डालमेटियन तट है
- (a)कार्स्टजन्य पर्वत-पदीय
- (b)नदी निक्षेपजन्य
- (c)पर्वत-पदीय
- (d)अन्तरपर्वतीय
सही — (a) कार्स्टजन्य पर्वत-पदीय। डालमेटियन तट, जो क्रोएशिया में एड्रियाटिक सागर के पूर्वी किनारे पर है, संगत (concordant) अथवा अनुदैर्घ्य तटरेखा का आदर्श उदाहरण है, और तटीय भू-आकृति विज्ञान में इस पूरे वर्ग का नाम ही इसी पर पड़ा है : डालमेटियन प्रकार की पहचान है तट के समानान्तर पड़े लम्बे अपतटीय द्वीप तथा तटीय खाड़ियाँ। यही समानान्तरता उस प्रक्रिया का चिह्न है। डिनारिक श्रेणियों की चूना-पत्थर की कटकें वर्तमान तट के समानान्तर एक रेखा में मोड़ी गई थीं; जब अन्तिम हिमानीकरण के बाद समुद्र-तल ऊपर उठा, तो उसने कटकों के बीच की लम्बी खाइयों को डुबो दिया और उनकी चोटियाँ पानी से बाहर लम्बे-लम्बे द्वीपों की शृंखला के रूप में खड़ी रह गईं। यहाँ संरचना जितनी मायने रखती है, चट्टान भी उतनी ही। ये डिनारिक चूना-पत्थर हैं, और 'कार्स्ट' शब्द स्वयं इसी क्षेत्र से आया है — कार्स्ट वह स्थलाकृति है जो चूना-पत्थर तथा डोलोमाइट जैसी घुलनशील कार्बोनेट चट्टानों के घुलने से बनती है, जिसमें ऊपर पोल्जे और नीचे विलय-रन्ध्र तथा गुफाएँ होती हैं। चारों में केवल विकल्प (a) ही कार्स्ट का नाम लेता है, और वह उसे 'पर्वत-पदीय' के साथ जोड़ता है — कार्स्ट की पर्वत-ढाल का समुद्र से मिलना, जो ठीक वही वर्णन है जिसकी यह भू-आकृति माँग करती है। यह भी ध्यान रखिए कि एड्रियाटिक सागर स्वयं एक संगत आकृति है — समानान्तर श्रेणियों के बीच पड़ा जल-निकाय, यानी वही संरचना बड़े पैमाने पर।
- (b)नदी निक्षेपजन्य — निक्षेपजन्य तट अवसाद से बाहर की ओर बनता है — डेल्टा, कीचड़-मैदान, रोधिकाएँ तथा बालू-रोध, जैसे गंगा या मिसिसिपी के मुहानों पर। डालमेटियन तट इसका उलटा है : यह निमज्जन का तट है, जिसे समुद्र-तल के उठने ने डुबोया है, और इसके द्वीप किसी नदी के बिछाए पदार्थ नहीं, बल्कि पहले से मौजूद कटकों की चोटियाँ हैं।
- (c)पर्वत-पदीय — यही फँसाने वाला विकल्प है, क्योंकि यह सही उत्तर ही है जिसमें से निर्णायक शब्द हटा दिया गया है। केवल 'पर्वत-पदीय' तट इतना भर कहता है कि पहाड़ियाँ समुद्र तक उतर आती हैं, जो बहुत-से तटों पर सच है और लम्बे समानान्तर द्वीपों के बारे में कुछ नहीं समझाता। डालमेटियन तट को उसका चरित्र कार्स्ट देता है — डिनारिक श्रेणियों का घुलनशील चूना-पत्थर — और जो विकल्प उसे छोड़ देता है, वह पूरी व्याख्या ही छोड़ देता है।
- (d)अन्तरपर्वतीय — अन्तरपर्वतीय आकृति पर्वत श्रेणियों के बीच पड़ा बेसिन या पठार होती है — एक स्थलबद्ध श्रेणी, जो ऊँची भूमि से घिरे गड्ढे का वर्णन करती है, किसी तटरेखा का नहीं। यहाँ इस शब्द की पहचान ही जाँची जा रही है : कोई तटरेखा अन्तरपर्वतीय हो ही नहीं सकती, क्योंकि परिभाषा से वह वहाँ है जहाँ थल समुद्र से मिलता है, न कि वहाँ जहाँ थल थल से घिरा हो।
