। नामित तीनों स्थलों में केवल लोथाल तटवर्ती है, और उसकी स्थिति ही प्रश्न को निपटा देती है : यह गुजरात में है, खम्भात की खाड़ी से समुद्र तक पहुँच रखता है, और उस व्यापार-मार्ग पर पड़ता है जो सिन्ध के हड़प्पाई नगरों तथा काठियावाड़ प्रायद्वीप के बीच चलता था। भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण ने यह स्थल 1954 में खोजा और 13 फ़रवरी 1955 से 19 मई 1960 तक इसका उत्खनन किया, जिसमें एक टीला, बसावट, एक बाज़ार तथा ईंटों से बना वह बड़ा कुंड मिला जिसे गोदी (डॉकयार्ड) माना गया — ASI के पाठ के अनुसार यह कहीं भी ज्ञात सबसे पुरानी गोदियों में से एक है, जो प्रवेश-नालियों द्वारा साबरमती की एक पुरानी धारा से जुड़ी थी। उस आयताकार संरचना में मिले नमक तथा जिप्सम के रवे संकेत देते हैं कि उसमें कभी समुद्र का पानी भरा था। यह नगर निर्यात के लिए विनिर्माण का केन्द्र भी था : यहाँ मनके, रत्न तथा आभूषण बनते थे जो पश्चिमी एशिया तथा अफ़्रीका के दूर-दूर के कोनों तक पहुँचे, और मनका-निर्माण तथा धातु-कर्म की इसकी तकनीकें इस सभ्यता की सबसे परिष्कृत तकनीकों में हैं। एक ईमानदार शर्त यहाँ जोड़नी चाहिए। उस कुंड को गोदी मानना सर्वस्वीकृत नहीं है — कुछ पुरातत्त्वविदों का तर्क है कि लोथाल लगभग सात हेक्टेयर का अपेक्षाकृत छोटा क़स्बा था और वह संरचना सिंचाई का तालाब थी। पर पश्चिमी एशिया से व्यापार का सम्बन्ध वस्तुओं तथा मुहरों पर टिका है, उस एक संरचना पर नहीं, इसलिए उत्तर दोनों ही स्थितियों में वही रहता है। चूँकि (c) सही है, विकल्प (d) 'उपर्युक्त में से कोई नहीं' गिर जाता है।
- (a)कालीबंगा (कालीबंगन) — राजस्थान में घग्घर की सूखी धारा पर स्थित हड़प्पाई स्थल, समुद्र से बहुत भीतर। यह सबसे पुराने उत्खनित जुते हुए खेत तथा अपनी अग्नि-वेदियों के लिए प्रसिद्ध है — यानी कृषि तथा कर्मकांड के प्रमाण, समुद्री व्यापार के नहीं। किसी मौसमी नदी पर बसा भीतरी स्थल पश्चिमी एशिया से व्यापार के प्रश्न का उत्तर हो ही नहीं सकता।
- (b)रोपार — रूपनगर, पंजाब में सतलुज पर, हड़प्पाई जगत् के उस सिरे पर जो समुद्र से सबसे दूर है। यह स्वतन्त्रता के बाद उत्खनित पहले हड़प्पाई स्थलों में से एक होने के लिए और उस समाधि के लिए याद किया जाता है जिसमें मनुष्य के साथ एक कुत्ता दफ़नाया गया था। यह भी भीतरी है, और यहाँ भी समुद्री व्यापार का कोई प्रमाण नहीं।
- (d)उपर्युक्त में से कोई नहीं — यह तभी सही होता जब नामित तीनों स्थल असफल होते, और तीसरा असफल होता नहीं। लोथाल का पश्चिमी एशिया की ओर सभ्यता के निकास-द्वार होना हड़प्पाई व्यापार के सबसे दृढ़ता से स्थापित तथ्यों में है, और वह उसकी तटवर्ती स्थिति तथा निर्यात-विनिर्माण पर उतना ही टिका है जितना विवादित गोदी पर।
हड़प्पाई सभ्यता अरब सागर के पार व्यापार करती थी, और मेसोपोटामिया के अभिलेख उन देशों के नाम लेते हैं जिनसे वह लेन-देन करती थी — मेलुह्हा, जिसे सामान्यतः सिन्धु क्षेत्र माना जाता है, और जहाँ तक पहुँच खाड़ी के बीच के बन्दरगाहों दिलमुन तथा मगान से होकर बनती थी। भारतीय सिरे पर पुरातत्त्वविदों को उस व्यापार की वस्तुएँ तथा उपकरण मिलते हैं : कार्नेलियन के मनके, शंख तथा हाथीदाँत का काम, सेलखड़ी की मुहरें, मानकीकृत बाट, और कभी-कभी फ़ारस की खाड़ी के प्रकार की मुहरें। लोथाल ठीक उस बिन्दु पर बैठा है जहाँ यह आवाजाही थल-मार्गों से मिलती