नेताओं की सूची – I को उनके क्षेत्र की सूची – II के साथ सुमेलित करें और नीचे दिए गए कोड से चयनित उत्तर दें : सूची – I सूची – II a. कुँवर सिंह i. फैजाबाद b. हजरत महल ii. बरेली c. खान बहादुर iii. जगदीशपुर d. मौलवी अहमदुल्ला iv. लखनऊ कोड : a b c d
- (a)iii iv ii i
- (b)iv i ii iii
- (c)ii i iii iv
- (d)उपरोक्त में से कोई नहीं
सही — (a) iii iv ii i। जोड़ियों को एक-एक करके लीजिए। कुँवर सिंह बिहार के भोजपुर क्षेत्र में जगदीशपुर रियासत के शासक थे और वहीं से उन्होंने विद्रोह संगठित किया — यानी मद iii। बेगम हजरत महल, निर्वासित नवाब वाजिद अली शाह की छोटी बेगम, ने अपने पुत्र बिरजिस क़द्र को अवध का शासक बनाया और स्वयं संरक्षिका बनकर लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व किया — मद iv। खान बहादुर खान, रुहेलखंड के हाफ़िज़ रहमत खान के पौत्र, ने बरेली में सरकार बनाई और वहाँ चाँदी का सिक्का तक चलाया — मद ii। मौलवी अहमदुल्ला शाह इतिहास में सीधे-सीधे 'फैजाबाद के मौलवी' के रूप में जाने जाते हैं और उन्हें अवध के विद्रोह का प्रकाश-स्तम्भ कहा गया — मद i। इससे बनता है a-iii, b-iv, c-ii, d-i, जो ठीक कोड (a) है। शेष कोड पहली ही जोड़ी पर गिर जाते हैं और उनसे आगे जाँचने की आवश्यकता ही नहीं : कोड (b) कुँवर सिंह को लखनऊ में रख देता है और कोड (c) उन्हें बरेली में, जबकि वे जगदीशपुर के हैं और कहीं के नहीं। चूँकि एक संगत तथा पूरा सुमेलन मौजूद है, इसलिए विकल्प (d) 'उपरोक्त में से कोई नहीं' टिक नहीं सकता। बिहार वाला ब्योरा थामने योग्य है : कुँवर सिंह मैदान में उतरे तब लगभग अस्सी वर्ष के थे, 23 अप्रैल 1858 को जगदीशपुर के पास एक लड़ाई जीती और तीन दिन बाद, 26 अप्रैल 1858 को, अपने गाँव में उनका देहान्त हुआ।
- (b)iv i ii iii — यह कुँवर सिंह को लखनऊ और मौलवी अहमदुल्ला को जगदीशपुर दे देता है, यानी बिहार के नेता को अवध के नेताओं से बदल देता है। खान बहादुर तथा बरेली की जोड़ी इसमें सही है, और यही बात इसे लापरवाह नज़र से बचा ले जाती है — पर सुमेलन का कोड तभी ग़लत हो जाता है जब उसकी कोई एक जोड़ी ग़लत हो, इसलिए पहली मद की एक जाँच ही इसे निपटा देती है।
- (c)ii i iii iv — यह कुँवर सिंह को बरेली, हजरत महल को फैजाबाद, खान बहादुर को जगदीशपुर और मौलवी को लखनऊ दे देता है — हर जोड़ी खिसकी हुई। यह उस अभ्यर्थी का विकल्प है जो चारों नाम और चारों स्थान पहचानता तो है, पर उसने इनमें से किसी को किसी से जोड़ा नहीं है।
- (d)उपरोक्त में से कोई नहीं — सुमेलन के प्रश्न में यह विकल्प तभी सही होता है जब दिया गया कोई भी कोड सच्ची जोड़ियों को न दोहराता हो। यहाँ कोड (a) उन्हें जोड़ी-दर-जोड़ी दोहराता है, इसलिए 'कोई नहीं' गिर जाता है। कारगर विधि यह है कि दो ऐसी जोड़ियाँ पक्की कर लीजिए जिन पर आपको सन्देह न हो, उनका खंडन करने वाला हर कोड काट दीजिए, और तभी देखिए कि बचा क्या है।