तटों का वर्गीकरण दो स्वतन्त्र ढंगों से होता है, और प्रश्न प्रायः उनमें से किसी एक पर टिकते हैं। पहला है भूवैज्ञानिक संरचना तथा तटरेखा के बीच के सम्बन्ध के आधार पर। संगत, अनुदैर्घ्य अथवा प्रशान्त प्रकार के तट पर मुड़ी हुई चट्टानों की कटकें समुद्र के समानान्तर चलती हैं, और निमज्जन से लम्बे द्वीपों तथा सँकरी जल-गलियों की शृंखलाएँ बनती हैं — यही डालमेटियन प्रकार है। असंगत अथवा अटलांटिक प्रकार के तट पर संरचनाएँ समुद्र से सिरे के बल मिलती हैं, और डूबने पर अन्तरीपों के बीच गहरी खाड़ियाँ बनती हैं, जैसे दक्षिण-पश्चिमी आयरलैंड की रियाएँ। दूसरा वर्गीकरण समुद्र-तल के परिवर्तन के आधार पर है : निमज्जन के तट, जो रिया, फ़्योर्ड तथा डालमेटियन तट देते हैं, और उन्मज्जन के तट, जो उठे हुए पुलिन तथा चौड़े तटीय मैदान देते हैं। कार्स्ट भू-आकृतियों के एक तीसरे और अलग परिवार का हिस्सा है — वे आकृतियाँ जो चूना-पत्थर के घुलने से बनती हैं, जैसे विलय-रन्ध्र, गुफाएँ, पोल्जे तथा अन्धी घाटियाँ — और डालमेटियन तट ठीक इसीलिए दिलचस्प है कि वह वहाँ पड़ता है जहाँ ये दोनों परिवार मिलते हैं : एक डूबी हुई कार्स्ट पर्वत-ढाल।
भू-आकृति के प्रश्न पर हमला इस तरह कीजिए कि हर विकल्प जिस प्रक्रिया की ओर संकेत करता है उसे नाम दीजिए, और फिर पूछिए कि नामित स्थान उस प्रक्रिया का उत्पाद हो भी सकता है या नहीं। 'नदी निक्षेपजन्य' का अर्थ है अवसाद से बाहर की ओर बनना; 'अन्तरपर्वतीय' का अर्थ है पर्वतों से घिरा होना, जिसे कोई तट पूरा कर ही नहीं सकता; 'पर्वत-पदीय' उभार से आगे कुछ नहीं कहता। केवल 'कार्स्टजन्य पर्वत-पदीय' ही चट्टान का प्रकार और स्थिति दोनों बताता है, और वही उस तट पर बैठता है जो समानान्तर चूना-पत्थर द्वीपों के लिए प्रसिद्ध है। इसी कारण यह प्रश्न इस पत्र के एक सामान्य सिद्धान्त का अच्छा उदाहरण भी है — जब दो विकल्पों में अन्तर केवल एक विशेषण-पदबन्ध का हो, तो वह पदबन्ध लगभग हमेशा प्रश्न का असली बिन्दु होता है, सजावट नहीं। डालमेटियन तट को एक पूरे पैकेज के रूप में सीखना उपयोगी है, क्योंकि उसी से शब्दावली भी बँध जाती है : संगत तट, निमज्जन, कार्स्ट, और वे डिनारिक श्रेणियाँ जिन्होंने दुनिया के भूगोलवेत्ताओं को 'कार्स्ट' शब्द दिया।
- संगत, अनुदैर्घ्य अथवा प्रशान्त प्रकार की तटरेखा वहाँ बनती है जहाँ मुड़ी हुई चट्टानों की कटकें तट के समानान्तर चलती हैं; एड्रियाटिक के डालमेशिया से नाम पाया डालमेटियन प्रकार तट के समानान्तर लम्बे अपतटीय द्वीप तथा खाड़ियाँ रखता है
- डालमेटियन तट निमज्जन की परिस्थितियों में बनते हैं — समुद्र-तल के सापेक्ष उठाव से समानान्तर कटकों के बीच की घाटियों का डूब जाना
- कार्स्ट वह स्थलाकृति है जो चूना-पत्थर तथा डोलोमाइट जैसी घुलनशील कार्बोनेट चट्टानों के घुलने से बनती है, जिसमें ऊपर पोल्जे और नीचे विलय-रन्ध्र तथा गुफाएँ होती हैं; यह शब्द इसी एड्रियाटिक क्षेत्र से आया है