थी, और उसका ढाँचा किसी अनुष्ठान-नगर के बजाय काम करते हुए क़स्बे का है — चबूतरे पर बना गोदाम, मनकों का कारख़ाना और एक बाज़ार। स्थलों का बड़ा नक़्शा एक तालिका के रूप में थामने योग्य है, क्योंकि परीक्षक उसे लगातार जाँचते हैं : रावी पर हड़प्पा, सिन्धु पर मोहनजोदड़ो अपने विशाल स्नानागार के साथ, राजस्थान में कालीबंगा अपने जुते हुए खेत के साथ, कच्छ में धौलावीरा अपने जल-कुंडों तथा साइनबोर्ड के साथ, हरियाणा में बनावली, पंजाब में रोपार, हरियाणा में राखीगढ़ी, और गुजरात में लोथाल अपनी गोदी के साथ।
इस प्रश्न में अधिकांश काम भूगोल कर देता है। पश्चिमी एशिया से व्यापार का अर्थ है समुद्री व्यापार, समुद्री व्यापार का अर्थ है तटवर्ती या ज्वारनदमुखी स्थल, और नामित तीन स्थानों में केवल एक ही समुद्र के आसपास है। यह अकेली छन्नी उस कोशिश से तेज़ और सुरक्षित है जिसमें याद करना पड़े कि किस उत्खनन से कौन-सी वस्तु निकली। फिर पुष्टि इस बात से कीजिए कि हर स्थल असल में किसके लिए प्रसिद्ध है, क्योंकि आयोग अपनी विकल्प-सूचियाँ ठीक इन्हीं साहचर्यों से बनाता है — कालीबंगा का जुता हुआ खेत, रोपार की कुत्ते वाली समाधि, लोथाल की गोदी। यह जान लेना भी उपयोगी है कि लोथाल केवल प्राचीन इतिहास का नहीं, समसामयिकी का भी जीवित विषय है : यह स्थल विश्व धरोहर की मान्यता के लिए भारत की अस्थायी सूची में है और राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर का स्थल है, इसलिए यह पत्र में किसी भी दिशा से आ सकता है।
- लोथाल गुजरात में है और खम्भात की खाड़ी से समुद्र तक पहुँच रखता है, उस व्यापार-मार्ग पर जो सिन्ध के हड़प्पाई नगरों तथा काठियावाड़ प्रायद्वीप के बीच चलता था
- भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण ने यह स्थल 1954 में खोजा और 13 फ़रवरी 1955 से 19 मई 1960 तक उत्खनन किया, जिसमें टीला, बसावट, बाज़ार तथा ईंटों से बना वह कुंड मिला जिसे गोदी माना गया और जो प्रवेश-नालियों से साबरमती की पुरानी धारा से जुड़ा था
- कुंड में मिले नमक तथा जिप्सम के रवे बताते हैं कि उसमें कभी समुद्र का पानी भरा था; फिर भी कुछ पुरातत्त्वविद उस संरचना को सिंचाई का तालाब और लोथाल को लगभग सात हेक्टेयर का छोटा क़स्बा मानते हैं
- लोथाल में मनके, रत्न तथा आभूषण बनते थे जो पश्चिमी एशिया तथा अफ़्रीका तक पहुँचे, और उसकी मनका-निर्माण तथा धातु-कर्म की तकनीकें अत्यन्त उन्नत थीं
- राजस्थान में घग्घर पर स्थित कालीबंगा सबसे पुराने उत्खनित जुते हुए खेत तथा अपनी अग्नि-वेदियों के लिए जाना जाता है; पंजाब में सतलुज पर स्थित रोपार स्वतन्त्रता के बाद के आरम्भिक उत्खनन तथा मनुष्य के साथ दफ़नाए गए कुत्ते के लिए
- मेसोपोटामिया के अभिलेख मेलुह्हा का नाम लेते हैं, जिसे सामान्यतः सिन्धु क्षेत्र माना जाता है, और जिससे व्यापार खाड़ी के बिचौलिया केन्द्रों दिलमुन तथा मगान से होकर होता था
स्मृति के काम में आने से पहले ही भूगोल काम कर देता है। नामित तीन स्थलों में दो भीतरी नदियों पर हैं, इसलिए तटवर्ती स्थल ही एकमात्र दावेदार बचता है — और यह छन्नी तब भी बची रहती है जब गोदी वाली पहचान विवादित मानी जाए, यही कारण है कि (d) 'उपर्युक्त में से कोई नहीं' गिर जाता है।
- यह याद रखना कि कोई स्थल 'प्रसिद्ध' है, पर यह न याद रखना कि किसके लिए; कालीबंगा तथा रोपार प्रसिद्ध स्थल हैं, पर कृषि तथा समाधि के प्रमाणों के लिए, व्यापार के लिए नहीं