1857 के विद्रोह का कोई एक नेतृत्व नहीं था, और इसीलिए उसे केन्द्रों तथा नेताओं के नक़्शे के रूप में पूछा जाता है। दिल्ली में बहादुर शाह ज़फ़र नाममात्र के मुखिया थे और सेनापति बख़्त खान; कानपुर में नाना साहब के साथ तात्या टोपे; झाँसी में रानी लक्ष्मीबाई; लखनऊ में बेगम हजरत महल अपने पुत्र बिरजिस क़द्र के नाम पर; फैजाबाद ने मौलवी अहमदुल्ला शाह दिए, जो पूरे अवध में लड़ाई ले गए; बरेली में रुहेला सरकार के मुखिया खान बहादुर खान; और बिहार में जगदीशपुर के कुँवर सिंह। हर केन्द्र का अपना सामाजिक आधार था — कहीं अपदस्थ राजवंश, कहीं भू-स्वामी वर्ग, कहीं कोई धर्मोपदेशक — और यही बिखराव विद्रोह की विफलता की मानक व्याख्याओं में से एक है, अंग्रेज़ों की सैन्य श्रेष्ठता तथा साझा कार्यक्रम के अभाव के साथ-साथ। बिहार का रंगमंच वह हिस्सा है जिसे राज्य का पत्र सबसे अधिक दबाएगा : आरा, उसकी घेराबन्दी तथा अगस्त 1857 में विन्सेंट आयर द्वारा उसका मुक्त कराया जाना, जगदीशपुर का विध्वंस, गंगा पार तक चली कुँवर सिंह की लम्बी मुहिम और अप्रैल 1858 में उनका घर लौटकर प्राण त्यागना।
सुमेलन के प्रश्न मितव्ययिता से जीते जाते हैं। चारों जोड़ियाँ बनाने की कोशिश मत कीजिए : वे एक या दो निकालिए जिन पर आपको सबसे अधिक भरोसा है, और उन्हें छन्नी की तरह इस्तेमाल कीजिए। यहाँ सबसे सुरक्षित लंगर कुँवर सिंह हैं, जिनका जगदीशपुर से जुड़ाव बिहार में 1857 का सबसे अधिक पूछा जाने वाला तथ्य है — और यही अकेला लंगर कोड (b) तथा (c) को मार देता है, क्योंकि दोनों उन्हें कहीं और ले जाते हैं। यदि दो कोड बच जाते, तो अगला लंगर फैजाबाद के मौलवी होते, जिनका स्थान उसी नाम में गुँथा है जिससे वे जाने जाते हैं। बनाने योग्य सामान्य आदत यह है कि 1857 को कथा के बजाय केन्द्र-और-नेता की तालिका के रूप में याद रखा जाए, और यह भी नोट कर लिया जाए कि कौन-से नेता अपने स्थान से ही जाने जाते हैं — फैजाबाद के मौलवी, झाँसी की रानी, फ़र्रुख़ाबाद के नवाब — क्योंकि ऐसे मामलों में जोड़ी नाम के भीतर ही चलती है।
- कुँवर सिंह बिहार के भोजपुर क्षेत्र में जगदीशपुर रियासत के शासक थे और वहीं विद्रोह संगठित किया; 23 अप्रैल 1858 को जगदीशपुर के पास एक लड़ाई जीती और 26 अप्रैल 1858 को उनका देहान्त हुआ
- बेगम हजरत महल, वाजिद अली शाह की छोटी बेगम, ने अपने पुत्र बिरजिस क़द्र को अवध का शासक बनाकर स्वयं संरक्षिका के रूप में लखनऊ के विद्रोह का नेतृत्व किया; बाद में उन्होंने नेपाल में शरण ली, जहाँ 1879 में उनकी मृत्यु हुई
- खान बहादुर खान, रुहेलखंड के हाफ़िज़ रहमत खान के पौत्र, ने विद्रोह के दौरान बरेली में सरकार बनाई और वहाँ चाँदी के सिक्के जारी किए
- मौलवी अहमदुल्ला शाह, जो फैजाबाद के मौलवी के नाम से जाने जाते हैं, अवध के विद्रोह के प्रकाश-स्तम्भ कहे गए; उन्हें पकड़ने के लिए 50,000 का इनाम घोषित हुआ और 1858 में वे मारे गए
- बिहार में विद्रोह का केन्द्र आरा तथा जगदीशपुर रहा; मेजर विन्सेंट आयर ने 3 अगस्त 1857 को आरा को मुक्त कराया और जगदीशपुर को नष्ट किया
1857 का कोई एक नेतृत्व नहीं था, और इसीलिए उसे नक़्शे की तरह पूछा जाता है : दिल्ली (बहादुर शाह ज़फ़र, सेनापति बख़्त खान), कानपुर (नाना साहब, तात्या टोपे), झाँसी (रानी लक्ष्मीबाई), लखनऊ, बरेली, फैजाबाद, जगदीशपुर। यही बिखराव स्वयं विद्रोह की विफलता की मानक व्याख्याओं में से एक है।
- सुमेलन के प्रश्न में किसी एक पक्की जोड़ी से कोड काटने के बजाय चारों जोड़ियाँ बनाने बैठ जाना