- एड्रियाटिक सागर स्वयं एक संगत आकृति है — समानान्तर पर्वत श्रेणियों के बीच पड़ा जल-निकाय
- दूसरी संगत भू-आकृति हाफ़ (Haff) प्रकार है — दक्षिणी बाल्टिक तट की लैगूनें, जो नीची तटरेखा के समानान्तर पड़े लम्बे बालू-रोधों से घिरी हैं
- इसके विपरीत असंगत अथवा अटलांटिक प्रकार का तट, जहाँ संरचनाएँ तट के समकोण पर चलती हैं, रिया बनाता है — जैसे दक्षिण-पश्चिमी आयरलैंड की रियाएँ
यही संरचना बताती है कि विकल्प (a) 'कार्स्टजन्य पर्वत-पदीय' उत्तर क्यों है और (c) 'पर्वत-पदीय' जाल क्यों — वही पदबन्ध, बस निर्णायक शब्द हटाकर। केवल पर्वत-पदीय तट का अर्थ इतना ही है कि पहाड़ियाँ समुद्र तक पहुँचती हैं, जो समानान्तर द्वीपों के बारे में कुछ नहीं समझाता; काम कार्स्ट चूना-पत्थर की वह संरचना करती है जिसे विकल्प (a) खुलकर नाम देता है। (b) 'नदी निक्षेपजन्य' उस तट का वर्णन है जो अवसाद से बाहर की ओर बनता है — डूबे हुए तट का ठीक उलटा; (d) 'अन्तरपर्वतीय' श्रेणियों से घिरे बेसिन का वर्णन है, जो कोई तटरेखा हो ही नहीं सकती। औपचारिक रूप से यह संगत / अनुदैर्घ्य / प्रशान्त प्रकार का तट है; असंगत अथवा अटलांटिक प्रकार, जिसमें संरचनाएँ समुद्र से सिरे के बल मिलती हैं, डूबकर रिया बनाता है।
- वह विकल्प चुन लेना जिसमें से विशेषण-पद निकाल दिया गया हो; 'पर्वत-पदीय' और 'कार्स्टजन्य पर्वत-पदीय' में अन्तर ठीक उन्हीं शब्दों का है जो पूरी व्याख्या ढोते हैं
- निमज्जन के तट को निक्षेपजन्य तट समझ बैठना — एक डूबा हुआ है, दूसरा बाहर की ओर बना हुआ
- 'अन्तरपर्वतीय' को किसी तटीय वस्तु के लिए प्रयोग करना; यह श्रेणियों से घिरे बेसिनों तथा पठारों का वर्णन करता है
BPSC किसी नामित भू-आकृति का वर्गीकरण एक ही पंक्ति में पूछता है और विकल्प-सूची इस तरह गढ़ता है कि एक विकल्प वही सही उत्तर हो जिसमें से एक शब्द ग़ायब हो — ऐसी रचना जो सामान्य परिचय के बजाय सटीक शब्दावली को पुरस्कृत करती है। UPSC किसी विदेशी तटरेखा का नाम कम ही लेता है; वह उन्हीं अन्तर्निहित प्रक्रियाओं को भारतीय उदाहरणों से पूछता है, इसलिए शब्दावली एक बार सीखकर फिर जिस भी स्थान पर पूछा जाए उस पर लगानी पड़ती है।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
जिस तटरेखा पर मुड़ी हुई चट्टानों की कटकें तट के समानान्तर चलती हैं, उसे कहते हैं
- (a)असंगत अथवा अटलांटिक प्रकार का तट
- (b)संगत अथवा प्रशान्त प्रकार का तट
- (c)उन्मज्जित तट
- (d)फ़्योर्ड तट
उत्तर(b) संगत अथवा प्रशान्त प्रकार का तट — जिसका आदर्श उदाहरण एड्रियाटिक का डालमेटियन तट है, जहाँ लम्बे द्वीप तथा खाड़ियाँ मुख्य भूमि के समानान्तर चलते हैं।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित में से कौन कार्स्ट भू-आकृति नहीं है ?
- (a)पोल्जे
- (b)विलय-रन्ध्र
- (c)अन्धी घाटी
- (d)हिमोढ़
उत्तर(d) हिमोढ़ — यह हिमानी निक्षेप है। पोल्जे, विलय-रन्ध्र तथा अन्धी घाटी सभी चूना-पत्थर के घुलने से बनते हैं।