- लोथाल की गोदी को निर्विवाद मान लेना — व्यापार का तर्क वस्तुओं, मुहरों तथा स्थिति पर भी टिका है, इसीलिए संरचना पर बहस होते हुए भी उत्तर सुरक्षित है
- लोथाल को ग़लत राज्य में रख देना; वह गुजरात में है, और उसकी तटवर्ती स्थिति ही इस प्रश्न का पूरा मर्म है
BPSC विशेषता का नाम लेकर स्थल पूछ लेता है, एक ही पंक्ति में, और दो भीतरी स्थलों को भटकाने के लिए रख देता है। UPSC इसी तालिका को सुमेलित युग्मों के रूप में पूछता है — स्थल के सामने पुरातात्त्विक प्राप्ति — या पूरी सभ्यता के बारे में कथनों के रूप में, इसलिए स्थलों की सूची में हर प्रविष्टि के साथ एक विशिष्ट प्राप्ति जुड़ी होनी चाहिए, केवल सामान्य परिचय नहीं।
निम्नलिखित में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं ? I. लोथाल : प्राचीन गोदी II. सारनाथ : बुद्ध का प्रथम उपदेश III. राजगीर : अशोक का सिंह-शीर्ष IV. नालन्दा : बौद्ध शिक्षा का महान केन्द्र नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए : कूट :
- (a) I, II, III तथा IV
- (b) III तथा IV
- (c) I, II तथा IV
- (d) I तथा II
उत्तर(c) I, II तथा IV
UPSC लोथाल–गोदी की जोड़ी को तय तथ्य मानकर उसके इर्द-गिर्द प्रश्न बनाता है और ग़लत युग्म कहीं और रखता है। यहाँ लोथाल को उत्तर बनाने वाला साहचर्य भी वही है।
सिन्धु घाटी सभ्यता के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. यह मुख्यतः एक लौकिक सभ्यता थी और धार्मिक तत्त्व, यद्यपि उपस्थित था, दृश्य पर हावी नहीं था। 2. इस काल में भारत में वस्त्र बनाने के लिए कपास का उपयोग होता था। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं ?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 तथा 2 दोनों
- (d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर(c) 1 तथा 2 दोनों
उसी सभ्यता का आर्थिक चरित्र — कपास के वस्त्र, शिल्प-उत्पादन तथा मन्दिर-केन्द्रित के बजाय नागरिक व्यवस्था। लोथाल का मनका-कारख़ाना तथा गोदाम ठीक इसी वर्णन का पुरातात्त्विक चेहरा हैं।
निम्नलिखित में से कौन-सा जानवर सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों को नहीं पता था?
- (a) बैल
- (b) घोड़ा
- (c) हाथी
- (d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर(b) घोड़ा
69वीं CCE ने इसी सभ्यता को प्रमाण की ओर से जाँचा — मुहरें तथा अस्थियाँ क्या दिखाती हैं और क्या नहीं। दोनों प्रश्न उस अभ्यर्थी को पुरस्कृत करते हैं जिसने हड़प्पाई जगत् को विशिष्ट स्थानों से जुड़ी विशिष्ट प्राप्तियों के समुच्चय के रूप में सीखा है।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
हड़प्पाई सभ्यता का सबसे पुराना उत्खनित जुता हुआ खेत कहाँ मिला ?
- (a)लोथाल
- (b)कालीबंगा
- (c)धौलावीरा
- (d)रोपार
उत्तर(b) कालीबंगा — राजस्थान में घग्घर पर, जो अपनी अग्नि-वेदियों के लिए भी जाना जाता है; लोथाल की विशिष्ट प्राप्ति गोदी है और धौलावीरा की जल-कुंड तथा साइनबोर्ड-अभिलेख।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
मेसोपोटामिया के अभिलेखों में जिस देश को सामान्यतः सिन्धु क्षेत्र माना जाता है, उसे कहा गया
- (a)दिलमुन
- (b)मगान
- (c)मेलुह्हा
- (d)पुंत
उत्तर(c) मेलुह्हा — जबकि दिलमुन तथा मगान खाड़ी के वे बीच के क्षेत्र थे जिनसे होकर यह व्यापार चलता था।