- अवध के दोनों नेताओं को गड्डमड्ड कर देना — हजरत महल लखनऊ की हैं, अहमदुल्ला शाह फैजाबाद के, और दोनों एक ही क्षेत्र में सक्रिय रहे
- सुमेलन-सूची पर 'कोई नहीं' को सुरक्षित मान लेना; वह तभी सही है जब कोई भी कोड सच्ची जोड़ियों को न दोहराए
BPSC 1857 को सुमेलन के अभ्यास के रूप में रखता है और सूची में बिहार का एक नेता बिठा देता है, इसलिए बिहार वाली जोड़ी वही है जो अपने-आप याद आनी चाहिए। UPSC इसी सामग्री को एक-तथ्य वाले प्रश्नों के रूप में पूछता है — कुँवर सिंह किस राज्य के थे, कौन-सा क्षेत्र विद्रोह से अछूता रहा — इसलिए केन्द्रों तथा नेताओं की तालिका दोनों के काम आती है : राज्य का पत्र पूरी तालिका माँगता है, केन्द्र का उसका कोई एक ख़ाना।
1857 के विद्रोह के प्रमुख नेता कुँवर सिंह निम्नलिखित में से किस स्थान के थे ?
- (a) बिहार
- (b) मध्य प्रदेश
- (c) राजस्थान
- (d) उत्तर प्रदेश
उत्तर(a) बिहार
वही जोड़ी, पर राज्य के स्तर पर। UPSC पूछता है कि कुँवर सिंह किस राज्य के थे; BPSC पूछता है कि किस रियासत के — और यहाँ पूरे सुमेलन कोड का लंगर वही रियासत, जगदीशपुर, है।
निम्नलिखित में से कौन-सा क्षेत्र 1857 के विद्रोह से प्रभावित नहीं हुआ था ?
- (a) झाँसी
- (b) चित्तौड़
- (c) जगदीशपुर
- (d) लखनऊ
उत्तर(b) चित्तौड़
1857 के केन्द्रों का वही नक़्शा, पर अपवर्जन से जाँचा हुआ। जगदीशपुर तथा लखनऊ दोनों यहाँ विकल्पों में आते हैं और दोनों इस प्रश्न की सूची – II में भी हैं — केन्द्रों को जान लेना ही दोनों पत्रों को उत्तर-योग्य बनाता है।
1857 के विद्रोह की विफलता के निम्नलिखित में से कौन-से कारण थे? 1. अंग्रेजों की सैन्य श्रेष्ठता 2. विद्रोहियों के पास कोई एकीकृत कार्यक्रम एवं विचारधारा नहीं थी 3. समाज के सभी वर्गों से समर्थन का अभाव था नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- (a) केवल 1 और 2
- (b) केवल 2 और 3
- (c) उपर्युक्त सभी
- (d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर(c) उपर्युक्त सभी
69वीं CCE ने पूछा कि विद्रोह विफल क्यों हुआ, और उसके उत्तर में गिना गया एक कारण इसी प्रश्न में आँखों के सामने है : जिस विद्रोह के नेता जगदीशपुर, लखनऊ, बरेली और फैजाबाद में अलग-अलग थे, उसका न कोई साझा कार्यक्रम था, न साझा नेतृत्व।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
बरेली में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किसने किया ?
- (a)बख़्त खान
- (b)खान बहादुर खान
- (c)मौलवी अहमदुल्ला शाह
- (d)नाना साहब
उत्तर(b) खान बहादुर खान — हाफ़िज़ रहमत खान के पौत्र, जिन्होंने बरेली में सरकार बनाई; बख़्त खान दिल्ली में सेनापति थे और नाना साहब कानपुर में।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
बिहार में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व जगदीशपुर से किसने किया ?
- (a)अमर सिंह
- (b)कुँवर सिंह
- (c)पीर अली खान
- (d)वारिस अली
उत्तर(b) कुँवर सिंह — भोजपुर की जगदीशपुर रियासत के अस्सी वर्षीय शासक, जिनका देहान्त अपने घर के पास मिली विजय के कुछ ही दिन बाद 26 अप्रैल 1858 को हुआ; उनके भाई अमर सिंह ने संघर्ष आगे बढ़ाया।